अध्याय 5 : खनिज तथा ऊर्जा संसाधन
इस अध्याय में हम धरती की उन अमूल्य भण्डारों — खनिज और ऊर्जा संसाधन — का परिचय, वर्गीकरण, वितरण तथा इनके उपयोग और संरक्षण के तरीकों का अध्ययन करेंगे। आप जानेंगे कि खनिज किस प्रकार बने, कहाँ पाए जाते हैं, तथा ऊर्जा के पारंपरिक और नवीनीकृत स्रोत क्या हैं और उनका हमारे जीवन, उद्योग और पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है।
इस अध्याय से आप सीखेंगे —
- खनिज और ऊर्जा संसाधनों की परिभाषा और प्राथमिक प्रकार।
- भारत तथा विश्व में प्रमुख खनिज और उनके भंडार।
- ऊर्जा के पारंपरिक (कोयला, पेट्रोलियम) और नवीनीकृत (सौर, पवन, जल) स्रोतों की विशेषताएँ।
- खनिजों व ऊर्जा स्रोतों के उपयोग, महत्व और संरक्षण के तरीके।
| विषय | खनिज (Minerals) | ऊर्जा संसाधन (Energy Resources) |
|---|---|---|
| परिभाषा | प्राकृतिक रूप से बनने वाले ठोस खनिज पदार्थ। | जो ऊर्जा उत्पन्न करने में प्रयुक्त होते हैं — ठोस, द्रव या गैस। |
| उदाहरण | लौह (Iron), बॉक्साइट, तांबा। | कोयला, पेट्रोलियम, सौर, पवन, जल। |
| प्रकृति | आमतौर पर अपरिवर्तनीय; सीमित भण्डार। | कुछ पारंपरिक अपूरणीय, कुछ नवीनीकृत (renewable)। |
इस अध्याय का रास्ता —
- खनिज: उत्पत्ति, प्रकार, और उपयोग
- ऊर्जा संसाधन: प्रकार, उत्पादन व उपयोग
- भारत में वितरण और क्षेत्रीय दृश्य
- पर्यावरणीय प्रभाव व संरक्षण के उपाय
- अभ्यास प्रश्न और संक्षिप्त मानचित्र कार्य
खनिज क्या है?
खनिज वे प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ठोस, अकार्बनिक (inorganic) पदार्थ हैं, जो पृथ्वी की पपड़ी (Earth’s crust) में विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बने होते हैं। ये पदार्थ किसी तत्व (जैसे — सोना, चाँदी) या यौगिक (जैसे — नमक, बॉक्साइट) के रूप में हो सकते हैं। खनिज मानव जीवन और औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं, क्योंकि इनसे धातुएँ, ऊर्जा स्रोत, और अनेक उपयोगी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं।
| आधार | खनिजों के प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| संरचना के आधार पर | धात्विक (Metallic) और अधात्विक (Non-Metallic) | धात्विक — लौह, तांबा, जस्ता अधात्विक — अभ्रक, नमक, चूना पत्थर |
| उपयोग के आधार पर | ऊर्जा खनिज और औद्योगिक खनिज | ऊर्जा — कोयला, पेट्रोलियम औद्योगिक — मैग्नीशियम, अभ्रक |
सरल शब्दों में: खनिज वे प्राकृतिक पदार्थ हैं जिनसे हम धातु, ईंधन, और निर्माण सामग्री जैसी अनेक वस्तुएँ प्राप्त करते हैं। ये हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।
भूगोलविदों व भू-वैज्ञानिकों द्वारा खनिजों का अध्ययन
भूगोलविद् स्थलाकृतियों की बेहतर जानकारी हेतु खनिजों का अध्ययन भू-पृष्ठ के एक अंश के रूप में करते हैं। वे खनिज संसाधनों के वितरण तथा उनसे संबंधित आर्थिक क्रियाओं में अधिक रुचि रखते हैं।
वहीं, भू-वैज्ञानिक खनिजों की निर्माण प्रक्रिया, उनकी आयु तथा उनके भौतिक और रासायनिक संगठन का अध्ययन करते हैं। वे यह समझने का प्रयास करते हैं कि पृथ्वी के भीतर विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा खनिज कैसे उत्पन्न होते हैं।
खनिजों की उपलब्धता
पृथ्वी की पपड़ी में खनिजों का असमान वितरण होता है। कुछ स्थानों पर खनिजों की प्रचुरता होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इनका अभाव पाया जाता है। खनिजों की उपलब्धता इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ की भूगर्भीय संरचना कैसी है और किन प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने उन क्षेत्रों का निर्माण किया है।
उदाहरण के लिए, भारत के झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक और राजस्थान राज्य खनिज संसाधनों से अत्यधिक समृद्ध हैं। वहीं, कुछ मैदान क्षेत्रों में खनिज लगभग अनुपस्थित हैं क्योंकि वहाँ की मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से हुआ है, न कि ठोस चट्टानों से।
खनिजों की उपलब्धता का अध्ययन और मानचित्रण भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey) के माध्यम से किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से क्षेत्र खनिज संसाधनों के दोहन के लिए उपयुक्त हैं।
खनिज किन-किन शैल समूहों में पाए जाते हैं
पृथ्वी की पपड़ी मुख्य रूप से तीन प्रकार की शैलों से बनी होती है — आग्नेय (Igneous), अवसादी (Sedimentary) और रूपांतरित (Metamorphic) शैलें। खनिज इन सभी शैल समूहों में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं।
| शैल समूह | खनिजों की उपस्थिति | उदाहरण |
|---|---|---|
| आग्नेय शैलें | ये शैलें ठंडे हुए लावा या मैग्मा से बनती हैं। इनमें मुख्यतः धात्विक खनिज पाए जाते हैं। | लौह (Iron), तांबा (Copper), टिन (Tin) |
| अवसादी शैलें | ये शैलें नदियों द्वारा लाई गई रेत, मिट्टी व अवसादों के जमाव से बनती हैं। इनमें ऊर्जा खनिज और कुछ अधात्विक खनिज पाए जाते हैं। | कोयला (Coal), पेट्रोलियम, नमक (Salt), चूना पत्थर |
| रूपांतरित शैलें | ये आग्नेय या अवसादी शैलों के दबाव और ताप से रूपांतरित होने पर बनती हैं। इनमें बहुमूल्य खनिज पाए जाते हैं। | अभ्रक (Mica), संगमरमर (Marble), ग्रेफाइट (Graphite) |
इस प्रकार प्रत्येक शैल समूह अपने विशेष प्रकार के खनिजों के लिए जाना जाता है, जो पृथ्वी की भूगर्भीय प्रक्रियाओं के अनुसार निर्मित होते हैं।
एक रोचक तथ्य: रैट होल (Rat Hole) खनन
क्या आप जानते हैं कि भारत में अधिकांश खनिज राष्ट्रीयकृत (Nationalized) हैं और उनका निष्कर्षण केवल सरकारी अनुमति के बाद ही संभव है? लेकिन उत्तर-पूर्वी भारत के कई जनजातीय क्षेत्रों में खनिजों का स्वामित्व व्यक्तिगत या सामुदायिक रूप से होता है।
मेघालय में कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर और डोलोमाइट के विशाल निक्षेप पाए जाते हैं। यहाँ के जोवाई और चेरापूँजी क्षेत्रों में कोयले का खनन परिवार के सदस्य स्वयं एक लंबी, संकीर्ण सुरंग बनाकर करते हैं — इसी प्रक्रिया को “रैट होल खनन” कहा जाता है।
यह खनन अत्यंत खतरनाक होता है क्योंकि इन सुरंगों में ऑक्सीजन की कमी, दुर्घटनाएँ और पर्यावरणीय क्षति जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसी कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) ने इसे अवैध घोषित किया है और सलाह दी है कि इस प्रकार की गतिविधियों को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
लौह खनिज एवं लौह अयस्क
लौह (Iron) पृथ्वी की पपड़ी में पाया जाने वाला एक प्रमुख धात्विक खनिज है। यह मानव सभ्यता के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इससे मशीनें, औज़ार, वाहन, पुल, रेलवे लाइनें, और भवन निर्माण की सामग्री बनाई जाती है। लौह अयस्क का परिशोधन करके इस्पात (Steel) बनाया जाता है, जो आधुनिक उद्योग का आधार है।
| लौह अयस्क का प्रकार | लौह की मात्रा (%) | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| हैमेटाइट (Hematite) | 60% – 70% | भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला अयस्क; उच्च गुणवत्ता वाला। |
| मैग्नेटाइट (Magnetite) | 70% – 75% | सबसे समृद्ध लौह अयस्क; चुंबकीय गुणों वाला। |
| लिमोनाइट (Limonite) | 35% – 50% | कम गुणवत्ता वाला; पीले-भूरे रंग का। |
| साइडेराइट (Siderite) | 20% – 40% | सबसे निम्न गुणवत्ता वाला अयस्क; व्यावसायिक रूप से कम उपयोगी। |
भारत में प्रमुख लौह अयस्क क्षेत्र — झारखंड (सिंहभूम), ओडिशा (मयूरभंज, क्योंझर), छत्तीसगढ़ (बैलाडीला), कर्नाटक (बेल्लारी), और गोवा प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। भारत लौह अयस्क का एक बड़ा निर्यातक देश भी है।
क्या आप जानते हैं?
कन्नड़ भाषा में ‘कुदरे’ शब्द का अर्थ होता है घोड़ा। कर्नाटक के पश्चिमी घाट की सबसे ऊँची चोटी का आकार घोड़े के मुख से मिलता-जुलता है, इसलिए उसे ‘कुदरेमुख’ कहा जाता है।
इसी प्रकार बेलाडिला की पहाड़ियाँ अपने आकार में बैल के डील (hump) जैसी दिखती हैं। इसी कारण इनका नाम ‘बेलाडिला’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है “बैल की डील के समान पहाड़ी”।
मैंगनीज (Manganese)
मैंगनीज एक महत्त्वपूर्ण धात्विक खनिज है, जिसका मुख्य उपयोग इस्पात (Steel) के निर्माण में किया जाता है। इस्पात बनाने के लिए एक टन इस्पात के निर्माण में लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज की आवश्यकता होती है। यह धातु इस्पात को कठोरता एवं मजबूती प्रदान करती है।
मैंगनीज का उपयोग केवल इस्पात निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रयोग ब्लीडिंग पाउडर, काँच, बैटरी, सूखाने वाले रसायन (ड्राइंग एजेंट) तथा रंग और पेंट बनाने में भी किया जाता है।
भारत में मैंगनीज का उत्पादन मुख्यतः मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों में होता है। इन क्षेत्रों की शिलाएँ प्राचीन काल की हैं और यहाँ लौह तथा मैंगनीज दोनों के भंडार साथ-साथ पाए जाते हैं।
भारत में मैंगनीज उत्पादन का प्रतिशत (2018–19):
- मध्य प्रदेश – 33%
- महाराष्ट्र – 27%
- ओडिशा – 16%
- कर्नाटक – 12%
- आंध्र प्रदेश – 10%
- अन्य राज्य – 2%
भारत में मैंगनीज के अधिकांश भंडार नर्मदा घाटी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन भंडारों से उच्च गुणवत्ता वाला मैंगनीज अयस्क निकाला जाता है, जो देश की धातु उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अलौह खनिज (Iron Ores) और तांबा (Copper)
खनिज वे प्राकृतिक संसाधन हैं जिनसे धातु और अन्य उपयोगी पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं। यहाँ हम अलौह खनिज और तांबा के बारे में जानेंगे।
1. अलौह खनिज (Iron Ores)
| ख़निज का नाम | रासायनिक सूत्र | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| हैमटाइट (Hematite) | Fe₂O₃ | ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड |
| मैग्नेटाइट (Magnetite) | Fe₃O₄ | केरल, कर्नाटक, झारखंड |
| लिंमोनाइट (Limonite) | FeO(OH)·nH₂O | राजस्थान, छत्तीसगढ़ |
| सिडराइट (Siderite) | FeCO₃ | गोवा, कर्नाटक |
2. तांबा (Copper)
तांबा एक महत्वपूर्ण धातु है जिसका उपयोग विद्युत उपकरणों, भवन निर्माण और औद्योगिक प्रयोजनों में होता है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| रासायनिक सूत्र | Cu |
| मुख्य क्षेत्र | राजस्थान (Khetri), झारखंड (Singhbhum) |
| प्रमुख उपयोग | तार, पाइप, विद्युत उपकरण, आभूषण |
बॉक्साइट (Bauxite)
बॉक्साइट एल्यूमिनियम का प्रमुख खनिज है। यह पृथ्वी पर सबसे अधिक पाया जाने वाला अलॉयमिनियम का स्रोत है।
1. रासायनिक संघटन
मुख्य रूप से इसमें Al₂O₃·2H₂O और Al₂O₃·3H₂O पाए जाते हैं। इसमें लौह, सिलिका और टाइटेनियम के अंश भी मिल सकते हैं।
2. मुख्य क्षेत्र
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| महाराष्ट्र | कोल्हापुर, रत्नागिरी |
| ओडिशा | केंडूजा, डेमपुर |
| छत्तीसगढ़ | किरंडी |
| कर्नाटक | मडिकेरी, चिकमंगलूर |
3. प्रमुख उपयोग
- एल्यूमिनियम धातु का निर्माण
- एयरोस्पेस और वाहन उद्योग में
- रिफ्रिजरेटर और विद्युत उपकरणों में
- पैकेजिंग सामग्री जैसे एल्यूमिनियम फॉइल में
चट्टानी खनिज (Rock Minerals) और चूना पत्थर (Limestone)
चट्टानी खनिज वे खनिज हैं जो चट्टानों के रूप में पाए जाते हैं और जिनका मुख्य उपयोग निर्माण, उद्योग और कृषि में होता है।
1. चूना पत्थर (Limestone)
चूना पत्थर एक सामान्य चट्टानी खनिज है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) से बना होता है।
2. मुख्य क्षेत्र
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| राजस्थान | जयपुर, अलवर |
| छत्तीसगढ़ | कवर्धा, रायपुर |
| मध्य प्रदेश | भीलवाड़ा, खजुराहो |
| महाराष्ट्र | सोलापुर, नागपुर |
3. प्रमुख उपयोग
- सीमेंट और ईंट बनाने में
- कृषि में मिट्टी की अम्लता कम करने के लिए
- औद्योगिक रसायनों और लोहे के गलाने में फ्लक्स के रूप में
- सड़क निर्माण और भवन निर्माण में
अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals) और अभ्रक (Mica)
अधात्विक खनिज वे खनिज हैं जिनसे धातु नहीं निकलती, लेकिन इनका उपयोग उद्योग, निर्माण और कला में होता है।
1. अभ्रक (Mica)
अभ्रक एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है। इसे मिका भी कहते हैं। यह मुख्य रूप से अल्युमिनियम सिलिकेट यौगिक से बना होता है।
2. मुख्य प्रकार
| प्रकार | विशेषताएँ |
|---|---|
| सिलिका अभ्रक (Muscovite) | पारदर्शी, रंग हल्का, विद्युत इन्सुलेटर |
| बायोटाइट अभ्रक (Biotite) | काला या गहरा भूरा, कठोर, गर्मी सहिष्णु |
3. मुख्य क्षेत्र
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| राजस्थान | भीलवाड़ा, उदयपुर |
| झारखंड | सिंघभूम, देवघर |
| मध्य प्रदेश | सागर, रीवा |
| आंध्र प्रदेश | कडपा, चित्तूर |
4. प्रमुख उपयोग
- विद्युत उपकरणों में इन्सुलेटर के रूप में
- सजावटी वस्तुएँ और निर्माण सामग्री
- कागज और पेंट उद्योग में
- विविध यांत्रिक उपकरणों और टाइलों में
खनन (Mining) और जोखिम एवं खतरे
खनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी से खनिज और अन्य उपयोगी संसाधन निकाले जाते हैं। हालांकि, खनन से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर कई जोखिम और खतरे उत्पन्न होते हैं।
1. खनन की प्रकारें
- भूमिगत खनन (Underground Mining): खदान के अंदर सुरंगों और गुफाओं के माध्यम से खनिज निकालना।
- खुले मैदान का खनन (Open Cast Mining): जमीन की सतह से खनिज निकालना। यह विधि तेजी से होती है लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव अधिक होता है।
- खनिजों का समुद्री खनन (Marine Mining): समुद्र से खनिज और जल संसाधन निकालना।
2. खनन से जुड़े जोखिम और खतरे
| खतरा / जोखिम | विवरण |
|---|---|
| पर्यावरणीय नुकसान | वनों की कटाई, भूमि का कटाव, मिट्टी और जल स्रोतों का प्रदूषण। |
| मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव | खनिज धूल और रासायनिक तत्व साँस की बीमारियाँ और त्वचा रोग उत्पन्न कर सकते हैं। |
| खनन दुर्घटनाएँ | भूमिगत खदानों में गुफा ढहना, गैस रिसाव और विस्फोट जैसी दुर्घटनाएँ। |
| जल प्रदूषण | खनन के पानी में रासायनिक तत्व और भारी धातुएँ मिलकर नदी और तालाबों को प्रदूषित करते हैं। |
| जैव विविधता पर प्रभाव | वन्य जीवन और पौधों के आवास नष्ट होते हैं, जिससे जैव विविधता घटती है। |
3. खनन के सुरक्षित उपाय
- सतत खनन और पर्यावरणीय नियमों का पालन।
- खनिज धूल और अपशिष्ट प्रबंधन।
- खनन क्षेत्रों में पेड़-पौधे लगाना।
- खदान में सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण।
खनिजों का संरक्षण (Conservation of Minerals)
खनिज सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके निरंतर उपयोग से जल्द ही खदानें समाप्त हो सकती हैं। इसलिए खनिजों का संरक्षण आवश्यक है।
1. खनिज संरक्षण के उद्देश्य
- भविष्य में खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- पर्यावरणीय नुकसान को कम करना।
- ऊर्जा और संसाधनों की बचत करना।
- आर्थिक स्थिरता बनाए रखना।
2. खनिज संरक्षण के उपाय
| उपाय | विवरण |
|---|---|
| खनिजों का सीमित उपयोग | अनावश्यक खनिजों का उपयोग कम करना और आवश्यकता अनुसार खनन करना। |
| रिसाइक्लिंग (Recycling) | धातु और अन्य खनिजों को पुनः प्रयोग में लाना। उदाहरण: पुराने लोहे, तांबे और एल्यूमिनियम को पिघलाकर फिर उपयोग करना। |
| विकल्पी खनिजों का उपयोग | कुछ खनिजों के स्थान पर सस्ते या पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों का उपयोग। |
| सतत खनन (Sustainable Mining) | खनन के दौरान पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा करना। |
| शिक्षा और जागरूकता | लोगों को खनिज संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना। |
ऊर्जा संसाधन (Energy Resources)
ऊर्जा संसाधन वे प्राकृतिक स्रोत हैं जिनसे हम ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं। यह जीवन और उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
1. ऊर्जा संसाधनों के प्रकार
| प्रकार | विवरण | मुख्य स्रोत / क्षेत्र |
|---|---|---|
| संधारणीय (Renewable) | ऐसे स्रोत जो लगातार उपलब्ध रहते हैं। | सौर ऊर्जा (Solar), पवन ऊर्जा (Wind), जल विद्युत (Hydro), बायोमास (Biomass) |
| असंधारणीय (Non-Renewable) | ऐसे स्रोत जो सीमित मात्रा में हैं और धीरे-धीरे समाप्त हो सकते हैं। | कोयला (Coal), पेट्रोलियम (Petroleum), प्राकृतिक गैस (Natural Gas), परमाणु ऊर्जा (Nuclear) |
2. मुख्य ऊर्जा स्रोत और उपयोग
- कोयला: ताप विद्युत उत्पादन, उद्योगों में ईंधन।
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस: वाहनों और उद्योगों में ऊर्जा।
- जल विद्युत: बांधों के माध्यम से बिजली उत्पादन।
- सौर ऊर्जा: सौर पैनलों से बिजली उत्पादन, हीटिंग और प्रकाश।
- पवन ऊर्जा: पवन चक्कियों से बिजली उत्पादन।
- परमाणु ऊर्जा: बिजली उत्पादन और उद्योग।
3. ऊर्जा संरक्षण के उपाय
- ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग और बचत।
- संधारणीय ऊर्जा स्रोतों का बढ़ावा।
- ऊर्जा कुशल उपकरणों और तकनीकों का प्रयोग।
- पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए ऊर्जा उत्पादन में सतत उपाय।
परंपरागत ऊर्जा स्रोत (Conventional Energy Sources)
परंपरागत ऊर्जा स्रोत वे हैं जो लंबे समय से उपयोग में हैं और अधिकांशतः सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित हैं।
1. मुख्य परंपरागत ऊर्जा स्रोत
| ऊर्जा स्रोत | विवरण | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| कोयला (Coal) | भूसंरचना में पाया जाने वाला कार्बन युक्त खनिज। | ताप विद्युत उत्पादन, उद्योगों में ईंधन |
| पेट्रोलियम (Petroleum) | कच्चा तेल, जो रिफाइनिंग के बाद डीजल, पेट्रोल आदि बनता है। | वाहन, उद्योग, बिजली उत्पादन |
| प्राकृतिक गैस (Natural Gas) | अंतरिक्ष में जमा मीथेन गैस। | गृहस्थ ऊर्जा, उद्योग, बिजली उत्पादन |
| जल विद्युत (Hydropower) | नदियों और बांधों के माध्यम से उत्पन्न ऊर्जा। | बिजली उत्पादन, औद्योगिक उपयोग |
| परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) | परमाणु विखंडन या संलयन से उत्पन्न ऊर्जा। | बिजली उत्पादन, औद्योगिक उपयोग |
2. विशेषताएँ
- अधिकतर सीमित संसाधनों पर आधारित।
- प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभाव अधिक हो सकता है।
- भारत में परंपरागत स्रोतों का प्रमुख उपयोग बिजली उत्पादन और उद्योगों में होता है।
कोयला (Coal)
कोयला एक महत्वपूर्ण परंपरागत ऊर्जा स्रोत है। यह मुख्य रूप से कार्बन युक्त खनिज है और उद्योग और बिजली उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
1. कोयले के प्रकार
| प्रकार | विशेषताएँ |
|---|---|
| लिग्नाइट (Lignite) | कम कार्बन, उच्च नमी, नीची ऊष्मा क्षमता, मुख्यतः बिजली उत्पादन में उपयोग। |
| ब्राइट कोल / सब-बिटुमिनस (Bituminous Coal) | मध्यम कार्बन, अधिक ऊर्जा, औद्योगिक उपयोग जैसे स्टील उत्पादन। |
| एंथ्रासाइट (Anthracite) | उच्च कार्बन, अधिक ऊर्जा, स्वच्छ जलाने वाला कोयला। |
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | मुख्य खदान |
|---|---|
| झारखंड | हज़ारीबाग, धनबाद, रांची |
| छत्तीसगढ़ | कोरबा, भिलाई |
| ओडिशा | तलचेर, इधर |
| मध्य प्रदेश | सिंगरौली, शिवपुरी |
| महाराष्ट्र | चंद्रपूर, नागपुर |
3. मुख्य उपयोग
- ताप विद्युत उत्पादन (Thermal Power Plants)
- स्टील उद्योग में ईंधन और कच्चा पदार्थ
- उद्योगों में भट्टी और ऊर्जा उत्पादन
- घर में गर्मी और खाना पकाने के लिए (परंपरागत रूप से)
पेट्रोलियम (Petroleum)
पेट्रोलियम एक महत्वपूर्ण परंपरागत ऊर्जा स्रोत है। इसे ‘काला सोना’ भी कहा जाता है क्योंकि यह उद्योग और अर्थव्यवस्था में अत्यंत मूल्यवान है।
1. पेट्रोलियम के प्रकार
- कच्चा तेल (Crude Oil): सीधे पृथ्वी से निकाला गया कच्चा तेल।
- रिफाइन किया हुआ तेल (Refined Petroleum): रिफाइनरी में प्रक्रिया करके पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, गैस आदि में बदलना।
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| असाम | असाम, भुज और असम मिजोरम क्षेत्रों में तेल का उत्पादन। |
| गुजरात | अलिवरा, कच्छ |
| राजस्थान | बारमेर और जैसलमेर क्षेत्र |
| उत्तर प्रदेश | हिल्स और मध्य यूपी क्षेत्रों में कुछ तेल। |
| पूर्वोत्तर क्षेत्र | असाम, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में तेल और गैस। |
3. मुख्य उपयोग
- वाहनों के ईंधन (पेट्रोल, डीजल)
- उद्योगों में ऊर्जा उत्पादन और कच्चा माल
- रसायन और प्लास्टिक उद्योग
- घरेलू उपयोग (केरोसीन)
प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण परंपरागत ऊर्जा स्रोत है। यह मुख्य रूप से मीथेन (CH₄) गैस से बनी होती है और स्वच्छ जलाने वाला ईंधन माना जाता है।
1. प्राकृतिक गैस के प्रकार
- संसाधित प्राकृतिक गैस (Processed Natural Gas): रिफाइनरी प्रक्रिया के बाद ईंधन और औद्योगिक उपयोग के लिए तैयार।
- कच्ची प्राकृतिक गैस (Raw Natural Gas): सीधे भूमिगत खदान या तेल/गैस कुएँ से प्राप्त।
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| अंध्र प्रदेश | कोणार्क, कृष्णा-गोदावरी बेसिन |
| तेलंगाना | बासिन और भूमिगत गैस क्षेत्रों में उत्पादन |
| गुजरात | कच्छ और खंभात क्षेत्रों में गैस |
| महाराष्ट्र | मुंबई-हाई बेसिन |
3. मुख्य उपयोग
- घरेलू ईंधन (रसोई गैस)
- बिजली उत्पादन
- उद्योगों में हीटिंग और रासायनिक कच्चा माल
- वाहनों में ईंधन (Compressed Natural Gas – CNG)
विद्युत (Electricity)
विद्युत ऊर्जा जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से उत्पन्न होती है और इसे कई घरेलू, औद्योगिक और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
1. विद्युत उत्पादन के स्रोत
| स्रोत | विवरण |
|---|---|
| ताप विद्युत (Thermal Power) | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस जलाकर भाप उत्पन्न कर बिजली बनाना। |
| जल विद्युत (Hydroelectric Power) | बांधों और नदियों के पानी से टरबाइन घुमाकर बिजली उत्पादन। |
| नवीन ऊर्जा स्रोत (Renewable Sources) | सौर पैनल, पवन चक्की और बायोमास के माध्यम से बिजली उत्पादन। |
| परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) | परमाणु विखंडन से उत्पन्न ऊष्मा से बिजली उत्पादन। |
2. विद्युत के मुख्य उपयोग
- घरेलू उपकरणों में ऊर्जा (लाइट, पंखा, कूलर)
- औद्योगिक उत्पादन में मशीनरी संचालन
- सड़क और रेल परिवहन में बिजली
- सूचना और संचार तकनीक (IT, इंटरनेट, टेलीफोन)
- पानी पंपिंग और कृषि उपकरण
3. विद्युत सुरक्षा के उपाय
- विद्युत उपकरणों का सुरक्षित संचालन और नियमित निरीक्षण।
- ओवरलोडिंग से बचाव।
- इन्सुलेशन और सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग।
- बिजली के तार और उपकरणों से दूरी बनाए रखना।
गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत (Non-Conventional Energy Sources)
गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत वे हैं जो नवीकरणीय (renewable) होते हैं और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हैं। ये स्रोत सतत उपलब्ध रहते हैं।
1. मुख्य गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत
| ऊर्जा स्रोत | विवरण | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| सौर ऊर्जा (Solar Energy) | सूरज की किरणों से ऊर्जा प्राप्त करना। | सौर पैनल, सौर हीटर, बिजली उत्पादन |
| पवन ऊर्जा (Wind Energy) | हवा की गति से टरबाइन घुमाकर बिजली उत्पन्न करना। | विद्युत उत्पादन, पंपिंग सिस्टम |
| जल ऊर्जा (Small Hydro) | छोटे बांध और नदियों के प्रवाह से बिजली उत्पादन। | ग्रामीण क्षेत्र और स्थानीय बिजली उत्पादन |
| जैव ऊर्जा (Biomass Energy) | जैविक अपशिष्ट, पेड़-पौधों और कृषि अवशेष से ऊर्जा। | घरेलू ईंधन, गैस, बिजली उत्पादन |
| भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) | पृथ्वी की आंतरिक गर्मी से ऊर्जा। | बिजली उत्पादन, गर्म पानी की आपूर्ति |
| महासागर ऊर्जा (Ocean/Tidal Energy) | महासागरीय लहरों और ज्वार-भाटे से ऊर्जा। | बिजली उत्पादन |
2. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत उपलब्ध
- पर्यावरण के अनुकूल और कम प्रदूषण फैलाते हैं
- छोटे और बड़े स्तर पर उपयोगी
परमाणु अथवा आण्विक ऊर्जा (Nuclear Energy)
परमाणु ऊर्जा वह ऊर्जा है जो परमाणु के भीतर नाभिकीय विखंडन (fission) या संलयन (fusion) से उत्पन्न होती है। यह आधुनिक ऊर्जा उत्पादन का एक महत्वपूर्ण और उच्च-उर्जा स्रोत है।
1. परमाणु ऊर्जा के प्रकार
| ऊर्जा प्रकार | विवरण |
|---|---|
| नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) | भारी परमाणु जैसे यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 का विखंडन कर ऊर्जा उत्पन्न करना। |
| नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) | हल्के परमाणु जैसे ड्यूटेरियम और ट्रिटियम का संलयन कर ऊर्जा उत्पन्न करना। यह प्रक्रिया सूर्य और तारों में होती है। |
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| तमिलनाडु | कुदनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना |
| कर्नाटक | कायिके परमाणु ऊर्जा केंद्र |
| राजस्थान | रावलकोटा परमाणु ऊर्जा परियोजना |
3. मुख्य उपयोग
- बिजली उत्पादन (Nuclear Power Plants)
- औद्योगिक प्रक्रिया और शोध कार्य
- मेडिकल उपयोग (Radiotherapy, Medical Imaging)
- अंतरिक्ष में ऊर्जा स्रोत
4. विशेषताएँ
- बहुत कम मात्रा में ईंधन से बड़ी ऊर्जा प्राप्त होती है।
- पर्यावरण पर कम हानिकारक प्रभाव (CO₂ उत्सर्जन कम)।
- परमाणु अपशिष्ट का सुरक्षित प्रबंधन आवश्यक।
सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सौर ऊर्जा वह ऊर्जा है जो सूर्य की किरणों से प्राप्त होती है। यह नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
1. प्रकार
- सौर तापीय ऊर्जा (Solar Thermal Energy): सूर्य की गर्मी से पानी या किसी द्रव को गर्म करके बिजली या गर्म पानी तैयार करना।
- सौर विद्युत ऊर्जा (Solar Photovoltaic / Solar PV): सौर पैनलों के माध्यम से सूर्य की रोशनी को सीधे बिजली में बदलना।
2. मुख्य उपयोग
- सौर पैनलों द्वारा बिजली उत्पादन
- सौर हीटर, गर्म पानी और घरेलू उपयोग
- सौर ऊर्जा संचालित पंप और मशीनरी
- सौर ऊर्जा संचालित वाहन और रोशनी
3. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत स्रोत
- पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में उपयोगी
- बिजली उत्पादन के लिए अक्षय विकल्प
पवन ऊर्जा (Wind Energy)
पवन ऊर्जा वह ऊर्जा है जो हवा की गति से उत्पन्न होती है। यह नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
1. पवन ऊर्जा के प्रकार
- थर्मल पवन ऊर्जा: हवा की गति से सीधे विद्युत उत्पन्न करना।
- यांत्रिक पवन ऊर्जा: पवन चक्कियों के माध्यम से पानी पंप करना या मशीनी काम करना।
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| तमिलनाडु | कोयंबटूर और पल्लक्कड़ क्षेत्र प्रमुख पवन फार्म |
| कर्नाटक | बीदर, बेल्लारी और विशाखापत्तनम क्षेत्र |
| गुजरात | कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र |
| राजस्थान | जैसलमेर और जालोर क्षेत्र |
3. मुख्य उपयोग
- विद्युत उत्पादन (Wind Turbines)
- पानी पंपिंग और कृषि कार्य
- सूचना और संचार उपकरणों के लिए बैकअप ऊर्जा
4. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत ऊर्जा स्रोत
- पर्यावरण के अनुकूल, कोई प्रदूषण नहीं
- विशेष रूप से खुले और पठारी क्षेत्रों में उपयोगी
बायोगैस (Biogas)
बायोगैस एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जो जैविक अपशिष्ट (जैसे गोबर, पत्तियाँ, खाद्य अपशिष्ट) के अपघटन से प्राप्त होती है। यह मुख्य रूप से मीथेन (CH₄) गैस से बनी होती है और स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग होती है।
1. बायोगैस का निर्माण
- गोबर, पत्तियाँ और कृषि अपशिष्ट को जलरोधक डीजेस्टर (Anaerobic Digester) में रखा जाता है।
- इसमें बैक्टीरिया जैविक अपशिष्ट को अपघटित करके मीथेन गैस उत्पन्न करते हैं।
- मीथेन गैस पाइपलाइन के माध्यम से स्टोव या इंजन में उपयोग होती है।
2. मुख्य उपयोग
- घरेलू ईंधन (खाना पकाने, गर्म पानी)
- विद्युत उत्पादन के लिए इंजन में ईंधन
- उर्वरक के रूप में ठोस अवशेष का उपयोग कृषि में
3. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत ऊर्जा स्रोत
- पर्यावरण के अनुकूल, कोई प्रदूषण नहीं
- ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में उपयोगी
- कचरे का निपटान और कृषि उर्वरक दोनों का समाधान
ज्वारीय ऊर्जा (Tidal / Ocean Energy)
ज्वारीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो समुद्र की लहरों और ज्वार-भाटा (Tides) की गति से प्राप्त होती है। यह नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
1. ज्वारीय ऊर्जा के प्रकार
- टाइडल ऊर्जा (Tidal Energy): ज्वार और भाटा की गति से टरबाइन घुमाकर बिजली उत्पन्न करना।
- ओशन/वेव ऊर्जा (Ocean/Wave Energy): समुद्र की लहरों की ऊर्जा से मशीनरी और टरबाइन चलाना।
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| गुजरात | खंभात और सौराष्ट्र क्षेत्रों में ज्वारीय ऊर्जा परियोजनाएँ |
| ओडिशा | पुरी और बालासोर क्षेत्र |
| तमिलनाडु | कोवलम और मद्रास तटीय क्षेत्र |
3. मुख्य उपयोग
- बिजली उत्पादन (Tidal Power Plants)
- उद्योगों में ऊर्जा आपूर्ति
- सागर के किनारे छोटे बिजली उत्पादन के लिए प्रयोग
4. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत ऊर्जा स्रोत
- पर्यावरण के अनुकूल, प्रदूषण कम
- सागर और समुद्र तट के निकट क्षेत्रों में उपयोगी
भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)
भूतापीय ऊर्जा वह ऊर्जा है जो पृथ्वी के आंतरिक हिस्से की गर्मी से प्राप्त होती है। यह नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
1. भूतापीय ऊर्जा के प्रकार
- हॉट स्प्रिंग्स (Hot Springs): प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत जिनका सीधे हीटिंग और बिजली उत्पादन में उपयोग।
- जियोथर्मल पावर प्लांट्स: पृथ्वी की गर्मी से भाप उत्पन्न कर टरबाइन घुमाकर बिजली उत्पादन।
2. मुख्य क्षेत्र (भारत में)
| राज्य/स्थान | विशेष विवरण |
|---|---|
| जम्मू-कश्मीर | पांच लेक, नर्गिस, त्सो मोरीर क्षेत्र में गर्म पानी के स्रोत |
| हिमाचल प्रदेश | मनाली और सोलंग घाटी क्षेत्र |
| उत्तराखंड | बदरीनाथ और मंसूरी क्षेत्र |
3. मुख्य उपयोग
- बिजली उत्पादन (Geothermal Power Plants)
- हीटिंग और गर्म पानी की आपूर्ति
- ग्रीनहाउस और कृषि उद्देश्यों में ऊर्जा
4. विशेषताएँ
- नवीकरणीय और सतत ऊर्जा स्रोत
- पर्यावरण के अनुकूल, प्रदूषण नहीं फैलाता
- स्थानीय रूप से बिजली और गर्मी का स्रोत
बहुवैकल्पिक प्रश्न (MCQs)
1. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अपक्षवित पदार्थ के अवशिष्ट भार को त्यागता हुआ चट्टानों के अपघटन से बनता है?
- (क) कोयला
- (ख) बॉक्साइट ✅
- (ग) सोना
- (घ) जस्ता
2. झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?
- (क) बॉक्साइट
- (ख) अवक
- (ग) लौह अयस्क ✅
- (घ) ताँबा
3. निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?
- (क) तलछटी चट्टाने ✅
- (ख) कायांतरित चट्टानें
- (ग) आग्नेय चट्टाने
- (घ) इनमें से कोई नहीं
4. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?
- (क) खनिज तेल
- (ख) यूरेनियम
- (ग) थोरियम ✅
- (घ) कोयला
वर्णात्मक प्रश्न
2. उत्तर लगभग 30 शब्दों में:
(i) (क) लौह और अलीह खनिज:लौह खनिज में लौह तत्व प्रधान होता है, जैसे हीमेटाइट, मैग्नेटाइट। अलीह खनिज में लौह नहीं होता, जैसे बॉक्साइट, ताँबा।
(i) (ख) परंपरागत और गैर परंपरागत ऊर्जा साधन:परंपरागत ऊर्जा स्रोत: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, परमाणु। गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत: सौर, पवन, जल, बायोगैस, भूतापीय, ज्वारीय।
(ii) खनिज क्या है?खनिज पृथ्वी की पर्त में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ठोस पदार्थ हैं जिनका रासायनिक संघटन निश्चित होता है और आर्थिक दृष्टि से उपयोगी होते हैं।
(iii) आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण:आग्नेय चट्टानों में खनिज लावा के ठंडने से बनते हैं। कायांतरित चट्टानों में उच्च ताप और दबाव के कारण पूर्व खनिजों का रूपांतरण होता है।
(iv) खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता:खनिज सीमित संसाधन हैं। उनका संरक्षण आवश्यक है ताकि भविष्य में उद्योग, ऊर्जा और आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध रहें।
3. उत्तर लगभग 120 शब्दों में:
(i) भारत में कोयले का वितरण:भारत में कोयले का मुख्य उत्पादन झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में होता है। झारखंड का जमशेदपुर और रांची क्षेत्र उच्च गुणवत्ता का कोयला देता है। छत्तीसगढ़ में कोरबा और बलरामपुर क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम बंगाल में दामोदर घाटी क्षेत्र और ओडिशा का सिंगराम क्षेत्र भी प्रमुख हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी सीमित मात्रा में कोयला मिलता है। भारत के कोयले का वितरण तापीय विद्युत उत्पादन, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए किया जाता है। कोयला मुख्य रूप से थर्मल पावर प्लांट और इस्पात उद्योग में उपयोग होता है।
(ii) भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल क्यों?
भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है, जहाँ सूर्य की रोशनी अधिकतम रहती है। यह सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयुक्त है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने के लिए सौर पैनल और हीटर प्रभावी हैं। सरकार ने सौर ऊर्जा पर विभिन्न योजनाएँ लागू की हैं। पर्यावरण अनुकूलता और नवीकरणीय स्रोत होने के कारण सौर ऊर्जा प्रदूषण कम करती है। सौर ऊर्जा लागत में गिरावट और तकनीकी विकास के कारण भविष्य में यह ऊर्जा प्रमुख विकल्प बनेगी। विद्युत उत्पादन, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में इसका बढ़ता उपयोग भारत में उज्जवल भविष्य की दिशा संकेत करता है।
खनिज तथा ऊर्जा संसाधन सम्बन्धित सरकारी आंकड़े और जानकारी:-
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