पाठ 1: पादपों में पोषण
पादपों में पोषण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करती है।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि पादप अपने भोजन के लिए किन तरीकों का उपयोग करते हैं, जैसे कि
प्रकाश संश्लेषण और कुछ पौधों में सजीवों से पोषण लेना।
साथ ही, पादपों में पोषण से जुड़े विभिन्न अंगों और उनकी भूमिकाओं को भी समझेंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- पादप अपने भोजन के लिए सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
- हरित पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण की मुख्य साइट होती हैं।
- कुछ पौधे मांसाहारी होते हैं और अन्य जीवों से पोषण प्राप्त करते हैं।
इस अध्याय को पढ़ने के बाद, आपको यह समझ में आएगा कि कैसे पादप अपनी जीवन क्रिया के लिए
आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करते हैं और यह प्रकृति में जैविक संतुलन बनाए रखने में कैसे मदद करता है।
पादपों में पोषण की विधियाँ
पादप अपने जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करने के लिए मुख्य रूप से दो तरीकों का उपयोग करते हैं:
- स्वपोषी poshan (Autotrophic Nutrition):अधिकतर पादप अपने भोजन को स्वयं बनाते हैं। इसे स्वपोषी पोषण कहते हैं।
इस प्रक्रिया में पादप सूर्य की रोशनी, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके
ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्व तैयार करते हैं।
यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहलाती है। - परसजीवी और मांसाहारी पादप (Heterotrophic Nutrition):कुछ विशेष पादप अपने भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
इसे परसजीवी पोषण कहते हैं।
उदाहरण: Cuscuta (परसजीवी पौधा)।
वहीं, कुछ पौधे मांसाहारी होते हैं और कीड़े या अन्य छोटे जीवों को पकड़कर पोषण प्राप्त करते हैं।
उदाहरण: ड्रैपेरिया, नेपथिस।
नोट:-
- स्वपोषी पोषण: पादप स्वयं भोजन बनाते हैं।
- परसजीवी पोषण: पादप दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
- मांसाहारी पादप: पादप कीड़ों या छोटे जीवों से पोषण प्राप्त करते हैं।
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पादप सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं।
यह प्रक्रिया मुख्य रूप से पत्तियों में स्थित हरितलवक (Chlorophyll) द्वारा होती है।
इसमें कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज और ऑक्सीजन का निर्माण होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है।
- मुख्य साइट: पत्तियों की हरित कोशिकाएँ (Mesophyll cells)।
- सामान्य समीकरण: 6CO₂ + 6H₂O + प्रकाश ऊर्जा → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
- ऑक्सीजन वातावरण में छोड़ दी जाती है।
प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक तत्व
| तत्व | भूमिका |
|---|---|
| सूर्य का प्रकाश | ऊर्जा का स्रोत, प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है। |
| जल (H₂O) | ग्लूकोज बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन प्रदान करता है। |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) | ग्लूकोज और अन्य कार्बनिक यौगिक बनाने में सहायक। |
| हरितलवक (Chlorophyll) | प्रकाश को अवशोषित करके ऊर्जा का उपयोग करता है। |
प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया
- पत्ती की कोशिकाओं में हरितलवक सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है।
- जल को जड़ों से लेकर पत्तियों तक पहुँचाया जाता है।
- पत्तियों की हवाओं से कार्बन डाइऑक्साइड अंदर आती है।
- प्रकाश ऊर्जा की मदद से जल और CO₂ का रासायनिक रूपांतरण होता है और ग्लूकोज बनता है।
- उत्पन्न ऑक्सीजन वायुमंडल में छोड़ दी जाती है।
नोट:
प्रकाश संश्लेषण के द्वारा पादप स्वयं अपना भोजन तैयार करते हैं और यह पृथ्वी पर जीवन के लिए ऑक्सीजन और ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
क्लोरोफिल (Chlorophyll)
क्लोरोफिल एक हरित वर्णक (green pigment) है जो पादपों की पत्तियों में पाया जाता है।
यह सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित करके प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को संभव बनाता है।
मुख्य तथ्य:
- पत्तियों की हरी रंगत का कारण क्लोरोफिल है।
- प्रकाश संश्लेषण की मुख्य साइट क्लोरोप्लास्ट में होती है।
- यह सूर्य की प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पत्तियों की हरित कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट के अंदर |
| कार्य | सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित करना और प्रकाश संश्लेषण को सक्रिय करना |
| प्रकार | क्लोरोफिल a और क्लोरोफिल b |
रंध्र (Stomata)
रंध्र पत्तियों की निचली सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिनके माध्यम से पादप वायुमंडल से
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन (O₂) छोड़ते हैं।
ये जल वाष्प का उत्सर्जन (Transpiration) भी नियंत्रित करते हैं।
मुख्य तथ्य:
- रंध्र छोटे छिद्र हैं जो मुख्य रूप से पत्तियों की निचली सतह पर पाए जाते हैं।
- प्रति रंध्र को दो गार्ड कोशिकाएँ (Guard Cells) घेरे रहती हैं।
- गार्ड कोशिकाएँ खुलने और बंद होने में सहायक होती हैं।
- रंध्र प्रकाश संश्लेषण और जल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पत्तियों की निचली सतह पर |
| संरचना | दो गार्ड कोशिकाओं द्वारा घेरे गए छिद्र |
| कार्य | CO₂ का ग्रहण, O₂ का उत्सर्जन, जल वाष्प का नियंत्रण |
पादपों में कार्बोहाइड्रेट के अतिरिक्त अन्य पदार्थों का संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण के द्वारा पादप मुख्य रूप से ग्लूकोज (Carbohydrates) बनाते हैं।
इसके अतिरिक्त, पादप इन कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के अन्य जैविक पदार्थों का निर्माण भी करते हैं।
ये पदार्थ पादप के विकास, संरचना और जीवन क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य तथ्य:
- ग्लूकोज से अन्य पदार्थ जैसे प्रोटीन, वसा और विटामिन तैयार किए जाते हैं।
- ये पदार्थ पादप की संरचना और ऊर्जा संग्रह में सहायक होते हैं।
- ये पदार्थ भोजन और औषधि के रूप में भी उपयोगी होते हैं।
पादपों द्वारा संश्लेषित अन्य पदार्थ
| पदार्थ | उत्पादन का स्रोत | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| प्रोटीन (Proteins) | ग्लूकोज + नाइट्रोजन युक्त यौगिक (जैसे अमीनो एसिड) | पौधों के ऊतकों के निर्माण और विकास में सहायक |
| वसा / तैलीय पदार्थ (Fats / Oils) | ग्लूकोज का रूपांतरण | ऊर्जा संग्रह और कोशिका झिल्ली का निर्माण |
| विटामिन (Vitamins) | ग्लूकोज और अन्य कार्बनिक यौगिक | जीव रासायनिक क्रियाओं के लिए सहायक |
| रेशा / सेल्यूलोज (Cellulose) | ग्लूकोज का polymerisation | पौधों की दीवार का निर्माण, मजबूती प्रदान करता है |
इस प्रकार, पादप न केवल ग्लूकोज का निर्माण करते हैं, बल्कि उससे कई अन्य आवश्यक जैविक पदार्थ भी बनाते हैं,
जो उनकी वृद्धि, विकास और जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं।
पादपों में पोषण की अन्य विधियाँ
अधिकांश पादप स्वयं अपना भोजन (ग्लूकोज) तैयार करते हैं जिसे स्वयं पोषण (Autotrophic Nutrition) कहते हैं।
इसके अलावा कुछ पौधे अन्य जीवों या स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। इन्हें परसजीवी (Parasitic) और मांसाहारी (Carnivorous) पौधे कहते हैं।
मुख्य तथ्य:
- परसजीवी पौधे अन्य पौधों से पोषण प्राप्त करते हैं।
- मांसाहारी पौधे कीड़े और छोटे जीवों को पकड़कर पोषण प्राप्त करते हैं।
- यह पौधों की पोषण की विविधता को दर्शाता है।
पादपों में अन्य पोषण विधियाँ
| विधि | उदाहरण | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| परसजीवी पोषण (Parasitic Nutrition) | Cuscuta (कसकस), Loranthus | अन्य पौधों से सीधे पोषक तत्व ग्रहण करता है। |
| मांसाहारी पोषण (Carnivorous Nutrition) | Dionaea (Venus Flytrap), Nepenthes | कीड़े और छोटे जीव पकड़कर प्रोटीन प्राप्त करता है। |
| सापेक्ष परसजीवी (Saprophytic Nutrition) | Monotropa, Balanophora | मृत जैविक पदार्थों से पोषण प्राप्त करता है। |
इस प्रकार, पादपों में पोषण केवल स्वयं पोषण तक सीमित नहीं है। कुछ पौधे अन्य जीवों या मृत पदार्थों पर निर्भर रहते हैं,
जो उन्हें आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
परपोषी पोषण (Parasitic Nutrition)
परपोषी पौधे (Parasitic Plants) ऐसे पौधे होते हैं जो स्वयं अपना भोजन नहीं बना सकते और
अन्य पौधों (मेज़बान पौधे) से सीधे पोषक तत्व प्राप्त करते हैं।
ये मुख्य रूप से मेज़बान पौधे की जड़ों या तनों से जुड़े रहते हैं और उनसे जल तथा आवश्यक खनिज प्राप्त करते हैं।
मुख्य तथ्य:
- परपोषी पौधे में प्रकाश संश्लेषण की क्षमता सीमित या नहीं होती।
- यह अन्य पौधों से पोषक तत्व और पानी ग्रहण करता है।
- इस प्रकार के पौधे अपने मेज़बान पर निर्भर रहते हैं।
अमरवेल (Cuscuta) का उदाहरण
Cuscuta, जिसे आम भाषा में अमरवेल कहा जाता है, एक प्रसिद्ध परपोषी पौधा है।
इसकी कुछ विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| रंग और रूप | पतली, लंबी और पीली या हरी तने; पत्तियाँ बहुत छोटी या अनुपस्थित |
| पोषण | मेज़बान पौधे से सीधे जल और पोषक तत्व ग्रहण करता है |
| जड़ें | असली जड़ें बहुत छोटी; हुक जैसी संरचना (haustoria) के माध्यम से मेज़बान से जुड़ता है |
| अन्य तथ्य | प्रकाश संश्लेषण सीमित या लगभग नहीं; पूरी तरह परपोषी |
इस प्रकार, अमरवेल (Cuscuta) परपोषी पौधों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो मेज़बान पर निर्भर रहते हुए अपना पोषण प्राप्त करता है।
परजीवी पोषण (Parasitic Nutrition)
परजीवी पौधे ऐसे पौधे होते हैं जो स्वयं अपना भोजन नहीं बना सकते और अन्य पौधों (मेज़बान) से पोषक तत्व ग्रहण करते हैं।
ये पौधे मुख्य रूप से मेज़बान की जड़ों या तनों से जुड़े रहते हैं और उससे जल एवं आवश्यक खनिज प्राप्त करते हैं।
मुख्य तथ्य:
- प्रकाश संश्लेषण की क्षमता सीमित या नहीं होती।
- मेज़बान पौधे पर निर्भर रहते हैं।
- उदाहरण: Cuscuta (अमरवेल), Loranthus
कीटभक्षी पादप (Carnivorous Plants)
कीटभक्षी पौधे ऐसे पौधे होते हैं जो प्रोटीन की पूर्ति के लिए छोटे जीवों, मुख्यतः कीड़ों, को पकड़कर खाते हैं।
ये पौधे आमतौर पर अमीर मिट्टी (Nitrogen-poor soil) वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
मुख्य तथ्य:
- ये पौधे मांसाहारी होते हैं और प्रोटीन प्राप्त करने के लिए कीड़े पकड़ते हैं।
- प्राकृतिक रूप से Nitrogen की कमी वाले क्षेत्रों में विकसित हुए हैं।
- मुख्य उदाहरण: Dionaea (Venus Flytrap), Nepenthes, Drosera
परजीवी और कीटभक्षी :
| पोषण प्रकार | उदाहरण | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| परजीवी (Parasitic) | Cuscuta (अमरवेल), Loranthus | मेज़बान पौधे से पोषक तत्व ग्रहण करता है, प्रकाश संश्लेषण सीमित या नहीं |
| कीटभक्षी / मांसाहारी (Carnivorous) | Dionaea (Venus Flytrap), Nepenthes, Drosera | कीड़े और छोटे जीव पकड़कर प्रोटीन प्राप्त करता है, आमतौर पर Nitrogen-poor क्षेत्रों में पाया जाता है |
मृतजीवी पौधे (Saprophytic Plants)
मृतजीवी पौधे (Saprophytic Plants) ऐसे पौधे होते हैं जो अपने लिए आवश्यक पोषण सीधे मृत जैविक पदार्थों (Dead Organic Matter) से प्राप्त करते हैं।
ये पौधे प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते, क्योंकि इनमें क्लोरोफिल नहीं होता या बहुत कम होता है।
मृतजीवी पौधे मुख्य रूप से मृत पत्तियों, लकड़ी और अन्य अपशिष्ट पदार्थों पर पाए जाते हैं।
मुख्य तथ्य:
- क्लोरोफिल की कमी या अनुपस्थिति होती है।
- वे मृत जैविक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
- आमतौर पर अंधेरे और नम स्थानों में पाए जाते हैं।
- ये पौधे पारिस्थितिकी तंत्र में अपशिष्ट पदार्थों को विघटित करने में मदद करते हैं।
- उदाहरण: Monotropa, Balanophora
मृतजीवी पौधों की विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्लोरोफिल | असामान्य या अनुपस्थित, इसलिए प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाते |
| पोषण स्रोत | मृत पौधों, पत्तियों, लकड़ी और अन्य मृत जैविक पदार्थ |
| स्थान | अंधेरे, नम और पौधों की अपशिष्ट भूमि |
| उपयोगिता | पारिस्थितिकी तंत्र में अपशिष्ट विघटन और पोषण चक्र में योगदान |
इस प्रकार, मृतजीवी पौधे पौधों की पोषण की विविध विधियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
ये जीवित और मृत पदार्थों के बीच जैविक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
कवक (Fungi)
कवक (Fungi) एक विशेष प्रकार के जीव हैं जो मृत या सजीव जैविक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते क्योंकि इनमें क्लोरोफिल नहीं होता।
कवक मुख्य रूप से मृतजीवी (Saprophytic) और परजीवी (Parasitic) होते हैं।
इनकी संरचना और जीवन पद्धति उन्हें पौधों और जानवरों से अलग करती है।
मुख्य तथ्य:
- कवक में क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए ये प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते।
- ये पोषण के लिए मृत या जीवित जीवों पर निर्भर रहते हैं।
- शरीर का निर्माण सुई जैसे तंतु (Hyphae) से होता है।
- कुछ कवक मनुष्यों और पौधों के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं।
- उदाहरण: Saccharomyces (खमीर), Agaricus (साबुत मशरूम)
कवक के प्रकार
| प्रकार | उदाहरण | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| मृतजीवी (Saprophytic) | Rhizopus (bread mold), Penicillium | मृत जैविक पदार्थ से पोषण लेते हैं |
| परजीवी (Parasitic) | Puccinia (rust fungi), Ustilago (smut) | जीवित पौधों या जानवरों पर निर्भर रहते हैं |
| सम्बद्ध (Symbiotic / Mutualistic) | Lichen (काई), Mycorrhizae | अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध में रहते हैं |
कवक प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि ये अपशिष्ट पदार्थों को विघटित करके मिट्टी को उर्वर बनाते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र में पोषण चक्र बनाए रखते हैं।
शैवाल (Algae)
शैवाल (Algae) जल में रहने वाले सरल, प्रमुख रूप से हरित वर्णक युक्त (Chlorophyll-containing) पौधे हैं।
ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और जल एवं नमी युक्त स्थानों में पाए जाते हैं।
शैवाल की संरचना विभिन्न प्रकार की होती है: एककोशिकीय (Unicellular), बहुकोशिकीय (Multicellular) और थैलसयुक्त।
मुख्य तथ्य:
- ये जल या नम मिट्टी में पाए जाते हैं।
- शैवाल में क्लोरोफिल होता है, इसलिए ये प्रकाश संश्लेषण कर सकते हैं।
- कुछ शैवाल खाद्य और औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
- एककोशिकीय शैवाल में केवल एक कोशिका होती है जबकि बहुकोशिकीय में कई कोशिकाएँ होती हैं।
- उदाहरण: Chlamydomonas, Spirogyra, Ulothrix, Laminaria
शैवाल के प्रकार
| वर्ग / Class | मुख्य रंग | उदाहरण | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| हरित शैवाल (Chlorophyta) | हरा (Green) | Chlamydomonas, Spirogyra, Ulothrix | मुख्यतः ताजे पानी में पाए जाते हैं, क्लोरोफिल a और b होता है |
| भूरे शैवाल (Phaeophyta) | भूरा (Brown) | Laminaria, Sargassum | मुख्यतः समुद्री शैवाल, फ्युकॉक्सैंथिन वर्णक होता है |
| लाल शैवाल (Rhodophyta) | लाल (Red) | Porphyra, Polysiphonia | मुख्यतः समुद्री, फीकोएरिथ्रिन वर्णक होता है |
| पीले-हरे शैवाल / सरसों शैवाल (Xanthophyta) | पीला-हरा (Yellow-green) | Vaucheria | मिट्टी और ताजे पानी में पाए जाते हैं, कैरोतेन और ज़ैंथोफिल वर्णक होता है |
शैवाल प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये जल में ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं और जलीय खाद्य श्रृंखला में आधार का कार्य करते हैं।
कुछ शैवाल मानव आहार, औषधि और उद्योगों में भी उपयोगी हैं।
सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship)
सहजीवी संबंध वह संबंध है जिसमें दो अलग-अलग जीव एक-दूसरे के साथ रहने से लाभ प्राप्त करते हैं।
यह लाभ दोनों पक्षों के लिए स्थायी और अनुकूल होता है।
पादपों में ऐसे संबंध कई प्रकार के देखे जाते हैं।
Lichen इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।
मुख्य तथ्य:
- दोनों जीवों को लाभ होता है।
- पादपों में मुख्य सहजीवी संबंध कवक (Fungi) और शैवाल (Algae / Cyanobacteria) के बीच होता है।
- ये संबंध पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।
Lichen (लाईकेन)
Lichen एक सहजीवी संगठन है जिसमें कवक (Fungi) और शैवाल (Algae / Cyanobacteria) रहते हैं।
कवक संरचना और सुरक्षा प्रदान करता है और शैवाल प्रकाश संश्लेषण करके भोजन तैयार करता है।
इस प्रकार, दोनों जीव एक-दूसरे से लाभ प्राप्त करते हैं।
मुख्य तथ्य:
- कवक संरचना और संरक्षण प्रदान करता है।
- शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है।
- Lichen पत्थर, पेड़ों की छाल और मिट्टी पर पाए जाते हैं।
- पर्यावरण प्रदूषण का संकेतक भी होते हैं।
Lichen के प्रकार
| प्रकार | स्थान / रूप | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्रस्टोज़ (Crustose) | पत्थर या जमीन से चिपके हुए | Graphis |
| फोलियोस (Foliose) | पत्तों जैसे फैले हुए | Parmeliaceae |
| फ्रूटिकोज़ (Fruticose) | झाड़ी या शाखाओं जैसे लटकते हुए | Usnea |
इस प्रकार, Lichen सहजीवी संबंध का उत्कृष्ट उदाहरण है जहाँ कवक और शैवाल एक-दूसरे के साथ मिलकर कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहते हैं।
मृदा में पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति
पौधों के विकास के लिए मृदा में पोषक तत्व आवश्यक हैं।
पौधे इन पोषक तत्वों को अपने पोषण के लिए ग्रहण करते हैं। समय के साथ मृदा से ये पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं।
इसलिए, मृदा की उर्वरता बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति आवश्यक होती है।
मुख्य तथ्य:
- मृदा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे प्रमुख पोषक तत्व धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं।
- पौधों की उपज और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए इन्हें नियमित रूप से पुनः पूरक करना आवश्यक है।
- कृषि में उर्वरकों (Fertilizers) का उपयोग करके पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति की जाती है।
- जैविक पदार्थ जैसे खाद और हरी खाद भी मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।
मृदा में पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति के तरीके
| तरीका | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| रासायनिक उर्वरक (Chemical Fertilizers) | पौधों को आवश्यक पोषक तत्व तेजी से उपलब्ध कराते हैं | नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम युक्त उर्वरक |
| जैविक खाद (Organic Manure) | मृत पौधों और जानवरों के अवशेषों से प्राप्त खाद | गोबर खाद, कंपोस्ट |
| हरी खाद (Green Manure) | विशेष पौधों को उगाकर, जड़ सहित मिट्टी में दबाया जाता है जिससे पोषक तत्व बढ़ते हैं | धनिया, मूली, बाजरा की हरी फसल |
| सहजीवी नाइट्रोजन-स्थिरीकरण (Symbiotic Nitrogen Fixation) | कुछ पौधों की जड़ों में बैक्टीरिया नाइट्रोजन को अमोनिया में बदलते हैं | मटर, चना, अलफाल्फा |
इस प्रकार, मृदा में पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरीकों से की जा सकती है।
यह कृषि उत्पादन और पौधों के स्वस्थ विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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