किशोरावस्था की ओर मानव जीवन का वह चरण है जब शरीर में यौवनारम्भ होता है। इस समय गुणसूत्र सक्रिय होकर हार्मोनों के स्राव को नियंत्रित करते हैं। यौवनारम्भ के दौरान बालक और बालिका दोनों में शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन दिखाई देते हैं जिन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहा जाता है। गौण लैंगिक लक्षण जैसे स्वर परिवर्तन, दाढ़ी-मूंछ का उगना या स्तन वृद्धि आदि शरीर को परिपक्व बनाते हैं। बालिकाओं में राजोदर्शन इस किशोरावस्था की ओर का प्रमुख संकेत है। राजोदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि यौवनारम्भ पूर्ण रूप से प्रारंभ हो चुका है और गुणसूत्र द्वारा संचालित यह प्रक्रिया जीवन के नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है। नीचे महत्वपूर्ण नोट्स और pdf दिए गए हैं ।
अध्याय 7 : किशोरावस्था की ओर (Towards adolescence)
जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनके शरीर और मन में अनेक परिवर्तन आते हैं। यह अवस्था, जब एक बच्चा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से परिपक्व होने लगता है, किशोरावस्था (Adolescence) कहलाती है। यह बचपन और वयस्कता के बीच की कड़ी होती है।
किशोरावस्था क्या है?
जब कोई बच्चा 11 से 19 वर्ष की आयु के बीच प्रवेश करता है, तो उसमें तेजी से वृद्धि और यौन परिपक्वता के संकेत दिखाई देने लगते हैं। यही कालावधि किशोरावस्था कहलाती है।
यौवनावस्था (Puberty) क्या है?
किशोरावस्था की शुरुआत यौवनावस्था से होती है। यह वह समय होता है जब बच्चे के शरीर में ऐसे हार्मोन (Hormones) बनने लगते हैं जो उसे यौन परिपक्वता की ओर ले जाते हैं। लड़कियों में यह लगभग 10–12 वर्ष और लड़कों में 12–14 वर्ष की आयु में शुरू होती है।
किशोरावस्था में होने वाले मुख्य परिवर्तन
- शरीर की ऊँचाई में तेजी से वृद्धि।
- शरीर के विभिन्न अंगों का विकास (जैसे – मांसपेशियाँ, कंधे, स्तन, आदि)।
- स्वर (Voice) में परिवर्तन – लड़कों की आवाज भारी और गहरी हो जाती है।
- भावनात्मक और मानसिक परिवर्तन – आत्मविश्वास, जिज्ञासा और पहचान की भावना बढ़ती है।
- हार्मोन के स्राव में वृद्धि।
तथ्य बॉक्स:
“Adolescence” शब्द Latin शब्द “Adolescere” से बना है, जिसका अर्थ है – “बढ़ना या परिपक्व होना”।
किशोरावस्था में स्वास्थ्य और स्वच्छता
इस अवस्था में पसीना, त्वचा पर मुहांसे, शरीर की गंध और बालों की वृद्धि जैसी प्राकृतिक बातें सामान्य होती हैं।
स्वच्छता और संतुलित आहार इस समय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
- नियमित स्नान करें और शरीर को साफ रखें।
- संतुलित आहार लें जिसमें प्रोटीन, विटामिन और आयरन भरपूर हों।
- पर्याप्त नींद लें और व्यायाम करें।
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें और आत्मविश्वास बनाए रखें।
हार्मोन का कार्य
हार्मोन ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ होते हैं जो शरीर के विकास और कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
लड़कों में — टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) और
लड़कियों में — एस्ट्रोजन (Estrogen) मुख्य हार्मोन होते हैं।
किशोरों के लिए सुझाव
- अपनी दिनचर्या नियमित रखें।
- नशे, धूम्रपान और गलत संगति से दूर रहें।
- माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बातचीत करें।
- खुद पर विश्वास रखें और अपनी क्षमताओं को पहचानें।
किशोरावस्था एवं यौनारंभ (Adolescence and Sexual Maturity)
जब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होता है और उसके शरीर में ऐसे परिवर्तन शुरू होते हैं जिनसे वह प्रजनन (Reproduction) के योग्य हो जाता है, तब वह किशोरावस्था (Adolescence) और यौनारंभ (Sexual Maturity) की अवस्था में प्रवेश करता है। यह समय व्यक्ति के जीवन में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास का महत्वपूर्ण दौर होता है।
किशोरावस्था क्या है?
किशोरावस्था वह अवधि है जब बच्चे में बचपन से वयस्क बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें शरीर की लंबाई, वजन, आवाज, और जननांगों में तेजी से परिवर्तन होने लगते हैं। यह सामान्यतः 11 से 19 वर्ष की आयु के बीच होती है।
यौनारंभ (Sexual Maturity)
यौनारंभ वह अवस्था है जब किशोर का शरीर यौन परिपक्वता प्राप्त कर लेता है, अर्थात् वह प्रजनन करने में सक्षम हो जाता है। इस अवस्था में शरीर में हार्मोन (Hormones) का स्राव बढ़ जाता है, जिससे प्रजनन अंग विकसित होते हैं और द्वितीयक यौन लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
लड़कों में यौनारंभ के संकेत
- कंधों की चौड़ाई बढ़ना और मांसपेशियों का विकास।
- आवाज़ भारी हो जाना।
- चेहरे, बगल और जननांगों के आसपास बाल उगना।
- टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव बढ़ना।
लड़कियों में यौनारंभ के संकेत
- स्तनों का विकास।
- शरीर का आकार स्त्रीसुलभ होना।
- मासिक धर्म (Menstruation) की शुरुआत।
- एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव बढ़ना।
महत्वपूर्ण तथ्य:
यौनारंभ की आयु हर व्यक्ति में समान नहीं होती। यह वंशानुगत गुणों, पोषण, जलवायु और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।
द्वितीयक यौन लक्षण (Secondary Sexual Characters)
द्वितीयक यौन लक्षण वे बाहरी परिवर्तन हैं जो यौनारंभ के दौरान शरीर में दिखाई देते हैं और जो लड़के और लड़की को एक-दूसरे से अलग पहचान देते हैं।
| लड़कों में | लड़कियों में |
|---|---|
| आवाज भारी होना | स्तनों का विकास |
| दाढ़ी-मूंछ उगना | मासिक धर्म का प्रारंभ |
| कंधे चौड़े होना | कमर चौड़ी होना |
हार्मोन की भूमिका
हार्मोन शरीर के नियंत्रण तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
टेस्टोस्टेरोन — लड़कों में द्वितीयक यौन लक्षणों को नियंत्रित करता है।
एस्ट्रोजन — लड़कियों में स्तन विकास और मासिक धर्म को नियंत्रित करता है।
ये दोनों हार्मोन पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary gland) के संकेतों से सक्रिय होते हैं।
स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के सुझाव
- शरीर को साफ रखें और रोजाना स्नान करें।
- स्वच्छ कपड़े पहनें और संतुलित आहार लें।
- शारीरिक परिवर्तनों से डरें नहीं — यह प्राकृतिक प्रक्रिया है।
- माता-पिता या शिक्षक से खुलकर बातचीत करें।
यौनारंभ में होने वाले परिवर्तन
यौनारंभ (Sexual maturity) के समय किशोरों के शरीर व मन में कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं। नीचे आपने जो मुख्य बिंदु बताए थे — उन्हीं के अनुसार व्यवस्थित, सरल तथा परीक्षोन्मुख HTML कंटेंट दिया गया है।
1. शारीरिक आकृति में परिवर्तन
किशोरावस्था में शरीर की लंबाई, भार और अंगों का अनुपात बदलता है। लड़कों में कंधे चौड़े होते हैं और मांसपेशियों का विकास तेज होता है; लड़कियों में कमर चौड़ी होने और शरीर का स्टोर-आकृति (फिगर) विकसित होने के लक्षण दिखते हैं।
- तेज़ वृद्धि (growth spurt) — ऊँचाई और वजन में अचानक बढ़ोतरी।
- अंगों का अनुपात बदलना — सिर के अनुपात से शरीर लंबा दिखना।
- मांसपेशियों व वसा का बँटवारा लिंगानुसार परिवर्तित होना।
सुझाव: संतुलित आहार (प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन) और नियमित व्यायाम आवश्यक हैं।
2. स्वर (Voice) में परिवर्तन
खासकर लड़कों में लैरिंक्स (voice box) का विकास और वॉइस कॉर्ड्स की मोटाई बढ़ने से आवाज गहरी और भारी हो जाती है। इस दौरान आवाज़ में फटी-फटी या अस्थायी बदलाव (voice cracks) सामान्य हैं।
- लैरिंक्स का विकास → आवाज़ का गहरा होना।
- अस्थायी अनियमितताएँ (voice breaks) — चिंता की बात नहीं।
सुझाव: गले पर दबाव न डालें, ज़ोर से चिल्लाने से बचें और पर्याप्त आराम रखें।
3. जनन अंगों का विकास
यौन परिपक्वता के साथ जनन-अंग (reproductive organs) बढ़ते और परिपक्व होते हैं — लड़कों में अंडकोश और लिंग का विकास, महिलाओं में गर्भाशय और अंडाशय का विकास तथा स्तनों का विकास शामिल है।
लड़केलड़कियाँ
| टेस्टिस का विकास, शुक्राणु का उत्पादन शुरू होना | अंडाशय में अंडों का परिपक्व होना, मासिक धर्म का आरम्भ |
| स्क्रोटम और जननांगों में वृद्धि | गर्भाशय व योनि का विकास |
नोट: ये परिवर्तन धीरे-धीरे होते हैं और सभी में एक ही आयु पर नहीं होते — अनुवांशिकता, पोषण और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
4. मानसिक, बौद्धिक और सम्मवेगात्मक (emotional) परिपक्वता
किशोरावस्था में न केवल शारीरिक बदलते हैं, बल्कि विचारों, निर्णय लेने की योग्यता और भावनाओं में भी बड़े बदलाव आते हैं। आत्म-परिचय, स्वतंत्रता की चाह, मूड स्विंग्स और सामाजिक पहचान की खोज आम हैं।
- बौद्धिक: तर्क शक्ति बेहतर होती है, समस्या समाधान के कौशल में वृद्धि।
- मानसिक: आत्म-छवि (self-image), आत्म-सम्मान और पहचान के विषय महत्वपूर्ण बनते हैं।
- सम्मवेगात्मक: तेज़ भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ, कभी-कभी अस्थिर मूड (mood swings)।
सुझाव: माता-पिता/शिक्षकों से खुलकर बात करें, सकारात्मक उपलब्धियों पर ध्यान दें और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखें। आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग लाभकारी हो सकती है।
5. स्वेद (sweat) एवं तैलीय (sebaceous) ग्रंथियों की सक्रियता में वृद्धि
हार्मोनल परिवर्तन के कारण पसीना और त्वचा के तैलीय ग्रंथियों की सक्रियता बढ़ जाती है। इससे शरीर की गंध, तेलीय त्वचा और मुहांसे (acne) जैसी समस्याएँ सामान्य रूप से होती हैं।
- अधिक पसीना और शरीर से गंध आना — रोज़ाना स्नान और स्वच्छ कपड़े आवश्यक।
- त्वचा का अधिक तेल बनना — त्वचा की सफाई और हल्की मॉइस्चराइज़िंग ज़रूरी।
- मुहांसों का होना — असहज पर सामान्य; सही सफाई व त्वचा देखभाल से नियंत्रित किया जा सकता है।
हाइजीन टिप्स: रोजाना स्नान, चेहरे को हल्के क्लीनर से धोना, तेलीय प्रोڊक्टों का सीमित उपयोग और यदि ज़रूरी हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
नोट:-
यौनारंभ के दौरान किशोरों में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कई परिवर्तन होते हैं — शारीरिक आकृति, स्वर, जनन अंग, मानसिक परिपक्वता और त्वचा/पसीना से जुड़ी समस्याएँ। ये सभी परिवर्तन सामान्य हैं और सही पोषण, स्वच्छता, समझ और समर्थन से सहज रूप से संभाले जा सकते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न:-
- किशोरावस्था कब सामान्यतः शुरू मानी जाती है?
(a) 5–10 वर्ष (b) 11–19 वर्ष (c) 20–25 वर्ष (d) 2–5 वर्ष - लड़कियों में मासिक धर्म किसका संकेत है?
(a) हार्मोनल असंतुलन (b) यौन परिपक्वता (c) रोग (d) भूख बढ़ना - किस हार्मोन से लड़कों में द्वितीयक यौन लक्षण प्रेरित होते हैं?
(a) एस्ट्रोजन (b) इन्सुलिन (c) टेस्टोस्टेरोन (d) थायरॉक्सिन - स्वर में अचानक फटने (voice cracks) का सामान्य कारण क्या है?
(a) दाँत गिरना (b) लैरिंक्स व वॉइस कॉर्ड का विकास (c) आँखों का विकास (d) त्वचा का तेल बढ़ना - यौनारंभ के समय त्वचा पर मुहांसों का कारण क्या है?
(a) पानी कम पीना (b) तैलीय ग्रंथियों की सक्रियता (c) व्यायाम की कमी (d) बालों का झड़ना - किसमें वृद्धि होने पर मानवीय कंकाल का अनुपात बदलता है?
(a) सिर का आकार (b) वृद्धि स्पर्ट (growth spurt) (c) नाखून की लंबाई (d) दाँतों की संख्या - कौन-सा उपाय किशोरों के लिए उचित नहीं है?
(a) संतुलित आहार (b) नियमित व्यायाम (c) खुले मन से बातचीत को प्रोत्साहित करना (d) नशे की आदतें अपनाना - किससे किशोरों की भावनात्मक समस्याओं में सहायता मिल सकती है?
(a) माता-पिता/शिक्षक/काउंसलर से बातचीत (b) अकेले रहना और समस्या दबा लेना (c) अनियंत्रित क्रोध (d) नशीली दवाओं का सेवन
उत्तर:
1.(b) 2.(b) 3.(c) 4.(b) 5.(b) 6.(b) 7.(d) 8.(a)
एडम्स एप्पल (Adam’s Apple)
किशोरावस्था के दौरान बालकों के गले में एक उभार दिखाई देने लगता है जिसे एडम्स एप्पल कहा जाता है। यह उभार गले के अंदर स्थित कंठनली (larynx) के बढ़ने के कारण बनता है।
कंठनली के बढ़ने से आवाज़ भारी और मोटी हो जाती है। यह परिवर्तन प्रायः लड़कों में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जबकि लड़कियों में यह बहुत छोटा या अस्पष्ट होता है।
गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters)
किशोरावस्था के दौरान शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होते हैं जो व्यक्ति को पुरुष या स्त्री की पहचान देते हैं। इन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहा जाता है। ये लक्षण यौन ग्रंथियों द्वारा स्रावित हार्मोनों के प्रभाव से विकसित होते हैं।
लड़कों में गौण लैंगिक लक्षण
- मूंछ और दाढ़ी का आना
- आवाज़ का भारी होना
- कंधों का चौड़ा होना
- छाती पर बालों का उगना
- मांसपेशियों का विकसित होना
लड़कियों में गौण लैंगिक लक्षण
- स्तनों का विकास
- कमर का चौड़ा होना
- शरीर का कोमल और गोलाकार होना
- आवाज़ का मधुर रहना
- जांघों और बगल के बालों का उगना
इन लक्षणों के विकसित होने से बालक और बालिका शारीरिक रूप से परिपक्व होते हैं तथा यौनारंभ की अवस्था में प्रवेश करते हैं।
किशोरावस्था में हार्मोन एवं उनका नियंत्रण
किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होते हैं। हार्मोन रासायनिक पदार्थ हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) द्वारा स्रावित किए जाते हैं। यौवनारंभ के साथ शरीर में विभिन्न ग्रंथियाँ सक्रिय हो जाती हैं।
लड़कों में वृषण (Testes) से टेस्टोस्टेरॉन नामक पौरुष हार्मोन का स्रवण प्रारंभ होता है जो चेहरे पर बालों के उगने, आवाज़ के भारी होने तथा मांसपेशियों के विकास के लिए उत्तरदायी होता है।
लड़कियों में अंडाशय (Ovaries) से एस्ट्रोजन नामक स्त्री हार्मोन स्रावित होता है जिससे स्तनों का विकास एवं शरीर का कोमल होना आरंभ होता है।
इन सभी हार्मोनों का नियंत्रण पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) द्वारा स्रावित हार्मोनों से होता है।
मुख्य हार्मोन एवं उनके कार्य
| ग्रंथि | हार्मोन | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| वृषण (Testes) | टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) | चेहरे पर बाल आना, आवाज़ भारी होना, मांसपेशियों का विकास |
| अंडाशय (Ovaries) | एस्ट्रोजन (Estrogen) | स्तनों का विकास, शरीर का कोमल एवं गोलाकार होना |
| पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) | विकास नियंत्रक हार्मोन (Growth & Stimulating Hormones) | अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करना, यौवनारंभ को प्रेरित करना |
इस प्रकार हार्मोन शरीर की वृद्धि, यौन परिपक्वता और किशोरावस्था में होने वाले सभी शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों को नियंत्रित करते हैं।
जनन प्रक्रिया प्रारंभ करने में हार्मोन की भूमिका
किशोरावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनों का स्रवण बढ़ जाता है। ये हार्मोन जनन अंगों के विकास, यौन कोशिकाओं (शुक्राणु एवं अंडाणु) के निर्माण तथा द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करते हैं।
इस प्रकार, हार्मोन जनन प्रक्रिया को प्रारंभ करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
हार्मोन के कार्य का क्रम:-
पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
↓ (स्रावित करती है नियंत्रक हार्मोन)
→ वृषण (Testes) / अंडाशय (Ovaries)
↓ (सक्रिय होते हैं)
→ पौरुष हार्मोन (Testosterone) / स्त्री हार्मोन (Estrogen)
↓
→ जनन अंगों का विकास
↓
→ शुक्राणु एवं अंडाणु का निर्माण
↓
→ जनन प्रक्रिया का आरंभ
अर्थात्, पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन अन्य ग्रंथियों को सक्रिय करते हैं, जिससे यौन हार्मोनों का निर्माण होता है और अंततः जनन प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
मानव में जनन काल की अवधि, ऋतुश्राव, रजोदर्शन एवं रजोनिवृत्ति
मानव में जनन क्षमता जीवन के एक निश्चित काल में सीमित रहती है। यह काल महिलाओं और पुरुषों में भिन्न होता है तथा हार्मोनल परिवर्तनों से नियंत्रित होता है।
1. जनन काल की अवधि (Reproductive Age Period)
मानव में यौवनारंभ के बाद एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति जनन क्रिया करने में सक्षम रहता है।
- लड़कियों में: सामान्यतः 12 से 45 वर्ष की आयु तक।
- लड़कों में: लगभग 13 वर्ष से लेकर जीवन के अंतिम चरण तक शुक्राणु निर्माण जारी रहता है।
2. ऋतुश्राव (Menstruation)
महिलाओं में प्रत्येक माह गर्भाशय की भीतरी परत (Endometrium) मोटी हो जाती है ताकि गर्भ ठहरने की स्थिति में भ्रूण का रोपण हो सके।
यदि निषेचन नहीं होता, तो यह परत रक्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है।
इस प्रक्रिया को ऋतुश्राव (Menstruation) कहा जाता है।
- यह सामान्यतः हर 28 से 30 दिन में होती है।
- इसकी अवधि लगभग 3 से 5 दिन तक रहती है।
- इस समय शरीर में हार्मोनल परिवर्तन और हल्की असुविधा सामान्य होती है।
3. रजोदर्शन (Menarche)
किशोरावस्था में जब किसी लड़की को पहली बार ऋतुश्राव होता है, उसे रजोदर्शन (Menarche) कहा जाता है।
यह यौन परिपक्वता की शुरुआत का संकेत है और प्रजनन काल के आरंभ को दर्शाता है।
- सामान्यतः 11 से 13 वर्ष की आयु में होता है।
- यह हार्मोन — विशेषकर एस्ट्रोजन (Estrogen) — के प्रभाव से होता है।
4. रजोनिवृत्ति (Menopause)
महिलाओं में एक निश्चित आयु के बाद जब मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है, तो इसे रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं।
यह प्रजनन काल की समाप्ति का संकेत है।
- सामान्यतः 45 से 50 वर्ष की आयु में होती है।
- इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घट जाता है।
- गर्माहट महसूस होना (hot flashes), मूड परिवर्तन, नींद की समस्या जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।
सारांश तालिका:
| क्रम | प्रक्रिया | मुख्य विशेषताएँ | आयु सीमा |
|---|---|---|---|
| 1 | रजोदर्शन (Menarche) | पहली बार मासिक धर्म का आना | 11–13 वर्ष |
| 2 | ऋतुश्राव (Menstruation) | हर 28–30 दिन में नियमित मासिक धर्म चक्र | प्रजनन काल के दौरान |
| 3 | रजोनिवृत्ति (Menopause) | मासिक धर्म का स्थायी रूप से बंद होना | 45–50 वर्ष |
नोट: रजोदर्शन से लेकर रजोनिवृत्ति तक का काल महिलाओं में जनन क्षमता की अवधि कहलाता है।
यह अवधि हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करती है और शरीर के जैविक परिपक्वता का संकेत है।
नोट: किशोरावस्था की ओर मानव जीवन का वह चरण है जब शरीर में यौवनारम्भ होता है। इस समय गुणसूत्र सक्रिय होकर हार्मोनों के स्राव को नियंत्रित करते हैं। यौवनारम्भ के दौरान बालक और बालिका दोनों में शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन दिखाई देते हैं जिन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहा जाता है। गौण लैंगिक लक्षण जैसे स्वर परिवर्तन, दाढ़ी-मूंछ का उगना या स्तन वृद्धि आदि शरीर को परिपक्व बनाते हैं। बालिकाओं में राजोदर्शन इस किशोरावस्था की ओर का प्रमुख संकेत है। राजोदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि यौवनारम्भ पूर्ण रूप से प्रारंभ हो चुका है और गुणसूत्र द्वारा संचालित यह प्रक्रिया जीवन के नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
संतति का लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है?
मनुष्य में संतति का लिंग (पुरुष या स्त्री) पिता द्वारा दिए गए युग्मक (sperm) से निर्धारित होता है।
हर मनुष्य के शरीर में 23 जोड़ी गुणसूत्र (chromosomes) होते हैं, जिनमें से एक जोड़ी यौन गुणसूत्र कहलाती है।
ये ही लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी होते हैं।
1. यौन गुणसूत्र (Sex Chromosomes)
- महिलाओं में — दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं।
- पुरुषों में — एक X तथा एक Y गुणसूत्र (XY) होता है।
2. निषेचन के समय लिंग निर्धारण
जब निषेचन (fertilization) होता है —
- महिला के अंडाणु (ovum) में हमेशा X गुणसूत्र होता है।
- पुरुष का शुक्राणु (sperm) या तो X या Y गुणसूत्र ले जाता है।
| अंडाणु (Ovum) | शुक्राणु (Sperm) | परिणाम (Result) | संतति का लिंग |
|---|---|---|---|
| X | X | XX | लड़की (Female) |
| X | Y | XY | लड़का (Male) |
3. निष्कर्ष:
यदि शुक्राणु X गुणसूत्र वाला अंडाणु से मिल जाए, तो लड़की (XX) उत्पन्न होती है।
यदि शुक्राणु Y गुणसूत्र वाला अंडाणु से मिल जाए, तो लड़का (XY) उत्पन्न होता है।
4. महत्वपूर्ण तथ्य
- संतान का लिंग पिता के शुक्राणु से निर्धारित होता है, माँ से नहीं।
- लड़का या लड़की होना एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है — इसमें किसी का नियंत्रण नहीं होता।
- लिंग के आधार पर भेदभाव करना सामाजिक रूप से अनुचित और कानूनी अपराध है।
फ्लो चार्ट: लिंग निर्धारण प्रक्रिया
अंडाणु (X) ⬇️
शुक्राणु (X) ➡️ निषेचन ➡️ XX (लड़की)
या
शुक्राणु (Y) ➡️ निषेचन ➡️ XY (लड़का)
नोट:
मनुष्य में लिंग निर्धारण पिता के शुक्राणु में उपस्थित गुणसूत्र पर निर्भर करता है।
यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य जैव विविधता और प्रजनन संतुलन बनाए रखना है।
लिंग हार्मोन के अतिरिक्त अन्य हार्मोन
मानव शरीर में केवल लिंग हार्मोन ही नहीं, बल्कि अनेक अन्य हार्मोन भी शरीर की वृद्धि, चयापचय (metabolism), एवं विभिन्न शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये हार्मोन विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियों से स्रावित होते हैं।
| ग्रंथि का नाम | हार्मोन | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) | विकास हार्मोन (Growth Hormone) | शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। |
| थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid gland) | थायरॉक्सिन (Thyroxine) | ऊर्जा उत्पादन और चयापचय की गति को नियंत्रित करता है। |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इंसुलिन (Insulin) | रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। |
| अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) | एड्रेनालिन (Adrenaline) | आपात स्थितियों में शरीर को कार्य करने के लिए तैयार करता है (Fight or Flight response)। |
| अग्न्याशय एवं अधिवृक्क ग्रंथि | ग्लूकागन (Glucagon), कोर्टिसोल (Cortisol) | ऊर्जा स्तर बनाए रखने एवं तनाव नियंत्रण में सहायक। |
नोट: इन सभी हार्मोनों का संतुलन शरीर के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक है। इनका असंतुलन विभिन्न रोगों का कारण बन सकता है, जैसे – मधुमेह (Diabetes), बौनापन (Dwarfism), या ग्वाइटर (Goitre)।
कोट एवं मेंढक में जीवन-चक्र पूर्ण करने में हार्मोन का योगदान
विभिन्न जीवों के जीवन-चक्र में हार्मोन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये हार्मोन वृद्धि, कायांतरण (Metamorphosis) तथा वयस्क अवस्था प्राप्त करने की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
1. कोट (Silkworm) में हार्मोन की भूमिका
कोट के जीवन चक्र में अंडा → शिशु (लार्वा) → प्यूपा (कोया) → वयस्क कीट की अवस्थाएँ होती हैं। इन परिवर्तनों को एक्डीसोन (Ecdysone) नामक हार्मोन नियंत्रित करता है।
| अवस्था | नियंत्रित हार्मोन | कार्य |
|---|---|---|
| लार्वा से प्यूपा में परिवर्तन | एक्डीसोन (Ecdysone) | कायांतरण (Metamorphosis) प्रारंभ करता है। |
| विकास के समय | जुवेनाइल हार्मोन (Juvenile Hormone) | लार्वा अवस्था को बनाए रखता है और समय से पहले कायांतरण नहीं होने देता। |
नोट: जब जुवेनाइल हार्मोन की मात्रा घटती है और एक्डीसोन की मात्रा बढ़ती है, तब कायांतरण होता है और कोट वयस्क बनता है।
2. मेंढक में हार्मोन की भूमिका
मेंढक के जीवन-चक्र में अंडा → टैडपोल (शिशु मेंढक) → वयस्क मेंढक की अवस्थाएँ होती हैं। इस कायांतरण की प्रक्रिया में थायरॉक्सिन (Thyroxine) हार्मोन की प्रमुख भूमिका होती है।
| अवस्था | नियंत्रित हार्मोन | कार्य |
|---|---|---|
| टैडपोल अवस्था | थायरॉक्सिन (Thyroxine) | कायांतरण की शुरुआत करता है। पूंछ सिकुड़ने लगती है, पैर और फेफड़े विकसित होते हैं। |
| वयस्क मेंढक अवस्था | थायरॉक्सिन का उच्च स्तर | जल में रहने वाले टैडपोल को भूमि पर रहने योग्य वयस्क मेंढक में बदलता है। |
निष्कर्ष: मेंढक में थायरॉक्सिन हार्मोन की उपस्थिति कायांतरण के लिए आवश्यक है। यदि थायरॉक्सिन का उत्पादन बाधित हो जाए, तो कायांतरण अधूरा रह जाता है।
फ्लो चार्ट:-
अंडा → शिशु (लार्वा/टैडपोल) → हार्मोन सक्रिय → कायांतरण → वयस्क
जननात्मक स्वास्थ्य (Reproductive Health)
जननात्मक स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ जीवन का संकेत है। किशोरावस्था के दौरान शरीर में तीव्र परिवर्तन होते हैं, इसलिए इस समय जननात्मक स्वास्थ्य की देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है।
- शरीर की स्वच्छता बनाए रखना (व्यक्तिगत स्वच्छता)।
- संतुलित आहार लेना।
- नियमित व्यायाम एवं पर्याप्त नींद लेना।
- हानिकारक आदतों जैसे धूम्रपान, मद्यपान आदि से दूर रहना।
- भावनात्मक संतुलन बनाए रखना एवं तनाव से बचना।
- सुरक्षित एवं सम्मानजनक संबंध बनाए रखना।
नोट: जननांगों की सफाई एवं स्वास्थ्य की जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है ताकि संक्रमण या रोगों से बचा जा सके।
किशोर की पोषण आवश्यकताएँ (Nutritional Needs of Adolescents)
किशोरावस्था में शरीर तीव्र गति से बढ़ता है, हड्डियाँ मजबूत होती हैं और मांसपेशियाँ विकसित होती हैं। इस समय उचित पोषण अत्यंत आवश्यक होता है ताकि शारीरिक एवं मानसिक विकास सही दिशा में हो सके।
| पोषक तत्व | मुख्य स्रोत | महत्व |
|---|---|---|
| प्रोटीन | दालें, अंडा, दूध, सोयाबीन, मछली | शरीर की वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत। |
| कार्बोहाइड्रेट | चावल, रोटी, आलू, फल | ऊर्जा प्रदान करता है। |
| वसा | घी, तेल, मूंगफली, मेवे | ऊर्जा का भंडार एवं शरीर को गर्मी प्रदान करता है। |
| विटामिन एवं खनिज | फल, सब्जियाँ, दूध, अनाज | रोगों से बचाव एवं हड्डियों के विकास में सहायक। |
| लोहा (Iron) | पालक, चुकंदर, मांस, गुड़ | रक्त में हीमोग्लोबिन बनाने में सहायक। |
| कैल्शियम | दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियाँ | हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता है। |
सुझाव: किशोरों को फास्ट फूड से बचना चाहिए और ताजे, घर के बने संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए। साथ ही प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise)
किशोरावस्था के दौरान शरीर तीव्र गति से विकसित होता है। इस अवस्था में शारीरिक व्यायाम अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि यह शरीर को स्वस्थ, सशक्त एवं संतुलित बनाए रखने में सहायता करता है। व्यायाम न केवल शरीर के लिए बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
शारीरिक व्यायाम के प्रमुख लाभ
- मांसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
- रक्त संचार और पाचन क्रिया सुधरती है।
- अधिक ऊर्जा और स्फूर्ति प्राप्त होती है।
- तनाव और चिंता में कमी आती है।
- शरीर का मोटापा नियंत्रित रहता है।
- व्यक्ति का आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ती है।
व्यायाम के प्रमुख प्रकार
| व्यायाम का प्रकार | उदाहरण | मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| एरोबिक व्यायाम (Aerobic Exercise) | दौड़ना, साइकिल चलाना, तैरना | हृदय और फेफड़ों को मजबूत करता है। |
| स्ट्रेचिंग (Stretching) | योग, हल्की कसरत | शरीर को लचीला बनाता है और चोट से बचाव करता है। |
| स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) | पुश-अप्स, पुल-अप्स, हल्के भार उठाना | मांसपेशियों का विकास और हड्डियों की मजबूती। |
| मानसिक व्यायाम | ध्यान, प्राणायाम | मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि। |
व्यायाम करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- प्रत्येक दिन कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें।
- व्यायाम से पहले हल्का वार्मअप करें।
- अत्यधिक थकान से बचें और पर्याप्त पानी पिएँ।
- सुबह के समय खुली हवा में व्यायाम करना सबसे लाभकारी है।
- व्यायाम के बाद संतुलित आहार लेना न भूलें।
नशीली दवाओं (Drugs) का निषेध करें
किशोरावस्था में कई बार जिज्ञासा, साथियों का दबाव (peer pressure) या मानसिक तनाव के कारण कुछ युवक-युवतियाँ नशीली दवाओं (Drugs) का प्रयोग करने लगते हैं। प्रारम्भ में यह आदत के रूप में दिखाई देती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत (Addiction) का रूप ले लेती है, जिससे शरीर, मन और सामाजिक जीवन पर अत्यंत हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
नशीली दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव
| प्रभाव का क्षेत्र | मुख्य दुष्प्रभाव |
|---|---|
| शारीरिक | हृदय, यकृत, मस्तिष्क तथा फेफड़ों को क्षति; शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी। |
| मानसिक | ध्यान, स्मरण शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता में कमी; अवसाद, चिंता एवं आक्रोश। |
| सामाजिक | परिवार और समाज से दूरी, अपराध प्रवृत्ति और असामाजिक व्यवहार की संभावना। |
नशा छोड़ने और रोकने के उपाय
- माता-पिता और शिक्षकों से खुलकर बात करें।
- नशा करने वाले मित्रों की संगति से बचें।
- खेलकूद, संगीत, योग या किसी रचनात्मक गतिविधि में भाग लें।
- यदि लत लग चुकी हो तो डॉक्टर या काउंसलर की सहायता लें।
- टी.वी., रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से नशा-निवारण अभियानों में भाग लें।
नोट:- नशीली दवाओं से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संतुलन बिगड़ जाता है। हर किशोर को चाहिए कि वह ऐसी वस्तुओं से दूर रहे और अपने जीवन को स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सकारात्मक बनाए।
किशोरावस्था मानव जीवन का वह चरण है जब शरीर में यौवनारम्भ होता है। इस समय गुणसूत्र सक्रिय होकर हार्मोनों के स्राव को नियंत्रित करते हैं। यौवनारम्भ के दौरान बालक और बालिका दोनों में शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन दिखाई देते हैं जिन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहा जाता है। गौण लैंगिक लक्षण जैसे स्वर परिवर्तन, दाढ़ी-मूंछ का उगना या स्तन वृद्धि आदि शरीर को परिपक्व बनाते हैं। बालिकाओं में राजोदर्शन इस किशोरावस्था का प्रमुख संकेत है। राजोदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि यौवनारम्भ पूर्ण रूप से प्रारंभ हो चुका है और गुणसूत्र द्वारा संचालित यह प्रक्रिया जीवन के नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
प्रमुख शब्द एवं उनके अर्थ
| क्रमांक | प्रमुख शब्द | अर्थ / परिभाषा |
|---|---|---|
| 1. | ऐडम्स ऐपल (Adam’s Apple) | गले में उभरी हुई संरचना जो स्वरयंत्र का भाग है; लड़कों में यौवन के समय अधिक स्पष्ट होती है। |
| 2. | किशोरावस्था (Adolescence) | वह अवस्था जब बच्चा शारीरिक एवं मानसिक रूप से परिपक्व होकर वयस्क बनता है (आयु 11-19 वर्ष)। |
| 3. | एड्रिनेलिन (Adrenaline) | अधिवृक्क ग्रंथि से स्रावित हार्मोन जो भय, क्रोध या तनाव की स्थिति में शरीर को तत्पर बनाता है। |
| 4. | संतुलित आहार (Balanced Diet) | जिसमें सभी पोषक तत्व उचित मात्रा में हों ताकि शरीर स्वस्थ और सक्रिय रहे। |
| 5. | अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) | ऐसी ग्रंथियाँ जो हार्मोन को सीधे रक्त में छोड़ती हैं और शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। |
| 6. | एस्ट्रोजन (Estrogen) | मादा हार्मोन जो अंडाशय से निकलता है और स्त्रियों में गौण लैंगिक लक्षणों का विकास करता है। |
| 7. | हार्मोन (Hormone) | रासायनिक पदार्थ जो शरीर की वृद्धि, विकास और क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। |
| 8. | इन्सुलिन (Insulin) | अग्न्याशय से स्रावित हार्मोन जो रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित करता है। |
| 9. | पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) | “मास्टर ग्रंथि” जो अन्य सभी अंतःस्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है। |
| 10. | यौवनारम्भ (Puberty) | वह समय जब बच्चे के शरीर में जनन से संबंधित परिवर्तन प्रारंभ होते हैं। |
| 11. | जननात्मक स्वास्थ्य (Reproductive Health) | शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ स्थिति जिससे व्यक्ति स्वस्थ जनन करने में सक्षम हो। |
| 12. | गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters) | यौवन के समय विकसित होने वाले लक्षण जैसे लड़कों में दाढ़ी-मूंछ, लड़कियों में स्तनों का विकास आदि। |
| 13. | लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) | गुणसूत्र जो व्यक्ति का लिंग निर्धारित करते हैं — पुरुष: XY, स्त्री: XX। |
| 14. | लक्ष्य-स्थल (Target Site) | वह अंग या ऊतक जहाँ किसी हार्मोन का प्रभाव दिखाई देता है। |
| 15. | टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) | नर हार्मोन जो वृषण से स्रावित होता है और पुरुषों में गौण लैंगिक लक्षणों का विकास करता है। |
| 16. | थायरॉक्सिन (Thyroxine) | थायरॉयड ग्रंथि से स्रावित हार्मोन जो शरीर की वृद्धि और चयापचय को नियंत्रित करता है। |
| 17. | स्वरयंत्र (Larynx) | गले का अंग जिससे आवाज उत्पन्न होती है; यौवन के समय लड़कों में बड़ा और स्पष्ट दिखता है (ऐडम्स ऐपल)। |
आपने क्या सीखा
- यौवनारम्भ होने पर व्यक्ति जनन के योग्य हो जाता है। 11 वर्ष की आयु से 19 वर्ष तक की अवधि को किशोरावस्था कहा जाता है।
- यौवनारम्भ की अवस्था में जनन अंगों में वृद्धि होती है तथा शरीर के विभिन्न भागों पर बाल आने लगते हैं। लड़कियों में स्तनों का विकास होता है तथा लड़कों में दाढ़ी-मूंछें उगने लगती हैं। इस अवस्था में स्वरयंत्र की वृद्धि के कारण लड़कों की आवाज भारी या फटने लगती है।
- किशोरावस्था में शरीर की लंबाई तेजी से बढ़ती है।
- हार्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ हैं जो शरीर की वृद्धि और जनन अंगों के परिपक्व होने को नियंत्रित करते हैं।
- पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) “मास्टर ग्रंथि” कहलाती है क्योंकि यह वृद्धि हार्मोन का स्राव करती है और अन्य ग्रंथियों — वृषण, अंडाशय, थायरॉइड तथा एड्रिनल — को भी हार्मोन स्रावित करने के लिए प्रेरित करती है।
- अग्न्याशय से इन्सुलिन, थायरॉयड से थायरॉक्सिन और एड्रिनल ग्रंथि से एड्रिनेलिन हार्मोन स्रावित होते हैं।
- टेस्टोस्टेरॉन नर हार्मोन है तथा एस्ट्रोजन मादा हार्मोन है।
- गर्भाशय की दीवार निषेचित अंडाणु (युग्मनज) को ग्रहण करने हेतु तैयार होती है। यदि निषेचन नहीं होता तो यह आंतरिक सतह शरीर से रक्त के साथ बाहर निकल जाती है, जिसे ऋतुस्राव या रजोधर्म कहते हैं।
- अजन्मे शिशु का लिंग निर्धारण इस पर निर्भर करता है कि युग्मनज में XX गुणसूत्र (स्त्री) हैं या XY गुणसूत्र (पुरुष)।
- किशोरावस्था में संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक व्यायाम करना तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
अभ्यास — हल (Solved in Detail)
प्रश्न 1: शरीर में होने वाले परिवर्तनों के लिए उत्तरदायी अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्त्रावित पदार्थ का क्या नाम है?
उत्तर: ऐसे रासायनिक पदार्थों को हार्मोन (Hormones) कहा जाता है। हार्मोन अंतःस्रावी (endocrine) ग्रंथियों द्वारा सीधे रक्त में स्रावित होते हैं और वे शरीर के विभिन्न लक्ष्य-स्थान (target sites) पर जाकर विकास, वृद्धि, चयापचय और जनन से संबंधित प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 2: किशोरावस्था को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किशोरावस्था (Adolescence) वह अवस्थ है जब बच्चा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से वयस्कता की ओर बढ़ता है। सामान्यतः यह आयु सीमा 11 से 19 वर्ष के बीच मानी जाती है। इस दौरान यौवनारम्भ (puberty) के कारण जनन अंग परिपक्व होते हैं एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षण प्रकट होते हैं।
प्रश्न 3: ऋतुस्त्राव क्या है? वर्णन कीजिए।
उत्तर: ऋतुस्त्राव (Menstruation / Menstruation) अर्थात् मासिक धर्म — महिलाओं में गर्भाशय की आंतरिक परत (endometrium) हर मास गर्भ ठहरने के लिये मोटी होती है। यदि अंडाणु निषेचित नहीं होता तो यह परत रक्त के साथ शरीर से बाहर निकल जाती है। इसे ऋतुस्त्राव या मासिक धर्म कहा जाता है। आम तौर पर इसका चक्र लगभग 28–30 दिन का और अवधि 3–5 दिन होती है।
प्रश्न 4: यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवर्तनों की सूची बनाइए।
उत्तर (मुख्य परिवर्तन):
-
- जनन अंगों का विकास (लड़कों में वृषण व लिंग का विकास; लड़कियों में अंडाशय, गर्भाशय व स्तनों का विकास)।
- द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का प्रगटन — (लड़कों में दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज, कंधे चौड़े होना; लड़कियों में स्तनों का विकास, कमर व जाँघों का गोल होना)।
- ऊँचाई और वजन में तीव्र वृद्धि (growth spurt)।
- स्वरयंत्र (larynx) का विकास जिससे आवाज़ में परिवर्तन (voice cracks) विशेषकर लड़कों में।
- त्वचा की तैलीयता और स्वेद ग्रंथियों की सक्रियता—जिससे मुंहासे और शरीर की गंध हो सकती है।
- भावनात्मक तथा बौद्धिक परिपक्वता — आत्म-छवि, स्वतंत्रता की भावना, मूड स्विंग्स आदि।
प्रश्न 5: दो कॉलम वाली एक सारणी बनाइए जिसमें अंतःस्रावी ग्रंथियों के नाम तथा उनके द्वारा स्रावित हार्मोन के नाम दर्शाए गए हों।
उत्तर (सारणी):
| अंतःस्रावी ग्रंथि | स्रावित हार्मोन |
|---|---|
| पीयूष ग्रंथि (Pituitary) | विकास हार्मोन (Growth hormone), FSH, LH (यौन-नियंत्रक हॉर्मोन्स इत्यादि) |
| थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid) | थायरॉक्सिन (Thyroxine) |
| अग्न्याशय (Pancreas) | इन्सुलिन, ग्लूकागन |
| अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal) | एड्रेनालिन (Adrenaline), कोर्टिसोल |
| वृषण (Testes) | टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) |
| अंडाशय (Ovaries) | एस्ट्रोजन (Estrogen), प्रोजेस्टेरोन |
प्रश्न 6: लिंग हार्मोन क्या है? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके प्रकार्य बताइए।
उत्तर:
लिंग-हार्मोन वे प्रधान हार्मोन हैं जो पुरुषत्व या स्त्रीत्व से जुड़े द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करते हैं। मुख्यतः दो प्रकार:
- टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) — यह मुख्य पुरुष (नर) हार्मोन है, वृषण (testes) से स्रावित होता है। नामकरण: लैटिन/रसायनी नाम के अनुरूप अंग्रेजी में यही नाम प्रचलित है।
- एस्ट्रोजन (Estrogen) — यह मुख्य महिला (स्त्री) हार्मोन है, अंडाशय (ovaries) से स्रावित होता है। नामकरण: “estrus” (यौन-चक्र) से संबंधित शब्दों से आया है।
मुख्य प्रकार्य (Functions):
- टेस्टोस्टेरॉन: मादा-पुरुष में मांसपेशियों का विकास, चेहरे/छाती पर बाल उगना, आवाज का गहरा होना (लड़कों में), यौन प्रवृत्ति और शुक्राणु निर्माण में सहायता।
- एस्ट्रोजन: स्तनों का विकास, गर्भाशय की परत का निर्माण, महिलाओं में मासिक चक्र का नियंत्रण, शरीर की वसा वितरण शैली (जाँघ-कमर) निर्धारित करना।
नोट: दोनों ही हार्मोन शरीर के अन्य अंगों पर भी प्रभाव डालते हैं और उनका संतुलन स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 7: सही विकल्प चुनिए — (क), (ख), (ग) में से।
(क) किशोर को सचेत रहना चाहिए कि वह क्या खा रहे हैं, क्योंकि :
विकल्प: (1) उचित भोजन से उनके मस्तिष्क का विकास होता है। (2) शरीर में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है। (3) किशोर को हर समय भूख लगती रहती है। (4) किशोर में स्वाद कलिकाएँ भलीभाँति विकसित होती हैं।
सही उत्तर: (ii) (2) — कारण: किशोरावस्था में तीव्र शारीरिक वृद्धि होती है, इसलिए शरीर को प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन व विटामिन की अधिक आवश्यकता होती है। विकल्प (1) आंशिक रूप से सही है पर मुख्य कारण (2) अधिक उचित व्याख्यात्मक उत्तर है।
(ख) स्त्रियों में जनन आयु (काल) का प्रारम्भ उस समय होता है जब उनके :
विकल्प: (1) ऋतुस्राव प्रारम्भ होता है। (2) स्तन विकसित होना प्रारम्भ कर देते हैं। (3) शारीरिक भार में परिवर्तन। (4) शरीर की लंबाई बढ़ती है।
सही उत्तर: (1) (ऋतुस्राव का प्रारम्भ) — कारण: रजोदर्शन (पहला मासिक धर्म) सीधे जनन आयु के आरम्भ का संकेत है; स्तन विकास भी संकेत है पर वास्तविक जननात्मक क्षमता का प्रमाण ऋतुस्राव है।
(ग) निम्न में से कौन सा आहार किशोर के लिए सर्वोचित है:
विकल्प: (1) चिप्स, नूडल्स, कोक (2) रोटी, दाल, सब्जियाँ (3) चावल, नूडल्स, बर्गर (4) शाकाहारी टिक्की, चिप्स तथा लेमन पेय
सही उत्तर: (ii) (रोटी, दाल, सब्जियाँ) — कारण: यह संयोजन प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आवश्यक विटामिन-खनिज प्रदान करता है और संतुलित आहार के निकट है।
प्रश्न 8: निम्न पर टिप्पणी लिखिए — (i) ऐडॅम्स ऐपॅल, (ii) गौण लैंगिक लक्षण, (iii) गर्भस्थ शिशु में लिंग निर्धारण
सॉल्व इन डिटेल:
(i) ऐडॅम्स ऐपॅल (Adam’s Apple):
ऐडॅम्स ऐपॅल गले में स्थित स्वरयंत्र (larynx) की अग्रभागीय उभार है जो विशेषकर पुरुषों में यौवन के बाद अधिक प्रमुख हो जाती है। इससे पहले कि यह बाहर दिखे, लैरिंक्स के विकास से वॉइस कॉर्ड मोटे होते हैं और आवाज़ गहरी हो जाती है। ऐडॅम्स ऐपॅल का दिखना और स्वर बदलना यौवन के हार्मोनल प्रभाव — विशेषकर टेस्टोस्टेरॉन — के कारण होता है। यह एक सामान्य, प्राकृतिक परिवर्तन है और इसका कोई रोग संबंधी अर्थ नहीं होता।
(ii) गौण लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters):
गौण लैंगिक लक्षण वे बाहरी शारीरिक लक्षण हैं जो यौवनारम्भ के समय प्रकट होते हैं तथा पुरुषों व महिलाओं के बीच भिन्नता दिखाते हैं। उदाहरण — पुरुषों में दाढ़ी-मूंछ, छाती पर बाल, आवाज का भारी होना; महिलाओं में स्तनों का विकास, कमर/जाँघ का गोल होना। ये लक्षण सीधे जनन अंगों से प्रजनन क्षमता का संकेत नहीं देते परंतु शारीरिक परिपक्वता और लिंग-विशेष विशेषताओं की पहचान कराते हैं। इनका विकास हार्मोनों (टेस्टोस्टेरॉन, एस्ट्रोजन) के द्वारा नियंत्रित होता है।
(iii) गर्भस्थ शिशु में लिंग निर्धारण (Sex Determination in Fetus):
मानव भ्रूण में लिंग निर्धारण निषेचन (fertilization) के समय होता है। माँ के अंडाणु में हमेशा X गुणसूत्र होता है; पिता के शुक्राणु में X या Y में से कोई एक गुणसूत्र होता है। यदि शुक्राणु X ले जाता है और अंडाणु (X) से मिला तो भ्रूण XX बनेगा — लड़की; यदि शुक्राणु Y ले जाता है और अंडाणु (X) से मिला तो XY बनेगा — लड़का। अतः संतति का लिंग पिता के शुक्राणु द्वारा निर्धारित होता है। यह एक याद रखने योग्य और सरल तथ्य है।
9. शब्द पहेली :
शब्द बनाने के लिए संकेतों के सहारे शब्द भरिए —
बाएँ से दाएँ ओर
- एड्रिनल ग्रंथि से स्रावित हार्मोन
- मेंढक में लार्वा से वयस्क तक होने वाला परिवर्तन
- अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित पदार्थ
- किशोरावस्था को कहा जाता है
ऊपर से नीचे की ओर
- अंतःस्रावी ग्रंथियों का दूसरा नाम
- स्वर पैच करने वाला अंग
- स्त्री हार्मोन
| 1 | 4 | 2 |
| 3 | ह | ॉ |
| र | ् | म |
| ो | न | े |
(संकेत: उत्तर – एड्रिनेलिन, कायांतरण, हार्मोन, यौवन, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ, स्वरयंत्र, एस्ट्रोजन)
10. ग्राफ एवं सारणी आधारित प्रश्न
नीचे दी गई सारणी में आयु वृद्धि के अनुसार लड़कों एवं लड़कियों की अनुमानित लंबाई के आँकड़े दिए गए हैं। सारणी का अध्ययन कर ग्राफ बनाइए तथा बताइए कि आयु बढ़ने के साथ लड़कों एवं लड़कियों की लंबाई में क्या परिवर्तन होता है?
| आयु (वर्षों में) | लड़के (सेमी में) | लड़कियाँ (सेमी में) |
|---|---|---|
| 0 | 53 | 53 |
| 4 | 96 | 92 |
| 8 | 114 | 120 |
| 12 | 129 | 133 |
| 16 | 150 | 150 |
| 20 | 173 | 165 |
बहुविकल्पीय प्रश्न:-
- किशोरावस्था सामान्यतः किस आयु-सीमा के बीच मानी जाती है?
(a) 5–10 वर्ष (b) 11–19 वर्ष (c) 20–25 वर्ष (d) 2–5 वर्ष - यौवनारम्भ (Puberty) के समय किस ग्रंथि का महत्त्वपूर्ण नियंत्रण होता है?
(a) अग्न्याशय (b) कर्ण ग्रंथि (c) पीयूष ग्रंथि (d) लसिका ग्रंथि - निम्न में से कौन-सा हार्मोन पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित करने का मुख्य कारण है?
(a) एस्ट्रोजन (b) इंसुलिन (c) टेस्टोस्टेरॉन (d) थायरॉक्सिन - लड़कियों में पहली बार मासिक धर्म को क्या कहते हैं?
(a) रजोनिवृत्ति (b) रजोदर्शन (Menarche) (c) गर्भनिरोध (d) ऋतुचक्र - आवाज में भारीपन और ऐडम्स-ऐपल का स्पष्ट होना मुख्यतः किस कारण होता है?
(a) फेफड़ों का विकास (b) ल्यारिंक्स (स्वरयंत्र) का विकास (c) हृदय का विकास (d) अग्न्याशय का कार्य - किशोरावस्था में त्वचा पर मुहांसों का कारण क्या है?
(a) पानी की कमी (b) तैलीय ग्रंथियों की सक्रियता (c) ज्यादा नींद (d) प्रोटीन की अधिकता - ज्यूवेनाइल हार्मोन (Juvenile Hormone) किसमें प्रमुख भूमिका निभाता है?
(a) मानव में यौवनारम्भ (b) कीटों में लार्वा अवस्था बनाए रखने में (c) थायरॉइड कार्य में (d) अग्न्याशय में - निम्न में से कौन-सा पदार्थ पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित नहीं होता?
(a) वृद्धि हार्मोन (b) FSH/LH (c) थायरॉक्सिन (d) प्रोलैक्टिन - मनुष्य में लिंग निर्धारण किस समय होता है?
(a) जन्म के समय (b) गर्भस्थ अवस्था में, निषेचन के समय (c) किशोरावस्था में (d) रजोनिवृत्ति पर - यदि निषेचन के समय संयोजन XX होगा तो संतति क्या होगी?
(a) लड़का (b) लड़की (c) निश्चय नहीं किया जा सकता (d) दोनों - अग्न्याशय (Pancreas) किस हार्मोन के लिए जाना जाता है जो रक्त शर्करा नियंत्रित करता है?
(a) एड्रेनलिन (b) इंसुलिन (c) एस्ट्रोजन (d) टेस्टोस्टेरॉन - किस प्रक्रिया को ऋतुश्राव (Menstruation) कहा जाता है?
(a) अंडाणु का निष्कासन (b) गर्भाशय की आंतरिक परत का रक्त के साथ निकलना (c) अंडाशय का टूटना (d) गर्भधारण - लड़कियों में कौन-सा हार्मोन स्तनों के विकास के लिए उत्तरदायी है?
(a) टेस्टोस्टेरॉन (b) इंसुलिन (c) एस्ट्रोजन (d) एड्रेनालिन - पीयूष ग्रंथि को सामान्यतः किस नाम से भी जाना जाता है?
(a) मास्टर ग्रंथि (b) पाचन ग्रंथि (c) श्वास ग्रंथि (d) नर्व ग्रंथि - यौवनारम्भ के दौरान लड़कों में आवाज़ टूटना (voice cracks) सामान्यतः किस कारण से होता है?
(a) दाँतों का गिरना (b) वॉइस कॉर्ड्स के विकास से अस्थायी अनियमितता (c) फेफड़ों की बीमारी (d) अधिक भोजन से - निम्न में से कौन-सा खाद्य पदार्थ किशोरों के लिए सबसे उपयुक्त है?
(a) जंक फूड जैसे चिप्स, कोक (b) संतुलित भोजन: रोटी, दाल, सब्जियाँ (c) केवल मीठा पदार्थ (d) बिना पौष्टिकता के स्नैक - थायरॉक्सिन (Thyroxine) का मुख्य कार्य क्या है?
(a) रक्त का थक्का बनाना (b) चयापचय (metabolism) और वृद्धि को नियंत्रित करना (c) मांसपेशियों का क्षरण (d) पाचन में सहायता - किसे गौण लैंगिक लक्षण (Secondary sexual characters) में शामिल नहीं किया जाता?
(a) बालों का विकास (b) मासिक धर्म की शुरुआत (c) वॉइस-बदलाव (d) हड्डियों का विकास - निर्बाध (healthy) जननात्मक स्वास्थ्य का तात्पर्य क्या है?
(a) केवल बीमारियों का न होना (b) शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वास्थ्य स्थिति जो जनन से संबंधित हो (c) केवल गर्भधारण की क्षमता (d) केवल चिकित्सा देखभाल - एड्रेनालिन (Adrenaline) किस स्थिति में अधिक स्रावित होता है?
(a) आराम की अवस्था में (b) ‘fight or flight’ यानी तनाव/खतरे की स्थिति में (c) नींद में (d) खाने के समय
उत्तर-कुंजी
- (b)
- (c)
- (c)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (c)
- (b)
- (b)
- (b)
- (b)
- (c)
- (a)
- (b)
- (b)
- (b)
- (d)
- (b)
- (b)
अतिरिक्त अध्ययन के लिए:-
- NCERT Class 8 Science Chapter 7 — किशोरावस्था की ओर (Official NCERT Textbook)
- DIKSHA Portal — Class 8 Science: Adolescence Related Video & Practice
- BYJU’S — NCERT Solutions for Class 8 Science Chapter 7 (Reaching the Age of Adolescence)
- LearnCBSE — Extra Questions & Solutions for Adolescence Chapter
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