अध्याय 11 : कार्य तथा ऊर्जा (Work and Energy)

अध्याय 11 : कार्य तथा ऊर्जा (Work and Energy)

भौतिकी का यह अध्याय हमें सिखाता है कि किसी वस्तु पर कार्य कैसे किया जाता है और ऊर्जा का स्थानांतरण कैसे होता है।
हर क्रिया में — चाहे वह गेंद को ऊपर फेंकना हो या साइकिल चलाना — कार्य और ऊर्जा का गहरा संबंध होता है।
इस अध्याय में हम यह जानेंगे कि कार्य, ऊर्जा और शक्ति (Power) क्या हैं, तथा ये एक-दूसरे से कैसे जुड़ी हैं।

क्या आप जानते हैं?
कार्य हमेशा तभी होता है जब बल (Force) किसी वस्तु पर लगाया जाए और वस्तु उसी दिशा में कुछ दूरी तय करे।
यदि बल तो लगाया गया पर वस्तु हिली नहीं, तो कार्य शून्य माना जाएगा!
मुख्य अवधारणा विवरण
कार्य (Work) जब कोई बल किसी वस्तु को बल की दिशा में चलाता है, तब कार्य होता है।
ऊर्जा (Energy) कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहा जाता है।
शक्ति (Power) कार्य करने की दर को शक्ति कहा जाता है।
कार्य का सूत्र कार्य (W) = बल (F) × विस्थापन (S)
SI इकाई कार्य और ऊर्जा की SI इकाई जूल (Joule) है।
रोचक तथ्य:
1 जूल कार्य का अर्थ है – जब 1 न्यूटन का बल किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर तक चलाता है।

इस अध्याय में आप कार्य, ऊर्जा के विभिन्न रूप (गतिज, स्थितिज), ऊर्जा के संरक्षण का नियम, शक्ति की गणना और ऊर्जा के व्यावहारिक प्रयोगों को विस्तार से समझेंगे।
यह अध्याय भौतिकी की नींव को मजबूत करने वाला है और आगे के कक्षाओं में “ऊर्जा रूपांतरण” जैसे जटिल विषयों के लिए आधार तैयार करता है।

मुख्य बिंदु:

  • कार्य तभी होता है जब बल की दिशा में विस्थापन हो।
  • ऊर्जा के कई रूप हैं — गतिज, स्थितिज, ऊष्मा, रासायनिक, विद्युत आदि।
  • ऊर्जा का neither निर्माण होता है न ही विनाश — यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
  • शक्ति = कार्य / समय
रोचक तथ्य:
आपने कभी सोचा है?
कठोर परिश्रम करने के बावजूद, यदि वस्तु नहीं हिलती — तो भौतिकी के अनुसार आपने कोई “कार्य” नहीं किया!
उदाहरण के लिए – दीवार को धक्का देने से आप थक तो जाते हैं, पर दीवार नहीं हिलती, इसलिए कार्य = 0

कार्य (Work)

सामान्य भाषा में “कार्य” का अर्थ होता है कोई भी काम करना — जैसे चलना, दौड़ना, पढ़ाई करना आदि।
परंतु भौतिकी में “कार्य” की परिभाषा इससे भिन्न है।
भौतिकी के अनुसार **कार्य तभी होता है जब कोई बल किसी वस्तु पर लगाया जाए और वस्तु बल की दिशा में कुछ दूरी (विस्थापन) तय करे।**

कार्य की परिभाषा:
जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वह वस्तु बल की दिशा में कुछ दूरी तक विस्थापित होती है, तब कहा जाता है कि बल ने वस्तु पर कार्य किया है।

कार्य का सूत्र (Formula for Work)

कार्य का परिमाण इस प्रकार दिया जाता है:

कार्य (W) = बल (F) × विस्थापन (S) × cos θ

जहाँ:
W = कार्य (Work)
F = लगाया गया बल (Force)
S = विस्थापन (Displacement)
θ = बल एवं विस्थापन के बीच का कोण

कार्य की SI इकाई

भौतिक राशि इकाई प्रतीक
कार्य जूल (Joule) J
बल न्यूटन (Newton) N
विस्थापन मीटर (metre) m
1 जूल कार्य:
जब 1 न्यूटन का बल किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर तक विस्थापित करता है,
तब किया गया कार्य 1 जूल कहलाता है।अर्थात्: 1 J = 1 N × 1 m

कार्य के प्रकार (Types of Work)

  • धनात्मक कार्य (Positive Work): जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों।उदाहरण: गेंद को ऊपर की ओर फेंकना।
  • ऋणात्मक कार्य (Negative Work): जब बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों।उदाहरण: किसी चलती वस्तु को रोकने के लिए ब्रेक लगाना।
  • शून्य कार्य (Zero Work): जब विस्थापन नहीं हो या बल विस्थापन के लंबवत हो।उदाहरण: दीवार को धक्का देना (विस्थापन नहीं), या किसी वस्तु को वृत्तीय गति में घुमाना (बल 90° पर)।
क्या आप जानते हैं?
आप दीवार को घंटों तक धक्का देते रहें — आप थक जाएँगे, पर भौतिकी के अनुसार कार्य शून्य रहेगा!
क्योंकि दीवार में कोई विस्थापन नहीं हुआ।

कार्य का ग्राफीय निरूपण

यदि बल स्थिर हो, तो कार्य = क्षेत्रफल (Force–Displacement ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल) के बराबर होता है।
अर्थात् ग्राफ का क्षेत्रफल कार्य का माप देता है।

कार्य का संख्यात्मक उदाहरण

उदाहरण:
एक व्यक्ति 50 N का बल लगाकर किसी वस्तु को 2 m तक बल की दिशा में खींचता है।
किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।समाधान:
W = F × S
= 50 × 2 = 100 Jअतः किया गया कार्य = 100 जूल

कार्य के वास्तविक जीवन उदाहरण

  • किसी वस्तु को जमीन से उठाना — धनात्मक कार्य।
  • किसी वस्तु को नीचे गिराना — गुरुत्व बल द्वारा कार्य।
  • वृत्तीय गति में घूमता हुआ उपग्रह — शून्य कार्य।

सारांश:

  • कार्य तभी होता है जब बल वस्तु को अपनी दिशा में विस्थापित करे।
  • कार्य का सूत्र: W = F × S × cosθ
  • इकाई: जूल (J)
  • कार्य के प्रकार: धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य

कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना (Scientific Concept of Work)

दैनिक जीवन में हम “कार्य” शब्द का प्रयोग किसी भी प्रकार की मेहनत या काम के लिए करते हैं —
जैसे पढ़ाई करना, खेलना, खेत जोतना या किसी वस्तु को उठाना।
परंतु भौतिकी में “कार्य” (Work) का अर्थ केवल तब होता है जब किसी वस्तु पर लगाया गया बल उसे अपनी दिशा में विस्थापित करे।
यानी यदि बल तो लगाया गया पर वस्तु हिली नहीं, तो भौतिकी के अनुसार कोई कार्य नहीं हुआ।

वैज्ञानिक परिभाषा:
जब किसी वस्तु पर कोई बल कार्य करता है और वह वस्तु उसी दिशा में कुछ दूरी तक विस्थापित होती है,
तो कहा जाता है कि बल ने उस वस्तु पर कार्य किया है।

कार्य के लिए आवश्यक शर्तें

  • बल किसी वस्तु पर लगाया गया हो।
  • वस्तु में विस्थापन हुआ हो।
  • बल और विस्थापन एक ही दिशा में या किसी कोण पर हों।
महत्वपूर्ण:
यदि बल तो लगाया गया पर वस्तु नहीं हिली (विस्थापन = 0)
तो किया गया कार्य भी शून्य (Zero) माना जाएगा।

कार्य का गणितीय निरूपण

कार्य का परिमाण निम्न सूत्र से दिया जाता है:

W = F × S × cosθ

जहाँ,
W = कार्य (Work)
F = बल (Force)
S = विस्थापन (Displacement)
θ = बल एवं विस्थापन के बीच का कोण

कार्य का संकेत (Sign of Work)

  • धनात्मक कार्य: जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों।उदाहरण – किसी वस्तु को ऊपर की ओर उठाना।
  • ऋणात्मक कार्य: जब बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों।उदाहरण – ब्रेक लगाने पर घर्षण बल।
  • शून्य कार्य: जब बल विस्थापन के लंबवत हो या वस्तु में विस्थापन न हो।उदाहरण – व्यक्ति दीवार को धक्का दे रहा है।

कार्य का सारांश:

  • कार्य का वैज्ञानिक अर्थ केवल बल और विस्थापन से जुड़ा है।
  • कार्य तभी होता है जब विस्थापन बल की दिशा में हो।
  • कार्य का सूत्र: W = F × S × cosθ
  • SI इकाई: जूल (Joule)
  • 1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर
क्या आप जानते हैं?
किसी वस्तु को वृत्तीय गति में घुमाने पर बल हमेशा विस्थापन के लंबवत होता है,
इसलिए इस स्थिति में किया गया कार्य शून्य होता है।

एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Constant Force)

जब किसी वस्तु पर लगाया गया बल अपनी दिशा और परिमाण में समान रहता है —
अर्थात् वह बल पूरे विस्थापन के दौरान नियत (Constant) रहता है,
तो ऐसे बल द्वारा किया गया कार्य नियत बल द्वारा किया गया कार्य कहलाता है।

परिभाषा:
यदि कोई नियत बल किसी वस्तु पर लगाया जाता है और वस्तु बल की दिशा में या किसी कोण पर
कुछ दूरी (विस्थापन) तय करती है, तो बल द्वारा किया गया कार्य निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त किया जाता है:
W = F × S × cosθ

जहाँ,
W = कार्य (Work done)
F = लगाया गया बल (Applied constant force)
S = वस्तु का विस्थापन (Displacement)
θ = बल और विस्थापन के बीच का कोण (Angle between force and displacement)

स्थिति 1 : बल और विस्थापन समान दिशा में हों

जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों, तब θ = 0° होता है।
तब cos 0° = 1
अतः कार्य का सूत्र बनेगा:

W = F × S

(यह स्थिति धनात्मक कार्य की होती है)

स्थिति 2 : बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हों

जब बल और विस्थापन एक-दूसरे के विपरीत हों, तब θ = 180°
और cos 180° = -1
अतः कार्य का मान होगा:

W = -F × S

(यह स्थिति ऋणात्मक कार्य की होती है)

स्थिति 3 : बल और विस्थापन के बीच कोण 90° हो

जब बल विस्थापन के लंबवत हो, तब θ = 90°
और cos 90° = 0
अतः कार्य का मान होगा:

W = 0

(इस स्थिति में कोई कार्य नहीं होता)

उदाहरण:
यदि किसी वस्तु पर 20 N का बल लगाया गया और वस्तु 5 m तक बल की दिशा में चली,
तो किया गया कार्य होगा:W = F × S = 20 × 5 = 100 जूलअतः नियत बल द्वारा किया गया कार्य 100 J है।

ग्राफीय व्याख्या

यदि बल नियत हो, तो कार्य को बल-विस्थापन (Force–Displacement) ग्राफ द्वारा दर्शाया जा सकता है।
इस स्थिति में ग्राफ एक सीधी रेखा होता है और किया गया कार्य ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल के बराबर होता है।

सारांश:

  • नियत बल का अर्थ है – बल का परिमाण और दिशा स्थिर रहना।
  • कार्य का सूत्र: W = F × S × cosθ
  • यदि θ = 0° → कार्य धनात्मक
  • यदि θ = 180° → कार्य ऋणात्मक
  • यदि θ = 90° → कार्य शून्य
  • SI इकाई: जूल (J)

प्रश्न:

किसी वस्तु पर 7 N का बल लगता है।
मान लीजिए बल की दिशा में वस्तु 8 m तक विस्थापित होती है और विस्थापन के समय बल लगातार लगा रहता है।
इस स्थिति में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया गया है:
बुल (F) = 7 N
विस्थापन (S) = 8 m
बल और विस्थापन की दिशा समान → θ = 0°

कार्य का सूत्र: W = F × S × cosθ

⇒ W = 7 × 8 × cos 0°
⇒ W = 56 × 1
⇒ W = 56 J

उत्तर: किया गया कार्य = 56 जूल (J)

1. हम कब कहते हैं कि कार्य किया गया है?

जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाया जाता है और वह वस्तु उसी दिशा में कुछ दूरी (विस्थापन) तय करती है, तब कहा जाता है कि बल ने कार्य किया।

2. जब किसी वस्तु पर लगने वाला बल इसके विस्थापन की दिशा में हो तो किए गए कार्य का व्यंजक लिखिए।

जब बल और विस्थापन समान दिशा में हों, θ = 0°।
इस स्थिति में कार्य का सूत्र होगा:
W = F × S

3. कार्य को परिभाषित कीजिए।

भौतिकी में कार्य की परिभाषा:
“जब किसी वस्तु पर कोई बल लगाया जाता है और वह वस्तु उसी दिशा में कुछ दूरी तय करती है, तो कहा जाता है कि बल ने कार्य किया।”

4. उदाहरण – बैलों द्वारा खेत जोतना

दिया गया: बल (F) = 140 N, विस्थापन (S) = 15 m, बल और विस्थापन की दिशा समान।

कार्य = F × S = 140 × 15 = 2100 J

अतः खेत को जोतने में किया गया कार्य = 2100 जूल


ऊर्जा (Energy)

ऊर्जा किसी भी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को कहते हैं।
यदि किसी वस्तु में ऊर्जा है, तो वह कार्य कर सकती है।
कार्य और ऊर्जा का आपस में गहरा संबंध है – जितना कार्य किया जाता है, उतनी ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।

परिभाषा:
“ऊर्जा वह भौतिक परिमाण है जो कार्य करने में सक्षम होती है।”

ऊर्जा के प्रकार

  • गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): किसी चलती वस्तु में ऊर्जा।सूत्र: KE = 1/2 × m × v²
    जहाँ, m = द्रव्यमान, v = वेग
  • स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy): किसी वस्तु की स्थिति या अवस्थिति में मौजूद ऊर्जा।सूत्र: PE = m × g × h
    जहाँ, m = द्रव्यमान, g = गुरुत्वीय त्वरण, h = ऊँचाई
  • ऊष्मा ऊर्जा (Heat Energy): किसी वस्तु के कणों की गति के कारण ऊर्जा।
  • रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy): रासायनिक बंधनों में संग्रहित ऊर्जा।
  • विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy): चार्ज कणों के प्रवाह के कारण ऊर्जा।

ऊर्जा और कार्य का संबंध

जब कोई बल किसी वस्तु पर कार्य करता है, तो वस्तु में ऊर्जा का परिवर्तन होता है।
सभी कार्य के पीछे ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।
अतः कार्य = ऊर्जा में परिवर्तन।

उदाहरण:
1. गेंद को ऊपर फेंकने पर, व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य गेंद में स्थितिज ऊर्जा में बदल जाता है।
2. चलती हुई कार में ईंधन की रासायनिक ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।

SI इकाई

ऊर्जा की SI इकाई: जूल (Joule)

रोचक तथ्य:
1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर
यानि 1 जूल कार्य करने की क्षमता है, जो 1 न्यूटन बल लगाने पर वस्तु को 1 मीटर तक विस्थापित करने के बराबर है।

सारांश

  • ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है।
  • मुख्य प्रकार: गतिज, स्थितिज, ऊष्मा, रासायनिक, विद्युत आदि।
  • कार्य और ऊर्जा का गहरा संबंध है।
  • SI इकाई: जूल (J)

ऊर्जा के रूप (Forms of Energy)

ऊर्जा कई प्रकार की होती है और विभिन्न रूपों में उपस्थित होती है। हर प्रकार की ऊर्जा कार्य करने में सक्षम होती है।
मुख्य रूप निम्नलिखित हैं:

  • 1. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy):
    किसी चलती वस्तु में उपस्थित ऊर्जा।सूत्र: KE = 1/2 × m × v²
    जहाँ m = द्रव्यमान, v = वेगउदाहरण: दौड़ती हुई कार, बहती हुई नदी।
  • 2. स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy):
    किसी वस्तु की स्थिति या अवस्थिति में उपस्थित ऊर्जा।सूत्र: PE = m × g × h
    जहाँ m = द्रव्यमान, g = गुरुत्वीय त्वरण, h = ऊँचाईउदाहरण: ऊँचाई पर रखा हुआ पत्थर, खिंचा हुआ बाण।
  • 3. ऊष्मा ऊर्जा (Heat/Thermal Energy):
    कणों की आंतरिक गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा।उदाहरण: आग, हीटर, सूर्य की गर्मी।
  • 4. रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy):
    रासायनिक बंधनों में संग्रहीत ऊर्जा।उदाहरण: भोजन, बैटरी, ईंधन।
  • 5. विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy):
    चार्ज कणों के प्रवाह के कारण ऊर्जा।उदाहरण: बिजली का उपयोग, इलेक्ट्रिक पंखा।
  • 6. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy):
    परमाणु के नाभिक में संग्रहीत ऊर्जा।उदाहरण: परमाणु बम, न्यूक्लियर पावर प्लांट।
  • 7. ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy):
    कणों के कंपन के कारण उत्पन्न ऊर्जा।उदाहरण: गाना, शोर, संगीत वाद्ययंत्र।
  • 8. प्रकाश ऊर्जा (Light Energy):
    प्रकाश के रूप में उपस्थित ऊर्जा।उदाहरण: सूरज की रोशनी, टॉर्च।
सारांश:
ऊर्जा कई रूपों में मौजूद होती है और कार्य करने में सक्षम होती है।
मुख्य रूप: गतिज, स्थितिज, ऊष्मा, रासायनिक, विद्युत, नाभिकीय, ध्वनि और प्रकाश ऊर्जा।

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

किसी चलती हुई वस्तु में उपस्थित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।
गतिज ऊर्जा का संबंध वस्तु के द्रव्यमान और वेग से होता है।
जितना अधिक वेग या द्रव्यमान होगा, उतनी अधिक गतिज ऊर्जा होगी।

कार्य तथा ऊर्जा, गतिज ऊर्जा

परिभाषा:
“किसी चलती वस्तु में उसकी गति के कारण ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।”

गतिज ऊर्जा का सूत्र

गतिज ऊर्जा (KE) = (1/2) × द्रव्यमान × वेग²
सूत्र:
KE = 1/2 × m × v²

जहाँ,
KE = गतिज ऊर्जा (Joule में)
m = वस्तु का द्रव्यमान (kg में)
v = वस्तु की वेग (m/s में)

SI इकाई

SI इकाई: जूल (Joule, J)
1 J = 1 kg·m²/s²

गतिज ऊर्जा के उदाहरण

  • दौड़ती हुई कार
  • चलती हुई साइकिल
  • फेंकी हुई गेंद
  • बहती हुई नदी का पानी

उदाहरण:

एक 2 kg द्रव्यमान वाली गेंद 5 m/s की वेग से चल रही है।

गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए:

KE = 1/2 × m × v²
KE = 1/2 × 2 × (5)²
KE = 1 × 25 = 25 J

अतः गेंद की गतिज ऊर्जा = 25 जूल

सारांश:

  • गतिज ऊर्जा किसी चलती वस्तु में उपस्थित ऊर्जा है।
  • सूत्र: KE = 1/2 × m × v²
  • SI इकाई: जूल (J)
  • वेग या द्रव्यमान बढ़ने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

1. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा क्या होती है?

किसी चलती हुई वस्तु में उसकी गति के कारण उपस्थित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं।

2. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा के लिए व्यंजक लिखो।

गतिज ऊर्जा (KE) का सूत्र:
KE = 1/2 × m × v²
जहाँ, m = द्रव्यमान (kg), v = वेग (m/s)

3. उदाहरण (वेग बदलने पर गतिज ऊर्जा)

दिया गया:

वस्तु का वेग v = 5 m/s

गतिज ऊर्जा KE = 25 J

यदि वेग को दोगुना कर दिया जाए → v’ = 2 × 5 = 10 m/s

यदि वेग को तीनगुना कर दिया जाए → v” = 3 × 5 = 15 m/s

हल:
गतिज ऊर्जा का सूत्र: KE = 1/2 × m × v²
    • जब वेग दोगुना हो जाए (v’ = 2v):

KE’ = 1/2 × m × (2v)² = 1/2 × m × 4v² = 4 × (1/2 × m × v²) = 4 × 25 = 100 J

    • जब वेग तीनगुना हो जाए (v” = 3v):

KE” = 1/2 × m × (3v)² = 1/2 × m × 9v² = 9 × (1/2 × m × v²) = 9 × 25 = 225 J

अतः:

  • वेग दोगुना → KE = 100 J
  • वेग तीनगुना → KE = 225 J

स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

किसी वस्तु की स्थिति या अवस्थिति के कारण उसमें संग्रहीत ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
अर्थात् यदि वस्तु किसी ऊँचाई पर है या किसी खिंचाव/संपीड़न में है, तो उसमें स्थितिज ऊर्जा होती है।
जितनी ऊँचाई या जितनी अवस्था में वस्तु है, उतनी अधिक स्थितिज ऊर्जा।

परिभाषा:
“किसी वस्तु की स्थिति या अवस्थिति के कारण कार्य करने की क्षमता को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।”

स्थितिज ऊर्जा का सूत्र:-

PE = m × g × h
जहाँ,
PE = स्थितिज ऊर्जा (Joule में)
m = वस्तु का द्रव्यमान (kg)
g = गुरुत्वीय त्वरण (m/s², सामान्यतः 9.8)
h = ऊँचाई (m)

SI इकाई

SI इकाई: जूल (Joule, J)

1 J = 1 kg·m²/s²

स्थितिज ऊर्जा के उदाहरण

  • ऊँचाई पर रखा हुआ पत्थर
  • खींचा हुआ बाण
  • संपीड़ित स्प्रिंग
  • ऊँचाई पर रखा हुआ पानी (हाइड्रोपावर)

उदाहरण:

एक 3 kg द्रव्यमान वाली वस्तु 10 m ऊँचाई पर रखी है।
स्थिति ऊर्जा ज्ञात कीजिए।समाधान:
PE = m × g × h = 3 × 9.8 × 10 = 294 J
अतः वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = 294 जूल

सारांश:

  • स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु की स्थिति या अवस्थिति के कारण उपस्थित ऊर्जा है।
  • सूत्र: PE = m × g × h
  • SI इकाई: जूल (J)
  • ऊँचाई या स्थिति बढ़ने पर स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है।

किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)

किसी वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) उस ऊर्जा को कहते हैं जो उसकी स्थिति या अवस्थिति के कारण उसमें संग्रहीत होती है।
यदि वस्तु को किसी ऊँचाई पर रखा जाता है या किसी खिंचाव/संपीड़न में रखा जाता है, तो उसमें स्थितिज ऊर्जा होती है।
स्थिति जितनी अधिक ऊँची या कठिन होगी, उतनी अधिक ऊर्जा वस्तु में संग्रहीत होगी।

सूत्र

किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा:

PE = m × g × h

जहाँ,
PE = स्थितिज ऊर्जा (Joule में)
m = वस्तु का द्रव्यमान (kg)
g = गुरुत्वीय त्वरण (m/s², सामान्यतः 9.8)
h = ऊँचाई (m)

SI इकाई

SI इकाई: जूल (Joule, J)
1 J = 1 kg·m²/s²

उदाहरण:

प्रश्न: एक 5 kg द्रव्यमान वाली वस्तु 12 m ऊँचाई पर रखी हुई है। इसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

हल:
1️⃣ दिया गया है: m = 5 kg, h = 12 m, g = 9.8 m/s²2️⃣ सूत्र लगाएँ: PE = m × g × h3️⃣ मान भरें: PE = 5 × 9.8 × 124️⃣ गणना करें: 5 × 9.8 = 49 → 49 × 12 = 588उत्तर: PE = 588 जूल (J)

विशेष बातें

  • स्थितिज ऊर्जा वस्तु की ऊँचाई और द्रव्यमान पर निर्भर करती है।
  • गुरुत्वीय त्वरण (g) पृथ्वी पर सामान्यतः 9.8 m/s² लिया जाता है।
  • जितनी ऊँचाई अधिक होगी, उतनी अधिक ऊर्जा वस्तु में संग्रहित होगी।
  • स्थिति में बदलाव होने पर यह ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो सकती है।

नोट:-

किसी ऊँचाई पर वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = PE = m × g × h
SI इकाई: जूल (J)
स्थिति या ऊँचाई बढ़ने पर ऊर्जा बढ़ती है।
इस ऊर्जा का परिवर्तन कार्य करने या गतिज ऊर्जा में हो सकता है।

ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Energy)

ऊर्जा संरक्षण का नियम यह बताता है कि ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है; यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
अर्थात् किसी बंद प्रणाली (isolated system) में कुल ऊर्जा हमेशा स्थिर रहती है।

परिभाषा

“किसी बंद प्रणाली में कुल ऊर्जा हमेशा समान रहती है, चाहे ऊर्जा का रूप बदल जाए।
स्थिति ऊर्जा, गतिज ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, ऊष्मा आदि किसी भी रूप में परिवर्तित हो सकते हैं, लेकिन कुल ऊर्जा का योग हमेशा स्थिर रहता है।”

सूत्र (Total Energy)

कुल ऊर्जा = स्थितिज ऊर्जा + गतिज ऊर्जा + अन्य रूप की ऊर्जा

TE = PE + KE + अन्य ऊर्जा

विशेष बातें

  • ऊर्जा नष्ट नहीं होती और न ही उत्पन्न होती है।
  • ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
  • इस नियम का प्रयोग यांत्रिक, रासायनिक, विद्युत और अन्य प्रकार की ऊर्जा में होता है।
  • कुल ऊर्जा किसी प्रणाली में हमेशा स्थिर रहती है।

उदाहरण 1: ऊँचाई से गिरती हुई गेंद

एक गेंद 10 m ऊँचाई पर रखी है।
शुरुआत में गेंद की स्थितिज ऊर्जा = PE = m × g × h
जैसे ही गेंद गिरती है, इसकी स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
नीचे पहुँचते समय PE लगभग 0 और KE अधिकतम होती है।
कुल ऊर्जा = PE + KE = स्थिर

उदाहरण 2: झूले पर बच्चा

बच्चा झूले पर ऊँचाई पर है।
ऊँचाई पर स्थिति ऊर्जा अधिक है और गतिज ऊर्जा कम।
झूलते समय स्थिति ऊर्जा कम होती है और गतिज ऊर्जा अधिक।
कुल ऊर्जा = स्थिति ऊर्जा + गतिज ऊर्जा = स्थिर

सारांश

  • ऊर्जा संरक्षण का नियम: “ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है और न ही नष्ट।”
  • ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
  • कुल ऊर्जा = स्थिति ऊर्जा + गतिज ऊर्जा + अन्य ऊर्जा (TE = PE + KE + अन्य ऊर्जा)
  • इस नियम का प्रयोग यांत्रिक, रासायनिक, विद्युत और अन्य ऊर्जा में होता है।

कार्य करने की दर (Power)

जब कोई बल किसी वस्तु पर कार्य करता है, तो यदि वह कार्य किसी समय में किया जाता है, तो कार्य करने की दर को शक्ति या पावर (Power) कहते हैं।
यह बताती है कि कितनी तेजी से ऊर्जा का रूपांतरण हो रहा है

परिभाषा

“किसी वस्तु पर कार्य करने की दर को शक्ति (Power) कहते हैं। यह यह बताती है कि किसी समय में कितनी ऊर्जा का रूपांतरण हुआ।”

सूत्र (Formula)

Power (P) = कार्य (W) / समय (t)
जहाँ,
P = शक्ति (Watt में)
W = किया गया कार्य (Joule में)
t = कार्य में लगा समय (seconds में)

SI इकाई

SI इकाई: वाट (Watt, W)
1 Watt = 1 Joule / 1 second

उदाहरण 1

एक व्यक्ति 200 J कार्य 10 सेकंड में करता है।
शक्ति ज्ञात कीजिए।हल:
P = W / t = 200 / 10 = 20 W

विशेष बातें

  • जितना कम समय में अधिक कार्य किया जाए, उतनी अधिक शक्ति होगी।
  • Power किसी भी प्रकार के कार्य, ऊर्जा परिवर्तन या मशीन पर लागू होती है।
  • यदि कार्य स्थिर रहता है लेकिन समय बदलता है, तो Power बदलती है।

नोट:

  • कार्य करने की दर = Power = कार्य / समय
  • SI इकाई: Watt (W)
  • Power यह बताती है कि ऊर्जा कितनी तेजी से रूपांतरित हो रही है।
  • Power अधिक होने का मतलब है कि अधिक तेज़ी से कार्य किया जा रहा है।

अभ्यास — कार्य और ऊर्जा (विस्तृत हल)

प्रश्न 1. निम्न सूचिबद्ध क्रियाकलापों को ध्यान से देखिए। अपनी कार्य शब्द की व्याख्या के आधार पर तर्क दीजिए कि इनमें कार्य हो रहा है अथवा नहीं।

  • सूमा एक तालाब में तैर रही है।
  • एक गधे ने अपनी पीठ पर बोझ उठा रखा है।
  • एक पवन चक्की (विंड मिल) कुंए से पानी उठा रही है।
  • एक हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया हो रही है।
  • एक इंजन ट्रेन को खींच रहा है।
  • अनाज के दाने सूर्य की धूप में सूख रहे हैं।
  • एक पाल-नाव पवन ऊर्जा के कारण गतिशील है।

समाधान और तर्क (सारांश):

  1. सूमा तालाब में तैर रही है — कार्य: हाँ (हाँ/न)
    तैरने पर शरीर भीतर की मांसपेशियों द्वारा बल लगता है और शरीर का स्थान बदलता है। जहाँ बल और विस्थापन के बीच कोई सम्बंध (दिशा) है और ऊर्जा का अंतरण हो रहा है — वहाँ भौतिकी के अर्थ में कार्य किया जा रहा है। (नोट: कई बार पानी पर तैरना आंतरिक रासायनिक ऊर्जा का उपयोग है।)
  2. गधा अपनी पीठ पर बोझ उठा कर खड़ा है — कार्य: नहीं
    यदि बोझ स्थिर है और ऊँचाई न बदल रही हो तो उस बोझ पर जो उर्ध्व-समर्थन बल (normal force) लग रहा है, उसका विस्थापन बल की दिशा में नहीं है (90°), अतः यांत्रिक कार्य = F·d·cosθ = 0। (यदि गधा चल रहा हो तो हालात अलग होंगे।)
  3. पवन चक्की कुँए से पानी उठा रही है — कार्य: हाँ
    यहाँ बल (रोक/तार/चक्र से लगने वाला तनाव) पानी को ऊपर उठाने में लगाया जा रहा है और पानी का ऊर्ध्वाधर विस्थापन हो रहा है — अतः कार्य हो रहा है।
  4. हरे पौधे में प्रकाश संश्लेषण — परंपरागत यांत्रिक कार्य: नहीं, पर ऊर्जा परिवर्तन: हाँ
    प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदल रही है। यांत्रिक बल-दिशा के आधार पर “वर्क” नहीं कहा जाएगा, पर ऊर्जा का अंतरण/रूपांतरण निश्चित रूप से हो रहा है।
  5. इंजन ट्रेन को खींच रहा है — कार्य: हाँ
    इंजन से लगने वाला बल ट्रेन को विस्थापित कर रहा है — इसलिए इंजन द्वारा कार्य किया जा रहा है।
  6. अनाज के दाने धूप में सूख रहे हैं — यांत्रिक कार्य: नहीं, पर ऊर्जा अंतरण: हाँ
    सूर्य से उष्मा/रैडिएशन आ रहा है और पानी वाष्पित हो रहा है — यह तापीय ऊर्जा का स्थानांतरण है, पर मेकॅनिकल कार्य नहीं कहा जाएगा।
  7. पाल-नाव पवन-ऊर्जा से गतिशील — कार्य: हाँ
    हवा पाल पर बल लगाती है और नाव का विस्थापन उसी दिशा/समेकित दिशा में होता है — इसलिए पवन द्वारा नाव पर कार्य होता है।
निष्कर्ष: भौतिकी में “कार्य” (work) तब होता है जब किसी बल का घटक उस वस्तु के विस्थापन में कार्य करता है; ऊर्जा के रूपांतरण (जैसे ऊष्मा ↔ रासायनिक) हमेशा “यांत्रिक कार्य” नहीं होते पर ऊर्जा का आदान-प्रदान अवश्य होता है।

प्रश्न 2. एक पिंड को धरती से किसी कोण पर फेंका जाता है। यह एक वक्र पथ पर चलता है और वापस धरती पर आ गिरता है। पिंड के पथ के प्रारम्भिक तथा अंतिम बिंदु एक ही क्षैतिज रेखा पर स्थित हैं। पिंड पर गुरुत्वबल द्वारा कितना कार्य किया गया?

समाधान:

गुरुत्व बल एक संरक्षित बल है। किसी बिंदु से उसी समतल ऊँचाई पर लौटने पर ऊँचाई (potential energy) में कोई परिवर्तन नहीं होता।

कार्य by gravity = परिवर्तन में संभाव्य ऊर्जा = m g (y_final – y_initial) = 0

अतः गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य = शून्य (0 J)।

प्रश्न 3. एक बैटरी बल्ब जलाती है। इस प्रक्रिया में होने वाले ऊर्जा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।

समाधान (ऊर्जा रूपांतरण):

  1. बैटरी में रासायनिक ऊर्जा उपलब्ध होती है।
  2. बत्ती (बल्ब) में करंट बहने पर रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा (battery द्वारा) रूपांतरित होती है।
  3. बल्ब में विद्युत ऊर्जा → प्रमुखतः प्रकाश ऊर्जा और ऊष्मा (ताप) में बदल जाती है।
  4. अथवा सिंपल रूप में: रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा → प्रकाश ऊर्जा + ऊष्मा
याद रखें: बल्ब की दक्षता के कारण अधिकांश ऊर्जा ऊष्मा में चली जाती है; प्रकाश ऊर्जा उसका उपयोगी हिस्सा होता है।

प्रश्न 4. 20 kg द्रव्यमान पर लगने वाला कोई बल इसके वेग को 5 m s⁻¹ से 2 m s⁻¹ में परिवर्तित कर देता है। बल द्वारा किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।

समाधान (Work-Energy Theorem):

कार्य = परिवर्तन में गतिज ऊर्जा = ΔK = (1/2) m (v²_final − v²_initial)

m = 20 kg, u = 5 m/s (प्रारम्भिक), v = 2 m/s (अंतिम)
ΔK = 1/2 × 20 × (2² − 5²) = 10 × (4 − 25) = 10 × (−21) = −210 J

अतः बल द्वारा किया गया कार्य = −210 J. (ऋणार्थ कार्य दर्शाता है कि बल ने वस्तु की गति को धीमा किया — बल ने वस्तु पर नकारात्मक कार्य किया।)

प्रश्न 5. 10 kg द्रव्यमान का एक पिंड मेज़ पर A बिंदु पर रखा है। इसे B बिंदु तक लाया जाता है। यदि A तथा B को मिलाने वाली रेखा क्षैतिज है तो पिंड पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

समाधान:

गुरुत्व बल (mg) का दिशा ऊर्ध्वाधर (नीचे) है। यदि displacement क्षैतिज है तो बल और विस्थापन के बीच कोण 90° है, अतः कार्य W = F d cosθ = mg·d·cos90° = 0.

अतः गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य = 0 J।

प्रश्न 6. मुक्त रूप से गिरते एक पिंड की स्थितिज ऊर्जा लगातार कम होती जाती है। क्या यह ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन करती है? कारण बताइए।

समाधान:

नहीं। ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार कुल ऊर्जा सम कुल रहता है (यदि बाहरी गैर-संरक्षित बलों को न माना जाए)। जब पिंड गिरता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा (potential energy) कम होती है और समकक्ष बढ़ोतरी गतिज ऊर्जा (kinetic energy) में होती है।

उदाहरण: पाया गया कुल ऊर्जा = K + U = स्थिर।
इसीलिए स्थितिज ऊर्जा घटते समय गतिज ऊर्जा बढ़ती है — कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।

प्रश्न 7. जब आप साइकिल चलाते हैं तो कौन-कौन से ऊर्जा रूपांतरण होते हैं?

समाधान:

  1. आपके शरीर की रासायनिक ऊर्जा (खाने की हुई ऊर्जा) मांसपेशियों द्वारा उपयोग में आती है।
  2. रासायनिक ऊर्जा → गतिज/यांत्रिक ऊर्जा (पेडल घुमाने, चक्के घुमाने) में बदलती है।
  3. कुछ ऊर्जा घर्षण और वायु प्रतिरोध के कारण ऊष्मा में नष्ट हो जाती है।
संक्षेप: रासायनिक → यांत्रिक (काइनेटिक) + ऊष्मा (घर्षण आदि)।

प्रश्न 8. जब आप अपनी सारी शक्ति लगा कर एक बड़ी चट्टान को धकेलना चाहते हैं और उसे हिलाने में असफल हो जाते हैं, तो क्या इस अवस्था में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है? आपके द्वारा व्यय की गई ऊर्जा कहाँ चली जाती है?

समाधान:

यदि चट्टान का विस्थापन शून्य है तो शुद्ध यांत्रिक कार्य W = F·d·cosθ = 0। अतः किसी बाह्य वस्तु पर दिये गए यांत्रिक कार्य का मान शून्य है।

फिर भी आपका शरीर ऊर्जा उपयोग करता है — यह रासायनिक ऊर्जा मुख्यतः निम्न रूपों में चली जाती है:

  • आपके शरीर (मांसपेशियों) की भीतर ऊष्मा के रूप में (थकान, पसीना)।
  • छोटी मात्रा में ध्वनि (टकराव की आवाज़), त्वचा-आकृति-परिवर्तन (लचीलापन), और मांसपेशियों में आंतरिक
निष्कर्ष: यांत्रिक कार्य = 0 पर ऊर्जा व्यय हुआ — वह शरीर की अंदरूनी ऊष्मा/रासायनिक-नुकसान में परिवर्तित हो गयी।

प्रश्न 9. किसी घर में एक महीने में ऊर्जा की 250 “यूनिट” व्यय हुई। यह ऊर्जा जूल में कितनी होगी?

समाधान:

एक यूनिट = 1 kWh = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10⁶ J

250 यूनिट = 250 × 3.6×10⁶ J = 900 ×10⁶ J = 9.0 × 10⁸ J

अतः 250 यूनिट = 9.0 × 10⁸ जूल।

प्रश्न 10. 40 kg द्रव्यमान का एक पिंड धरती से 5 m की ऊँचाई तक उठाया जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी है? यदि पिंड को मुक्त रूप से गिरने दिया जाए तो?

समाधान:

स्तिथिज ऊर्जा U = m g h। g ≈ 9.8 m/s² (या अगर आप 10 m/s² लेना चाहें तो सहज आँकड़ा दे सकते हैं)।

m = 40 kg, h = 5 m, g = 9.8 m/s²
U = 40 × 9.8 × 5 = 40 × 49 = 1960 J

इसलिए स्थितिज ऊर्जा = 1960 J।

यदि पिंड को मुक्त गिरने दिया जाए (हवा-प्रतिरोध नगण्य माने), तो जमीन पर पहुँचते समय इसकी गतिज ऊर्जा = प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा = 1960 J (ऊर्जा संरक्षण)।

अंतिम टिप्स:

  • हमें हमेशा ध्यान रखना है — कार्य (work) तभी होगा जब बल का कुछ घटक उस वस्तु के विस्थापन में काम कर रहा हो।
  • ऊर्जा के रूपांतरणों में अक्सर ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऊष्मा के रूप में छूट जाता है (घर्षण, अव्यवस्थितता)।
  • सवालों में g = 9.8 m/s² मान कर गणना करें — अगर शिक्षक ने 10 म/s² लेने को कहा है तो वैसा कीजिए।

अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (प्रश्न 11 से 21)


प्रश्न 11. पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए किसी उपग्रह पर गुरुत्व बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?

उत्तर:
उपग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा उसकी गति की दिशा के लम्बवत कार्य करता है। अतः बल और विस्थापन के बीच कोण 90° होता है।
चूँकि  W = F × s × cosθ
यहाँ θ = 90°, अतः cos 90° = 0
कार्य = 0
इसलिए, गुरुत्व बल द्वारा उपग्रह पर किया गया कार्य शून्य होता है।

प्रश्न 12. क्या किसी पिंड पर लगने वाले किसी भी बल की अनुपस्थिति में, उसका विस्थापन हो सकता है?

उत्तर:
हाँ, यदि कोई वस्तु पहले से ही गति में है तो बिना बल के भी वह समान गति से चलती रहेगी।
यह न्यूटन के प्रथम गति नियम के अनुसार है। बल की अनुपस्थिति में वस्तु अपनी गति की अवस्था बनाए रखती है। अतः विस्थापन संभव है, परंतु त्वरण नहीं होगा।

प्रश्न 13. कोई मजदूर अपने सिर पर एक बोझ 30 मिनट तक रखे रहता है और थक जाता है। क्या उसने कार्य किया या नहीं?

उत्तर:
यहाँ बल (ऊर्ध्व दिशा में) है लेकिन विस्थापन नहीं है (सिर स्थिर है)।
अतः कार्य = 0 (क्योंकि विस्थापन शून्य है)।
मजदूर थकता है क्योंकि उसकी मांसपेशियों में जैव-रासायनिक ऊर्जा का उपभोग होता है, लेकिन भौतिक कार्य नहीं होता।

प्रश्न 14. एक विद्युत हीटर की शक्ति 1500 W है। 10 घंटे में यह कितनी ऊर्जा उपयोग करेगा?

दिया गया: शक्ति (P) = 1500 W = 1500 J/s, समय (t) = 10 घंटे = 10 × 3600 = 36000 s
सूत्र: E = P × t
E = 1500 × 36000 = 54,000,000 J = 54 × 10⁶ जूल
अतः हीटर द्वारा प्रयुक्त ऊर्जा = 54 मेगाजूल

प्रश्न 15. सरल लोलक के दोलन में ऊर्जा परिवर्तन समझाइए।

उत्तर:
लोलक जब चरम स्थिति से नीचे आता है तो स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
मध्य स्थिति में गतिज ऊर्जा अधिकतम और स्थितिज न्यूनतम होती है।
वापस ऊपर जाने पर यह गतिज से पुनः स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है।
कुछ समय बाद वायु प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का अपव्यय होता है और लोलक रुक जाता है। यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में वातावरण में चली जाती है। ऊर्जा संरक्षण का नियम यहाँ लागू रहता है।

प्रश्न 16. द्रव्यमान m का एक पिंड वेग v से चल रहा है। उसे रोकने के लिए कितना कार्य करना होगा?

दिया गया: द्रव्यमान = m, वेग = v
कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
ΔK = 0 – (½mv²) = -½mv²
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि बल विपरीत दिशा में कार्य करता है।
अतः रोकने के लिए किया गया कार्य = ½mv²

प्रश्न 17. 1500 kg द्रव्यमान की कार जो 60 km/h से चल रही है, रोकने के लिए कितना कार्य करना होगा?

दिया गया: m = 1500 kg, v = 60 km/h = 16.67 m/s
W = ½mv² = ½ × 1500 × (16.67)²
= 750 × 278 ≈ 2.09 × 10⁵ J
अतः कार को रोकने के लिए किया गया कार्य लगभग 2.1 × 10⁵ जूल होगा।

प्रश्न 18. बल F द्वारा पिंड पर किया गया कार्य – ऋणात्मक, धनात्मक या शून्य बताइए।

(i) जब बल और विस्थापन समान दिशा में हैं → कार्य धनात्मक
(ii) जब बल और विस्थापन विपरीत दिशा में हैं → कार्य ऋणात्मक
(iii) जब बल विस्थापन के लंबवत है → कार्य शून्य

प्रश्न 19. क्या किसी वस्तु पर त्वरण शून्य हो सकता है जबकि बल कार्य कर रहे हों?

उत्तर:
हाँ, जब किसी वस्तु पर कार्य करने वाले सभी बल संतुलित हों (जैसे स्थिर गति से चलती कार में घर्षण और इंजन बल बराबर हों), तब त्वरण शून्य होगा परंतु बल कार्य कर रहे होते हैं क्योंकि विस्थापन हो रहा है।

प्रश्न 20. चार युक्तियाँ, जिनमें प्रत्येक की शक्ति 500 W है, 10 घंटे तक चलती हैं।

प्रत्येक द्वारा प्रयुक्त ऊर्जा = 500 × 10 × 3600 = 1.8 × 10⁷ J
4 युक्तियों द्वारा कुल ऊर्जा = 4 × 1.8 × 10⁷ = 7.2 × 10⁷ J
अतः कुल ऊर्जा = 72 मेगाजूल

प्रश्न 21. मुक्त रूप से गिरता पिंड धरती पर पहुँचकर रुक जाता है। इसकी गतिज ऊर्जा का क्या होता है?

गिरते समय पिंड की स्थितिज ऊर्जा घटती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
धरती से टकराने पर गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि तथा विकृति ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि एक रूप से दूसरे रूप में बदल जाती है।

  • NCERT — पाठ: कार्य तथा ऊर्जा (PDF)
    आधिकारिक NCERT पाठ (हिंदी) — सिद्धान्त, उदाहरण और परिभाषाएँ; स्कूल-स्तर के लिए मूल पाठ.
  • Khan Academy (Hindi) — Work, energy and power
    वीडियो और लेखों का हिन्दी सर्वसम्पुट सेट — कार्य, गतिज/स्थितिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और प्रश्न-उदाहरण.
  • The Physics Classroom — Work, Energy and Power (English)
    सरल व स्पष्ट अंग्रेज़ी व्याख्या, इंटरएक्टिव उदाहरण और अभ्यास प्रश्न — शिक्षण एवं समझ के लिए उपयोगी।

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