जंतुओं में जनन jantuyo me janan notes in hindi
अध्याय 6 : जंतुओं में जनन (Reproduction in Animals)
प्रकृति ने सभी जीवों को अपनी जाति को बनाए रखने और जीवन को आगे बढ़ाने की अद्भुत क्षमता दी है।
इस प्रक्रिया को जनन (Reproduction) कहा जाता है। जंतु जनन के माध्यम से नए संतानों को उत्पन्न करते हैं
जिससे उनकी प्रजाति लुप्त नहीं होती। जनन दो प्रमुख प्रकारों में होता है –
अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन।
क्या आप जानते हैं? — कुछ जीव जैसे हाइड्रा और अमीबा बिना किसी साथी के भी जनन कर सकते हैं!
इसे अलैंगिक जनन कहा जाता है।
मनुष्यों और अधिकतर जंतुओं में जनन लैंगिक होता है जिसमें नर और मादा दोनों की भागीदारी होती है।
इस प्रक्रिया में नर से शुक्राणु (Sperms) और मादा से अंडाणु (Ova) मिलकर
एक नई संतान का निर्माण करते हैं, जिसे निषेचन (Fertilization) कहा जाता है।
मुख्य बिंदु :
- जनन जीवन की निरंतरता का आधार है।
- जनन के दो प्रकार – लैंगिक और अलैंगिक।
- निषेचन के बाद भ्रूण (Embryo) का विकास होता है।
- मनुष्य में जनन कोशिकाएँ – शुक्राणु और अंडाणु।
इस अध्याय में हम जानेंगे कि जंतुओं में जनन कैसे होता है, निषेचन की प्रक्रिया क्या है, भ्रूण कैसे बनता है,
और कौन-कौन से जंतु अंडे देते हैं तथा कौन बच्चे जन्म देते हैं।
जंतुओं में जनन jantuyo me janan notes in hindi
सीखने योग्य बातें (Learning Outcomes):
- जनन के प्रकारों की पहचान करना।
- निषेचन और भ्रूण विकास की प्रक्रिया समझना।
- अंडज और जरायुज जंतुओं के बीच अंतर बताना।
- क्लोनिंग की अवधारणा को जानना।
जनन की विधियां (Methods of Reproduction)
जंतुओं में जनन दो प्रमुख विधियों से होता है —
अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) और
लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)।
दोनों विधियों का उद्देश्य नई संतान उत्पन्न करना है,
लेकिन उनकी प्रक्रिया और भाग लेने वाले जीवों की भूमिका में अंतर होता है।
कुछ जीव अकेले ही संतान उत्पन्न कर सकते हैं, जबकि कुछ में नर और मादा दोनों की आवश्यकता होती है।
1. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
इस विधि में केवल एक जीव जनन में भाग लेता है।
नर और मादा कोशिकाओं का मिलन नहीं होता।
नया जीव अपने माता-पिता के समान होता है।
यह जनन सामान्यतः सूक्ष्मजीवों और सरल जंतुओं में पाया जाता है।
- अमीबा – द्विखंडन (Binary fission) द्वारा जनन करता है।
- हाइड्रा – कलिकाजनन (Budding) द्वारा जनन करता है।
- स्टारफिश – खंडन (Regeneration) से नई संतान बनाता है।
2. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
इस विधि में दो अलग-अलग जीव – नर (Male) और मादा (Female) भाग लेते हैं।
नर से शुक्राणु (Sperm) और मादा से अंडाणु (Ovum) बनते हैं।
दोनों के संलयन से निषेचित अंड (Zygote) बनता है,
जो बाद में विकसित होकर नई संतान का निर्माण करता है।
उदाहरण : मनुष्य, गाय, बकरी, मछली, पक्षी आदि सभी लैंगिक जनन करते हैं।
मुख्य अंतर (Asexual vs Sexual Reproduction)
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| केवल एक जीव भाग लेता है। | नर और मादा दोनों भाग लेते हैं। |
| संतान समान होती है। | संतान में कुछ भिन्नता होती है। |
| तेज़ और सरल प्रक्रिया। | धीमी और जटिल प्रक्रिया। |
| मुख्यतः सरल जीवों में। | मुख्यतः उच्च जीवों में। |
लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
लैंगिक जनन वह विधि है जिसमें दो भिन्न जीव —
नर (Male) और मादा (Female) —
भाग लेते हैं। नर से शुक्राणु (Sperms) और मादा से अंडाणु (Ova) बनते हैं।
दोनों के संलयन से निषेचित अंड (Zygote) बनता है,
जो बाद में विकसित होकर एक नई संतान का निर्माण करता है।
इसलिए उनमें कुछ भिन्नता पाई जाती है।
1. जनन अंग (Reproductive Organs)
लैंगिक जनन में नर और मादा के अलग-अलग जनन अंग होते हैं,
जो जनन कोशिकाएँ बनाते हैं।
- नर जनन अंग (Male Reproductive Organs): इनमें वृषण (Testes) प्रमुख अंग हैं जो शुक्राणु (Sperms) बनाते हैं।
- मादा जनन अंग (Female Reproductive Organs): इनमें अंडाशय (Ovaries) प्रमुख अंग हैं जो अंडाणु (Ova) बनाते हैं।
2. निषेचन (Fertilization)
जब नर के शुक्राणु मादा के अंडाणु से मिलते हैं तो
निषेचन (Fertilization) होता है।
इससे एक नई कोशिका बनती है जिसे जाइगोट (Zygote) कहते हैं।
जाइगोट ही आगे चलकर भ्रूण (Embryo) बनता है।
3. निषेचन के प्रकार (Types of Fertilization)
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| बाह्य निषेचन (External Fertilization) | जब निषेचन शरीर के बाहर होता है। | मेंढक, मछली |
| आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) | जब निषेचन मादा के शरीर के भीतर होता है। | मनुष्य, पक्षी, गाय |
4. भ्रूण विकास (Development of Embryo)
निषेचन के बाद जाइगोट कई बार विभाजित होकर
एक भ्रूण (Embryo) बनाता है।
भ्रूण धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर के सभी भाग विकसित होते हैं।
कुछ जीवों में भ्रूण अंडे के भीतर विकसित होता है,
जबकि कुछ में वह मादा के शरीर के भीतर विकसित होता है।
- अंडज जीव (Oviparous): जो अंडे देते हैं — जैसे पक्षी, मेंढक, मछली।
- जरायुज जीव (Viviparous): जो सीधे बच्चे जन्म देते हैं — जैसे मनुष्य, गाय, कुत्ता।
जिससे विविधता (Variation) उत्पन्न होती है — और यही प्रकृति की उन्नति का आधार है।
नर जनन अंग (Male Reproductive Organs)
नर जनन तंत्र ऐसे अंगों से मिलकर बना होता है जो शुक्राणु (Sperms) बनाते हैं
और उन्हें शरीर से बाहर ले जाते हैं। शुक्राणु सूक्ष्म आकार की गतिशील कोशिकाएँ होती हैं
जो अंडाणु से मिलकर निषेचन करती हैं।
- वृषण (Testes): ये दो अंडाकार ग्रंथियाँ होती हैं जो शुक्राणु बनाती हैं।
साथ ही ये टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) नामक हार्मोन भी स्रावित करती हैं
जो द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (Secondary sexual characters) के विकास के लिए आवश्यक है। - शुक्रवाहिनी नलिकाएँ (Sperm Ducts): ये नलिकाएँ शुक्राणुओं को वृषण से
शरीर के बाहर ले जाने का कार्य करती हैं। - लिंग (Penis): यह बाहरी जनन अंग है जिसके माध्यम से शुक्राणु मादा के शरीर में प्रविष्ट किए जाते हैं।
उन्हें मादा जनन अंग तक पहुँचाना है।
मादा जनन अंग (Female Reproductive Organs)
मादा जनन तंत्र में वे अंग शामिल होते हैं जो अंडाणु (Ova) बनाते हैं
और निषेचन के बाद भ्रूण के विकास के लिए उपयुक्त स्थान प्रदान करते हैं।
-
- अंडाशय (Ovaries): दो छोटी ग्रंथियाँ जो अंडाणु बनाती हैं।
ये एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन स्रावित करती हैं
जो मासिक चक्र और गर्भधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। - अंडवाहिनी नलिकाएँ (Oviducts / Fallopian Tubes):
ये नलिकाएँ अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं।
इन्हीं में शुक्राणु और अंडाणु का मिलन होता है, जिसे निषेचन (Fertilization) कहा जाता है। - गर्भाशय (Uterus): यह एक थैलीनुमा पेशीय अंग है जहाँ निषेचित अंड (जाइगोट)
भ्रूण में विकसित होता है। भ्रूण को पोषण गर्भाशय की दीवार से प्राप्त होता है। - योनि (Vagina): यह बाहरी जनन मार्ग है जिससे शुक्राणु प्रवेश करते हैं
और शिशु जन्म के समय यही मार्ग प्रयोग होता है।
- अंडाशय (Ovaries): दो छोटी ग्रंथियाँ जो अंडाणु बनाती हैं।
भ्रूण को पोषण देना और शिशु के जन्म तक उसकी रक्षा करना।
निषेचन (Fertilization)
जब नर जनन कोशिका (शुक्राणु) मादा की जनन कोशिका (अंडाणु) से मिलती है,
तो इस प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहा जाता है।
इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप एक नई कोशिका बनती है जिसे जाइगोट (Zygote) कहा जाता है।
जाइगोट में माता और पिता दोनों के गुण मौजूद होते हैं।
जंतुओं में जनन jantuyo me janan notes in hindi
इसी से भ्रूण (Embryo) का निर्माण होता है।
निषेचन के प्रकार (Types of Fertilization)
जंतुओं में निषेचन दो प्रकार का होता है —
बाह्य निषेचन (External Fertilization) और
आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization)।
1. बाह्य निषेचन (External Fertilization)
जब निषेचन नर और मादा दोनों के शरीर के बाहर, सामान्यतः जल में होता है,
तो इसे बाह्य निषेचन कहा जाता है।
इसमें नर और मादा दोनों अपने जनन कोशिकाएँ (शुक्राणु और अंडाणु) पानी में छोड़ते हैं,
जहाँ उनका संलयन होकर जाइगोट बनता है।
- उदाहरण: मेंढक, मछली, तिलचट्टा आदि।
- विशेषता: इसमें अंडों की संख्या बहुत अधिक होती है,
क्योंकि बहुत से अंडे नष्ट भी हो जाते हैं।
2. आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization)
जब निषेचन मादा के शरीर के अंदर होता है, तो इसे आंतरिक निषेचन कहा जाता है।
इसमें नर अपने शुक्राणु मादा के शरीर के भीतर छोड़ता है,
जहाँ वे अंडाणु से मिलकर जाइगोट का निर्माण करते हैं।
यह निषेचन भूमि पर रहने वाले अधिकांश जीवों में पाया जाता है।
- उदाहरण: मनुष्य, पक्षी, गाय, कुत्ता, बिल्ली आदि।
- विशेषता: इसमें भ्रूण मादा के शरीर के भीतर सुरक्षित रूप से विकसित होता है।
बाह्य निषेचन की तुलना में अधिक होती है।
सारांश तालिका (Summary Table)
| आधार | बाह्य निषेचन | आंतरिक निषेचन |
|---|---|---|
| स्थान | शरीर के बाहर | मादा के शरीर के भीतर |
| अंडों की संख्या | बहुत अधिक | कम |
| भ्रूण की सुरक्षा | कम | अधिक |
| उदाहरण | मेंढक, मछली | मनुष्य, पक्षी, गाय |
परखनली शिशु (Test Tube Baby)
कभी-कभी कुछ दंपत्तियों में निषेचन (Fertilization) स्वाभाविक रूप से नहीं हो पाता।
ऐसी स्थिति में विज्ञान की मदद से शरीर के बाहर निषेचन कराकर भ्रूण बनाया जाता है,
और बाद में उसे माँ के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है।
इस प्रकार जन्मे शिशु को ही परखनली शिशु (Test Tube Baby) कहा जाता है।
परखनली शिशु की प्रक्रिया:
- अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्र करना: महिला के अंडाशय से अंडाणु और पुरुष के शरीर से शुक्राणु एकत्र किए जाते हैं।
- प्रयोगशाला में निषेचन: दोनों को परखनली (Test Tube) या विशेष पात्र में मिलाया जाता है ताकि निषेचन हो सके।
- भ्रूण का विकास: निषेचित अंड (Zygote) को कुछ दिनों तक विशेष माध्यम में बढ़ाया जाता है जब तक वह भ्रूण का रूप न ले ले।
- गर्भाशय में प्रत्यारोपण: विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित (Implant) किया जाता है जहाँ वह सामान्य रूप से विकसित होता है।
जिसका अर्थ है — “शरीर के बाहर निषेचन”।
परखनली शिशु तकनीक उन दंपत्तियों के लिए वरदान सिद्ध हुई है
जो संतान प्राप्ति में असमर्थ हैं।
यह विज्ञान की एक महान उपलब्धि है जिसने लाखों परिवारों को नई उम्मीद दी है।
भ्रूण का परिवर्धन (Development of Embryo)
जब शुक्राणु और अंडाणु का निषेचन हो जाता है, तब बनने वाली कोशिका को जाइगोट (Zygote) कहा जाता है।
यही जाइगोट लगातार कोशिका विभाजन द्वारा बढ़ता है और धीरे-धीरे भ्रूण (Embryo) का रूप ले लेता है।
भ्रूण के विकास की प्रमुख अवस्थाएँ:
- 1. जाइगोट का निर्माण: शुक्राणु और अंडाणु के मिलन से एकल कोशिका वाला जाइगोट बनता है।
- 2. कोशिका विभाजन: जाइगोट बार-बार विभाजित होकर अनेक कोशिकाओं का समूह बनाता है।
- 3. भ्रूण का निर्माण: विभाजित कोशिकाएँ विशेष आकार और संरचना प्राप्त करती हैं जिससे भ्रूण बनता है।
- 4. भ्रूण का गर्भाशय में विकास: भ्रूण गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है और वहीं उसका परिवर्धन (growth) होता है।
जंतुओं में जनन jantuyo me janan notes in hindi
जहाँ से उसे ऑक्सीजन और भोजन प्राप्त होता है।
यही भ्रूण आगे चलकर भ्रूणपोष (Foetus) का रूप लेता है।
भ्रूण का यह विकास लगभग 9 महीनों तक चलता है,
जिसके बाद शिशु जन्म लेता है।
इस पूरी प्रक्रिया को ही गर्भावस्था (Pregnancy) कहा जाता है।
जरायुज एवं अंडप्रजक जंतु (Viviparous and Oviparous Animals)
सभी जंतुओं में शिशु जन्म एक समान नहीं होता।
कुछ जंतु सीधे शिशु को जन्म देते हैं, जबकि कुछ अंडे देकर प्रजनन करते हैं।
इन्हीं आधारों पर जंतुओं को दो वर्गों में बाँटा गया है —
जरायुज (Viviparous) और अंडप्रजक (Oviparous)।
१. जरायुज जंतु (Viviparous Animals)
वे जंतु जिनमें भ्रूण का विकास मादा के शरीर के भीतर होता है
और शिशु सीधे जन्म लेता है, उन्हें जरायुज जंतु कहा जाता है।
- उदाहरण: मनुष्य, गाय, बिल्ली, कुत्ता आदि।
- विशेषता: भ्रूण को पोषण गर्भाशय में मिलता है और शिशु जन्म के समय पूर्ण विकसित होता है।
जिससे उसके जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।
२. अंडप्रजक जंतु (Oviparous Animals)
वे जंतु जो अंडे देकर शिशु उत्पन्न करते हैं, उन्हें अंडप्रजक जंतु कहा जाता है।
इनमें भ्रूण का विकास अंडे के भीतर होता है।
- उदाहरण: पक्षी, मेंढक, मछली, सरीसृप आदि।
- विशेषता: अंडों में कठोर या मुलायम खोल होता है जो भ्रूण की रक्षा करता है।
इस प्रकार, जरायुज जंतुओं में शिशु जीवित जन्म लेते हैं
जबकि अंडप्रजक जंतु अंडे देते हैं जिनसे बाद में शिशु निकलते हैं।
शिशु से वयस्क (From Young to Adult)
शिशु के जन्म के बाद उसका शरीर धीरे-धीरे बढ़ता और विकसित होता है।
इस प्रक्रिया में कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं,
जिन्हें हम विकास (Growth) और परिपक्वता (Maturity) कहते हैं।
शिशु से वयस्क बनने की प्रक्रिया:
- 1. वृद्धि (Growth): शिशु की ऊँचाई, वजन और शरीर का आकार धीरे-धीरे बढ़ता है।
- 2. अंगों का विकास: शरीर के सभी अंग पूर्ण रूप से कार्य करने लगते हैं।
- 3. किशोरावस्था (Adolescence): एक ऐसी अवस्था जिसमें बच्चे के शरीर में
हार्मोनल परिवर्तन होते हैं और वे वयस्कता की ओर बढ़ते हैं। - 4. द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास: इस अवस्था में लड़कों में दाढ़ी-मूँछ आना,
आवाज़ भारी होना तथा लड़कियों में स्तन विकसित होना जैसे परिवर्तन दिखाई देते हैं। - 5. परिपक्वता (Maturity): शरीर अब प्रजनन योग्य बन जाता है और व्यक्ति वयस्क कहलाता है।
जो मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं।
विकास की यह यात्रा — शिशु से वयस्क बनने तक —
प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग समय पर होती है,
परंतु अंततः यह सभी के जीवन का एक स्वाभाविक और आवश्यक चरण है।
कायांतरण (Metamorphosis)
कई जंतुओं में शिशु के जन्म के बाद वह सीधे वयस्क नहीं बनता,
बल्कि उसके शरीर में कई आकारिक (Morphological) परिवर्तन होते हैं।
इन परिवर्तनों की प्रक्रिया को ही कायांतरण (Metamorphosis) कहा जाता है।
कायांतरण की परिभाषा:
कायांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें शिशु अवस्था (Larva) और वयस्क अवस्था (Adult) के बीच
जंतु के शरीर के आकार, संरचना तथा कार्यों में पूर्ण परिवर्तन हो जाते हैं।
कायांतरण के उदाहरण:
- मेंढक (Frog): मेंढक का अंडा पहले टैडपोल (Tadpole) नामक जलीय लार्वा बनाता है।
यह धीरे-धीरे अपने गलफड़े खोकर फेफड़ों से साँस लेने लगता है और वयस्क मेंढक बन जाता है। - तितली (Butterfly): तितली के जीवन चक्र में अंडा → इल्ली (Caterpillar) → प्यूपा (Pupa) → वयस्क तितली के रूप में
कई अवस्थाएँ होती हैं। इसे पूर्ण कायांतरण (Complete Metamorphosis) कहा जाता है।
मेंढक में यह प्रक्रिया थाइरॉक्सिन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है,
जो थायरॉयड ग्रंथि से स्रावित होता है।
इस प्रकार, कायांतरण एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है
जो जंतुओं को अपने परिवेश के अनुसार अनुकूल बनाकर वयस्क अवस्था तक पहुँचने में सहायता करती है।
अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
जब किसी जीव में केवल एक जनक (Parent) से ही नए जीव का निर्माण होता है,
तो इस प्रकार के जनन को अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) कहा जाता है।
इसमें शुक्राणु और अंडाणु का कोई मेल (Fertilization) नहीं होता।
मुख्य विशेषताएँ:
- केवल एक जनक की आवश्यकता होती है।
- नए जीव मूल जनक के समान होते हैं।
- यह जनन विधि सरल, तीव्र और ऊर्जा-संरक्षण वाली होती है।
- मुख्यतः सूक्ष्मजंतुओं जैसे अमीबा, यीस्ट, जलकुंभी आदि में पाई जाती है।
अलैंगिक जनन की विधियाँ:
- खंडन (Fragmentation): जब कोई जीव अपने शरीर के टुकड़ों में विभाजित हो जाता है
और प्रत्येक टुकड़ा एक नया जीव बना लेता है।
उदाहरण: स्पाइरोगायरा (Spirogyra)। - कलिकाजनन (Budding): शरीर पर एक छोटी कली (Bud) बनती है जो बढ़कर नए जीव का रूप ले लेती है।
उदाहरण: यीस्ट (Yeast) और हाइड्रा (Hydra)। - द्विखंडन (Binary Fission): एक जीव दो समान भागों में विभाजित होकर दो नए जीव बनाता है।
उदाहरण: अमीबा (Amoeba), पैरामीशियम (Paramecium)।
लेकिन उनमें आनुवंशिक विविधता (Genetic Variation) नहीं होती।
इस प्रकार, अलैंगिक जनन सरल, त्वरित और प्रारंभिक जीवों में पाई जाने वाली जनन विधि है
जो जीवन के निरंतरता को बनाए रखती है।
हाइड्रा में मुकुलन (Budding in Hydra)
हाइड्रा एक छोटा जलीय जंतु है जो झीलों और तालाबों के किनारों पर पाया जाता है।
इसमें जनन की एक विशेष विधि मुकुलन (Budding) कहलाती है,
जो अलैंगिक जनन का एक प्रकार है।
मुकुलन की प्रक्रिया:
- 1. कली का निर्माण: हाइड्रा के शरीर की बाहरी सतह पर एक छोटी सी उभार (Bud) बनती है।
- 2. वृद्धि: यह कली धीरे-धीरे बढ़कर हाइड्रा के समान स्पर्शक (Tentacles) और मुख विकसित कर लेती है।
- 3. विभाजन: जब कली पूर्ण रूप से विकसित हो जाती है,
तो वह जनक हाइड्रा से अलग होकर एक स्वतंत्र हाइड्रा बन जाती है।
और यह अत्यंत तीव्र गति से होती है।
यह जनन विधि सरल और प्रभावी मानी जाती है।
कभी-कभी हाइड्रा के शरीर पर एक साथ एक से अधिक कलियाँ भी बन जाती हैं,
जो क्रमशः अलग होकर नई हाइड्राएँ उत्पन्न करती हैं।
इस प्रकार हाइड्रा अलैंगिक जनन द्वारा अपनी जनसंख्या को शीघ्र बढ़ा लेता है।
अमीबा में द्विखंडन
अलैंगिक जनन की सबसे सामान्य विधि द्विखंडन (Binary Fission) है। इसमें एक कोशिका दो समान भागों में विभाजित होकर दो नए जीव बना देती है। यह प्रक्रिया एककोशिकीय जीवों जैसे कि अमीबा में पाई जाती है।
प्रक्रिया:
- अनुकूल परिस्थितियों में अमीबा का नाभिक (nucleus) पहले दो भागों में विभाजित होता है।
- इसके बाद कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) भी दो भागों में विभाजित हो जाता है।
- इस प्रकार एक अमीबा से दो नए अमीबा बनते हैं, जो आकार और संरचना में समान होता है।
मुख्य तथ्य:
- यह प्रक्रिया एककोशिकीय जंतुओं में होती है।
- यह तेज गति से जनसंख्या बढ़ाने का तरीका है।
- नए जीव माता-पिता से बिल्कुल समान होते हैं।
डॉली की कहानी (क्लोन)
विज्ञान के इतिहास में डॉली भेड़ का नाम बहुत प्रसिद्ध है। यह दुनिया की पहली क्लोन स्तनपायी (Cloned Mammal) थी, जिसे बिना किसी नर-मादा के संयोग के कृत्रिम रूप से प्रयोगशाला में तैयार किया गया था।
डॉली का जन्म वर्ष 1996 में स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक इयान विलमट (Ian Wilmut) और उनकी टीम द्वारा किया गया। उन्होंने एक वयस्क भेड़ की स्तन कोशिका (mammary cell) से नाभिक (nucleus) निकालकर उसे एक अंडाणु कोशिका (egg cell) में स्थापित किया, जिसका नाभिक पहले ही हटा दिया गया था। इस संलयन (fusion) से एक भ्रूण बना जिसे दूसरी भेड़ के गर्भ में प्रत्यारोपित किया गया।
कुछ समय बाद डॉली नाम की भेड़ का जन्म हुआ, जो उस मूल भेड़ की बिलकुल समान प्रतिलिपि थी — यानी उसका DNA पूरी तरह समान था ।
क्लोन (Clone) ऐसे जीव को कहा जाता है जो किसी एक जीव की समान आनुवंशिक प्रतिलिपि हो। इसका अर्थ है कि दोनों के जीन या DNA बिल्कुल एक जैसे होते हैं।
डॉली की मृत्यु वर्ष 2003 में फेफड़ों की बीमारी के कारण हुई। वह केवल छह वर्ष जीवित रही, लेकिन उसकी सफलता ने जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के क्षेत्र में एक नया युग शुरू किया।
महत्व:
- यह प्रयोग साबित करता है कि शरीर की सामान्य कोशिकाओं से भी नया जीव बनाया जा सकता है।
- इससे लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने की संभावना बनी।
- क्लोनिंग से जुड़े कई नैतिक और वैज्ञानिक प्रश्न आज भी चर्चा में हैं।
प्रमुख शब्द
- अलैंगिक जनन : वह जनन जिसमें केवल एक अभिभावक भाग लेता है।
- द्विखंडन : एक कोशिका का दो समान भागों में विभाजन, जैसे अमीबा में।
- मुकुलन : शरीर पर नई कलिका बनकर नए जीव का निर्माण, जैसे हाइड्रा में।
- अंडे : मादा जनन कोशिकाएँ जिनसे संतान विकसित होती है।
- भ्रूण : निषेचन के बाद बनने वाला विकसित होता हुआ जीव।
- बाह्य निषेचन : शरीर के बाहर होने वाला निषेचन, जैसे मेंढक में।
- निषेचन : शुक्राणु और अंडाणु के मेल से नए जीव का बनना।
- गर्भ : मादा के शरीर का वह भाग जहाँ भ्रूण का विकास होता है।
- आंतरिक निषेचन : शरीर के भीतर होने वाला निषेचन, जैसे मनुष्य में।
- कायांतरण : लार्वा से वयस्क बनने की प्रक्रिया, जैसे तितली में।
- अंडप्रजक जंतु : वे जंतु जो अंडे देकर संतान उत्पन्न करते हैं, जैसे पक्षी।
- लैंगिक जनन : वह जनन जिसमें नर और मादा दोनों की भागीदारी होती है।
- शुक्राणु : नर जनन कोशिका जो अंडाणु के साथ मिलकर भ्रूण बनाती है।
- जरायुज जंतु : वे जंतु जिनमें भ्रूण माता के गर्भ में विकसित होता है, जैसे मनुष्य।
आपने क्या सीखा
- जंतु दो विधियों द्वारा प्रजनन करते हैं —
(i) लैंगिक जनन तथा (ii) अलैंगिक जनन। - नर युग्मक एवं मादा युग्मक के संलयन द्वारा जनन को लैंगिक जनन कहते हैं।
अंडाशय, अंडवाहिनी एवं गर्भाशय मादा के जनन अंग हैं।
नर के जननांग हैं — वृषण, शुक्राणु नली एवं शिश्न। - अंडाशय मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे अंडाणु (या अंडकोशिका) कहते हैं।
वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे शुक्राणु कहते हैं।
अंडाणु एवं शुक्राणु का संलयन निषेचन कहलाता है और निषेचित अंडा युग्मनज कहलाता है। - मादा के शरीर के अंदर होने वाले निषेचन को आंतरिक निषेचन कहते हैं।
यह मनुष्य, मुर्गी, गाय, कुत्ते आदि में होता है।
मादा के शरीर के बाहर होने वाला निषेचन बाह्य निषेचन कहलाता है,
जो मेंढक, मछली और स्टारफिश जैसे जंतुओं में पाया जाता है। - युग्मनज में अनेक विभाजन होते हैं तथा इससे भ्रूण बनता है।
भ्रूण गर्भाशय की दीवार में स्थापित होकर वहीं उसकी वृद्धि एवं परिवर्धन होता है।
जब भ्रूण के सभी अंग पहचान योग्य हो जाते हैं तो उसे गर्भ कहते हैं। - मनुष्य, गाय और कुत्ते जैसे जंतु जो शिशु को जन्म देते हैं, उन्हें जरायुज जंतु कहा जाता है।
मुर्गी, मेंढक, छिपकली और तितली जैसे जंतु जो अंडे देते हैं, अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं। - लारवा का वयस्क जंतु में परिवर्तित होने की प्रक्रिया कायांतरण कहलाती है।
जनन का वह प्रकार जिसमें केवल एक ही जीव भाग लेता है, अलैंगिक जनन कहलाता है। - हाइड्रा में मुकुल द्वारा नए जीव का विकास होता है, इसे मुकुलन कहते हैं।
अमीबा स्वयं दो भागों में विभाजित होकर संतति उत्पन्न करता है, इसे द्विखंडन कहा जाता है।
जंतुओं में जनन jantuyo me janan notes in hindi
अभ्यास प्रश्नों के उत्तर —
प्रश्न 1. सजीवों के लिए जनन क्यों महत्वपूर्ण है? समझाइए।
उत्तर :
- जीवों का जनन उनकी प्रजाति की निरंतरता (continuity) सुनिश्चित करता है — यानी किसी प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है।
- जनन से नयी संतति उत्पन्न होती है, जिससे प्रजाति का क्षरण नहीं होता।
- लैंगिक जनन के कारण आनुवंशिक विविधता (genetic variation) आती है — यह विविधता प्राकृतिक चयन और विकास के लिए आवश्यक है।
- अलैंगिक जनन तेज़ी से संख्या बढ़ाने में मदद करता है (जैसे सूक्ष्मजीव), जब परिस्थितियाँ अनुकूल हों।
- संक्षेप में — जनन प्रजातियों की सर्वाइवल, अनुकूलन और विकास के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 2. मनुष्य में निषेचन प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर : मनुष्य में निषेचन (fertilization) की प्रक्रिया सरल चरणों में समझिए —
- जनन कोशिकाओं का निर्माण : पुरुष के वृषण में शुक्राणु बनते हैं; महिलाओं के अंडाशय में अंडाणु बनते हैं।
- संयोग (Copulation) / परिग्रहण : संभोग (sexual intercourse) के दौरान पुरुष का शुक्राणु योनि में प्रवेश करता है।
- यात्रा और मिलन : शुक्राणु योनि → गर्भाशय → फॉलोपियन ट्यूब (अंडवाहिनी) की ओर जाता है जहाँ वह अंडाणु से मिलता है।
- निषेचन : जब एक शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश कर देता है तो उनका केन्द्रक (nuclei) मिलकर एक नई कोशिका — जाइगोट (युग्मनज) — बनाते हैं। यह प्रक्रिया आंतरिक निषेचन कहलाती है।
- भ्रूण विकास : जाइगोट विभाजित होकर भ्रूण बनता है, भ्रूण गर्भाशय की दीवार में स्थापित (implant) हो जाता है और गर्भावस्था के दौरान विकसित होता है।
प्रश्न 3. सर्वोत्कृष्ट उत्तर चुनिए :
(क) आंतरिक निषेचन होता है :
उत्तर : (i) मादा के शरीर में.
व्याख्या: आंतरिक निषेचन में निषेचन मादा के शरीर के भीतर होता है (उदा. मानव, गाय)।
(ख) एक टेडपोल जिस प्रक्रम द्वारा वयस्क में विकसित होता है, वह है :
उत्तर : (ii) कायांतरण.
व्याख्या: मेंढक अंडे → टैडपोल (लार्वा) → फिर कायांतरण के द्वारा वयस्क बनता है।
(ग) एक युग्मनज में पाए जाने वाले केन्द्रकों की संख्या होती है :
उत्तर : (ii) एक.
व्याख्या: निषेचन के बाद नर और मादा के केन्द्रक (nuclei) का मिलन हो जाता है और एक संयुक्त केन्द्रक (एक नाभिक) वाला युग्मनज बनता है।
प्रश्न 4. निम्न कथन सत्य (T) है अथवा असत्य (F) संकेत कीजिए —
- अंडप्रजक जंतु विकसित शिशु को जन्म देते हैं।
उत्तर : असत्य (F). व्याख्या: अंडप्रजक जंतु अंडे देते हैं; विकसित शिशु (fully developed young) नहीं देते।
- प्रत्येक शुक्राणु एक एकल कोशिका है।
उत्तर : सत्य (T). शुक्राणु एकल कोशिका (single cell) है जो गतिशील होती है।
- मेंढक में बाह्य निषेचन होता है।
उत्तर : सत्य (T). मेंढक नर व मादा अंडाणु और शुक्राणु पानी में छोड़ते हैं जहाँ निषेचन होता है।
- वह कोशिका जो मनुष्य में नए जीवन का प्रारम्भ है, युग्मक कहलाती है।
उत्तर : सत्य (T). युग्मक/जाइगोट वह एकल कोशिका है जो निषेचन के तुरंत बाद बनती है।
- निषेचन के पश्चात दिया गया अंडा एक एकल कोशिका है।
उत्तर : सत्य (T). निषेचन के तुरंत बाद निषेचित अंडा (जाइगोट) एक एकल कोशिका होता है।
- अमीबा मुकुलन द्वारा जनन करता है।
उत्तर : असत्य (F). अमीबा मुकुलन से नहीं बल्कि द्विखंडन (binary fission) से प्रजनन करता है।
- एलैंगिक जनन में भी निषेचन आवश्यक है।
उत्तर : असत्य (F). वाक्य में टाइपो लग रहा है — यदि ‘एलैंगिक’ से अर्थ ‘अलैंगिक’ लिया जाए तो भी निषेचन आवश्यक नहीं होता; परन्तु लैंगिक (sexual) जनन में निषेचन आवश्यक है। (प्रश्न का आशय यहाँ ‘अलैंगिक’ है तो उत्तर F होगा)।
- द्विखंडन अलैंगिक जनन की एक विधि है।
उत्तर : सत्य (T). द्विखंडन एककोशिकीय जीवों में पाया जाने वाला अलैंगिक जनन है।
- निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है।
उत्तर : सत्य (T). यही परिभाषा है।
- भ्रूण एक एकल कोशिका का बना होता है।
उत्तर : असत्य (F). भ्रूण कई कोशिकाओं (multicellular) से बनता है; निषेचित अंडा (जाइगोट) ही एक एकल कोशिका है।
प्रश्न 5. युग्मनज और गर्भ में दो भिन्नताएँ दीजिए।
उत्तर :
| आधार | युग्मनज (Zygote) | गर्भ (Foetus / Embryo stage) |
|---|---|---|
| परिभाषा | निषेचन के तुरंत बाद बनने वाली एकल कोशिका। | विकसित भ्रूण की वह अवस्था जहाँ अनेक कोशिकाएँ व अंग बन चुके होते हैं। |
| कोशिकीय स्थिति | एकल कोशिका (single cell)। | बहुकोशिकीय (multicellular) और अंग स्पष्ट रूप से विकसित। |
प्रश्न 6. अलैंगिक जनन की परिभाषा लिखिए। जंतुओं में अलैंगिक जनन की दो विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
परिभाषा : अलैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें केवल एक ही जनक (parent) से नई संतान बनती है; इसमें नर और मादा युग्मकों के मिलन (fertilization) की आवश्यकता नहीं होती।
(i) द्विखंडन (Binary fission)
यह एककोशिकीय जीवों (single-celled organisms) में सामान्य है। प्रक्रिया —
- कोशिका पहले अपने केन्द्रक (nucleus) का विभाजन करती है।
- फिर कोशिकाद्रव्य और झिल्ली विभाजित होती है और दो समान कोशिकाएँ बनती हैं।
- उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम।
(ii) मुकुलन (Budding)
यह बहुकोशिकीय सरल जंतुओं में होता है —
- जनक के शरीर पर एक छोटी सी वृद्धि (कली / bud) बनती है।
- यह कली बढ़कर जनक जैसा नया जीव बन जाती है और अलग हो जाती है।
- उदाहरण: हाइड्रा, कुछ प्रकार की यीस्ट कोशिकाएँ।
(अन्य अलैंगिक विधियाँ: खंडन/Fragmentation, प्रजनन से जुड़े स्पोर बनाना (sporulation), रोजन (vegetative propagation) — पर आपाततः ऊपर दो प्रमुख विधियाँ दी गईं।)
प्रश्न 7. मादा के किस जनन अंग में भ्रूण का रोपण होता है?
भ्रूण का रोपण गर्भाशय (Uterus) में होता है।
निषेचन के बाद बनने वाला युग्मनज कई बार विभाजित होकर भ्रूण बनाता है।
यह भ्रूण मादा के गर्भाशय की भीतरी दीवार में जाकर स्थापित होता है।
गर्भाशय में ही भ्रूण को पोषण मिलता है और वह विकसित होकर शिशु का रूप लेता है।
प्रश्न 8. कायांतरण किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
कायांतरण वह प्रक्रिया है जिसमें लारवा (larva) अवस्था का जीव
बढ़ते-बढ़ते पूरी तरह वयस्क जंतु में बदल जाता है।
इस परिवर्तन के दौरान शरीर की बनावट और संरचना में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं।
उदाहरण —
- मेंढक में टैडपोल लारवा का वयस्क मेंढक में बदलना।
- तितली में लारवा (सूंडी) का प्यूपा बनकर तितली में बदलना।
प्रश्न 9. आंतरिक निषेचन एवं बाह्य निषेचन में भेद कीजिए।
| क्रमांक | आंतरिक निषेचन | बाह्य निषेचन |
|---|---|---|
| 1. | यह मादा के शरीर के अंदर होता है। | यह मादा के शरीर के बाहर होता है। |
| 2. | यह मनुष्य, गाय, कुत्ता आदि में पाया जाता है। | यह मेंढक, मछली, स्टारफिश आदि में पाया जाता है। |
| 3. | निषेचित अंडा मादा के गर्भाशय में विकसित होता है। | निषेचित अंडा जल या बाह्य वातावरण में विकसित होता है। |
| 4. | भ्रूण को सुरक्षा और पोषण मिलता है। | भ्रूण को बाहरी वातावरण में खतरे अधिक होते हैं। |
अध्याय 6 : जंतुओं में जनन — 20 महत्वपूर्ण MCQs
- जनन का अर्थ है —
(a) वृद्धि करना (b) भोजन बनाना (c) नए जीवों का निर्माण (d) श्वसन करना
उत्तर: (c) नए जीवों का निर्माण - मनुष्य में निषेचन कहाँ होता है?
(a) वृषण (b) अंडवाहिनी (c) गर्भाशय (d) अंडाशय
उत्तर: (b) अंडवाहिनी - नर जनन अंग का नाम है —
(a) गर्भाशय (b) अंडाशय (c) वृषण (d) अंडवाहिनी
उत्तर: (c) वृषण - मादा जनन अंग है —
(a) वृषण (b) अंडाशय (c) शिश्न (d) शुक्राणु नली
उत्तर: (b) अंडाशय - निषेचित अंडे को क्या कहते हैं?
(a) भ्रूण (b) युग्मनज (c) अंडाणु (d) शुक्राणु
उत्तर: (b) युग्मनज - आंतरिक निषेचन कहाँ होता है?
(a) मादा के शरीर के बाहर (b) मादा के शरीर के अंदर (c) नर के शरीर में (d) जल में
उत्तर: (b) मादा के शरीर के अंदर - मेंढक में निषेचन का प्रकार है —
(a) आंतरिक (b) बाह्य (c) दोनों (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) बाह्य - शिशु को जन्म देने वाले जंतु कहलाते हैं —
(a) अंडप्रजक (b) जरायुज (c) कायांतरित (d) परजीवी
उत्तर: (b) जरायुज - अंडे देने वाले जंतु कहलाते हैं —
(a) जरायुज (b) अंडप्रजक (c) कायांतरणीय (d) विभाजनशील
उत्तर: (b) अंडप्रजक - लारवा से वयस्क बनने की प्रक्रिया है —
(a) निषेचन (b) कायांतरण (c) विभाजन (d) मुकुलन
उत्तर: (b) कायांतरण - जनन की वह विधि जिसमें केवल एक जीव भाग लेता है —
(a) लैंगिक जनन (b) अलैंगिक जनन (c) निषेचन (d) कायांतरण
उत्तर: (b) अलैंगिक जनन - हाइड्रा में जनन किस प्रकार होता है?
(a) द्विखंडन (b) मुकुलन (c) कायांतरण (d) निषेचन
उत्तर: (b) मुकुलन - अमीबा में जनन का प्रकार है —
(a) मुकुलन (b) द्विखंडन (c) निषेचन (d) कायांतरण
उत्तर: (b) द्विखंडन - भ्रूण का विकास कहाँ होता है?
(a) अंडवाहिनी (b) वृषण (c) गर्भाशय (d) युग्मनज
उत्तर: (c) गर्भाशय - निषेचन किसके संलयन से होता है?
(a) अंडाणु और शुक्राणु (b) भ्रूण और अंडा (c) वृषण और अंडाशय (d) युग्मनज और भ्रूण
उत्तर: (a) अंडाणु और शुक्राणु - भेड़ “डॉली” का निर्माण किस विधि से हुआ था?
(a) निषेचन (b) क्लोनिंग (c) कायांतरण (d) मुकुलन
उत्तर: (b) क्लोनिंग - अलैंगिक जनन में निषेचन होता है या नहीं?
(a) होता है (b) नहीं होता (c) कभी-कभी होता है (d) अनिश्चित
उत्तर: (b) नहीं होता - निषेचन के बाद बनने वाली कोशिका कहलाती है —
(a) भ्रूण (b) युग्मनज (c) अंडाणु (d) शुक्राणु
उत्तर: (b) युग्मनज - परखनली शिशु किससे संबंधित है?
(a) कायांतरण (b) निषेचन (c) क्लोनिंग (d) कृत्रिम निषेचन
उत्तर: (d) कृत्रिम निषेचन - मेंढक के जीवन चक्र में कौन-सी अवस्था पाई जाती है?
(a) लारवा (b) युग्मनज (c) भ्रूण (d) अंडाणु
उत्तर: (a) लारवा
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