अध्याय 2 — प्राणियों में पोषण
इस अध्याय में हम जानेंगे कि प्राणी—छोटे-से-बड़े—अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं और उसे ऊर्जा में कैसे बदलते हैं।
बस एक किताब के नियमों तक सीमित रहकर नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के उदाहरणों (जैसे — पक्षी का कीड़ा पकड़ना,
मानवीय भोजन और पौधों का सहारा लेने वाले जीव) से भी समझेंगे ताकि conceptos दिल और दिमाग दोनों में बैठ जाएँ।
इस अध्याय से आप —
- ऑटोट्रॉफिक और हेटेरोट्रॉफिक पोषण में फर्क समझ पाएँगे।
- विभिन्न प्रकार के हेटेरोट्रॉफिक पोषण — पारासाइटिक, सैप्रोट्रॉफिक, हंटिंग/शिकारी इत्यादि — पहचान पाएँगे।
- पाचन तंत्र के सरल कार्य और ऊर्जा प्राप्ति की प्रक्रिया का सामान्य ज्ञान मिलेगा।
पढ़ते समय ध्यान रखें — जीवों की दुनिया में हर प्रकार का पोषण किसी न किसी परिस्थिति का नतीजा है।
थोड़ा जिज्ञासा रखें: अगली बार जब आप कोई पक्षी या कीड़ा देखें तो सोचें — यह किस तरह से खाना ढूँढ रहा है?
छोटे-छोटे सवाल ही बड़े सिद्धांतों तक पहुँचाते हैं।
आगे के सेक्शन में हम हर तरह के पोषण को उदाहरण, चित्र और सरल तालिका के साथ समझाएँगे — ताकि परीक्षा के साथ
साथ समझ भी अच्छी बने।
भोजन के अनेक घटक
हमारा भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा, वृद्धि और स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए होता है।
हर खाद्य पदार्थ में कई प्रकार के पोषक तत्व (Nutrients) पाए जाते हैं, जिनका अपना अलग-अलग कार्य होता है।
कोई शरीर को ऊर्जा देता है, कोई ऊतक (Tissues) की मरम्मत करता है, तो कोई शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
मुख्य पोषक तत्व —
- कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates): ऊर्जा का प्रमुख स्रोत। अनाज, आलू, चावल और चीनी में प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
- प्रोटीन (Proteins): शरीर की वृद्धि और ऊतकों की मरम्मत में सहायक। दूध, दाल, अंडा और मांस इसके अच्छे स्रोत हैं।
- वसा (Fats): ऊर्जा का संचित रूप। तेल, घी, मक्खन और सूखे मेवे में पाए जाते हैं।
- विटामिन (Vitamins): शरीर के सुचारु कार्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक।
- खनिज लवण (Minerals): हड्डियों, दाँतों और रक्त निर्माण में सहायक।
- जल (Water): जीवन के हर कार्य के लिए आवश्यक — यह पोषक तत्वों के परिवहन में मदद करता है।
- Roughage (रेशा या अपाच्य तत्व): पाचन को सुचारु बनाता है और शरीर से अपशिष्ट बाहर निकालने में मदद करता है।
भोजन के ये सभी घटक मिलकर हमारे शरीर को पूर्ण पोषण प्रदान करते हैं।
अगर इनमें से कोई भी घटक लंबे समय तक न मिले, तो शरीर में कमी या रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
संतुलित आहार वही है जिसमें इन सभी पोषक तत्वों की उचित मात्रा शामिल हो।
खाद्य अंतर्ग्रहण की विभिन्न विधियाँ
अलग-अलग प्राणी अपने भोजन को ग्रहण करने के लिए विभिन्न तरीकों का प्रयोग करते हैं।
यह उनकी रचना (Structure) और जीवन शैली (Lifestyle) पर निर्भर करता है।
किसी के पास चोंच होती है, किसी के दाँत, किसी के शोषक (sucker) और किसी के छोटे-छोटे रोम (cilia)।
यह विविधता हमें प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता दिखाती है।
मुख्य खाद्य अंतर्ग्रहण विधियाँ —
| क्रम | विधि का नाम | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | फैगोसाइटोसिस (Phagocytosis) | जीव अपने भोजन को कोशिका झिल्ली से घेरकर भीतर लेता है। | अमीबा |
| 2 | फिल्टर फीडिंग (Filter Feeding) | जल में उपस्थित सूक्ष्म भोजन कणों को छानकर ग्रहण करना। | व्हेल, स्पॉन्ज |
| 3 | सक्शन (Suction) | शिकार के शरीर से द्रव पदार्थ चूसकर ग्रहण करना। | मच्छर, जोंक |
| 4 | इंजेशन (Ingestion) | मुख या चोंच के माध्यम से ठोस या द्रव भोजन लेना। | मनुष्य, पक्षी |
| 5 | एब्सॉर्प्शन (Absorption) | भोजन को सीधे शरीर की सतह से सोख लेना। | टेपवर्म, कवक |
हर प्राणी की भोजन ग्रहण करने की विधि उसके शरीर की संरचना और आवास के अनुसार विकसित हुई है।
यह अनुकूलन ही जीवन को टिकाए रखता है — यही प्रकृति का सबसे सुंदर विज्ञान है।
अमीबा जैसे सूक्ष्म जीव भी भोजन ग्रहण करने में अत्यंत कुशल होते हैं — वे अपने शरीर से झिल्ली निकालकर शिकार को पकड़ते हैं, जिसे “फूड वैक्यूल” में पचा लिया जाता है।
अंतर्ग्रहण की विभिन्न विधियाँ :-
नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक जंतु के लिए उसके आहार का प्रकार और आहार ग्रहण करने की विधि दी गई है।
| जंतु का नाम | आहार का प्रकार | आहार की विधि |
|---|---|---|
| घोंघा | शाकाहारी / अपघटनकारी (detritivore) | रैडुला की तरह के रगड़ने/पोंछने से पत्तियाँ और सड़े-गले पदार्थ खाता है (छीलना/रगड़ना)। |
| चींटी | विविधभक्षी (Omnivore) — चीनी, बीज, कीट आदि | काटना/चबाना और खाद्य कणों को उठाकर ले जाना; कभी-कभी संग्रह भी करती हैं (चबाना/काटना)। |
| चील | मानव/प्राणि: मांसाहारी (Carnivore) | शिकार पकड़ना और तेज चोंच से माँस फाड़कर खाना; बड़े टुकड़े निगलना या फाड़-फाड़ कर खाना (पकड़ना/छीलना/निगलना)। |
| मर्मर पक्षी | कीटाहारी/नट-बीज वंश (इंसेक्टोवोर/औम्निवोर) | टहनियों/छाल के नीचे छिपे कीटों को चोंच से खरोंचकर निकालना; कीड़े पकड़कर खाना (चोंच से खुरचना/पकड़ना)। |
| जूँ (लूस) | परजीवी (Parasite) — शरीर का रक्त/उपकला | छिद्र बनाकर त्वचा से रक्त या ऊतक द्रव चूसना (शोषण/चूसना)। |
| मच्छर | परजीवी/रक्त-निक्षेपक (Female mosquitoes — रक्त पर निर्भर) | नुकीली मुखरचना से त्वचा छेद कर रक्त चूसना; तरल आहार के लिए चूसना (सक्शन/चूसना)। |
| तितली | नव–शर्कराहारी (Nectarivore) — फूलों का रस | लम्बी नली (proboscis) से फूलों का रस चूसकर ग्रहण करना (शोषण/चूसना)। |
| मक्खी | विसर्जित/तरल पदार्थ खाती है — विविध (Liquid feeder) | ठोस भोजन को तरल बनाकर/उसे बाहर-छिड़क कर स्पॉन्ज-जैसी मुखरचना से सूखा/तरल पदार्थ चूसना (स्पॉन्जिंग/चूसना)। |
मानव में पाचन
मनुष्य सर्वाहारी (omnivorous) प्राणी है अर्थात् वह पौधों तथा जन्तुओं दोनों से प्राप्त भोजन खाता है।
भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज लवण जैसे विभिन्न पोषक तत्त्व होते हैं।
इन जटिल पदार्थों को शरीर के उपयोग योग्य सरल पदार्थों में बदलने की प्रक्रिया को पाचन कहा जाता है।
भोजन के जटिल अणुओं को एंजाइमों की सहायता से छोटे, घुलनशील और अवशोषित हो सकने वाले अणुओं में तोड़ने की प्रक्रिया को पाचन कहते हैं।
मानव पाचन तंत्र के प्रमुख अंग
मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System) में विभिन्न अंग एक क्रम में कार्य करते हैं ताकि भोजन से ऊर्जा प्राप्त की जा सके।
| पाचन अंग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| मुख (Mouth) | भोजन को चबाना, लार में उपस्थित एमाइलेज एंजाइम से कार्बोहाइड्रेट का प्रारंभिक पाचन। |
| ग्रसनी और ग्रासनली (Pharynx & Oesophagus) | भोजन को मांसपेशीय संकुचन (Peristalsis) द्वारा पेट तक पहुँचाना। |
| आमाशय (Stomach) | यहां पर HCl और पेप्सिन एंजाइम के द्वारा प्रोटीन का पाचन आरंभ होता है। |
| लघु आंत (Small Intestine) | अग्न्याशय और यकृत के रसों की सहायता से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा का पूर्ण पाचन होता है। |
| बृहदांत्र (Large Intestine) | अवशिष्ट पदार्थ से जल का अवशोषण होता है। |
| मलाशय और गुदा (Rectum & Anus) | अपचित पदार्थों का निष्कासन (Egestion)। |
इस प्रकार मानव शरीर में भोजन एक क्रमबद्ध प्रक्रिया से गुजरता है — अंतर्ग्रहण → पाचन → अवशोषण → आत्मसात् → निष्कासन।
यह प्रक्रिया शरीर को ऊर्जा और पोषण प्रदान करती है।
मुख एवं मुख गुहिका (Mouth and Buccal Cavity)
पाचन की प्रक्रिया की शुरुआत मुख (Mouth) से होती है। मुख के अंदर का भाग मुख गुहिका (Buccal Cavity) कहलाता है।
यही वह स्थान है जहाँ भोजन सबसे पहले प्रवेश करता है और यहाँ से पाचन की यात्रा शुरू होती है।
मुख गुहिका में मुख्य रूप से तीन घटक होते हैं — दाँत (Teeth), जीभ (Tongue) और लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands)।
मुख में भोजन को चबाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है और लार के साथ मिलाकर उसे गीला किया जाता है ताकि निगलना आसान हो सके।
जीभ (Tongue)
जीभ एक पेशीय अंग (muscular organ) है जो मुख के तल (floor) पर स्थित होती है। यह भोजन को इधर-उधर करने,
चबाने में सहायता करने तथा निगलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- स्वाद का अनुभव: जीभ पर छोटे-छोटे स्वाद कली (taste buds) होती हैं, जो चार मुख्य स्वादों —
मीठा, खट्टा, कड़वा और नमकीन — को पहचानती हैं। - भोजन का मिलाना: जीभ भोजन को लार के साथ अच्छी तरह मिलाती है।
- भाषा निर्माण: जीभ ध्वनि उच्चारण (speech) में भी सहायक होती है।
जीभ का आगे का भाग मीठे स्वाद को, किनारे खट्टे स्वाद को और पीछे का भाग कड़वे स्वाद को पहचानता है।
दाँत (Teeth)
दाँत भोजन को काटने, चबाने और पीसने के काम आते हैं। मनुष्य के दाँत दो बार निकलते हैं —
दूध के दाँत (Milk teeth) और स्थायी दाँत (Permanent teeth)।
| दाँत का प्रकार | संख्या (एक जबड़े में) | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| कटारी दाँत (Incisors) | 4 | भोजन को काटना |
| रदनक दाँत (Canines) | 2 | भोजन को फाड़ना |
| अग्र चर्वणक (Premolars) | 4 | भोजन को चबाना व पीसना |
| पश्च चर्वणक (Molars) | 6 | भोजन को बारीक पीसना |
इस प्रकार प्रत्येक जबड़े में 16 और कुल 32 दाँत होते हैं।
दाँतों की संख्या और आकार मनुष्य के सर्वाहारी स्वभाव के अनुसार बनाए गए हैं —
जिससे वह पौधों और मांस दोनों को खा सके।
लार ग्रंथियों से निकलने वाला लार (saliva) भोजन को गीला करता है और उसमें उपस्थित
एमाइलेज (Amylase) एंजाइम स्टार्च को शर्करा में तोड़ना शुरू करता है।
यानी, पाचन की शुरुआत मुख में ही हो जाती है।
जीभ पर स्वाद के विभिन्न क्षेत्र (Different Regions of Taste on Tongue)
जीभ न केवल भोजन को मिलाने और बोलने में सहायता करती है, बल्कि यह स्वाद को पहचानने का प्रमुख अंग भी है।
जीभ की सतह पर स्वाद कलिकाएँ (Taste Buds) नामक सूक्ष्म संरचनाएँ होती हैं जो विभिन्न स्वादों को पहचानती हैं।
मानव जीभ पर स्वाद के लिए विशेष क्षेत्र (taste regions) बने होते हैं, जो अलग-अलग स्वादों —
मीठा, नमकीन, खट्टा और कड़वा — को पहचानने में विशेषज्ञ होते हैं।
जीभ के स्वाद क्षेत्र
| स्वाद का प्रकार | जीभ का भाग | उदाहरण |
|---|---|---|
| मीठा (Sweet) | जीभ का अग्र भाग (Front part) | शक्कर, मिठाई, फल |
| नमकीन (Salty) | मीठे क्षेत्र के ठीक पीछे तथा किनारों पर | नमक, चिप्स |
| खट्टा (Sour) | जीभ के किनारों पर | नींबू, अमचूर, इमली |
| कड़वा (Bitter) | जीभ का पश्च भाग (Back part) | नीम, करेेला, कॉफी |
स्वाद कलिकाओं की सहायता से मस्तिष्क यह पहचानता है कि भोजन स्वादिष्ट है या नहीं।
यह प्रक्रिया स्वाद संवेदन (taste perception) कहलाती है।
पहले यह माना जाता था कि जीभ के अलग-अलग भाग केवल एक ही स्वाद पहचानते हैं,
परंतु आधुनिक शोध बताते हैं कि जीभ का हर भाग लगभग सभी स्वादों को महसूस कर सकता है —
बस कुछ क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं
भोजन नली (ग्रसिका)
भोजन नली, जिसे ग्रसिका भी कहते हैं, निगला हुआ भोजन ग्रस-नली अथवा ग्रसिका में जाता है। यह नली ग्रसिका गले एवं वक्ष में होती है और भोजन को आगे पेट की ओर पहुँचाती है।
संरचना और कार्य
ग्रसिका मोटी भित्ति वाली एक थैलीनुमा संरचना है। यह ‘U’ आकार की होती है तथा आहार नाल का सबसे चौड़ा भाग है। यह भोजन को ग्रसिका (ग्रास नली) से प्राप्त कर दूसरी ओर धुत्रांग में खोलती है।
भोजन नली का कार्य
- भोजन को मुँह से पेट की ओर पहुँचाना।
- श्वसन नली में भोजन के प्रवेश को रोकना।
- पाचन प्रक्रिया में शुरुआत करना।
आंतरिक असर
भोजन नली पेट रस, पाचन रस और एंजाइमों के साथ भोजन को तोड़ने और पचाने में मदद करती है। इसका सही कार्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
मानव शरीर में आमाशय (Stomach)
आमाशय, मानव पाचन तंत्र का एक मुख्य अंग है, जो भोजन को पचाने और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भोजन को जमा करने, उसे मिक्स करने और रासायनिक पाचन के लिए तैयार करने का कार्य करता है।
मुख्य तथ्य:
- स्थान: पेट के ऊपरी भाग में, डायफ्राम के नीचे।
- आकार: ‘J’ के आकार का अंग।
- लंबाई: लगभग 25-30 सेमी।
- मुख्य कार्य: भोजन का संग्रहण, मिक्सिंग और पाचन।
संरचना (Structure)
आमाशय को चार मुख्य भागों में बांटा गया है:
| भाग | विवरण |
|---|---|
| Cardia | जहां भोजन भोजन नली (Esophagus) से आमाशय में प्रवेश करता है। |
| Fundus | आमाशय का ऊपरी गोल भाग, भोजन के संग्रहण के लिए। |
| Body (Corpus) | मुख्य भाग, जहाँ भोजन का मिक्सिंग और रासायनिक पाचन होता है। |
| Pylorus | निम्न भाग, जो भोजन को छोटी आंत में जाने से पहले नियंत्रित करता है। |
आमाशय की परतें (Layers of Stomach)
आमाशय की दीवार में मुख्यतः चार परतें होती हैं:
- Mucosa: अंदर की परत, जिसमें ग्रंथियाँ होती हैं जो पाचक रस (Gastric juice) छोड़ती हैं।
- Submucosa: रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं वाली परत।
- Muscular layer: मांसपेशियों की परत, भोजन को मिक्स करने और पेंच करने के लिए।
- Serosa: बाहरी पतली परत जो पेट को ढकती है।
आमाशय का कार्य (Functions)
- भोजन का संग्रहण और धीरे-धीरे छोटी आंत में प्रवाह।
- भोजन को मिक्स करना और उसे लिक्विड या काइमस (Chyme) में बदलना।
- पाचक रस (Hydrochloric acid और Enzymes) के माध्यम से रासायनिक पाचन।
- बैक्टीरिया और हानिकारक जीवाणुओं को मारना।
मानव शरीर में छोटी आंत (Small Intestine)
छोटी आंत पाचन तंत्र का सबसे लंबा हिस्सा है और यह मुख्य रूप से भोजन के रासायनिक पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए जिम्मेदार है।
मुख्य तथ्य:
- लंबाई: लगभग 6–7 मीटर।
- भाग: डुओडेनम (Duodenum), जेजुनम (Jejunum), इलियम (Ileum)।
- मुख्य कार्य: रासायनिक पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण।
- स्थान: आमाशय के बाद और बड़ी आंत से पहले।
संरचना (Structure)
छोटी आंत को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
| भाग | विवरण |
|---|---|
| डुओडेनम (Duodenum) | छोटी आंत का पहला हिस्सा, जो आमाशय से भोजन प्राप्त करता है। यहाँ पाचन रस (Pancreatic juice और Bile) मिलकर भोजन का रासायनिक पाचन करते हैं। |
| जेजुनम (Jejunum) | बीच का हिस्सा, मुख्यतः पोषक तत्वों का अवशोषण करता है। |
| इलियम (Ileum) | आखिरी हिस्सा, जहाँ विटामिन B12 और पित्त लवणों का अवशोषण होता है और बड़ी आंत में भोजन भेजा जाता है। |
छोटी आंत में पाचन (Digestion in Small Intestine)
छोटी आंत में भोजन का रासायनिक पाचन मुख्य रूप से इन रसों के माध्यम से होता है:
- पैन्क्रियाटिक जूस (Pancreatic juice): अमाइलेज़, ट्रिप्सिन और लिपेज़ जैसे एंज़ाइम्स के द्वारा कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पाचन।
- पित्त (Bile): यकृत द्वारा निर्मित, वसा को इमल्सिफाई करता है जिससे वसा आसानी से पचती है।
- Intestinal juice: छोटी आंत की परत से निकलने वाला रस, जो अंतिम पाचन क्रिया में मदद करता है।
मानव शरीर में पित्ताशय (Gallbladder)
पित्ताशय एक छोटा, नलिका जैसा अंग है जो यकृत (Liver) के नीचे स्थित होता है। इसका मुख्य कार्य यकृत द्वारा निर्मित पित्त (Bile) को संग्रहित करना और आवश्यकतानुसार छोटी आंत में छोड़ना है।
मुख्य तथ्य:
- स्थान: यकृत के नीचे, पेट के ऊपरी दाएँ हिस्से में।
- आकार: छोटे अंगूठे के आकार का, नलिका जैसा।
- मुख्य कार्य: पित्त का संग्रहण और छोटी आंत में उत्सर्जन।
- लंबाई: लगभग 7–10 सेमी।
पित्त रस (Bile)
पित्त रस यकृत द्वारा निर्मित एक पाचक द्रव्य है, जो वसा के पाचन में सहायक होता है। पित्त में पित्त लवण (Bile salts), बिलीरुबिन, पानी और खनिज तत्व होते हैं।
| पित्त के घटक | भूमिका / कार्य |
|---|---|
| पित्त लवण (Bile salts) | वसा को इमल्सिफाई करके छोटे बूंदों में तोड़ते हैं, जिससे लिपेज़ एंज़ाइम आसानी से पच सके। |
| बिलीरुबिन (Bilirubin) | लाल रक्त कोशिकाओं के क्षय से उत्पन्न, पित्त का रंग देता है। |
| पानी (Water) | पित्त को द्रव रूप में बनाए रखता है और छोटी आंत में प्रवाह सुगम बनाता है। |
| खनिज तत्व (Electrolytes) | pH संतुलन और एंज़ाइम गतिविधि में सहायक। |
पित्ताशय एवं पित्त रस का कार्य (Functions)
- यकृत द्वारा निर्मित पित्त को संग्रहित करना।
- छोटी आंत में वसा के पाचन के लिए आवश्यक मात्रा में पित्त छोड़ना।
- वसा को इमल्सिफाई करना, जिससे पचाना आसान हो।
- अवशिष्ट पदार्थों और हानिकारक पदार्थों को निष्कासित करना।
छोटी आंत में अवशोषण (Absorption in Small Intestine)
छोटी आंत मानव पाचन तंत्र का मुख्य भाग है जहाँ भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण होता है। इसकी दीवार की विशेष संरचना जैसे Villi और Microvilli सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं, जिससे अवशोषण तेज और प्रभावी होता है।
मुख्य तथ्य:
- छोटी आंत की लंबाई लगभग 6–7 मीटर।
- मुख्य अवशोषण भाग: Jejunum और Ileum।
- Villi और Microvilli सतह क्षेत्र को बढ़ाते हैं।
- अवशोषित पोषक तत्व रक्त और लिम्फ के माध्यम से शरीर में पहुँचते हैं।
अवशोषित पोषक तत्व और उनकी स्थानिक प्रक्रिया
| पोषक तत्व | अवशोषण की जगह | विवरण |
|---|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट (Glucose) | मुख्यतः Jejunum | Glucose और अन्य सरल शर्करा कोशिकाओं में पहुँचकर रक्त में मिलते हैं। |
| प्रोटीन (Amino acids) | Jejunum और Ileum | प्रोटीन के टूटे हुए अमीनो एसिड को रक्त में अवशोषित किया जाता है। |
| वसा (Fatty acids & Glycerol) | Ileum | वसा पहले इमल्सिफाई होते हैं और फिर लैक्टील्स (Lacteals) के माध्यम से लिम्फ में प्रवेश करते हैं। |
| विटामिन और खनिज | पूरा Small Intestine | विटामिन A, D, E, K वसा में घुलनशील, और B, C पानी में घुलनशील। खनिज जैसे Ca²⁺, Fe²⁺ अवशोषित होते हैं। |
| पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स | Ileum और Colon | पानी और खनिज लवणों का संतुलन बनाए रखा जाता है। |
अवशोषण की प्रक्रिया सही होने के लिए छोटी आंत की सतह स्वस्थ और villi सक्रिय होना आवश्यक है। किसी भी रोग या संक्रमण से अवशोषण प्रभावित हो सकता है।
मानव शरीर में बड़ी आंत (Large Intestine)
बड़ी आंत छोटी आंत के बाद स्थित है और यह पाचन तंत्र का अंतिम हिस्सा है। इसका मुख्य कार्य पानी और खनिजों का अवशोषण करना और अपचनीय अवशिष्ट पदार्थों को मल (Feces) के रूप में शरीर से बाहर निकालना है।
मुख्य तथ्य:
- लंबाई: लगभग 1.5 मीटर।
- भाग: Cecum, Colon (Ascending, Transverse, Descending, Sigmoid), Rectum और Anus।
- मुख्य कार्य: पानी और इलेक्ट्रोलाइट का अवशोषण, मल का निर्माण और निष्कासन।
- छोटी आंत से पोषक तत्व का अवशोषण पूर्ण होने के बाद अवशिष्ट पदार्थ बड़ी आंत में पहुँचते हैं।
बड़ी आंत की संरचना (Structure)
| भाग | विवरण |
|---|---|
| Cecum | छोटी आंत से बड़ी आंत का प्रारंभिक भाग। Appendix जुड़ा होता है। |
| Colon | मुख्य भाग जिसमें Ascending, Transverse, Descending और Sigmoid Colon शामिल हैं। पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का अवशोषण यहाँ होता है। |
| Rectum | अवशिष्ट पदार्थों का संग्रहण करता है, मल तैयार करता है। |
| Anus | मल का निष्कासन होता है। |
बड़ी आंत में पाचन और अवशोषण (Digestion & Absorption)
बड़ी आंत में रासायनिक पाचन बहुत कम होता है। मुख्यतः अवशोषण और बैक्टीरिया द्वारा कुछ अंतिम पाचन किया जाता है।
- पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स: मुख्य अवशोषण। मल का गठन।
- फाइबर: अवशोषित नहीं होता, परन्तु बैक्टीरिया द्वारा तोड़ा जाता है और SCFA (Short Chain Fatty Acids) बनते हैं।
- विटामिन: बैक्टीरिया विटामिन K और कुछ B विटामिन का संश्लेषण करते हैं, जो अवशोषित होते हैं।
- बैक्टीरिया की भूमिका: अवशिष्ट पदार्थों में शेष कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का ब्रेकडाउन।
घास खाने वाले जंतुओं में पाचन (Digestion in Herbivores)
घास खाने वाले जंतु जैसे गाय, भैंस और हिरण मुख्यतः रूमिनेंट (Ruminants) होते हैं। इनका पाचन तंत्र विशेष रूप से वनस्पति (घास और पत्तियाँ) को पचाने के लिए विकसित हुआ है।
मुख्य तथ्य:
- रूमिनेंट जानवरों का पाचन तंत्र लंबा और विशेष अंगों वाला होता है।
- मुख्य अंग: चार-कक्षीय पेट – रूमेन, रेटिकुलम, ओमासम, अबोमासम।
- पोषक तत्वों का अवशोषण मुख्यतः छोटी आंत में होता है।
- बैक्टीरिया और प्रोटोजोआ वनस्पति में से सेलूलोज़ को तोड़ते हैं।
रूमिनेंट पेट की संरचना (Structure of Ruminant Stomach)
| पेट का भाग | कार्य |
|---|---|
| Rumen (भारी कक्ष) | भोजन संग्रहण और प्रारंभिक ब्रेकडाउन। बैक्टीरिया और प्रोटोजोआ द्वारा सेलूलोज़ का टूटना। |
| Reticulum (हृदय कक्ष) | भोजन को छानना और बड़े कणों को रूमेन में वापस भेजना। |
| Omasum (पृष्ठीय कक्ष) | भोजन को और अधिक मिक्स करना और पानी का अवशोषण। |
| Abomasum (सत्य पेट) | Enzymatic digestion, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का रासायनिक पाचन। |
घास खाने वाले जंतुओं में पाचन प्रक्रिया (Digestion Process)
- गाय या भैंस भोजन चबाने के बाद रूमेन में भेजते हैं।
- रूमेन और रेटिकुलम में सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ) सेलूलोज़ को टूटने में मदद करते हैं।
- Omasum में पानी अवशोषित होता है।
- Abomasum में Enzymes (Pepsin और HCl) प्रोटीन का पाचन करते हैं।
- छोटी आंत में पोषक तत्व अवशोषित होते हैं और बड़ी आंत में अपशिष्ट पदार्थ मल के रूप में निष्कासित होते हैं।
अमीबा में पाचन (Digestion in Amoeba)
अमीबा एक एककोशिकीय प्राणी है, जिसका पाचन तंत्र सरल होता है और यह कोशिका स्तर पर होता है। अमीबा में विशेष अंग नहीं होते, इसलिए पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण कोशिका झिल्ली (Cell membrane) और सायटोप्लाज्म में होता है।
मुख्य तथ्य:
- एककोशिकीय प्राणी, कोई विशेष अंग नहीं।
- पोषक तत्व ग्रहण pseudopodia (प्रत्यास्थ पैरों) द्वारा।
- पाचन सायटोप्लाज्म में पाचन रस (Enzymes) द्वारा होता है।
- अवशिष्ट पदार्थ को निष्कासित करना कोशिका झिल्ली द्वारा।
अमीबा में पाचन प्रक्रिया (Process of Digestion)
- भोजन ग्रहण (Ingestion): अमीबा pseudopodia बनाकर भोजन को घेरे और उसे भोजन कण (Food vacuole) में बंद कर लेता है।
- अंतर्जलीय पाचन (Intracellular digestion): भोजन कण में एंज़ाइम मिलते हैं जो भोजन को तोड़ते हैं।
- अवशोषण (Absorption): टूटे हुए पोषक तत्व सायटोप्लाज्म द्वारा अवशोषित होते हैं।
- अवशिष्ट निष्कासन (Egestion): अपचनीय पदार्थ को भोजन कण से बाहर निकाल दिया जाता है।
पाचन तंत्र: प्रमुख शब्द
| प्रमुख शब्द | परिभाषा / विवरण |
|---|---|
| अवशोषण | पोषक तत्वों का रक्त या लिम्फ में प्रवेश करने की प्रक्रिया। |
| ऐमीनो अम्ल | प्रोटीन के टूटने पर प्राप्त छोटे पोषक घटक। |
| स्वांगीकरण | वसा को छोटे बूंदों में विभाजित करना ताकि पाचन आसान हो। |
| पित्तरस | यकृत द्वारा निर्मित पाचक द्रव्य जो वसा पाचन में सहायक है। |
| मुख-गुहिका | भोजन ग्रहण करने और चबाने का स्थान; इसमें दांत और जीभ शामिल हैं। |
| रदनक | भोजन को पीसने और चबाने के लिए उपयोगी अंग। |
| सेलुलोस | पादपों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक, रूमिनेंट जानवरों में पचता है। |
| पाचन तंत्र | भोजन को पचाने और पोषक तत्व अवशोषित करने वाला अंगों का समूह। |
| चर्वणक | भोजन को चबाने और पीसने वाला अंग। |
| निष्कासन | अपचनीय अवशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया। |
| वसा अम्ल | वसा के टूटने पर बनने वाले छोटे घटक, जो अवशोषित होते हैं। |
| खाद्यधानी | पाचन के लिए भोजन को संग्रहित करने का स्थान, जैसे रूमेन। |
| पित्ताशय | यकृत द्वारा निर्मित पित्त संग्रह करने और छोटी आंत में छोड़ने वाला अंग। |
| कृतक | पाचन संबंधी कृत्रिम या संरचित प्रक्रिया (संदर्भ के अनुसार)। |
| अंतर्ग्रहण | भोजन का ग्रहण करना। |
| यकृत | पाचन तंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथि, पित्त निर्माण करता है। |
| ग्रसिका | भोजन को निगलने और पेट में भेजने वाली नली। |
| अग्न्याशय | पाचन एंज़ाइम और इंसुलिन बनाने वाला ग्रंथि। |
| अग्रचर्वणक | भोजन को पहले चबाने और पीसने वाला अंग। |
| पादाभ | पादप या पशु अंग जो पाचन या पोषण में सहायक हो। |
| रूमेन | रूमिनेंट जानवरों का पहला पेट, जहाँ भोजन संग्रह और प्रारंभिक पाचन होता है। |
| रूमिनैन्ट (रोमंथी) | ऐसे जानवर जो चार-कक्षीय पेट वाले होते हैं, जैसे गाय और भैंस। |
| लाला-ग्रंथि | मुख में स्थित लार ग्रंथि, जो भोजन को नम करती है और एंज़ाइम देती है। |
| दीर्घरोम | रूमिनेंट पेट का अंतिम कक्ष, जहाँ रासायनिक पाचन होता है। |
अभ्यास: पाचन तंत्र
1. उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
- मानव पोषण के मुख्य चरण अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, निष्कासन हैं।
- मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि का नाम यकृत है।
- आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं पेप्सिन भोजन पर क्रिया करते हैं।
- क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति पर अँगुली के समान अनेक प्रवर्ध होते हैं, जो Villi (ग्रसिका) कहलाते हैं।
- अमीबा अपने भोजन का पाचन अंतर्जलीय पाचन (Intracellular digestion) में करता है।
2. सत्य एवं असत्य कथनों को चिह्नित कीजिए।
| कथन | सत्य / असत्य |
|---|---|
| मंड का पाचन आमाशय से प्रारंभ होता है। | असत्य ❌ (मंड का पाचन मुख से प्रारंभ होता है) |
| जीभ लाला-ग्रंथि को भोजन के साथ मिलाने में सहायता करती है। | सत्य ✔ |
| पित्ताशय में पित्त रस अस्थायी रूप से भंडारित होता है। | सत्य ✔ |
| रूमिनैन्ट निगली हुई घास को अपने मुख में वापस लाकर धीरे-धीरे चबाते रहते हैं। | सत्य ✔ |
3. निम्न में से सही विकल्प पर (✔) का चिह्न लगाइए।
वसा का पूर्णरूपेण पाचन जिस अंग में होता है, वह है:
- (i) आमाशय
- (ii) मुख
- (iii) क्षुद्रांत्र ✔
- (iv) बृहदांत्र
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
जल का अवशोषण मुख्यतः जिस अंग द्वारा होता है, वह है:
- (i) आमाशय
- (ii) ग्रसिका
- (iii) क्षुद्रांत्र
- (iv) बृहदांत्र ✔
2. कॉलम A और कॉलम B का मिलान
| कॉलम A (खाद्य घटक) | कॉलम B (पाचन के उत्पाद) |
|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट्स | शर्करा |
| प्रोटीन | ऐमीनो अम्ल |
| वसा | वसा अम्ल एवं ग्लिसरॉल |
3. दीर्घरोम
दीर्घरोम – रूमिनेंट जानवरों के पेट का अंतिम कक्ष है। यह Abomasum के रूप में पाया जाता है और इसका कार्य रासायनिक पाचन (Enzymatic digestion) करना है, जहाँ प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व का पाचन होता है।
4. पित्त
पित्त यकृत (Liver) द्वारा निर्मित होता है। यह वसा (Fat) के पाचन में सहायक होता है क्योंकि पित्त वसा को छोटे बूंदों में विभाजित करता है (Emulsification)।
5. विशेष कार्बोहाइड्रेट
रूमिनेंट जानवरों द्वारा पचाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट है सेलुलोज़, जिसे मानव नहीं पचा सकते क्योंकि मानव शरीर में इसे तोड़ने वाले एंज़ाइम नहीं होते।
6. ग्लूकोस से ऊर्जा तुरंत प्राप्त होने का कारण
ग्लूकोस सीधे रक्त में अवशोषित होती है और कोशिकाओं द्वारा तुरंत ATP के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करने में प्रयोग की जाती है।
7. आहार नाल के विभिन्न भागों द्वारा क्रियाएँ
| क्रिया | आयु/भाग |
|---|---|
| पचे भोजन का अवशोषण | क्षुद्रांत्र (Small intestine) |
| भोजन को चबाना | मुख (Mouth) और चर्वणक (Teeth) |
| जीवाणु नष्ट करना | आमाशय (Stomach) का HCl |
| भोजन का संपूर्ण पाचन | छोटी आंत (Small intestine) |
| मल का निर्माण | बड़ी आंत (Large intestine) |
8. मानव एवं अमीबा के पोषण में समानता एवं अंतर
- समानता: दोनों में पोषण का उद्देश्य शरीर के लिए ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करना है।
- अंतर: अमीबा में पाचन अंतर्जलीय (Intracellular) होता है जबकि मानव में पाचन बहुकोशिकीय अंगों और ग्रंथियों द्वारा (Extracellular) होता है।
कॉलम मिलान: पाचन तंत्र के अंग और कार्य
| कॉलम A (अंग) | कॉलम B (उचित कथन) |
|---|---|
| लाला-ग्रंथि | लाला रस स्त्रावित करना (iii) |
| आमाशय | अम्ल का निर्मोचन (iv) |
| यकृत | पित्त रस का स्रवण (i) |
| मलाशय | मल त्याग (vii) |
| क्षुद्रांत्र | पाचन का पूरा होना (v) |
| बृहदांत्र | जल का अवशोषण (vi) |
क्या केवल हरी सब्जियाँ और घास से जीवन निर्वाह संभव है?
सिर्फ हरी सब्जियों और घास (पादपों की पत्तियाँ) का सेवन करके जीवन निर्वाह करना मानव के लिए संभव नहीं है, और इसके पीछे कई कारण हैं:
मुख्य कारण:
- हरी सब्जियाँ और घास मुख्यतः सेलुलोस और रेशे (Fiber) से बनी होती हैं।
- मानव शरीर में सेलुलोस को तोड़ने वाला एंज़ाइम नहीं होता, इसलिए यह पचती नहीं।
- केवल घास खाने से मानव को पर्याप्त प्रोटीन, वसा, विटामिन B12, और आवश्यक मिनरल्स नहीं मिलते।
- मानव की पाचन प्रणाली एककोशिकीय या रूमिनेंट जानवरों जैसी नहीं है, जो घास/सेलुलोस को पचा सकें।
- अत्यधिक घास खाने से पाचन संबंधी समस्या, कुपोषण और ऊर्जा की कमी हो सकती है।
रूमिनेंट जानवरों की तुलना
रूमिनेंट (जैसे गाय, भैंस) जानवरों में चार-कक्षीय पेट होता है, जिसमें रूमेन और दीर्घरोम जैसे कक्ष होते हैं। ये जानवर सेलुलोस और रेशे को सहजीवी बैक्टीरिया की मदद से पचा सकते हैं। मानव में ऐसा पेट और बैक्टीरिया नहीं होते, इसलिए हम केवल घास/हरी पत्तियों से जीवन निर्वाह नहीं कर सकते।
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