Sound – ध्वनि
ध्वनि हमारे चारों ओर हर समय मौजूद रहती है। यह एक प्रकार की ऊर्जा है जो किसी वस्तु के कंपन (vibration) के माध्यम से उत्पन्न होती है और हमारे कान तक पहुँचती है। ध्वनि केवल हवा में ही नहीं, बल्कि ठोस और तरल माध्यमों में भी फैल सकती है। इस अध्याय में हम ध्वनि के गुण, प्रकार, फैलने का तरीका और उसकी विशेषताओं के बारे में सीखेंगे।
ध्वनि के गुण
- ऊँचाई (Pitch): यह ध्वनि की तीव्रता नहीं, बल्कि उसकी ऊँचाई को दर्शाता है।
- तीव्रता (Loudness): यह ध्वनि की शोर या मात्रा को दर्शाता है।
- गुणवत्ता (Quality/Timbre): यह ध्वनि की पहचान बताती है, जिससे हम अलग-अलग वाद्ययंत्रों या व्यक्तियों की आवाज़ अलग पहचान सकते हैं।
ध्वनि का फैलना
ध्वनि तरंगों के रूप में माध्यम में फैलती है। ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों में ध्वनि का फैलना संभव है। ध्वनि की गति ठोस में सबसे अधिक, तरल में मध्यम और गैस में सबसे कम होती है।
ध्वनि के प्रकार
- स्वर (Musical sound): जिसे हम सुनकर सुखद अनुभव करते हैं।
- अस्वर (Noise): जो सुनने में अप्रिय या अनियमित होती है।
इस अध्याय को समझने के बाद आप ध्वनि के गुण, उसके फैलने के तरीके और स्वर व अस्वर में अंतर को आसानी से पहचान सकते हैं।
विभिन्न वाद्ययंत्र और उनसे उत्पन्न ध्वनि
| वाद्ययंत्र | ध्वनि का प्रकार | विशेषता |
|---|---|---|
| गिटार | संगीतमय (Musical) | तारों के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है। |
| ड्रम | संगीतमय/तालबद्ध (Rhythmic) | ढोलक की झंकार और ताल से ध्वनि निकलती है। |
| बाँसुरी | संगीतमय (Musical) | हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न होती है। |
| शंख | गंभीर और तीव्र (Deep & Sharp) | हवा के दबाव से ध्वनि निकलती है। |
| पियानो | संगीतमय (Musical) | कुंजी दबाने पर तारों का कंपन ध्वनि पैदा करता है। |
| मंजीरा | संगीतमय/तालबद्ध (Rhythmic) | दो धातु की प्लेटों के आपस में टकराने से ध्वनि निकलती है। |
| शहनाई | संगीतमय (Musical) | हवा के प्रवाह और रीड के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है। |
ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
ध्वनि हमेशा कंपित वस्तुओं (vibrating objects) से उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो उसके आस-पास के माध्यम (जैसे हवा, पानी या ठोस) में कणों का कम्पन होता है। यह कम्पन तरंगों (sound waves) के रूप में हमारे कान तक पहुँचता है और हमें ध्वनि सुनाई देती है।
कंपित वस्तुओं के उदाहरण
| कंपित वस्तु | ध्वनि का प्रकार | कैसे उत्पन्न होती है |
|---|---|---|
| घंटी | संगीतमय (Musical) | घंटी को बजाने पर उसका धातु का हिस्सा कम्पित होता है, जिससे हवा में तरंगें पैदा होती हैं। |
| गिटार | संगीतमय (Musical) | तारों को खींचने पर तार कम्पित होती हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है। |
| ड्रम | तालबद्ध (Rhythmic) | ड्रम की झिल्ली को हथेली या छड़ी से मारने पर झिल्ली कम्पित होती है और ध्वनि निकलती है। |
| बाँसुरी | संगीतमय (Musical) | हवा को फूंकने पर बाँसुरी के अंदर की हवा कम्पित होती है और ध्वनि उत्पन्न होती है। |
| पियानो | संगीतमय (Musical) | कुंजी दबाने पर तार कम्पित होती है और ध्वनि निकलती है। |
मनुष्यों (मानवों) द्वारा उत्पन्न ध्वनि
मनुष्य भी ध्वनि उत्पन्न कर सकता है। यह ध्वनि हमारे स्वरयंत्र (vocal cords) के कम्पन से उत्पन्न होती है। जब हवा फेफड़ों से वोकल कॉर्ड्स के माध्यम से गुज़रती है, तो वे कम्पित होती हैं और आवाज़ बनती है।
मनुष्यों द्वारा उत्पन्न ध्वनि के प्रकार
| ध्वनि का प्रकार | उदाहरण | विशेषता |
|---|---|---|
| स्वर (Musical Sound) | गाना, स्वर वादन, गायन | संगीतमय और सुखद ध्वनि, सुनने में मधुर। |
| अस्वर (Noise) | चिल्लाना, रोना, अचानक शोर | अनियमित, अप्रिय ध्वनि। |
| संवाद / बातचीत (Speech) | किसी से बात करना, कहानी सुनाना | सामाजिक और संचार के लिए महत्वपूर्ण ध्वनि। |
| संकेत ध्वनि (Signals) | सायरन, हँसी, कराहना | भाव या चेतावनी देने वाली ध्वनि। |
मानव में वाक्यंत्र (Speech Apparatus)
मनुष्य की ध्वनि और भाषा उत्पन्न करने की क्षमता मुख्य रूप से उसके वाक्यांत्र पर निर्भर करती है। वाक्यांत्र में विभिन्न अंग मिलकर स्वर और उच्चारण (speech) पैदा करते हैं।
वाक्यंत्र के प्रमुख अंग और उनका कार्य
| अंग | स्थान/संरचना | कार्य |
|---|---|---|
| स्वरयंत्र (Vocal cords) | गले में स्थित | हवा के प्रवाह से कम्पन करके स्वर उत्पन्न करना। |
| मुँह (Mouth) | मुखगुहा (Oral cavity) | स्वर को उच्चारण और रूप देने में मदद करता है। |
| जीभ (Tongue) | मुख में स्थित लचीला अंग | स्वरों और व्यंजनों (consonants) के उच्चारण में सहायक। |
| तालु (Palate) | मुँह की छत | स्वर और व्यंजन के ध्वनि मार्ग को नियंत्रित करता है। |
| होंठ (Lips) | मुख के सामने | स्वरों और व्यंजनों को स्पष्ट उच्चारण देना। |
| नासिका (Nose) | मुख और गले के ऊपर | स्वरों में अनुनाद (Resonance) पैदा करना। |
ध्वनि का संचरण और माध्यम
ध्वनि तरंगों के रूप में फैलती है। ध्वनि का संचरण केवल उस माध्यम के माध्यम से संभव है जिसमें कण मौजूद हों। इसीलिए ध्वनि के लिए किसी माध्यम (air, water, solid) की आवश्यकता होती है।
ध्वनि संचरण के माध्यम और गति
| माध्यम | ध्वनि की गति | विशेषता |
|---|---|---|
| ठोस (Solids) | सबसे अधिक | कण आपस में घनिष्ठ होते हैं, इसलिए कंपन तेजी से फैलता है। |
| तरल (Liquids) | मध्यम | कण ठोस की तुलना में कम घनिष्ठ होते हैं, इसलिए गति कम होती है। |
| गैस (Air) | सबसे कम | कण कम घनिष्ठ होते हैं, इसलिए ध्वनि की गति सबसे कम होती है। |
| शून्य (Vacuum) | 0 (नहीं फैलती) | माध्यम नहीं होने के कारण ध्वनि नहीं फैलती। |
ध्वनि का मानव द्वारा श्रवण (Hearing)
हम ध्वनि को अपने कानों (Ears) के माध्यम से सुनते हैं। कान में ध्वनि तरंगें पहुँचती हैं और उन्हें तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क तक भेजा जाता है, जहाँ हम आवाज़ को पहचानते हैं।
कान के भाग और कार्य
| कान का भाग | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| बाहरी कान (Outer Ear) | कान का बाहरी हिस्सा | ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करके कान की नली (ear canal) में भेजना। |
| मध्य कान (Middle Ear) | कान के ढक्कन के पीछे | ड्रम झिल्ली और हड्डियों (ossicles) के माध्यम से ध्वनि को बढ़ाना। |
| आंतरिक कान (Inner Ear) | कान के अंदरूनी हिस्से में | कॉक्लिया में ध्वनि तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क को भेजना। |
ध्वनि के प्रमुख भौतिक गुण और परिभाषाएँ
| गुण | परिभाषा |
|---|---|
| कंपन का आयाम (Amplitude) | किसी कंपन की अधिकतम विस्थापन दूरी। यह ध्वनि की प्रबलता (loudness) को प्रभावित करता है। |
| तरंगदैर्ध्य (Wavelength) | ध्वनि की एक पूर्ण तरंग की लंबाई। यह ध्वनि की ऊँचाई (pitch) और प्रकार पर प्रभाव डालता है। |
| आवर्तकाल (Time Period) | एक पूर्ण कंपन को पूरा होने में लगने वाला समय। आवर्तकाल जितना छोटा होगा, आवृत्ति उतनी अधिक होगी। |
| आवृति (Frequency) | प्रति सेकंड कितनी बार किसी वस्तु का कंपन होता है। यह ध्वनि की ऊँचाई (pitch) को निर्धारित करता है। |
| तारत्व (Timbre / Quality) | ध्वनि की पहचान और स्वर की विशेषता। यह बताता है कि एक ही ऊँचाई और प्रबलता की ध्वनि अलग-अलग वाद्ययंत्रों या लोगों में कैसे अलग सुनाई देती है। |
| प्रबलता (Loudness / Intensity) | ध्वनि की तीव्रता या जोर। यह कंपन के आयाम पर निर्भर करती है और हमें ध्वनि तेज या धीमी सुनाई देती है। |
ध्वनि के भौतिक गुण
ध्वनि के गुणों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये ध्वनि की विशेषताओं और उसके प्रभाव को बताते हैं। यहाँ ध्वनि के प्रमुख भौतिक गुण दिए गए हैं:
| गुण | परिभाषा | प्रभाव / विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कंपन का आयाम (Amplitude) | किसी कंपन की अधिकतम दूरी | ध्वनि की प्रबलता (loudness) को दर्शाता है | तीव्र घंटी की आवाज़ अधिक होती है |
| तरंगदैर्ध्य (Wavelength) | एक पूर्ण तरंग की लंबाई | ध्वनि की ऊँचाई और गहराई पर प्रभाव डालता है | गहरी आवाज़ = लंबी तरंगदैर्ध्य, ऊँची आवाज़ = छोटी तरंगदैर्ध्य |
| आवर्तकाल (Time Period) | एक पूर्ण कंपन में लगने वाला समय | ध्वनि की आवृत्ति (frequency) से संबंधित | उच्च आवृत्ति = छोटा आवर्तकाल, निम्न आवृत्ति = लंबा आवर्तकाल |
| आवृति (Frequency) | प्रति सेकंड कंपन की संख्या | ध्वनि की ऊँचाई (Pitch) को दर्शाता है | ऊँची आवाज़ = अधिक आवृत्ति, नीची आवाज़ = कम आवृत्ति |
| तारत्व (Timbre / Quality) | ध्वनि की पहचान और स्वर का गुण | एक ही ऊँचाई और प्रबलता में भी अलग-अलग ध्वनि को अलग पहचानने में मदद करता है | गिटार और पियानो की एक ही नोट की ध्वनि अलग लगती है |
| प्रबलता (Loudness / Intensity) | ध्वनि की तीव्रता या जोर | कंपन के आयाम पर निर्भर करती है | धमाका या जोरदार संगीत की ध्वनि प्रबल होती है |
ध्वनि की आवृति और प्रबलता
1. आवृति (Frequency)
ध्वनि की आवृति यह बताती है कि किसी ध्वनि स्रोत का कंपन प्रति सेकंड कितनी बार होता है।
f = 1 / T
जहाँ,
f = आवृति (Frequency in Hertz, Hz)
T = आवर्तकाल (Time period in seconds, s)
मात्रक: आवृति का SI मात्रक है हर्ट्ज़ (Hz), यानी प्रति सेकंड कितनी बार कंपन हुआ।
2. प्रबलता (Loudness / Intensity)
ध्वनि की प्रबलता यह बताती है कि ध्वनि कितनी जोर से सुनाई देती है।
ध्वनि की प्रबलता को डेसीबल (dB) में मापा जाता है।
– अधिक आयाम वाली ध्वनि अधिक प्रबल होती है।
– कम आयाम वाली ध्वनि कम प्रबल होती है।
3. ध्वनि के लिए सामान्य डेसीबल स्तर
| ध्वनि | डेसीबल (dB) स्तर | विशेषता / प्रभाव |
|---|---|---|
| धीमी आवाज़ (Soft sound) | 0 – 30 dB | सुनने में आरामदायक, सामान्य बातचीत जैसी। |
| सामान्य आवाज़ (Moderate sound) | 30 – 60 dB | सामान्य वातावरण में सुनाई देने वाली ध्वनि। |
| जोरदार आवाज़ (Loud sound) | 60 – 85 dB | थोड़ी असुविधा, लंबे समय तक सुनने पर कान पर असर। |
| खतरनाक / बहुत जोरदार (Very loud / Dangerous) | 85 dB से ऊपर | लंबे समय तक सुनने पर सुनने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव। |
श्रव्य और अश्रव्य ध्वनियाँ
ध्वनि को दो प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
1. श्रव्य ध्वनि (Audible Sound)
ये वह ध्वनियाँ हैं जिन्हें मानव कान सुन सकता है। मानव कान सामान्यतः 20 Hz से 20,000 Hz तक की आवृति वाली ध्वनि सुन सकता है।
उदाहरण: घंटी, गिटार, मानव वाणी, पंखे की आवाज़, पक्षियों की चहचहाहट।
2. अश्रव्य ध्वनि (Inaudible Sound)
ये वह ध्वनियाँ हैं जिन्हें मानव कान नहीं सुन सकता। यह या तो बहुत कम आवृत्ति (20 Hz से कम) या बहुत अधिक आवृत्ति (20,000 Hz से अधिक) वाली होती हैं।
उदाहरण:
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) – 20,000 Hz से अधिक
- इनफ्रासाउंड (Infrasound) – 20 Hz से कम
ध्यान दें: श्रव्य ध्वनि हमारी रोज़मर्रा की ध्वनियाँ हैं, जबकि अश्रव्य ध्वनि का उपयोग चिकित्सा, शोध और तकनीकी उपकरणों में होता है।
शोर और संगीत
1. शोर (Noise)
शोर वह ध्वनि है जो असंगत और अव्यवस्थित होती है। इसे सुनकर मन को असुविधा होती है और यह अक्सर कान या मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
उदाहरण: सड़क पर वाहनों का हल्ला, निर्माण स्थल की आवाज़, जोर-जोर से बज रहे अलार्म।
2. संगीत (Music)
संगीत वह ध्वनि है जो संगत और सुव्यवस्थित होती है। इसे सुनकर मन को सुखद अनुभव होता है और यह मनोरंजन और मानसिक शांति प्रदान करती है।
उदाहरण: गिटार, पियानो, शास्त्रीय गायन, पारंपरिक नृत्य संगीत।
ध्यान दें:
– शोर अव्यवस्थित ध्वनि है और लंबे समय तक सुनने पर कान या मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
– संगीत व्यवस्थित ध्वनि है जो आनंद और मानसिक शांति देती है।
ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
ध्वनि प्रदूषण उस स्थिति को कहते हैं जब ध्वनि का स्तर इतना बढ़ जाता है कि यह मानव स्वास्थ्य, जीव-जंतु और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो। इसे शोर के अत्यधिक स्तर के कारण उत्पन्न किया जाता है।
1. कारण
- सड़क पर वाहनों का हल्ला और हॉर्न
- उद्योगों और निर्माण स्थलों की मशीनों की आवाज़
- पार्टी, धमाके, पटाखे और अलार्म
- रेलवे और हवाई जहाजों का शोर
2. प्रभाव
- सुनने की क्षमता में कमी या कान की चोट
- तनाव, नींद में खलल और मानसिक परेशानी
- पशुओं पर नकारात्मक प्रभाव, जैसे उनकी गतिविधियों में बदलाव
- सामाजिक असुविधा और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट
3. नियंत्रण
- वाहनों और उद्योगों के शोर नियंत्रण उपाय अपनाना
- ध्वनि प्रदूषण क्षेत्रों में पौधे लगाना और शोर अवरोधक दीवारें बनाना
- अत्यधिक शोर वाले समय और स्थान से बचाव
ध्यान दें: ध्वनि प्रदूषण केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
प्रमुख शब्द (Key Terms)
- आयाम (Amplitude) – किसी कंपन की अधिकतम विस्थापन दूरी।
- कर्ण पटल (Eardrum / Tympanic Membrane) – मध्य कान में स्थित झिल्ली जो ध्वनि तरंगों को बढ़ाती है।
- आवृत्ति (Frequency) – प्रति सेकंड किसी वस्तु के कंपन की संख्या।
- हर्ट्ज (Hz) – आवृत्ति का SI मात्रक।
- कंठ (Larynx / Voice Box) – मानव शरीर में स्वर उत्पन्न करने वाला अंग।
- प्रबलता (Loudness / Intensity) – ध्वनि की तीव्रता या जोर।
- शोर (Noise) – असंगत और अव्यवस्थित ध्वनि जो असुविधा पैदा करती है।
- दोलन (Vibration) – किसी वस्तु का दोहराव वाली गति।
- तारत्व (Timbre / Quality) – ध्वनि की पहचान और स्वर की विशेषता।
- आवर्तकाल (Time Period) – एक पूर्ण कंपन को पूरा होने में लगने वाला समय।
- कंपन (Vibration) – ध्वनि उत्पन्न करने वाली किसी वस्तु की गति।
- वाक्यंत्र (Speech Apparatus) – मानव में ध्वनि और वाणी उत्पन्न करने वाले अंगों का समूह।
- श्वास नली (Trachea / Windpipe) – वायु मार्ग जिससे फेफड़ों और कंठ तक हवा जाती है।
आपने क्या सीखा (What You Learned)
- ध्वनि कंपन करती हुई वस्तु द्वारा उत्पन्न होती है।
- मानव वाक्-तंतुओं के कंपन द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
- ध्वनि किसी माध्यम (गैस, द्रव या ठोस) में संचरित होती है। यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
- कर्ण पटल ध्वनि के कंपनों को अनुभव करते हैं और इन्हें मस्तिष्क तक भेजते हैं। इस प्रक्रिया को श्रवण कहते हैं।
- प्रति सेकंड होने वाले दोलनों या कंपनों की संख्या आवृत्ति (Frequency) कहलाती है।
- आवृत्ति को हर्ट्ज (Hz) में व्यक्त किया जाता है।
- कंपन का आयाम जितना अधिक होता है, ध्वनि उतनी ही प्रबल होती है।
- तार का कंपन जितना तीव्र और आवृत्ति अधिक होती है, उतनी ही ध्वनि तीक्ष्ण और तारत्वपूर्ण होती है।
- अप्रिय और अव्यवस्थित ध्वनियाँ शोर (Noise) कहलाती हैं।
- अत्यधिक या अवांछित ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) उत्पन्न करती हैं। यह मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
- ध्वनि प्रदूषण को न्यूनतम करने के प्रयास करने चाहिए।
- सड़क के किनारे तथा अन्य स्थानों पर पेड़ लगाने से ध्वनि प्रदूषण कम किया जा सकता है।
अभ्यास (Exercises) – उत्तर
1. सही उत्तर चुनिए
ध्वनि संचरित हो सकती है:
-
- उत्तर: (घ) ठोस, द्रव तथा गैसों में
क्योंकि ध्वनि का संचरण किसी भी माध्यम में होता है। निर्वात में ध्वनि संचरित नहीं होती।
2. निम्न में से किस वाद्य यंत्र की आवृत्ति न्यूनतम होने की सम्भावना है?
-
- उत्तर: (ग) पुरुष की
पुरुष की आवाज़ में आमतौर पर तार का आयाम बड़ा और कंपन कम होता है, जिससे आवृत्ति कम होती है।
3. सही/गलत (T/F)
- (क) T – ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
- (ख) F – किसी वस्तु के प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं, न कि आवर्तकाल।
- (ग) F – यदि कंपन का आयाम अधिक होता है तो ध्वनि अधिक प्रबल होती है।
- (घ) T – मानव कानों के लिए श्रव्यता 20 Hz से 20,000 Hz है।
- (ङ) F – कंपन की आवृत्ति अधिक होने पर तारत्व अधिक होता है।
- (च) F – अवांछित या अप्रिय ध्वनि को शोर कहते हैं।
- (छ) T – ध्वनि प्रदूषण आंशिक श्रवण अशक्तता उत्पन्न कर सकता है।
4. रिक्त स्थान भरें
- (क) किसी वस्तु द्वारा एक दोलन को पूरा करने में लिए गए समय को आवर्तकाल (Time Period) कहते हैं।
- (ख) प्रबलता कम्पन के आयाम (Amplitude) से निर्धारित की जाती है।
- (ग) आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।
- (घ) अवांछित ध्वनि को शोर (Noise) कहते हैं।
- (ङ) ध्वनि की तीव्रता कंपनों की आयाम (Amplitude) से निर्धारित होती है।
5. एक दोलक 4 सेकंड में 40 बार दोलन करता है।
दी गई जानकारी: N = 40 दोलन, t = 4 सेकंड
आवर्तकाल (T) = कुल समय / दोलनों की संख्या = t / N
T = 4 / 40 = 0.1 सेकंड
आवृत्ति (f) = 1 / T
f = 1 / 0.1 = 10 Hz
6. एक मच्छर अपने पंखों को 500 कम्पन प्रति सेकंड की दर से कंपित करता है।
आवृत्ति (f) = 500 Hz
आवर्तकाल (T) = 1 / f = 1 / 500 = 0.002 सेकंड
7. वाद्य यंत्र में कंपित भाग
- (क) ढोलक – ढोलक की झिल्ली कंपित होती है।
- (ख) सितार – तार कंपित होती हैं।
- (ग) बांसुरी – हवा का स्तंभ कंपित होता है।
8. शोर और संगीत में अंतर
– शोर: असंगत, अव्यवस्थित ध्वनि जो असुविधा देती है।
– संगीत: व्यवस्थित और सुरीली ध्वनि जो सुख और आनंद देती है।
हाँ, कभी-कभी संगीत यदि अत्यधिक जोर या असंगत हो जाए तो शोर बन सकता है।
9. ध्वनि प्रदूषण के स्रोत
- सड़क पर वाहनों का शोर और हॉर्न
- निर्माण स्थल और उद्योगों की मशीनें
- पार्टी, पटाखे और अलार्म
- रेल और हवाई यातायात
10. ध्वनि प्रदूषण मानव के लिए हानिकारक
- श्रवण क्षमता में कमी
- तनाव, नींद में खलल, मानसिक स्वास्थ्य पर असर
- सामाजिक और कार्यक्षमता में कमी
11. मकान खरीदने की सलाह
सड़क के किनारे वाले मकान की तुलना में तीन गली दूर वाला मकान खरीदना बेहतर होगा।
क्योंकि सड़क के किनारे ध्वनि प्रदूषण अधिक होता है और स्वास्थ्य व मानसिक शांति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
12. मानव वाक्युत्पत्ति
चित्रण: मानव वाक्युत्पत्ति में मुख, जीभ, दांत, होंठ और कंठ (larynx) शामिल हैं।
कार्य: वाक्युत्पत्ति अंग ध्वनि उत्पन्न करने, स्वर और शब्दों का निर्माण करने में सहयोग करते हैं।
13. तड़ित और मेघगर्जन की घटना
तड़ित (Lightning) और मेघगर्जन (Thunder) एक ही समय और दूरी पर होते हैं। प्रकाश की गति बहुत तेज होती है, इसलिए तड़ित पहले दिखाई देती है। ध्वनि की गति अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए मेघगर्जन बाद में सुनाई देता है।
Chapter 10 – ध्वनि: MCQs
- ध्वनि उत्पन्न होती है:
- (क) स्थिर वस्तु से
- (ख) कंपन करने वाली वस्तु से
- (ग) निर्वात से
- (घ) प्रकाश से
- उत्तर: (ख)
- मानव कान किस आवृत्ति की ध्वनि सुन सकता है?
- (क) 0–100 Hz
- (ख) 20–20,000 Hz
- (ग) 50–10,000 Hz
- (घ) 100–50,000 Hz
- उत्तर: (ख)
- ध्वनि संचरण के लिए क्या आवश्यक है?
- (क) गैस, द्रव या ठोस माध्यम
- (ख) निर्वात
- (ग) प्रकाश
- (घ) कोई माध्यम नहीं
- उत्तर: (क)
- कर्ण पटल का कार्य है:
- (क) ध्वनि उत्पन्न करना
- (ख) ध्वनि को मस्तिष्क तक भेजना
- (ग) हवा निकालना
- (घ) प्रकाश को महसूस करना
- उत्तर: (ख)
- ध्वनि की प्रबलता किससे निर्धारित होती है?
- (क) आवृत्ति
- (ख) आयाम
- (ग) माध्यम
- (घ) तापमान
- उत्तर: (ख)
- किस प्रकार की ध्वनि असंगत और अप्रिय होती है?
- (क) संगीत
- (ख) शोर
- (ग) श्रव्य ध्वनि
- (घ) अल्ट्रासाउंड
- उत्तर: (ख)
- ध्वनि प्रदूषण किसके कारण होता है?
- (क) शोर
- (ख) संगीत
- (ग) प्रकाश
- (घ) जल
- उत्तर: (क)
- आवर्तकाल (Time period) का सूत्र क्या है?
- (क) T = 1/f
- (ख) T = f
- (ग) T = f × t
- (घ) T = A/f
- उत्तर: (क)
- ध्वनि की तीव्रता को मापने का मात्रक है:
- (क) हर्ट्ज
- (ख) डेसिबल
- (ग) मीटर
- (घ) न्यूटन
- उत्तर: (ख)
- श्रव्य और अश्रव्य ध्वनि में अंतर है:
- (क) श्रव्य ध्वनि मानव कान सुन सकता है
- (ख) अश्रव्य ध्वनि मानव कान नहीं सुन सकता
- (ग) दोनों सही हैं
- (घ) कोई नहीं
- उत्तर: (ग)
- संगीत और शोर में अंतर क्या है?
- (क) संगीत व्यवस्थित ध्वनि है
- (ख) शोर अव्यवस्थित ध्वनि है
- (ग) दोनों सही हैं
- (घ) कोई नहीं
- उत्तर: (ग)
- मानव वाक्यंत्र में कौन सा अंग ध्वनि उत्पन्न करता है?
- (क) कंठ (Larynx)
- (ख) जीभ
- (ग) होंठ
- (घ) दांत
- उत्तर: (क)
- ध्वनि का संचरण कहाँ सबसे तेज होता है?
- (क) गैस में
- (ख) द्रव में
- (ग) ठोस में
- (घ) निर्वात में
- उत्तर: (ग)
- ध्वनि का आवृत्ति बढ़ाने से क्या बढ़ता है?
- (क) प्रबलता
- (ख) तारत्व
- (ग) माध्यम
- (घ) आयाम
- उत्तर: (ख)
- कौन सी ध्वनि अल्ट्रासाउंड के रूप में आती है?
- (क) 10 Hz
- (ख) 50 Hz
- (ग) 40,000 Hz
- (घ) 500 Hz
- उत्तर: (ग)
- ध्वनि के संचरण में कौन सा माध्यम सबसे धीमा है?
- (क) ठोस
- (ख) द्रव
- (ग) गैस
- (घ) निर्वात
- उत्तर: (ग)
- कर्ण पटल किस प्रकार से ध्वनि को अनुभव करता है?
- (क) प्रकाश तरंगों से
- (ख) कंपनों से
- (ग) ताप से
- (घ) वायु दबाव से नहीं
- उत्तर: (ख)
- ध्वनि प्रदूषण को कम करने का उपाय है:
- (क) सड़क किनारे पेड़ लगाना
- (ख) वाहनों का हॉर्न कम करना
- (ग) उद्योगों में शोर अवरोधक लगाना
- (घ) सभी उपाय
- उत्तर: (घ)
- कंपन की आवृत्ति को दर्शाने का मात्रक है:
- (क) डेसिबल
- (ख) हर्ट्ज
- (ग) मीटर
- (घ) न्यूटन
- उत्तर: (ख)
- कंपन का आयाम अधिक होने पर ध्वनि:
- (क) प्रबल होती है
- (ख) मंद होती है
- (ग) तेज गति होती है
- (घ) कोई प्रभाव नहीं
- उत्तर: (क)
External Links for more study-
- NCERT Textbook – Class 8 Science Chapter 10 (ध्वनि)
- Khan Academy – Sound and Mechanical Waves
- BYJU’S – Class 8 Science: Sound
- Toppr – Sound Notes and Exercises
- YouTube – Class 8 Science Chapter 10: ध्वनि (Video Lessons)

