वन एवं वन्य जीव संसाधन , बाघ परियोजना, आरक्षित वन, रक्षित वन मुख्य बिंदु।
अध्याय — वन एवं वन्य जीव संसाधन
वन एवं वन्यजीव संसाधन का तात्पर्य है— पृथ्वी पर उपस्थित उन प्राकृतिक आवासों और जीवों से जिनसे मनुष्य और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों लाभान्वित होते हैं।
वन न केवल लकड़ी, ईंधन और औषधि आदि प्रदान करते हैं, बल्कि यह कार्बन चक्र, वर्षा-चक्र और जैव विविधता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
वन्यजीव (Wildlife) प्राकृतिक प्रक्रियाओं के हिस्से हैं और पारिस्थितिक तंत्र की संतुलन बनाए रखने में आवश्यक हैं।
Quick fact :
वनों का संरक्षण सीधे तौर पर जलवायु नियंत्रण, मिट्टी संरक्षण और स्थानीय-वैश्विक दोनों तरह के पारिस्थितिक लाभ से जुड़ा होता है।
इस अध्याय में आप निम्न बिंदुओं का अध्ययन करेंगे:
- वनों के प्रकार और वितरण — भारत व विश्व में
- वनों का आर्थिक, पारिस्थितिक और सामाजिक महत्त्व
- वन्यजीव और उनका संरक्षण — अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान व जैव विविधता
- वनक्षरण, अवैध कटान और वन्यजीवों के सामने आने वाले खतरे
- वन संरक्षण के उपाय तथा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ (जैसे Project Tiger, Wildlife Protection Act आदि)
Exam tip :
“वनों के प्रकार” और “वन संरक्षण की योजनाएँ” (भारत में) को याद रखें — अक्सर 3–5 अंकों के प्रश्न इन पर आते हैं।
भारत में वनस्पतिजात एवं प्राणिजात (Flora & Fauna of India)
परिचय : भारत जैव विविधता के दृष्टिकोण से विश्व के समृद्ध देशों में शुमार है। यहाँ विभिन्न जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ (flora) और प्राणी (fauna) पाए जाते हैं।
Quick fact :
भारत में विविध पारिस्थितिकी प्रणालियाँ — पर्वत, मैदानी, रेगिस्तानी, तटीय और समुद्री — मौजूद हैं, इसलिए यहाँ प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक है।
1. भारत की प्रमुख वनस्पति श्रेणियाँ (Major Vegetation Types)
तापीय नित्यहरित वनो (Tropical Evergreen Forests)
स्थल: पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर। विशेषताएँ: घने, कई परतों वाले वनो; महोगनी, चिकन, कट्टन, हरबोल जैसे वृक्ष।
मोनसून (मीयर) पर्णपाती वनो (Tropical Deciduous Forests)
स्थल: अधिकांश भारतीय पठार और मैदान। विशेषताएँ: वर्षा के मौसम में पत्ते हरे रहते हैं, शुष्क ऋतु में झड़ते हैं; शीशम, सागवान, सागौन, बाँस आदि।
सूखी पर्णपाती / कांटेदार वनो (Dry Deciduous & Thorn Forests)
स्थल: पश्चिमी उप-आवृत क्षेत्र—राजस्थान के किनारे, मध्य भारत। विशेषताएँ: कम वर्षा, झाड़ियाँ, कंटीले पौधे।
लेटेराइट (Laterite) और ऊँची पर्वतीय वन (Montane Forests)
स्थल: पश्चिमी घाट की ऊँचाइयाँ, हिमालयी सुदूर क्षेत्र। विशेषताएँ: ऊँचाई के साथ बदलाव—ओक, देवदार, पाइन, एवरीटस आदि।
मैनग्रव (Mangrove) वन
स्थल: सुदूरबन (Sundarbans), अंडमान-निकोबार, गुजरात के कुछ तट। विशेषताएँ: लवण सहिष्णु पेड़-पौधे—गाँघु (Rhizophora), सिनोमिया आदि; समुद्री तूफान व तटरेखा संरक्षण में अहम।
2. प्रमुख वनस्पतियाँ — कुछ उदाहरण
- महोगनी, शीशम (सागवान), देवदार, पाइन, सागौन
- बाँस और बांसवंती (bamboos)
- विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियाँ और फलों के वृक्ष
3. भारत की प्रमुख प्राणी श्रेणियाँ (Major Faunal Groups)
- स्तनधारी (Mammals): बाघ (Tiger), एशियाई हाथी, भारतीय गैंडा (One-horned Rhinoceros), असम कैपिबरा नहीं—(नोट: कैपिबरा दक्षिण अमेरिका का है), चीता (historically), हिम तेंदुआ (Snow Leopard).
- पक्षी (Birds): सारस, मयूर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard), सारस, स्प्रिंग- और पल्सिंग प्रवासी पक्षी।
- उभयचर एवं सरीसृप (Amphibians & Reptiles): सांपों, छिपकलियों और मेंढकों की कई प्रजातियाँ।
- मछलियाँ एवं समुद्री जीव: तटीय और मध्यम-समुद्री पारिस्थितिकी में विविध मछलियाँ एवं कोरल-प्रकार।
- कीट (Insects): पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्त्वपूर्ण—परागण आदि।
महत्वपूर्ण — संरक्षित/लुप्तप्राय जीव:
बाघ, पेंगोलिन (Pangolin), गॉलिन—(नोट: गॉलिन का उल्लेख न करें; यहाँ उदाहरण: असम गैंडा, हिम तेंदुआ, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)। ये लुप्तप्राय प्रजातियाँ हैं और संरक्षण की ज़रूरत है।
4. जैव विविधता हॉटस्पॉट्स (Hotspots) और प्रमुख संरक्षित क्षेत्र
- वेस्टर्न घाट (Western Ghats): उच्च अंत विविधता, कई एंडेमिक प्रजातियाँ।
- ईस्टर्न हिमालय (Eastern Himalaya): वनस्पति और प्राणी दोनों में समृद्धि।
- संडरबन्स (Sundarbans): मैनग्रोव के विशाल क्षेत्र और बाघ का अद्वितीय आवास।
- अंडमान-निकोबार आर्किपेलागस: अनेक एंडेमिक प्रजातियाँ।
कुछ प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्य (Examples):
Jim Corbett, Kaziranga, Sundarbans, Gir, Ranthambore, Bandipur, Periyar आदि।
5. संरक्षण (Conservation) — नीतियाँ व उपाय
- राष्ट्रीय कानून: Wildlife Protection Act (1972), Forest Conservation Act (1980)
- विशेष परियोजनाएँ: Project Tiger, Project Elephant
- संरक्षित क्षेत्र: National Parks, Wildlife Sanctuaries, Biosphere Reserves
- समुदाय आधारित संरक्षण: ग्राम-स्तरीय वन समितियाँ, बायोडायवर्सिटी प्रबंधन
- जैव विविधता संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते: CITES, Convention on Biological Diversity
Exam tip :
“वन के प्रकार” और “प्रमुख संरक्षित क्षेत्र” (जैसे: Kaziranga — गैंडा, Sundarbans — टाइगर) को याद रखें। छोटे प्रश्न में उदाहरण दें।
निष्कर्ष
भारत की वनस्पतिजात और प्राणिजात न केवल आर्थिक संसाधन हैं बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और संस्कृति का हिस्सा भी हैं। प्रभावी संरक्षण व नीति-निर्माण के द्वारा इन्हें बचाना और पुनर्स्थापित करना आवश्यक है।
भारत में वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण
भारत एक जैव विविधता से परिपूर्ण देश है जहाँ पर्वत, मैदानी क्षेत्र, मरुस्थल, वर्षा-वन और तटीय क्षेत्र सभी प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र पाए जाते हैं।
परंतु बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, कृषि विस्तार और अवैध कटान के कारण हमारे वनों और वन्यजीवों पर भारी दबाव पड़ा है।
इन्हें संरक्षित करना न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।
महत्त्वपूर्ण तथ्य :
भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 21.71% भाग वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है (FRA 2021 के अनुसार)।
वन संरक्षण के उपाय
- वन कटाई पर नियंत्रण और वृक्षारोपण (Afforestation) को बढ़ावा देना।
- संवेदनशील क्षेत्रों में वन आरक्षण और राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना।
- स्थानीय लोगों की भागीदारी से संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM) को प्रोत्साहन।
- वन संसाधनों के सतत उपयोग की नीति अपनाना।
जानकारी :
भारत सरकार ने 1980 में वन (संरक्षण) अधिनियम लागू किया ताकि वनों को अन्य उपयोगों में बदलने से रोका जा सके।
वन्य जीवन संरक्षण के उपाय
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थापना।
- Project Tiger (1973) और Project Elephant (1992) जैसी योजनाओं का संचालन।
- वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी पर नियंत्रण।
- लुप्तप्राय प्रजातियों की पहचान और पुनर्वास।
उदाहरण :
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में की गई थी।
यह प्रोजेक्ट टाइगर के तहत संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
जनसहभागिता की भूमिका
स्थानीय समुदायों की भागीदारी से वन संरक्षण अधिक प्रभावी बनता है।
चिपको आंदोलन (उत्तराखंड) और अप्पिको आंदोलन (कर्नाटक) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
इन आंदोलनों ने लोगों को वनों के महत्त्व के प्रति जागरूक किया।
Exam Tip :
“चिपको आंदोलन”, “वन संरक्षण अधिनियम 1980” और “Project Tiger” पर आधारित प्रश्न 3 या 5 अंकों के रूप में पूछे जाते हैं।
बाघ परियोजना (Project Tiger)
भारत में बाघों की घटती संख्या को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1973 में
“बाघ परियोजना (Project Tiger)” की शुरुआत की।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना और
उनके शिकार तथा आवास विनाश पर नियंत्रण करना है।
महत्त्वपूर्ण तथ्य :
“बाघ परियोजना” का शुभारंभ तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हुआ था।
उद्देश्य
- बाघों की घटती संख्या को रोकना।
- उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) की रक्षा करना।
- शिकार, अवैध व्यापार और मानव हस्तक्षेप पर नियंत्रण।
- संरक्षित क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
प्रारंभिक संरक्षित क्षेत्र
परियोजना की शुरुआत में भारत के 9 अभयारण्यों को “बाघ आरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserves)” घोषित किया गया था।
इनमें प्रमुख हैं —
जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड), कान्हा (मध्य प्रदेश), सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), और
रणथंभौर (राजस्थान)।
जानकारी :
वर्तमान में (2024 तक) भारत में 50 से अधिक बाघ रिज़र्व हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग
75,000 वर्ग किलोमीटर है।
प्रमुख बाघ अभयारण्य
- जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान – उत्तराखंड
- कान्हा राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश
- सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान – पश्चिम बंगाल
- रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान – राजस्थान
- सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व – तमिलनाडु
उदाहरण :
“कान्हा राष्ट्रीय उद्यान” को भारत में सर्वश्रेष्ठ प्रबंधित टाइगर रिज़र्व में से एक माना जाता है।
परिणाम
- भारत में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- 2018 की जनगणना में बाघों की संख्या 2,967 थी, जो विश्व की कुल बाघ जनसंख्या का लगभग 75% है।
- यह परियोजना जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भारत की बड़ी सफलता है।
Exam Tip :
“Project Tiger 1973”, “Project Elephant 1992”, और “Wildlife Protection Act 1972”
तीनों को साथ में याद करें — अक्सर इनसे जुड़ा प्रश्न बोर्ड परीक्षा में पूछा जाता है।
आरक्षित, रक्षित एवं अवर्गीकृत वन
भारत में वनों को उनके उपयोग, स्वामित्व और संरक्षण के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है —
आरक्षित वन (Reserved Forests), रक्षित वन (Protected Forests) और
अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests)।
यह वर्गीकरण मुख्यतः राज्य सरकारों द्वारा किया गया है ताकि वनों के उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
आरक्षित वन (Reserved Forests)
परिभाषा :
ऐसे वन जिन पर सबसे अधिक सरकारी नियंत्रण होता है और जहाँ स्थानीय लोगों की गतिविधियाँ
(जैसे लकड़ी काटना या चराई) पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रतिबंधित रहती हैं।
- ये वन पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं।
- इनमें किसी भी प्रकार का उपयोग सरकारी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
- भारत के कुल वन क्षेत्र का लगभग 53% भाग आरक्षित वनों के अंतर्गत आता है।
उदाहरण :
मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आरक्षित वनों का सबसे अधिक क्षेत्रफल पाया जाता है।
रक्षित वन (Protected Forests)
परिभाषा :
ऐसे वन जिन पर सरकारी नियंत्रण होता है, परंतु स्थानीय लोगों को सीमित अधिकार (जैसे सूखी लकड़ी इकट्ठा करना,
पत्तियाँ या फल लेना) प्रदान किए जाते हैं।
- इन वनों का संरक्षण राज्य सरकार की निगरानी में होता है।
- भारत के कुल वन क्षेत्र का लगभग 29% भाग रक्षित वनों के अंतर्गत आता है।
- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार में ऐसे वनों की अधिकता है।
अवर्गीकृत वन (Unclassified Forests)
परिभाषा :
ऐसे वन जो न तो आरक्षित हैं और न ही रक्षित, इन्हें सामान्यतः
स्थानीय समुदायों या निजी स्वामित्व द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
- इन वनों का कोई विशेष संरक्षण दर्जा नहीं होता।
- अक्सर ये वन जनजातीय क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में पाए जाते हैं।
- भारत के कुल वन क्षेत्र का लगभग 18% भाग अवर्गीकृत वनों में शामिल है।
Exam Tip :
“आरक्षित, रक्षित और अवर्गीकृत वनों” का अंतर 3 अंकों के प्रश्न में अक्सर पूछा जाता है।
प्रतिशत और उदाहरणों को अवश्य याद रखें।
समुदाय और वन संरक्षण
वनों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है।
भारत में अनेक क्षेत्रों में लोगों ने अपने पारंपरिक ज्ञान,
सामाजिक एकता और आत्म-प्रेरणा से वनों और वन्यजीवों की रक्षा की है।
“समुदाय आधारित संरक्षण” का अर्थ है — जब स्थानीय लोग स्वयं वन संसाधनों के संरक्षण
और प्रबंधन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
मुख्य विचार :
वनों की रक्षा केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है;
जब तक स्थानीय लोग संरक्षण में शामिल नहीं होते, तब तक इसका दीर्घकालीन प्रभाव नहीं होता।
संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM)
भारत सरकार ने वर्ष 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के तहत
संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) की शुरुआत की।
इसका उद्देश्य था — वन विभाग और स्थानीय ग्राम समुदायों के बीच
साझेदारी बनाकर वनों का संरक्षण और पुनर्स्थापन (Restoration) करना।
- ग्राम समितियों को वनों की देखभाल और वृक्षारोपण की जिम्मेदारी दी जाती है।
- संरक्षण के बदले उन्हें वन उपज जैसे सूखी लकड़ी, पत्तियाँ, फल, बीज आदि एकत्र करने की अनुमति दी जाती है।
- इस नीति से हजारों गाँवों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।
उदाहरण :
पश्चिम बंगाल के अराबारी गाँव में “संयुक्त वन प्रबंधन” का पहला सफल मॉडल लागू किया गया,
जहाँ स्थानीय लोगों की मदद से वनों का पुनरुद्धार हुआ।
समुदाय आधारित संरक्षण आंदोलन
- चिपको आंदोलन (उत्तराखंड): महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर वृक्ष कटाई का विरोध किया।
- अप्पिको आंदोलन (कर्नाटक): लोगों ने पेड़ों को गले लगाकर वनों को बचाने का संकल्प लिया।
- बिश्नोई समुदाय (राजस्थान): यह समुदाय सैकड़ों वर्षों से पशु-पक्षियों और पेड़ों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
जानकारी :
राजस्थान में बिश्नोई समाज की अमृता देवी और उनके 363 अनुयायियों ने
1731 में खेजड़ी वृक्षों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक तरीके
जनजातीय समुदाय पारंपरिक रूप से वनों के संरक्षण में योगदान देते रहे हैं।
वे वन संसाधनों का सतत उपयोग करते हैं — जैसे सीमित कटाई,
प्राकृतिक पुनर्जनन, और पवित्र उपवन (Sacred Groves) की परंपरा।
कई स्थानों पर ये पवित्र वन धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से पूरी तरह संरक्षित रहते हैं।
Exam Tip :
“संयुक्त वन प्रबंधन”, “चिपको आंदोलन” और “बिश्नोई समाज” पर आधारित प्रश्न
3 या 5 अंकों में अवश्य पूछे जाते हैं।
इनकी तिथि, स्थान और उद्देश्य याद रखें।
पवित्र पेड़ों के झुरमुट – विविध एवं दुर्लभ जातियों की संपत्ति
भारत के अनेक भागों में ऐसे पवित्र वन या “पवित्र पेड़ों के झुरमुट” पाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। ये क्षेत्र केवल पूजा और आस्था के स्थल ही नहीं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण के भी प्रमुख केंद्र हैं।
विशेषताएँ:
- इन झुरमुटों में पेड़ों को काटना, शिकार करना या कोई भी विनाशकारी गतिविधि करना वर्जित होता है।
- यहां पर अनेक दुर्लभ पौधों और जीवों की प्रजातियाँ सुरक्षित रूप से पाई जाती हैं।
- ये झुरमुट स्थानीय समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं से जुड़े होते हैं।
- इनके संरक्षण से स्थानीय जल स्रोत और मिट्टी की नमी बनी रहती है।
प्रमुख उदाहरण:
- मेघालय – “खासी जनजाति” द्वारा संरक्षित पवित्र वन।
- राजस्थान – “बिश्नोई समुदाय” द्वारा पेड़ों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध।
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ – आदिवासी क्षेत्रों में पवित्र ग्रोव्स (Sacred Groves) पाए जाते हैं।
इस प्रकार ये पवित्र पेड़ों के झुरमुट मानव और प्रकृति के बीच संतुलन और सह-अस्तित्व के सुंदर उदाहरण हैं। ये न केवल सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
वन एवं वन्य जीव संसाधन – अभ्यास प्रश्न उत्तर
1. बहुविकल्पक प्रश्न
(i) इनमें से कौन-सा संरक्षण तरीका समुदायों की सीधी भागीदारी नहीं करता?
(क) संयुक्त वन प्रबंधन
(ख) चिपको आंदोलन
(ग) बीच बचाओ आंदोलन
(घ) वन्य जीव अभयारण्य (Sanctuary) का परिमार्जन
उत्तर: (घ) वन्य जीव अभयारण्य (Sanctuary) का परिमार्जन
2. निम्नलिखित का मेल करें
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| आरक्षित वन | सरकार, व्यक्तियों के निजी और समुदायों के अधीन अन्य वन और बंजर भूमि। |
| रक्षित वन | वन और वन्य जीव संसाधन संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान वन। |
| अवर्गीकृत वन | वन भूमि जो और अधिक क्षरण से बचाई जाती है। |
3. लगभग 30 शब्दों में उत्तर दीजिए
(i) जैव विविधता क्या है? यह मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: जैव विविधता पृथ्वी पर पाई जाने वाली विभिन्न जीव-जंतुओं और पौधों की विविधता है। यह मानव के भोजन, दवाइयों, पर्यावरणीय संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र के स्थायित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
(ii) स्पष्ट कीजिए कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारण हैं?
उत्तर: मानव द्वारा अंधाधुंध वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, खनन और प्रदूषण जैसी गतिविधियों से प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं जिससे अनेक वनस्पति और जीव प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं।
4. लगभग 120 शब्दों में उत्तर दीजिए
(i) भारत में विभिन्न समुदायों ने किन प्रकार से वन और वन्य जीव संरक्षण और रक्षण में योगदान किया है? विस्तारपूर्वक विवेचना करें।
उत्तर: भारत में अनेक समुदायों ने परंपरागत और धार्मिक विश्वासों के माध्यम से वनों और वन्य जीवों की रक्षा की है। राजस्थान के बिश्नोई समुदाय ने हिरणों और पेड़ों की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उत्तराखंड में चिपको आंदोलन के तहत ग्रामीणों ने पेड़ों को बचाने के लिए उन्हें आलिंगन किया। मेघालय, नागालैंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पवित्र ग्रोव्स (Sacred Groves) के रूप में वनों का संरक्षण किया जाता है। इन प्रयासों से न केवल पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है बल्कि जैव विविधता भी संरक्षित रहती है।
(ii) वन और वन्य जीव संरक्षण में सहयोगी रीति-रिवाजों पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर: भारत में कई पारंपरिक रीति-रिवाजों और त्यौहारों का सीधा संबंध प्रकृति से है। जैसे वृक्षारोपण पर्व, वट सावित्री, तुलसी पूजन आदि के माध्यम से पेड़ों का सम्मान किया जाता है। अनेक जनजातियाँ विशेष पेड़ों और जीवों को पवित्र मानकर उनकी रक्षा करती हैं। कुछ क्षेत्रों में शिकार पर प्रतिबंध और जंगलों को देवी-देवताओं का स्थान माना गया है। ये परंपराएँ वनों और वन्य जीवों के संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती हैं और मनुष्य-प्रकृति के सामंजस्य को सुदृढ़ बनाती हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
| क्रम | प्रश्न | विकल्प | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 1. | भारत में “प्रोजेक्ट टाइगर” की शुरुआत किस वर्ष हुई थी? | (क) 1973 (ख) 1980 (ग) 1985 (घ) 1990 | (क) 1973 |
| 2. | भारत में सबसे अधिक वन क्षेत्र किस राज्य में पाया जाता है? | (क) केरल (ख) मध्य प्रदेश (ग) असम (घ) ओडिशा | (ख) मध्य प्रदेश |
| 3. | भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग कितना प्रतिशत वन क्षेत्र है? | (क) 10% (ख) 21% (ग) 33% (घ) 45% | (ख) 21% |
| 4. | वन्य जीव संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ था? | (क) 1970 (ख) 1971 (ग) 1972 (घ) 1973 | (ग) 1972 |
| 5. | ‘चिपको आंदोलन’ किस राज्य से संबंधित है? | (क) हिमाचल प्रदेश (ख) उत्तराखंड (ग) बिहार (घ) गुजरात | (ख) उत्तराखंड |
| 6. | आरक्षित वन किसके नियंत्रण में होते हैं? | (क) पंचायत (ख) सरकार (ग) निजी व्यक्ति (घ) ग्राम सभा | (ख) सरकार |
| 7. | रक्षित वन किस उद्देश्य से बनाए जाते हैं? | (क) वन्य जीव संरक्षण (ख) कृषि के लिए (ग) लकड़ी व्यापार (घ) पशुपालन | (क) वन्य जीव संरक्षण |
| 8. | भारत में सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य कौन-सा है? | (क) काज़ीरंगा (ख) गिर (ग) रनथंभौर (घ) सुन्दरबन | (ग) रनथंभौर |
| 9. | साइलेंट वैली परियोजना का संबंध किस राज्य से है? | (क) तमिलनाडु (ख) केरल (ग) महाराष्ट्र (घ) ओडिशा | (ख) केरल |
| 10. | ‘बिश्नोई समुदाय’ किस चीज की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है? | (क) जल स्रोत (ख) हिरण और पेड़ (ग) मिट्टी संरक्षण (घ) पक्षी संरक्षण | (ख) हिरण और पेड़ |
| 11. | भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान कौन-सा है? | (क) गिर राष्ट्रीय उद्यान (ख) काज़ीरंगा (ग) जिम कॉर्बेट (घ) कान्हा | (ग) जिम कॉर्बेट |
| 12. | वन्यजीव अभयारण्य में क्या किया जा सकता है? | (क) शिकार (ख) पेड़ काटना (ग) वन्यजीवों को संरक्षण देना (घ) खनन | (ग) वन्यजीवों को संरक्षण देना |
| 13. | भारत में बाघ संरक्षण के लिए कितने “टाइगर रिजर्व” बनाए गए हैं? | (क) 25 (ख) 35 (ग) 50 से अधिक (घ) 100 | (ग) 50 से अधिक |
| 14. | ‘बीज बचाओ आंदोलन’ का मुख्य उद्देश्य क्या था? | (क) खेती बढ़ाना (ख) देशी बीजों की रक्षा (ग) वृक्षारोपण (घ) खाद बनाना | (ख) देशी बीजों की रक्षा |
| 15. | वन संरक्षण में समुदाय की भागीदारी किस योजना से जुड़ी है? | (क) मनरेगा (ख) राष्ट्रीय हरित योजना (ग) संयुक्त वन प्रबंधन (घ) ग्रीन मिशन | (ग) संयुक्त वन प्रबंधन |
| 16. | काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है? | (क) असम (ख) झारखंड (ग) राजस्थान (घ) मध्य प्रदेश | (क) असम |
| 17. | ‘वन्यजीव सप्ताह’ हर वर्ष कब मनाया जाता है? | (क) 1–7 जनवरी (ख) 2–8 अक्टूबर (ग) 10–16 मार्च (घ) 5–11 जून | (ख) 2–8 अक्टूबर |
| 18. | भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है? | (क) अनुच्छेद 14 (ख) अनुच्छेद 32 (ग) अनुच्छेद 48A (घ) अनुच्छेद 370 | (ग) अनुच्छेद 48A |
| 19. | वनों के क्षय का प्रमुख कारण क्या है? | (क) वर्षा की कमी (ख) पशुपालन (ग) औद्योगिकीकरण व कटाई (घ) पर्वत निर्माण | (ग) औद्योगिकीकरण व कटाई |
| 20. | वन्य जीवों की रक्षा हेतु अंतरराष्ट्रीय संगठन कौन-सा है? | (क) WHO (ख) WWF (ग) UNESCO (घ) UNO | (ख) WWF |
और अधिक जानकारी के लिए – वन एवं वन्य जीव संसाधन
- NCERT Official Textbook (Class 10 Geography)
- BYJU’S NCERT Solutions – Forest and Wildlife Resources
- LearnCBSE – Class 10 Forest and Wildlife Resources Notes
- StudyRankers – Forest and Wildlife Resources Class 10 Notes
- TopperLearning – Class 10 Geography Chapter 2 Solutions
- Extramarks – Forest and Wildlife Resources Summary
- CBSE Guess – NCERT Class 10 Forest and Wildlife Resources
- SelfStudys – NCERT Notes on Forest and Wildlife Resources
- Tiwari Academy – Class 10 Geography Chapter 2 Solutions
- InspireVeda – Free MCQs & Notes on Geography Chapters
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