अध्याय 5 : पौधों और जंतुओं का संरक्षण
हमारी पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के पौधे और जंतु पाए जाते हैं जो प्रकृति के balance of nature को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
लेकिन deforestation, प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण यह संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
यदि अभी ध्यान न दिया जाए, तो कई species हमेशा के लिए extinct हो सकती हैं।
भारत में विविध प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं — जैसे बाघ, हाथी, गैंडा और मोर।
इन्हें बचाने के लिए National Parks, Wildlife Sanctuaries और Biosphere Reserves बनाए गए हैं।
इस अध्याय में आप जानेंगे कि biodiversity क्या होती है, इसका संरक्षण क्यों आवश्यक है,
तथा endangered species और extinct species में क्या अंतर होता है।
साथ ही यह भी समझेंगे कि पर्यावरण की रक्षा में हमारी क्या भूमिका हो सकती है।
| मुख्य विषय | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|
| Biodiversity | जीवों की विविधता और उनका पारस्परिक संबंध। |
| Deforestation | वनों की कटाई जिससे आवास और पर्यावरण असंतुलित होते हैं। |
| Wildlife Sanctuary | ऐसा क्षेत्र जहाँ जंतु प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहते हैं। |
जिसकी स्थापना वर्ष 1986 में की गई थी।
वनोन्मूलन (Deforestation) और इसके कारण
जब बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटकर वन क्षेत्र को खाली किया जाता है, तो इसे वनोन्मूलन (Deforestation) कहा जाता है।
वनों की कटाई से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है, मिट्टी का कटाव बढ़ता है और अनेक जंतुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं।
यह पृथ्वी के तापमान में वृद्धि (Global Warming) का एक प्रमुख कारण भी है।
वनों का नष्ट होना या पेड़ों की अत्यधिक कटाई जिससे वन क्षेत्र घट जाए, उसे वनोन्मूलन (Deforestation) कहते हैं।
वनोन्मूलन के प्रमुख कारण (Major Causes of Deforestation):
- कृषि विस्तार (Agricultural Expansion): खेती योग्य भूमि बढ़ाने के लिए पेड़ों को काटा जाता है।
- शहरीकरण (Urbanization): शहरों के फैलाव, मकानों, सड़कों और उद्योगों के निर्माण हेतु वनों की कटाई।
- ईंधन और लकड़ी (Fuel & Timber): लकड़ी और जलावन के लिए पेड़ों को काटना।
- खनन (Mining): खनिज पदार्थों की प्राप्ति हेतु बड़ी मात्रा में पेड़ हटाए जाते हैं।
- पशु चराई (Overgrazing): अत्यधिक पशु चराने से पेड़ों और पौधों का पुनर्जनन नहीं हो पाता।
- वनाग्नि (Forest Fire): आग लगने से वन क्षेत्र नष्ट हो जाता है।
और greenhouse gases की मात्रा बढ़ जाती है।
वनों का संरक्षण ही पर्यावरण की सुरक्षा है। हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
वनोन्मूलन के परिणाम (Effects of Deforestation)
वनों की कटाई केवल पेड़ों की कमी ही नहीं लाती, बल्कि यह पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को भी प्रभावित करती है।
वनोन्मूलन (Deforestation) के कई हानिकारक परिणाम होते हैं जो सीधे जलवायु, मृदा, और जीव-जंतुओं के जीवन पर असर डालते हैं।
- मृदा अपरदन (Soil Erosion): पेड़ों की जड़ों से मिट्टी बंधी रहती है। उनके हटने पर मिट्टी बह जाती है और उपजाऊपन घट जाता है।
- वर्षा में कमी (Reduced Rainfall): पेड़ जल चक्र (Water Cycle) को बनाए रखते हैं। वनों की कमी से वर्षा घट जाती है।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change): वनों के अभाव में carbon dioxide की मात्रा बढ़ती है जिससे global warming होती है।
- वन्यजीवों का आवास नष्ट होना (Loss of Habitat): अनेक जंतुओं के घर (habitats) नष्ट हो जाते हैं जिससे वे endangered या extinct हो सकते हैं।
- बाढ़ की समस्या (Floods): पेड़ वर्षा का जल सोखते हैं। उनके बिना वर्षा का पानी तेजी से बहता है और बाढ़ आती है।
- मरुस्थलीकरण (Desertification): वनों की कमी से भूमि बंजर हो जाती है और धीरे-धीरे मरुस्थल का रूप ले लेती है।
- प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि (Increase in Natural Disasters): भूस्खलन, सूखा और चक्रवात जैसी आपदाएँ बढ़ जाती हैं।
इसीलिए हमें afforestation (वृक्षारोपण) और forest conservation पर ध्यान देना चाहिए।
वनों का संरक्षण ही धरती के भविष्य की सुरक्षा है।
सूखा (Drought) और मरुस्थलीकरण (Desertification)
वनोन्मूलन (Deforestation) के कारण जलवायु में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
इनमें से दो प्रमुख परिणाम हैं — सूखा (Drought) और मरुस्थलीकरण (Desertification)।
ये दोनों पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं क्योंकि ये भूमि, जल और जीवन — तीनों पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
1. सूखा (Drought)
जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक वर्षा नहीं होती या बहुत कम होती है, तो उस स्थिति को सूखा (Drought) कहा जाता है।
वनों के नष्ट होने से water cycle प्रभावित होती है और वायुमंडल में moisture की मात्रा घट जाती है।
परिणामस्वरूप वर्षा में कमी आती है और भूमि सूखने लगती है।
- जल स्रोत (rivers, ponds) सूख जाते हैं।
- खेती नष्ट हो जाती है और food shortage की स्थिति बनती है।
- मनुष्य और पशुओं के लिए water scarcity उत्पन्न होती है।
2. मरुस्थलीकरण (Desertification)
जब उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे अपनी नमी और उर्वरता खो देती है और रेगिस्तान का रूप ले लेती है,
तो इस प्रक्रिया को मरुस्थलीकरण (Desertification) कहा जाता है।
वनों की कमी, अत्यधिक चराई, और जलवायु परिवर्तन इसके प्रमुख कारण हैं।
- भूमि की fertility घट जाती है।
- वनस्पति और फसलों का उत्पादन कम हो जाता है।
- क्षेत्र धीरे-धीरे रेगिस्तान में बदल जाता है।
भारत में यह समस्या राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के कुछ हिस्सों में अधिक देखी जाती है।
वृक्षारोपण, जल संरक्षण और मृदा प्रबंधन से सूखा और मरुस्थलीकरण दोनों को रोका जा सकता है।
वन एवं वन्य प्राणियों का संरक्षण (Conservation of Forests and Wildlife)
वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण हमारे पर्यावरण की स्थिरता और जीवन के संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
वनों से हमें ऑक्सीजन, लकड़ी, औषधियाँ और वर्षा प्राप्त होती हैं, जबकि वन्य प्राणी food chain और ecological balance बनाए रखते हैं।
इनके बिना जीवन संभव नहीं है।
वन संरक्षण (Conservation of Forests)
वनों का संरक्षण उन सभी उपायों को संदर्भित करता है जिनसे पेड़ों, पौधों और वन क्षेत्र की रक्षा की जा सके।
इसका उद्देश्य वनों की निरंतरता बनाए रखना और प्राकृतिक संसाधनों का sustainable use करना है।
- वृक्षारोपण (Afforestation): अधिक से अधिक पेड़ लगाना और कटे हुए पेड़ों की भरपाई करना।
- सामुदायिक वन कार्यक्रम (Social Forestry): गाँव और शहरों के आसपास जनता द्वारा पेड़ लगाना।
- नियंत्रित लकड़ी उपयोग (Controlled Logging): आवश्यकतानुसार ही पेड़ों की कटाई।
- वनाग्नि नियंत्रण (Fire Prevention): जंगलों में आग से बचाव के उपाय करना।
- सरकारी योजनाएँ: जैसे Van Mahotsav और Chipko Movement वनों की रक्षा के लिए आरंभ किए गए।
जिसमें ग्रामीणों ने पेड़ों को बचाने के लिए उन्हें गले लगाया।
वन्य प्राणियों का संरक्षण (Conservation of Wildlife)
वन्य प्राणियों का संरक्षण उन उपायों का समूह है जिनसे जानवरों की दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा की जा सके।
यह न केवल पर्यावरण के संतुलन के लिए बल्कि जैव विविधता (biodiversity) के संरक्षण के लिए भी आवश्यक है।
- अभयारण्य (Wildlife Sanctuary): ऐसे क्षेत्र जहाँ जंतु प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रहते हैं।
- राष्ट्रीय उद्यान (National Park): सरकारी रूप से संरक्षित क्षेत्र जहाँ शिकार और पेड़ों की कटाई वर्जित है।
- जैवमंडल रिज़र्व (Biosphere Reserve): बड़े क्षेत्र जहाँ मानव और प्रकृति दोनों का संतुलन बनाए रखा जाता है।
- शिकार निषेध (Ban on Hunting): दुर्लभ प्रजातियों के शिकार पर रोक लगाना।
- जनजागरूकता (Public Awareness): लोगों को वन्य प्राणियों के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
इसके अलावा Project Elephant और Crocodile Project भी चलाए गए।
वनों और वन्य प्राणियों का संरक्षण ही पृथ्वी की जैव विविधता को जीवित रख सकता है।
वन्यजीव अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, जैवमंडल और आरक्षित क्षेत्र
पौधों और जंतुओं का संरक्षण करने के लिए हमारे देश में कई प्रकार के संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य है –
प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना, विलुप्त होने वाले जीवों की रक्षा करना और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
1. वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary)
वन्यजीव अभ्यारण्य ऐसे क्षेत्र होते हैं जहाँ जानवरों का शिकार तथा वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध होता है।
इन क्षेत्रों में वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है।
उदाहरण: काजीरंगा (असम), रणथंभौर (राजस्थान), मानेरस (केरल)।
2. राष्ट्रीय उद्यान (National Park)
राष्ट्रीय उद्यान ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ वन्यजीवों के साथ-साथ वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों की भी रक्षा की जाती है।
यहाँ किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि, जैसे कि खेती या लकड़ी काटना, सख्ती से निषिद्ध होती है।
उदाहरण: जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड), कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश)।
3. जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve)
जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र एक बड़ा संरक्षित क्षेत्र होता है जिसमें वन, जीव-जंतु, पौधे, सूक्ष्मजीव आदि सभी का संरक्षण किया जाता है।
यह क्षेत्र पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उदाहरण: नीलगिरी, सुंदरबन, नर्मदाw।
4. आरक्षित क्षेत्र (Reserved Area)
आरक्षित क्षेत्र वे स्थान होते हैं जिन्हें सरकार द्वारा विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है।
इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि को सख्ती से नियंत्रित किया जाता है ताकि
पौधों, जानवरों और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
भारत में वर्तमान में 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान, 500 से अधिक वन्यजीव अभ्यारण्य और 18 से अधिक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।
पेड़-पौधे और जीव-जंतु (Plants and Animals)
हमारे आसपास पाए जाने वाले पेड़-पौधे (Plants) और जीव-जंतु (Animals) प्रकृति के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।
ये दोनों मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का निर्माण करते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
पौधे हमें ऑक्सीजन, भोजन, लकड़ी, दवाइयाँ तथा अनेक आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करते हैं,
जबकि जीव-जंतु खाद्य श्रृंखला (Food Chain) को बनाए रखते हैं और पर्यावरणीय संतुलन में योगदान करते हैं।
1. पौधों का महत्व (Importance of Plants)
पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के माध्यम से ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं जो सभी जीवों के जीवन के लिए आवश्यक है।
वे मिट्टी को बाँधकर कटाव (Erosion) को रोकते हैं और वर्षा चक्र (Rain Cycle) को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
इसके अलावा, अनेक पौधे औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।
2. जीव-जंतुओं का महत्व (Importance of Animals)
जीव-जंतु पौधों पर निर्भर रहते हैं और मनुष्यों को दूध, मांस, ऊन, चमड़ा आदि प्रदान करते हैं।
कई पशु परागण (Pollination) में सहायता करते हैं जिससे पौधों में फल और बीज बनते हैं।
वे प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला (Food Chain) को संतुलित रखते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में स्थिरता बनी रहती है।
3. पौधों और जीव-जंतुओं के बीच संबंध (Interdependence)
पौधे और जीव-जंतु एक-दूसरे के पूरक हैं।
पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिसे जीव-जंतु श्वसन के लिए उपयोग करते हैं,
जबकि जीव-जंतु कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिसे पौधे प्रकाश संश्लेषण में प्रयोग करते हैं।
इस प्रकार दोनों के बीच जीवन चक्र (Life Cycle) चलता रहता है।
एक बड़ा पेड़ प्रतिवर्ष लगभग 118 किलोग्राम ऑक्सीजन उत्पन्न करता है, जो दो मनुष्यों के एक वर्ष के लिए पर्याप्त होती है।
विशेष क्षेत्रीय प्रजाति (Endemic Species)
वे पौधे या जीव-जंतु जो केवल किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र (Specific Geographical Area) में पाए जाते हैं और दुनिया के अन्य हिस्सों में नहीं मिलते, उन्हें
विशेष क्षेत्रीय प्रजाति (Endemic Species) कहा जाता है।
इन प्रजातियों का अस्तित्व उस क्षेत्र की जलवायु (Climate), मिट्टी (Soil) और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
1. विशेषताएँ (Characteristics)
- ये केवल एक ही क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाई जाती हैं।
- इनका अस्तित्व पर्यावरण में छोटे बदलाव से भी प्रभावित हो सकता है।
- इन प्रजातियों का लुप्त होना स्थानीय जैव विविधता (Local Biodiversity) पर गहरा असर डालता है।
2. उदाहरण (Examples)
- कांगेर घाटी (छत्तीसगढ़) – फ्लाइंग स्क्विरल (Flying Squirrel)
- नीलगिरी पर्वत (Nilgiri Hills) – नीलगिरी ताहर (Nilgiri Tahr)
- असम और मेघालय – गोल्डन लंगूर (Golden Langur)
- सुंदरबन – रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger)
3. संरक्षण की आवश्यकता (Need for Conservation)
इन प्रजातियों के लुप्त होने से उनका पूरा पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) असंतुलित हो सकता है।
इसलिए आवश्यक है कि इनके आवास (Habitat) को सुरक्षित रखा जाए,
वनों की कटाई पर नियंत्रण किया जाए और संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) बनाए जाएँ।
भारत में लगभग 10% प्रजातियाँ विशेष क्षेत्रीय हैं, जो केवल हमारे देश में पाई जाती हैं।
वन्य प्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary)
वन्य प्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ
वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में सुरक्षित रखा जाता है।
यहाँ किसी भी प्रकार का शिकार (Hunting), वनों की कटाई (Deforestation) या
मानवीय हस्तक्षेप सीमित या प्रतिबंधित होता है।
इनका उद्देश्य है — वन्य जीवों का संरक्षण (Conservation of Wildlife) तथा
उनके जीवन पर्यावरण की रक्षा करना।
1. मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)
- लुप्तप्राय प्रजातियों (Endangered Species) की रक्षा करना।
- जानवरों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास प्रदान करना।
- वन्य जीवों के व्यवहार और जीवन-चक्र का अध्ययन करना।
- प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकना।
2. विशेषताएँ (Key Features)
- यहाँ स्थानीय वनस्पति और जीव दोनों का संरक्षण किया जाता है।
- सीमित पर्यटन (Eco-Tourism) की अनुमति होती है ताकि पर्यावरण प्रभावित न हो।
- सरकार द्वारा नियमित रूप से इनका प्रबंधन और निगरानी की जाती है।
3. भारत के प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य (Famous Wildlife Sanctuaries in India)
| अभ्यारण्य का नाम | राज्य | प्रसिद्ध जीव |
|---|---|---|
| काजीरंगा अभ्यारण्य | असम | एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhino) |
| मानेरस अभ्यारण्य | केरल | हाथी, बाघ |
| रणथंभौर अभ्यारण्य | राजस्थान | बाघ (Tiger) |
| गिर अभ्यारण्य | गुजरात | एशियाई शेर (Asiatic Lion) |
भारत में लगभग 500 से अधिक वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuaries) हैं जो देश की समृद्ध जैव विविधता को सुरक्षित रखते हैं।
राष्ट्रीय उद्यान (National Park)
राष्ट्रीय उद्यान (National Park) ऐसे संरक्षित क्षेत्र होते हैं जहाँ वन्य जीव (Wild Animals),
वनस्पति (Plants) और प्राकृतिक पर्यावरण (Natural Environment) को पूरी तरह से संरक्षण प्रदान किया जाता है।
इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि जैसे – खेती, चराई या लकड़ी काटना पूरी तरह निषिद्ध (Prohibited) होती है।
राष्ट्रीय उद्यानों का उद्देश्य है – जैव विविधता (Biodiversity) का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखना।
1. उद्देश्य (Objectives)
- लुप्तप्राय प्रजातियों (Endangered Species) की रक्षा करना।
- प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) को सुरक्षित बनाए रखना।
- जंगलों और वन्यजीवों की पारिस्थितिकी का संरक्षण।
- शोध (Research) और शिक्षा (Education) के लिए संरक्षण क्षेत्र उपलब्ध कराना।
2. विशेषताएँ (Key Features)
- यहाँ किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि वर्जित होती है।
- वन्य जीवों को पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में संरक्षण दिया जाता है।
- पर्यावरणीय संतुलन (Environmental Balance) बनाए रखने में मदद करते हैं।
3. भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (Famous National Parks of India)
| राष्ट्रीय उद्यान | राज्य | प्रसिद्ध जीव |
|---|---|---|
| जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान | उत्तराखंड | बाघ (Tiger) |
| कान्हा राष्ट्रीय उद्यान | मध्य प्रदेश | बारहसिंगा (Swamp Deer) |
| गिर राष्ट्रीय उद्यान | गुजरात | एशियाई शेर (Asiatic Lion) |
| काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान | असम | एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhino) |
4. विशेष जानकारी (Additional Info)
भारत में पहला राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (1936) था।
वर्तमान में भारत में लगभग 100 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान हैं जो हमारे देश की जैव विविधता के रक्षक हैं।
भारत के राष्ट्रीय उद्यान मिलकर देश के लगभग 1.2% भू-भाग को संरक्षित करते हैं।
प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) और संकटापन्न जंतु (Endangered Animals)
1. प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
भारत में बाघ (Tiger) की संख्या तेज़ी से घट रही थी, इसलिए उनके संरक्षण के लिए भारत सरकार ने
1973 में प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger) नामक विशेष योजना प्रारंभ की।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य था — बाघों के लिए सुरक्षित आवास (Safe Habitat) तैयार करना,
उनके शिकार (Poaching) पर रोक लगाना और उनकी संख्या बढ़ाना।
प्रोजेक्ट टाइगर के तहत विशेष टाइगर रिजर्व (Tiger Reserves) बनाए गए जहाँ बाघों और उनके पर्यावरण को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाती है।
इन क्षेत्रों में बाघों की गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे Camera Trapping और GPS Tracking का प्रयोग किया जाता है।
मुख्य उद्देश्य:
- बाघों की संख्या में वृद्धि करना।
- शिकार और अवैध व्यापार को रोकना।
- प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना।
- स्थानीय लोगों को जागरूक करना और संरक्षण में शामिल करना।
वर्तमान में भारत में लगभग 50 से अधिक टाइगर रिजर्व हैं।
इनमें जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड), कान्हा (मध्य प्रदेश), सुंदरबन (पश्चिम बंगाल) और रणथंभौर (राजस्थान) प्रमुख हैं।
भारत में वर्तमान में विश्व की कुल बाघ जनसंख्या का लगभग 70% हिस्सा पाया जाता है।
2. संकटापन्न जंतु (Endangered Animals)
वे जीव-जंतु जिनकी संख्या बहुत कम हो गई है और जिनके लुप्त (Extinct) होने की संभावना है, उन्हें
संकटापन्न जंतु (Endangered Animals) कहा जाता है।
इन प्रजातियों का अस्तित्व मानवीय गतिविधियों, वनों की कटाई, शिकार और
प्रदूषण जैसी कारणों से खतरे में है।
मुख्य कारण (Main Causes)
- वनों का नष्ट होना (Deforestation)
- अवैध शिकार (Poaching)
- प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन (Pollution and Climate Change)
- आवास विनाश (Habitat Destruction)
भारत के कुछ प्रमुख संकटापन्न जंतु
| जंतु का नाम | वैज्ञानिक नाम (Scientific Name) | स्थिति |
|---|---|---|
| एशियाई शेर | Panthera leo persica | संकटापन्न |
| एक सींग वाला गैंडा | Rhinoceros unicornis | संकटापन्न |
| हिम तेंदुआ | Panthera uncia | संकटापन्न |
| गंगा डॉल्फिन | Platanista gangetica | संकटापन्न |
संकटापन्न जंतुओं का संरक्षण केवल सरकार की नहीं बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है।
वन्यजीवों की रक्षा करना पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
रेड डाटा बुक (Red Data Book)
रेड डाटा बुक (Red Data Book) एक ऐसा अभिलेख (Record) है जिसमें
उन सभी पौधों (Plants) और प्राणियों (Animals) का विवरण दर्ज किया जाता है
जो लुप्तप्राय (Endangered) या संकटापन्न (Threatened) स्थिति में हैं।
यह पुस्तक IUCN (International Union for Conservation of Nature) द्वारा प्रकाशित की जाती है।
मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)
- लुप्तप्राय प्रजातियों की पहचान और सूची तैयार करना।
- उनके संरक्षण (Conservation) हेतु आवश्यक उपाय सुझाना।
- वैज्ञानिकों और सरकार को जागरूक करना कि कौन सी प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं।
प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)
- इसमें विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग पुस्तिकाएँ प्रकाशित की जाती हैं।
- यह जानकारी लुप्त, संकटापन्न, असुरक्षित और सामान्य प्रजातियों के आधार पर वर्गीकृत होती है।
- भारत के लिए भी एक अलग Indian Red Data Book तैयार की गई है।
रेड डाटा बुक की श्रेणियाँ (Categories in Red Data Book)
| श्रेणी | अर्थ |
|---|---|
| Extinct (विलुप्त) | जो प्रजातियाँ अब पृथ्वी पर कहीं नहीं पाई जातीं। |
| Endangered (लुप्तप्राय) | जो प्रजातियाँ बहुत कम बची हैं और विलुप्त होने के कगार पर हैं। |
| Vulnerable (असुरक्षित) | जिनकी संख्या तेजी से घट रही है। |
| Rare (दुर्लभ) | जो केवल कुछ ही स्थानों पर मिलती हैं। |
भारत की Red Data Book में लगभग 450 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज हैं, जिनमें कई पौधे और वन्य जीव शामिल हैं।
प्रवास (Migration)
प्रवास (Migration) का अर्थ है किसी जीव या पक्षी का
एक स्थान से दूसरे स्थान पर नियत समयावधि (Fixed Interval) में जाना और फिर वापस लौट आना।
यह क्रिया सामान्यतः खाद्य, प्रजनन (Reproduction), या अनुकूल जलवायु (Favorable Climate) की तलाश में की जाती है।
प्रवास के मुख्य कारण (Main Reasons for Migration)
- खाद्य की खोज (Search for Food): जब किसी क्षेत्र में भोजन की कमी होती है, तो जीव दूसरे क्षेत्र में चले जाते हैं।
- अनुकूल जलवायु (Favorable Climate): अत्यधिक ठंड या गर्मी से बचने के लिए प्राणी प्रवास करते हैं।
- प्रजनन हेतु (For Breeding): कई जीव सुरक्षित स्थानों पर जाकर प्रजनन करते हैं।
- जीवित रहने हेतु (For Survival): पर्यावरणीय परिवर्तन जैसे सूखा या बाढ़ के कारण भी प्रवास होता है।
उदाहरण (Examples)
- साइबेरियन क्रेन (Siberian Crane): यह पक्षी हर वर्ष साइबेरिया से भारत के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (Bharatpur, Rajasthan) तक प्रवास करती है।
- सालमन मछली (Salmon Fish): समुद्र से नदियों की ओर प्रजनन के लिए जाती है।
- कछुए (Turtles): अपने जन्मस्थान पर अंडे देने के लिए वापस लौटते हैं।
प्रवास का महत्व (Importance of Migration)
- प्रजातियों के जीवन चक्र को बनाए रखने में सहायक।
- जनसंख्या संतुलन (Population Balance) बनाए रखता है।
- जीवों को अनुकूल परिस्थितियों में रहने का अवसर देता है।
कुछ पक्षी जैसे आर्कटिक टर्न (Arctic Tern) हर वर्ष लगभग 35,000 किलोमीटर की यात्रा करते हैं — यह पृथ्वी की सबसे लंबी प्रवासी यात्रा मानी जाती है।
पुनर्वनीकरण (Reforestation)
पुनर्वनीकरण (Reforestation) का अर्थ है कटे हुए या नष्ट हुए वनों की जगह पर
फिर से पेड़ लगाना (Planting Trees Again)।
यह प्रक्रिया वनों की पुनः स्थापना (Restoration of Forests) के लिए की जाती है ताकि
प्राकृतिक संतुलन (Ecological Balance) बना रहे और पर्यावरण शुद्ध बना रहे।
पुनर्वनीकरण की आवश्यकता (Need for Reforestation)
- वनों की कटाई (Deforestation) से हुए नुकसान की भरपाई करना।
- मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) को रोकना।
- वायु की गुणवत्ता (Air Quality) में सुधार करना।
- वन्य प्राणियों के आवास (Habitat) को पुनः स्थापित करना।
- जलवायु संतुलन (Climate Balance) बनाए रखना।
पुनर्वनीकरण के तरीके (Methods of Reforestation)
- स्थानीय पेड़ों की प्रजातियों (Native Species) को लगाना।
- बीज बोने या पौधारोपण (Seed Sowing / Plantation) द्वारा नया वन बनाना।
- सामुदायिक भागीदारी (Community Participation) के माध्यम से वृक्षारोपण अभियान चलाना।
- वनों की सुरक्षा के लिए कानून और निगरानी प्रणाली लागू करना।
पुनर्वनीकरण के लाभ (Benefits of Reforestation)
- कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके Global Warming को कम करता है।
- जल स्रोतों को संरक्षित करता है।
- पशु-पक्षियों के लिए आवास उपलब्ध कराता है।
- कृषि भूमि की उर्वरता (Fertility) बनाए रखता है।
भारत में वन महोत्सव (Van Mahotsav) हर वर्ष जुलाई माह में मनाया जाता है,
जिसमें देशभर में लाखों पेड़ लगाए जाते हैं।
प्रमुख शब्द (Important Terms)
| शब्द | अर्थ / विवरण |
|---|---|
| जैव विविधता (Biodiversity) | पृथ्वी पर पाई जाने वाली सभी प्रकार की जीवित प्रजातियों – पौधे, प्राणी और सूक्ष्मजीव – की विविधता। |
| जैवमण्डल आरक्षण / संरक्षण (Biosphere Reserve) | एक बड़ा क्षेत्र जहाँ पौधों, प्राणियों और मनुष्यों के साथ प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण किया जाता है। |
| वनोन्मूलन (Deforestation) | मानव गतिविधियों के कारण वनों का नष्ट होना या पेड़ों की अत्यधिक कटाई। |
| मरुस्थलीकरण (Desertification) | उपजाऊ भूमि का धीरे-धीरे रेगिस्तान में बदल जाना। |
| पारितंत्र (Ecosystem) | जीवित और निर्जीव तत्वों का परस्पर संबंध, जो मिलकर एक प्राकृतिक इकाई बनाते हैं। |
| संकटापन्न स्पीशीज (Endangered Species) | वे प्रजातियाँ जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। |
| विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज (Endemic Species) | जो केवल किसी विशेष क्षेत्र में पाई जाती हैं और अन्यत्र नहीं। |
| विलुप्त (Extinct) | जो प्रजातियाँ अब पृथ्वी पर कहीं नहीं पाई जातीं। |
| प्राणिजात (Fauna) | किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली सभी प्रकार की पशु प्रजातियाँ। |
| वनस्पतिजात (Flora) | किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली सभी प्रकार की पौधों की प्रजातियाँ। |
| प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) | जो भोजन, जलवायु या प्रजनन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर नियमित रूप से जाते हैं। |
| राष्ट्रीय उद्यान (National Park) | वन्यजीवों और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा हेतु संरक्षित क्षेत्र। |
| रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book) | लुप्तप्राय और विलुप्त प्रजातियों की सूची वाली पुस्तक, जिसे IUCN द्वारा प्रकाशित किया जाता है। |
| पुनर्वनरोपण (Reforestation) | कटे हुए वनों की जगह नए पेड़ लगाना। |
| अभ्यारण्य (Sanctuary) | ऐसा संरक्षित क्षेत्र जहाँ वन्य प्राणियों को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखा जाता है। |
आपने क्या सीखा (What You Have Learnt)
वन्यप्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary), राष्ट्रीय उद्यान (National Park) एवं जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) ऐसे क्षेत्र हैं जो वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण और परिरक्षण के लिए बनाए गए हैं।
जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है किसी विशिष्ट क्षेत्र में पाए जाने वाले सजीवों की विभिन्न किस्में।
किसी क्षेत्र के सभी पौधे एवं जन्तु उस क्षेत्र के वनस्पतिजात (Flora) और प्राणिजात (Fauna) कहलाते हैं।
विशेष क्षेत्रीय स्पीशीज़ (Endemic Species) वे होती हैं जो केवल किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती हैं।
संकटापन्न स्पीशीज़ (Endangered Species) वे प्रजातियाँ हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं।
रेड डाटा पुस्तक (Red Data Book) में सभी संकटापन्न स्पीशीज़ का विवरण दर्ज किया जाता है।
प्रवास (Migration) वह परिघटना है जिसमें किसी प्रजाति का अपने आवास (Habitat) से किसी अन्य स्थान पर हर वर्ष की विशेष अवधि में प्रजनन या अनुकूल जलवायु के लिए जाना शामिल है।
हमें वृक्ष, ऊर्जा और पानी की बचत करनी चाहिए तथा कागज़ का पुनः उपयोग (Reuse) और पुनः चक्रण (Recycling) अपनाना चाहिए।
पुनर्वनरोपण (Reforestation) का अर्थ है नष्ट किए गए वनों की जगह पर फिर से पेड़ लगाकर उन्हें पुनर्स्थापित करना।
प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए वनों, जल, ऊर्जा और जीव-जंतुओं का संरक्षण आवश्यक है।
हम सभी को मिलकर पृथ्वी को हरा-भरा और जीवंत बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
अभ्यास प्रश्नोत्तर – पौधों और जंतुओं का संरक्षण
1. रिक्त स्थानों को उचित शब्दों द्वारा पूर्ति कीजिए:
(क) वह क्षेत्र जिसमें जंतु अपने प्राकृतिक आवास में संरक्षित होते हैं, अभ्यारण्य कहलाता है।
(ख) किसी क्षेत्र विशेष में पाई जाने वाली विशेष क्षेत्री (Endemic) स्पीशीज कहलाती हैं।
(ग) प्रवासी पक्षी सुदूर क्षेत्रों से प्रजनन या अनुकूल जलवायु के लिए पलायन करते हैं।
2. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए:
(क) वन्यप्राणी उद्यान (Wildlife Sanctuary) एवं जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve):
वन्यप्राणी अभ्यारण्य वह क्षेत्र है जहाँ जानवरों को उनके प्राकृतिक निवास में सुरक्षा दी जाती है।
जैवमण्डलीय आरक्षित क्षेत्र अपेक्षाकृत बड़ा क्षेत्र होता है जहाँ पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों की संपूर्ण जैव विविधता का संरक्षण किया जाता है।
इसमें मानव गतिविधियाँ सीमित रूप से अनुमति प्राप्त होती हैं।
(ख) चिड़ियाघर (Zoo) एवं अभ्यारण्य (Sanctuary):
चिड़ियाघर में जानवरों को कृत्रिम बाड़ों में रखा जाता है और लोग उन्हें देखने आते हैं।
अभ्यारण्य में जंतु अपने प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से रहते हैं और वहाँ शिकार या कटाई निषिद्ध होती है।
(ग) संकटापन्न (Endangered) एवं विलुप्त (Extinct) स्पीशीज़:
संकटापन्न वे प्रजातियाँ हैं जिनकी संख्या बहुत कम रह गई है और जो विलुप्त होने के खतरे में हैं।
विलुप्त वे प्रजातियाँ हैं जो अब पृथ्वी पर कहीं नहीं पाई जातीं।
(घ) वनस्पतिजात (Flora) एवं प्राणिजात (Fauna):
वनस्पतिजात किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी पौधों को कहते हैं।
प्राणिजात किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी जानवरों को कहते हैं।
3. वनोन्मूलन का निम्न पर क्या प्रभाव पड़ता है — चर्चा कीजिए:
(क) वन्यप्राणी: वनों के नष्ट होने से जानवरों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो जाता है। उन्हें भोजन और आश्रय नहीं मिलता, जिससे वे विलुप्त होने लगते हैं।
(ख) पर्यावरण: पेड़ों की कटाई से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है, तापमान बढ़ता है और जलवायु असंतुलित हो जाती है।
(ग) गाँव (ग्रामीण क्षेत्र): ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी का कटाव बढ़ जाता है, जिससे कृषि उत्पादन घटता है और जलस्रोत सूखने लगते हैं।
(घ) शहर (शहरी क्षेत्र): प्रदूषण बढ़ता है, गर्मी में वृद्धि होती है और ताज़ी हवा की कमी से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
(ङ) पृथ्वी: वनोन्मूलन से पृथ्वी का तापमान बढ़ता है, वर्षा चक्र प्रभावित होता है और मरुस्थलीकरण बढ़ता है।
(च) अगली पीढ़ी: संसाधनों की कमी, जल संकट और असंतुलित पर्यावरण अगली पीढ़ियों के लिए खतरा बन सकता है।
4. क्या होगा यदि —
(क) यदि हम वृक्षों की कटाई करते रहे तो पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, वर्षा कम होगी और ऑक्सीजन की मात्रा घट जाएगी।
(ख) यदि किसी जंतु का आवास बाधित हो जाए तो वह किसी अन्य स्थान की ओर पलायन करेगा या विलुप्त हो सकता है।
(ग) यदि मिट्टी की ऊपरी परत अनावरित हो जाए तो मिट्टी का क्षरण होगा और पौधों की वृद्धि रुक जाएगी।
5. संक्षेप में उत्तर दीजिए:
(क) हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
जैव विविधता से पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है। यह हमें भोजन, दवाइयाँ और प्राकृतिक संसाधन प्रदान करती है। इसके संरक्षण से पृथ्वी पर जीवन संभव बना रहता है।
(ख) संरक्षित वन भी वन्य जंतुओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं — कारण:
अवैध शिकार, पेड़ों की कटाई, आग और मानव हस्तक्षेप जैसे कारणों से कई बार संरक्षित क्षेत्र भी असुरक्षित हो जाते हैं।
(ग) कुछ आदिवासी वन पर निर्भर करते हैं — कैसे?
आदिवासी लोग लकड़ी, औषधीय पौधों, फलों, गोंद और शहद जैसी वस्तुएँ वनों से प्राप्त करते हैं और इन्हीं से उनका जीवनयापन चलता है।
(घ) वनोन्मूलन के कारक और उनके प्रभाव क्या हैं?
जनसंख्या वृद्धि, कृषि विस्तार, नगरीकरण और लकड़ी की मांग वनोन्मूलन के प्रमुख कारण हैं।
इससे जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का कटाव और जैव विविधता का नुकसान होता है।
(ङ) रेड डाटा पुस्तक क्या है?
रेड डाटा पुस्तक एक सूची है जिसमें संकटापन्न, दुर्लभ और विलुप्त प्रजातियों की जानकारी दर्ज रहती है। यह इन प्रजातियों के संरक्षण हेतु बनाई जाती है।
(च) प्रवास से आप क्या समझते हैं?
प्रवास वह परिघटना है जिसमें जंतु, विशेषकर पक्षी, भोजन, जलवायु या प्रजनन के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर नियमित रूप से जाते हैं।
6. फैक्ट्रियों एवं आवास की माँग की आपूर्ति हेतु वनों की अनवरत कटाई हो रही है। क्या इन परियोजनाओं के लिए वृक्षों की कटाई न्यायसंगत है? इस पर चर्चा कीजिए तथा एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर:
फैक्ट्रियों और आवासीय क्षेत्रों की बढ़ती माँग के कारण बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जा रही है। यद्यपि विकास आवश्यक है, परंतु वनों की अंधाधुंध कटाई न्यायसंगत नहीं है।
वन पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं, ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।
इसलिए हर विकास परियोजना में पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन आवश्यक है। यदि पेड़ों की कटाई की जाती है तो उसके बदले उतने ही वृक्ष लगाने चाहिए।
यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उद्योग एवं आवास परियोजनाएँ सतत विकास (Sustainable Development) की भावना के अनुरूप हों।
वनों की कटाई से जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का कटाव और वन्यप्राणियों का आवास नष्ट हो रहा है।
औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि चयन इस प्रकार होना चाहिए जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिकीय संतुलन न बिगड़े।
सरकार और जनता दोनों को मिलकर वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।
7. अपने स्थानीय क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने में आप किस प्रकार योगदान दे सकते हैं? अपने द्वारा की जाने वाली क्रियाओं की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:
हम सभी अपने स्तर पर हरियाली बनाए रखने में सहयोग कर सकते हैं। मेरे द्वारा किए जाने वाले कार्य इस प्रकार हैं:
- अपने घर और विद्यालय के आसपास वृक्षारोपण करना।
- पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई करना।
- कागज और लकड़ी की बर्बादी रोकना।
- प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं का उपयोग करना।
- स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
- हर वर्ष “वन महोत्सव” में भाग लेकर नए पौधे लगाना।
- सूखे पेड़ों के स्थान पर नए पौधे लगवाने के लिए प्रेरित करना।
8. वनोन्मूलन से वर्षा दर किस प्रकार कम हुई है? समझाइए।
उत्तर:
वन वर्षा चक्र (Water Cycle) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पेड़ वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा वायुमंडल में जलवाष्प छोड़ते हैं, जिससे बादल बनते हैं और वर्षा होती है।
जब वनों की कटाई होती है, तो वायुमंडल में नमी कम हो जाती है और बादल बनने की प्रक्रिया घट जाती है।
परिणामस्वरूप, वर्षा की मात्रा कम हो जाती है और कई क्षेत्रों में सूखा पड़ने लगता है।
इसलिए वनों का संरक्षण वर्षा दर को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
9. अपने राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों के विषय में सूचना एकत्र कीजिए। भारत के रेखा मानचित्र में उनकी स्थिति दर्शाइए।
उत्तर:
नीचे मेरे राज्य (उत्तर प्रदेश) के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) की सूची दी गई है:
| क्रम | राष्ट्रीय उद्यान का नाम | स्थान | प्रमुख वन्यजीव |
|---|---|---|---|
| 1. | दुधवा राष्ट्रीय उद्यान | लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) | गैंडा, बाघ, बारहसिंगा |
| 2. | कटरनिया घाट वन्यजीव अभ्यारण्य | बहराइच | हाथी, बाघ, घड़ियाल |
| 3. | पीलीभीत टाइगर रिजर्व | पीलीभीत | बाघ, हिरण, पक्षी |
भारत के रेखा मानचित्र में इन उद्यानों की स्थिति उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग में दिखाई जाती है, जो नेपाल की सीमा के समीप है।
10. हमें कागज की बचत क्यों करना चाहिए? उन कार्यों की सूची बनाइए जिनके द्वारा आप कागज की बचत कर सकते हैं।
उत्तर:
कागज लकड़ी से बनता है और लकड़ी पेड़ों से प्राप्त होती है।
अतः कागज की अधिक खपत वनों की कटाई को बढ़ाती है।
इसलिए हमें कागज की बचत करनी चाहिए ताकि वनों का संरक्षण हो सके और पर्यावरण संतुलित बना रहे।
कागज की बचत करने के उपाय:
- कागज के दोनों पक्षों पर लिखना।
- पुराने नोटबुक या रफ पेपर का पुनः उपयोग करना।
- अनावश्यक प्रिंटआउट से बचना।
- डिजिटल माध्यम (Mobile, Computer) का अधिक उपयोग करना।
- पुराने कागजों को रीसायकल बिन में डालना।
- लोगों को “पेपर सेव” अभियान में शामिल करना चाहिए।
20 MCQs — पौधों और जंतुओं का संरक्षण
नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) के विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। (Answer key नीचे दी गई है)
1. “Biodiversity” से तात्पर्य क्या है?
2. वनोन्मूलन (Deforestation) का मुख्य कारण कौन-सा है?
3. ‘Endemic species’ किसे कहते हैं?
4. ‘Red Data Book’ किस संगठन द्वारा संकलित एवं प्रकाशित की जाती है?
5. ‘Project Tiger’ की शुरुआत किस वर्ष हुई थी?
6. निम्नलिखित में से कौन-सा ‘National Park’ का मुख्य उद्देश्य नहीं है?
7. ‘Reforestation’ का अर्थ क्या है?
8. ‘Desertification’ किससे संबंधित है?
9. ‘Wildlife Sanctuary’ में निम्नलिखित में से क्या सीमित या निषिद्ध होता है?
10. प्रजातियों के प्रवास (Migration) का एक मुख्य उद्देश्य क्या है?
11. ‘Fauna’ शब्द किसका संदर्भ देता है?
12. वनोन्मूलन से भूमि पर कौन-सा प्रभाव सबसे पहले दिखाई देता है?
13. ‘Biosphere Reserve’ किसलिए महत्वपूर्ण है?
14. ‘Endangered’ और ‘Extinct’ में मुख्य अंतर क्या है?
15. वनोन्मूलन को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका कौन-सा है?
16. ‘Transpiration’ किस क्रिया से संबंधित है?
17. ‘Afforestation’ का अर्थ क्या है?
18. ‘Protected Area’ में कौन-सा शामिल नहीं है?
19. ‘Paper saving’ का प्रत्यक्ष लाभ क्या है?
20. निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप ‘संकटापन्न (Endangered) प्रजाति’ के संरक्षण में सहायक है?
Answer Key (उत्तर सूचक)
1 — (B)
2 — (B)
3 — (B)
4 — (B)
5 — (B)
6 — (B)
7 — (B)
8 — (A)
9 — (B)
10 — (B)
11 — (B)
12 — (A)
13 — (B)
14 — (B)
15 — (B)
16 — (B)
17 — (B)
18 — (C)
19 — (A)
20 — (B)
बाहरी उपयोगी लिंक (External Reference Links)
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