कक्षा 8 अध्याय 13 — प्रकाश (light)

प्रकाश (Light)

Class 8 Science Chapter 13 प्रकाश (Light) के इस पेज पर आपको इस अध्याय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण नोट्स, परिभाषाएँ, प्रकाश के गुण, परावर्तन, परावर्तन के नियम, उदाहरण, प्रश्न-उत्तर और PDF एक ही जगह पर सरल भाषा में उपलब्ध हैं।

यह अध्याय NCERT Class 8 के सबसे महत्वपूर्ण पाठों में से एक है, जो आगे Class 9, 10 और Competitive Exams की तैयारी में भी बहुत काम आता है।

Table of Contents

इस अध्याय में आप सीखेंगे

  • प्रकाश क्या है और यह कैसे फैलता है (सीधी रेखा में)
  • छाया, अर्ध-छाया (penumbra) और अंधेरा (umbra) क्या होते हैं
  • प्रतिबिंब क्या है और समतल दर्पण में परावर्तन के नियम
  • वस्तुओं का प्रतिबिंब और दर्पणों के व्यवहार — अभिन्न व्यावहारिक प्रयोग

महत्वपूर्ण शब्द

प्रकाश स्रोत, परावर्तन, प्रतिबिंब, छाया, किरण, समतल दर्पण

साधारण प्रयोग (प्रस्ताव)

  1. टेबल लैम्प और छोटे खिलौने से छाया बनाकर छाया के आकार का निरीक्षण करें।
  2. एक समतल दर्पण के सामने मोमबत्ती रखकर प्रतिबिंब का अवलोकन करें और परावर्तन के नियम नोट करें।

प्रकाश के गुण

प्रकाश एक ऊर्जा का रूप है जो हमें वस्तुओं को देखने में सहायता करता है। इसके कुछ महत्वपूर्ण गुण नीचे दिए गए हैं:

  • प्रकाश सीधी रेखा में चलता है — इसे प्रकाश का सीधी रेखीय प्रसार कहते हैं।
  • प्रकाश का परावर्तन होता है — जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर लौटता है, इसे परावर्तन कहते हैं।
  • प्रकाश का अपवर्तन होता है — माध्यम बदलने पर प्रकाश मुड़ जाता है।
  • प्रकाश की गति बहुत तेज होती है — लगभग 3×108 m/s।
  • प्रकाश वस्तुओं पर छाया बनाता है — जब प्रकाश किसी अपारदर्शी वस्तु से रुकता है, तो छाया बनती है।
  • प्रकाश बहुरंगी होता है — सफेद प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना है (VIBGYOR)। Light

वस्तुओं को दृश्य कौन बनाता है?

हम किसी वस्तु को तभी देख पाते हैं जब उस वस्तु से प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। प्रकाश ही वह माध्यम है जो वस्तुओं को दृश्य बनाता है। बिना प्रकाश के कोई भी वस्तु दिखाई नहीं देती, चाहे वह हमारे बिल्कुल पास ही क्यों न हो।

कैसे दिखती हैं वस्तुएँ?

  • प्रकाश किसी स्रोत (जैसे सूर्य, बल्ब) से निकलकर वस्तु पर पड़ता है।
  • वस्तु इस प्रकाश को परावर्तित (reflect) करती है।
  • यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है।
  • हमारी आँख और मस्तिष्क इस प्रकाश को संसाधित करके वस्तु को “देख” पाते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • यदि किसी कमरे में बिल्कुल अंधेरा हो, तो कोई भी वस्तु दिखाई नहीं देगी क्योंकि प्रकाश अनुपस्थित है।
  • केवल प्रकाश स्रोत ही नहीं, बल्कि वस्तु द्वारा प्रकाश का परावर्तन भी आवश्यक है।
  • पारदर्शी वस्तुएँ प्रकाश को अपने अंदर से गुजरने देती हैं, इसलिए वे स्पष्ट दिखाई देती हैं।
  • अपारदर्शी वस्तुएँ प्रकाश को रोकती हैं और उसी के कारण छाया बनती है।

प्रकाश का परावर्तन

जब प्रकाश किसी चिकनी और चमकीली सतह से टकराकर वापस लौटता है, तो इस प्रक्रिया को प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं। दर्पण इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। परावर्तन की प्रक्रिया के दौरान प्रकाश कुछ निश्चित नियमों का पालन करता है, जिन्हें परावर्तन के नियम कहा जाता है।

Reflection of light class 8 notes, light
प्रकाश का परावर्तन

परावर्तन क्या है?

प्रकाश की किरण जब किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है, तो इसे परावर्तन कहते हैं।
इस घटना के कारण हम दर्पण में अपनी छवि देख पाते हैं।

परावर्तन से संबंधित मुख्य शब्द

  • आपतित किरण (Incident Ray) — सतह पर गिरने वाली प्रकाश किरण।
  • परावर्तित किरण (Reflected Ray) — सतह से टकराकर वापस लौटने वाली किरण।
  • लंब (Normal) — सतह पर आपतन बिंदु से खींची गई एक काल्पनिक लंब रेखा।
  • आपतन कोण (Angle of Incidence) — आपतित किरण और लंब के बीच का कोण।
  • परावर्तन कोण (Angle of Reflection) — परावर्तित किरण और लंब के बीच का कोण।

परावर्तन के नियम

  1. पहला नियम: आपतन कोण (∠i) और परावर्तन कोण (∠r) बराबर होते हैं।∠i = ∠r
  2. दूसरा नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और लंब — तीनों एक ही तल (plane) में स्थित होते हैं।

दैनिक जीवन में परावर्तन के उदाहरण

  • दर्पण में अपनी छवि देखना
  • पानी या काँच में प्रतिबिंब बनना
  • टॉर्च की रोशनी किसी सतह से टकराकर लौटना
  • वाहनों में रियर-व्यू मिरर का उपयोग

नियमित तथा विसरित परावर्तन

प्रकाश जब किसी सतह से टकराकर लौटता है, तो परावर्तन की प्रकृति उस सतह के प्रकार पर निर्भर करती है। सतह के चिकने या खुरदरे होने के अनुसार परावर्तन दो प्रकार का होता है:

1. नियमित परावर्तन (Regular Reflection)

जब प्रकाश किरणें किसी चिकनी, चमकीली और समतल सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर समान दिशा में लौटती हैं, तो इसे नियमित परावर्तन कहते हैं।
इस प्रकार के परावर्तन से हमें स्पष्ट छवि दिखाई देती है।

  • सतह बहुत चिकनी होती है।
  • सभी किरणें एक ही दिशा में परावर्तित होती हैं।
  • स्पष्ट, साफ और तीक्ष्ण छवि बनती है।
  • उदाहरण: दर्पण, चमकीली धातु की प्लेट, शांत पानी की सतह।Light

2. विसरित परावर्तन (Diffuse Reflection)

जब प्रकाश किरणें किसी खुरदरी या असमतल सतह से टकराती हैं तो वे विभिन्न दिशाओं में परावर्तित हो जाती हैं। इसे विसरित परावर्तन कहते हैं।
इसमें स्पष्ट छवि नहीं बनती।

  • सतह खुरदरी या असमान होती है।
  • किरणें अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती हैं।
  • स्पष्ट छवि नहीं बनती — केवल प्रकाश फैलता है।
  • उदाहरण: कागज़, सड़क, दीवार, पत्थर।

नियमित और विसरित परावर्तन में अंतर

नियमित परावर्तन विसरित परावर्तन
चिकनी सतह पर होता है। खुरदरी सतह पर होता है।
किरणें समान दिशा में लौटती हैं। किरणें अलग-अलग दिशाओं में बिखरती हैं।
स्पष्ट छवि बनती है। स्पष्ट छवि नहीं बनती।
उदाहरण: दर्पण। उदाहरण: कागज़, दीवार।

परावर्तित प्रकाश को पुनः परावर्तित किया जा सकता है

परावर्तन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि परावर्तित प्रकाश को भी किसी दूसरी सतह से टकराकर पुनः परावर्तित किया जा सकता है।
इसका अर्थ है कि प्रकाश की किरणें केवल एक बार नहीं, बल्कि कई बार परावर्तन कर सकती हैं।

यह कैसे होता है?

जब प्रकाश किसी सतह से परावर्तित होकर दूसरी सतह पर पड़ता है, तो वह दूसरी सतह भी उसे वापस परावर्तित कर सकती है।
यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि प्रकाश अवशोषित (absorb) न हो जाए।

दैनिक जीवन में पुनः परावर्तन के उदाहरण

  • एक कमरे में प्रकाश दीवारों से कई बार टकराकर फैल जाता है, जिससे पूरा कमरा रोशन हो जाता है।
  • प्रतिबिंबित सूर्य प्रकाश पानी, काँच या सफेद दीवारों से टकराकर दूसरी सतहों को भी रोशन करता है।
  • दर्पणों से बने पेरीस्कोप में प्रकाश दो दर्पणों से लगातार परावर्तित होकर आँख तक पहुँचता है।
  • कार हेडलाइट का प्रकाश सड़क पर और आस-पास की सतहों पर कई बार परावर्तित होता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि प्रकाश के कई बार परावर्तित होने से हमें वस्तुएँ अधिक स्पष्ट दिखाई देती हैं, कमरे रोशन होते हैं,
और कई वैज्ञानिक उपकरण जैसे कि दर्पण आधारित दूरबीन (reflecting telescope) बेहतर कार्य करते हैं।

बहु-प्रतिबिंब (Multiple Reflection)

जब प्रकाश की किरणें दो या अधिक दर्पणों से बार-बार परावर्तित होकर अनेक प्रतिबिंब बनाती हैं, तो इस प्रक्रिया को बहु-प्रतिबिंब कहा जाता है।
इस स्थिति में एक ही वस्तु के कई प्रतिबिंब दिखाई देते हैं।

बहु-प्रतिबिंब कब होता है?

जब दो दर्पण एक-दूसरे के साथ किसी कोण पर रखे जाते हैं और उनके बीच एक वस्तु रखी जाती है, तो प्रकाश बार-बार परावर्तित होकर कई छवियाँ बनाता है।

प्रतिबिंबों की संख्या का सूत्र

यदि दो दर्पणों के बीच का कोण θ हो, तो बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या होती है:

N = (360° / θ) – 1

उदाहरण:
यदि दो दर्पणों के बीच का कोण 60° हो
→ N = 360/60 – 1 = 6 – 1 = 5 प्रतिबिंब

बहु-प्रतिबिंब के दैनिक जीवन में उदाहरण

  • हेयर सैलून — दो दर्पणों के सामने बैठने पर आपका कई कोणों से प्रतिबिंब दिखाई देता है।
  • कैलिडोस्कोप — तीन दर्पणों से लगातार परावर्तन होकर सुंदर पैटर्न बनते हैं।
  • परावर्तक दूरबीन — प्रकाश कई दर्पणों से टकराकर केंद्रित होता है।
  • गहनों की दुकानों के शोकेस — कई दर्पणों से वस्तुएँ अधिक चमकदार दिखती हैं।

बहु-प्रतिबिंब क्यों महत्वपूर्ण है?

बहु-प्रतिबिंब से हमें वस्तुओं के कई दृश्य एक साथ प्राप्त होते हैं। यह सिद्धांत वैज्ञानिक उपकरणों, सजावटी वस्तुओं और प्रकाशीय यंत्रों (Optical instruments) में उपयोग किया जाता है।Light


बहुमूर्तिदर्शी (Kaleidoscope)

बहुमूर्तिदर्शी एक ऐसा यंत्र है जिसमें दर्पणों की विशेष व्यवस्था के कारण
रंग-बिरंगे और सुंदर पैटर्न दिखाई देते हैं। जब इसे घुमाया जाता है तो
अंदर मौजूद रंगीन काँच के टुकड़े, मोती या मनके अपनी स्थिति बदलते हैं और
दर्पणों से परावर्तित होकर सुंदर-सुंदर आकृतियाँ बनाते हैं।

यह कैसे काम करता है?

बहुमूर्तिदर्शी में सामान्यतः तीन दर्पण 60° के कोण पर लगाए जाते हैं।
जब प्रकाश रंगीन टुकड़ों पर गिरता है तो वे दर्पणों से बार-बार परावर्तित
होकर अनेक सममित आकृतियाँ बनाते हैं।

बहुमूर्तिदर्शी की मुख्य विशेषताएँ

  • तीन दर्पणों से बना होता है।
  • अंदर रंगीन काँच, मनके या कागज़ के छोटे टुकड़े होते हैं।
  • घुमाने पर हर बार नया डिज़ाइन बनता है।
  • परावर्तन के सिद्धांत पर काम करता है।

उपयोग:

बहुमूर्तिदर्शी का उपयोग मुख्य रूप से मनोरंजन और डिज़ाइन पैटर्न सीखने में किया जाता है।
कलाकार भी नए पैटर्न बनाने के लिए इसका उपयोग करते हैं।


सूर्य का प्रकाश श्वेत या रंगीन?

सूर्य का प्रकाश हमें श्वेत दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में यह अनेक रंगों के
मिश्रण से बना होता है। जब सूर्य का प्रकाश प्रिज्म या वर्षा की जल-बूँदों से गुजरता है
तो यह सात अलग-अलग रंगों में विभाजित हो जाता है। इस घटना को वर्णक्रम कहा जाता है।Light

सूर्य के प्रकाश के सातLight रंग

  • लाल (Red)
  • नारंगी (Orange)
  • पीला (Yellow)
  • हरा (Green)
  • नीला (Blue)
  • जामुनी (Indigo)
  • बैंगनी (Violet)

निष्कर्ष

सूर्य का प्रकाश वास्तव में श्वेत होता है, परंतु यह सात रंगों का मिश्रण है।
इसी कारण इसे बहुरंगी प्रकाश कहा जाता है।

हमारे नेत्रों की संरचना

नेत्र (Eyes) प्रकाश को ग्रहण करने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण इंद्रिय अंग है।
यह हमें वस्तुओं को देखने में सहायता करता है। इसकी संरचना कैमरे के समान होती है
जिसमें कई भाग मिलकर कार्य करते हैं।

नेत्र के मुख्य भाग

  • कॉर्निया (Cornea): नेत्र का पारदर्शी बाहरी भाग, जिससे प्रकाश पहली बार प्रवेश करता है।
  • आईरिस (Iris): नेत्र का रंगीन भाग जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।
  • पुतली (Pupil): एक छोटा छिद्र जहाँ से प्रकाश नेत्र के अंदर जाता है।
  • लेंस (Lens): प्रकाश को अपवर्तित करके रेटिना पर साफ़ छवि बनाता है।
  • रेटिना (Retina): नेत्र का स्क्रीन जैसा भाग जहाँ वास्तविक उलटी छवि बनती है।
  • ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve): रेटिना से बनी छवि को संकेतों के रूप में मस्तिष्क तक पहुँचाती है।
  • विट्रियस ह्यूमर: नेत्रगोलक को आकार प्रदान करने वाला जिलेनुमा पदार्थ।
  • सिलियरी मांसपेशियाँ (Ciliary Muscles): लेंस की आकृति बदलकर दूर व पास की वस्तुओं को स्पष्ट दिखाती हैं।

नेत्र कैसे काम करता है?

जब प्रकाश वस्तु से परावर्तित होकर कॉर्निया से नेत्र में प्रवेश करता है,
तो लेंस उसे रेटिना पर फोकस करता है। रेटिना इस छवि को विद्युत संकेतों में बदल देती है
और ऑप्टिक नर्व इन्हें मस्तिष्क तक पहुँचाता है। मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करके
हमें वस्तु का सही आकार और रंग दिखाता है।

नेत्रों की क्रियाविधि

हमारे नेत्र प्रकाश को ग्रहण करके उसे मस्तिष्क तक पहुँचाते हैं, जिससे हम वस्तुओं को
स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। नेत्र एक कैमरे की तरह कार्य करता है जहाँ प्रकाश प्रवेश करता है,
अपवर्तन होता है और रेटिना पर छवि बनती है।

नेत्र कैसे कार्य करते हैं?

  1. प्रकाश का प्रवेश:
    वस्तु से परावर्तित प्रकाश सबसे पहले कॉर्निया से होकर नेत्र में प्रवेश करता है।
  2. पुतली (Pupil) का नियंत्रण:
    आइरिस पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।
    – तेज प्रकाश में पुतली सिकुड़ जाती है।
    – कम प्रकाश में पुतली फैल जाती है।
  3. लेंस द्वारा अपवर्तन:
    नेत्र का लेंस प्रकाश को अपवर्तित करके उसे रेटिना पर फोकस करता है।
  4. छवि का निर्माण:
    रेटिना पर वस्तु की उलटी और वास्तविक छवि बनती है।
  5. संकेतों का मस्तिष्क तक पहुँचना:
    रेटिना छवि को विद्युत संकेतों में बदलकर ऑप्टिक नर्व के माध्यम से मस्तिष्क तक भेजती है।
  6. मस्तिष्क द्वारा व्याख्या:
    मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करके वस्तु को सीधा और स्पष्ट दिखाता है।

निष्कर्ष

नेत्र वस्तु से आने वाले प्रकाश को ग्रहण करके, उसे रेटिना पर फोकस करते हैं और मस्तिष्क तक संदेश भेजते हैं।
मस्तिष्क उन संदेशों को समझकर हमें वस्तुओं का सटीक अनुभव कराता है।

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यह अध्याय NCERT Class 8 के सबसे महत्वपूर्ण पाठों में से एक है, जो आगे Class 9, 10 और Competitive Exams की तैयारी में भी बहुत काम आता है।

नेत्रों की देखभाल

नेत्र हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। इनकी उचित देखभाल करना आवश्यक है
ताकि हमारी दृष्टि स्वस्थ और स्पष्ट बनी रहे। दैनिक आदतों से लेकर भोजन तक,
सभी का प्रभाव हमारी आँखों पर पड़ता है। Light

नेत्रों की देखभाल के प्रमुख उपाय

  • साफ-सफाई:
    आँखों को हमेशा साफ रखें। गंदे हाथों से आँखों को न छुएँ।
  • सही प्रकाश में पढ़ना:
    बहुत तेज़ या बहुत कम रोशनी में पढ़ने से बचें। उचित प्रकाश में कार्य करें।
  • स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें:
    मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर का उपयोग करते समय बीच-बीच में आँखों को आराम दें।
  • आँखों में पानी डालना:
    दिन में एक-दो बार ठंडे, साफ पानी से आँखों को धोना फायदेमंद होता है।
  • संतुलित आहार:
    विटामिन A से भरपूर भोजन (गाजर, शकरकंद, हरी सब्जियाँ, पपीता आदि)
    आँखों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
  • धूप से बचाव:
    तेज धूप में बाहर जाते समय धूप का चश्मा (UV protection) पहनें।
  • नियमित जांच:
    यदि धुंधला दिखाई दे या सिरदर्द हो तो नेत्र चिकित्सक से जांच करवाएँ।
  • दूरी का ध्यान:
    किताब और आँखों के बीच लगभग 30–35 सेमी की दूरी रखें।
  • पर्याप्त नींद:
    अच्छी नींद से आँखें आराम पाती हैं और तनाव कम होता है।

Note:-

नेत्रों की नियमित देखभाल से दृष्टि लंबे समय तक स्वस्थ बनी रहती है।
सही आदतें अपनाकर हम आँखों से जुड़े कई रोगों से बच सकते हैं।

जन्तुओं के नेत्र एवं उनकी विशेषताएँ

जन्तुओं के नेत्र विभिन्न आकार और विशेषताओं वाले होते हैं। अलग-अलग प्राणियों की आँखों की संरचना
उनकी जीवन शैली और पर्यावरण के अनुसार भिन्न होती है।

विभिन्न जन्तुओं के नेत्रों की विशेषताएँ

जंतु नेत्रों की विशेषताएँ दृष्टि क्षमता
केकड़ा बहुत छोटे नेत्र होते हैं। चारों ओर देख सकता है, पीछे से आने वाले शत्रु का भी पता लगा लेता है।
तितली बड़े नेत्र होते हैं, जो सहस्रों छोटे नेत्रों से मिलकर बने प्रतीत होते हैं। सामने, पार्श्व और पीछे—तीनों दिशाओं में देख सकती है।
उल्लू बड़ा कॉर्निया और बड़ी पुतली; रेटिना में अधिक शलाकाएँ (Rods) और कम शंकु (Cones)। रात में भली-भाँति देख सकता है, पर दिन में नहीं देख पाता।
दिन में सक्रिय पक्षी (चील, गरुड़) रेटिना में अधिक शंकु (Cones) और कम शलाकाएँ (Rods) होती हैं। दिन में बहुत अच्छी दृष्टि, पर रात में स्पष्ट नहीं देख पाते।

इस प्रकार जानवरों के नेत्र उनकी गतिविधियों एवं जीवनशैली के अनुसार ढले हुए होते हैं।

चाक्षुष-विकृति वाले व्यक्ति पढ़-लिख सकते हैं

जिन व्यक्तियों की दृष्टि सामान्य रूप से कार्य नहीं करती या जिनमें किसी प्रकार की
चाक्षुष-विकृति (Visual impairment) होती है, वे भी अनेक तरीकों से पढ़-लिख सकते हैं।
दृष्टिबाधित लोगों के लिए विशेष लिपि, उपकरण और तकनीकें विकसित की गई हैं, जिनकी सहायता
से वे शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं।

दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए पढ़ने-लिखने के साधन

  • ब्रेल लिपि (Braille Script):
    यह एक विशेष स्पर्श आधारित लिपि है जिसमें उभरी हुई बिंदुओं का उपयोग किया जाता है।
    उंगलियों की सहायता से इन बिंदुओं को छूकर पढ़ा जाता है।
  • ऑडियो पुस्तकें:
    दृष्टिबाधित व्यक्ति रिकॉर्डेड ऑडियो पुस्तकों को सुनकर भी सीखते हैं।
  • स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर:
    कंप्यूटर और मोबाइल पर स्क्रीन रीडर टेक्नोलॉजी लिखे हुए टेक्स्ट को आवाज़ में बदलकर सुना देती है।
  • बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें:
    कम दृष्टि वाले व्यक्ति बड़े और स्पष्ट अक्षरों वाली पुस्तकों से आसानी से पढ़ सकते हैं।
  • सहायक उपकरण (Assistive Devices):
    जैसे-—Magnifying glass (आवर्धक लेंस), टॉर्च, स्पेशल चश्मे आदि।

Note:-

चाक्षुष-विकृति होने के बावजूद व्यक्ति शिक्षा से वंचित नहीं होते।
उपलब्ध विशेष साधनों और तकनीकों की सहायता से वे सामान्य व्यक्तियों की तरह
पढ़-लिख सकते हैं और ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।


ब्रेल पद्धति क्या है?

ब्रेल पद्धति दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए पढ़ने-लिखने की एक विशेष तकनीक है। इसमें अक्षरों, संख्याओं और चिन्हों को छह उभरे हुए बिंदुओं के अलग-अलग संयोजनों के रूप में दिखाया जाता है। इन बिंदुओं को उँगलियों से स्पर्श करके पढ़ा जाता है। इसे 1824 में लुई ब्रेल ने विकसित किया था।

ब्रेल सेल की संरचना

एक ब्रेल सेल में कुल छह बिंदु होते हैं, जो इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं:

ब्रेल सेल (6-बिंदु संरचना)

(1) (4)
(2) (5)
(3) (6)

स्थिति नंबर:

  • बाएँ तरफ 1 – 2 – 3
  • दाएँ तरफ 4 – 5 – 6

ब्रेल अक्षरों के उदाहरण

A अक्षर (Dot 1)

• .
. .
. .

B अक्षर (Dot 1,2)

• .
• .
. .

C अक्षर (Dot 1,4)

••
. .
. .

ब्रेल कैसे पढ़ा जाता है?

  • उभरे हुए बिंदुओं को उँगलियों से महसूस किया जाता है।
  • उँगलियों को बाएँ से दाएँ ले जाया जाता है।
  • बिंदुओं के पैटर्न अक्षर बनाते हैं।
  • अक्षर मिलकर शब्द और वाक्य बनाते हैं।

ब्रेल कैसे लिखा जाता है?

1. स्लेट और स्टाइलस: कागज को स्लेट में रखकर स्टाइलस से दबाया जाता है।

2. ब्रेल टाइपराइटर: इसमें छह कुंजियाँ होती हैं, हर कुंजी एक बिंदु का प्रतिनिधित्व करती है।

ब्रेल पद्धति का महत्व

  • दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पढ़ने-लिखने में सक्षम बनाती है।
  • शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाती है।
  • यह विश्व में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली स्पर्श आधारित लिपि है।

प्रमुख शब्द (Key Terms)

प्रमुख शब्द अर्थ / व्याख्या
आपतन कोण आपतित किरण और अभिलंब के बीच बनने वाला कोण
परावर्तन कोण परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच बनने वाला कोण
अंध बिन्दु नेत्र में वह स्थान जहाँ से दृष्टि-तंतु निकलते हैं और जहाँ प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ नहीं होतीं
बैल एक घरेलू पशु; यहाँ उदाहरण हेतु उपयोग
शंकु रेटिना की प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ जो रंगों को पहचानती हैं
स्वच्छ मंडल (कॉर्निया) नेत्र का पारदर्शी बाहरी भाग जो प्रकाश को भीतर प्रवेश करने देता है
विसरित या अनियमित परावर्तन खुरदरे पृष्ठ से होने वाला परावर्तन जिसमें प्रकाश अनेक दिशाओं में फैल जाता है
आपतित किरण वह किरण जो दर्पण या सतह पर गिरती है
परिहारिका (आइरिस) नेत्र का रंगीन भाग जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है
बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप) प्रतिबिंबों द्वारा कई सुंदर आकृतियाँ दिखाने वाला उपकरण
पार्श्व-परिवर्तन दर्पण में छवि का बाएँ-दाएँ उलटा दिखाई देना
परावर्तन के नियम वे दो मूलभूत नियम जो प्रकाश के परावर्तन को बताते हैं
पुतली नेत्र का काला भाग जो प्रकाश के प्रवेश की मात्रा नियंत्रित करता है
परावर्तित किरण सतह से टकराकर वापस लौटने वाली किरण
परावर्तन प्रकाश का सतह से टकराकर वापस लौटना
नियमित परावर्तन समतल सतह से होने वाला परावर्तन जिसमें किरणें समान दिशा में लौटती हैं
दृष्टि-पटल (रेटिना) नेत्र की वह झिल्ली जहाँ प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ छवि बनाती हैं
शलाकाएँ रेटिना की कोशिकाएँ जो कम प्रकाश में देखने में सहायक होती हैं

आपने क्या सीखा है

  • प्रकाश सभी पृष्ठों से परावर्तित होता है।
  • जब प्रकाश किसी चिकने, पॉलिश किए हुए तथा नियमित पृष्ठों पर आपतित होता है तो नियमित परावर्तन होता है।
  • विसरित या अनियमित परावर्तन खुरदरे पृष्ठों से होता है।
  • परावर्तन के दो नियम होते हैं:
    • (i) आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है।
    • (ii) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा परावर्तक पृष्ठ पर आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
  • दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब में पार्श्व परिवर्तन होता है।
  • किसी कोण पर झुके दो दर्पण अनेक प्रतिबिंब बना सकते हैं।
  • बहुलित परावर्तन के कारण कैलाइडोस्कोप में सुंदर पैटर्न बनते हैं।
  • सूर्य का प्रकाश, जिसे श्वेत प्रकाश कहते हैं, सात रंगों से मिलकर बना होता है।
  • हमारे नेत्र के महत्वपूर्ण भाग हैं: कॉर्निया (स्वच्छ मंडल), आइरिस (परितारिका), पुतली, लेंस, रेटिना (दृष्टि पटल) तथा दृक् तंत्रिकाएँ।
  • सामान्य नेत्र समीप तथा दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
  • ब्रेल पद्धति का उपयोग करके चाक्षुष-विकृति युक्त व्यक्ति पढ़ और लिख सकते हैं।
  • चाक्षुष-विकृति युक्त व्यक्ति अपने पर्यावरण से संपर्क के लिए अपनी अन्य ज्ञानेन्द्रियों को अधिक तीक्ष्णता से विकसित कर लेते हैं।

अभ्यास : प्रकाश का परावर्तन

1. मान लीजिए आप एक अंधेरे कमरे में हैं। क्या आप कमरे में वस्तुओं को देख सकते हैं? क्या आप कमरे के बाहर वस्तुओं को देख सकते हैं। व्याख्या कीजिए।

नहीं, अंधेरे कमरे में वस्तुएँ दिखाई नहीं देतीं क्योंकि प्रकाश नहीं है। हाँ, बाहर की वस्तुएँ दिखाई देती हैं क्योंकि वहाँ प्रकाश है जो वस्तुओं से परावर्तित होकर हमारी आँखों में पहुँचता है।

2. नियमित तथा विसरित परावर्तन में अन्तर बताइए। क्या विसरित परावर्तन का अर्थ है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं?

नियमित परावर्तन चिकनी सतह (जैसे दर्पण) से होता है जिसमें आप्तन कोण = परावर्तन कोण होता है और प्रतिबिम्ब स्पष्ट बनता है। विसरित परावर्तन खुरदरी सतह से होता है जिसमें प्रकाश सभी दिशाओं में बिखर जाता है। नहीं, विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के नियम लागू होते हैं, बस सभी किरणें समानांतर नहीं रहतीं।

3. निम्न में से प्रत्येक के स्थान के सामने लिखिए, यदि प्रकाश की एक समान्तर किरण-पुंज इनसे टकराए तो नियमित परावर्तन होगा या विसरित परावर्तन होगा। प्रत्येक स्थिति में अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

(क) पॉलिश युक्त लकड़ी की मेज → नियमित परावर्तन (सतह चिकनी है)

(ख) चॉक पाउडर → विसरित परावर्तन (सतह खुरदरी है)

(ग) गत्ते का पृष्ठ → विसरित परावर्तन

(घ) संगमरमर के फर्श पर फैला जल → नियमित परावर्तन (जल चिकनी सतह बनाता है)

(ङ) दर्पण → नियमित परावर्तन

(च) कागज का टुकड़ा → विसरित परावर्तन

4. परावर्तन के नियम बताइए।

1. आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)
2. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब तीनों एक ही समतल में होते हैं।

5. यह दर्शाने के लिए कि आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं, एक क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए।

एक समतल दर्पण को मेज पर रखें। एक पतला लकड़ी का तख्ता दर्पण के लम्बवत् खड़ा करें। एक कंघी से पतली प्रकाश किरण तख्ते के समान्तर भेजें। किरण तख्ते के साथ-साथ चलती हुई दर्पण से टकराकर परावर्तित होती है और तख्ते के साथ वापस आती है। इससे सिद्ध होता है कि तीनों एक ही तल में हैं।

6. नीचे दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

(a) एक समतल दर्पण के सामने 1m दूर खड़ा एक व्यक्ति अपने प्रतिबिम्ब से 2m दूर दिखाई देता है।

(b) यदि किसी समतल दर्पण के सामने खड़े होकर आप अपने दाएँ हाथ से अपने बाएँ कान को छुएँ तो दर्पण में ऐसा लगेगा कि आपका दायाँ कान बायें हाथ से छुआ गया है।

(c) जब आप मंद प्रकाश में देखते हैं तो आपकी पुतली का साइज़ बड़ा हो जाता है।

(d) रात्रि पक्षियों के नेत्रों में शलाकाओं की संख्या की अपेक्षा शंकुओं की संख्या अधिक होती है।

प्रश्न 7 तथा 8 में सही विकल्प छाँटिए

7. आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है :

(क) सदैव      (ख) कभी-कभी     (ग) विशेष दशाओं में     (घ) कभी नहीं
उत्तर: (क) सदैव

8. समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब होता है

(क) आभासी, दर्पण के पीछे तथा आवर्धित।
(ख) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज़ के बराबर।
(ग) वास्तविक, दर्पण के पृष्ठ पर तथा आवर्धित।
(घ) वास्तविक, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज़ के बराबर।
उत्तर: (ख) आभासी, दर्पण के पीछे तथा बिंब के साइज़ के बराबर।

9. कैलाडोस्कोप की रचना का वर्णन कीजिए।

कैलाडोस्कोप में तीन समान समलंब चतुर्भुज समतल दर्पण 60° कोण बनाते हुए एक नली में लगे होते हैं। नली के एक सिरे पर रंगीन काँच के टुकड़े और दूसरे सिरे पर आँख रखने की व्यवस्था होती है। दर्पणों के बार-बार परावर्तन से सुंदर प्रतिबिम्ब बनते हैं।

10. मानव नेत्र का एक नामांकित रेखाचित्र बनाइए।

(यहाँ रेखाचित्र बनाना है। मुख्य भाग: कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस, रेटिना, ऑप्टिक नर्व, अंध बिंदु, श्वेतपटल, कॉरोइड)

11. गुरमीत लेजर टॉर्च के द्वारा क्रियाकलाप 13.8 को करना चाहता था। उसके अध्यापक ने ऐसा करने से मना किया। क्या आप अध्यापक की सलाह के आधार की व्याख्या कर सकते हैं?

लेजर प्रकाश बहुत तीव्र एवं संकेन्द्रित होता है। यदि यह सीधे किसी की आँख में चला जाए तो रेटिना को स्थायी रूप से क्षति पहुँचा सकता है और अन्धापन भी हो सकता है। इसलिए सुरक्षा के कारण अध्यापक ने लेजर टॉर्च का उपयोग करने से मना किया।

12. वर्णन कीजिए कि आप अपने नेत्रों की देखभाल कैसे करेंगे।

• बहुत पास या बहुत दूर से पढ़ाई नहीं करनी चाहिए
• पढ़ते समय पर्याप्त प्रकाश होना चाहिए
• लम्बे समय तक टी.वी./मोबाइल/कंप्यूटर स्क्रीन न देखें
• आँखों में खुजली होने पर न रगड़ें, साफ पानी से धोएँ
• हर साल नेत्र जाँच करवाएँ
• हरी सब्जियाँ व विटामिन A युक्त भोजन लें

13. यदि परावर्तित किरण आपतित किरण से 90° का कोण बनाए तो आपतन कोण का मान कितना होगा?

परावर्तन का नियम: आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)
यदि परावर्तित किरण आपतित किरण से 90° का कोण बनाती है तो अभिलम्ब से दोनों किरणों के बीच का कोण 90° है।
∴ i + r = 90°
लेकिन i = r
इसलिए 2i = 90° ⇒ i = 45°
उत्तर: आपतन कोण = 45°

14. यदि दो समान्तर समतल दर्पण एक-दूसरे से 40 cm के अन्तराल पर रखे हों तो इनके बीच रखी एक मोमबत्ती के कितने प्रतिबिम्ब बनेंगे?

जब दो समतल दर्पण समानान्तर होते हैं तो वे एक-दूसरे से अनन्त बार परावर्तन करते हैं।
इसलिए प्रतिबिम्बों की संख्या = अनन्त (∞)

15. दो दर्पण एक-दूसरे के लम्बवत् रखे हैं। प्रकाश की एक किरण पहले दर्पण पर 30° के कोण पर आपतित होती है (जैसा चित्र 13.19 में दिखाया गया है)। दूसरे दर्पण से परावर्तित होने वाली किरण बनाइए।

पहला दर्पण: आपतन कोण = 30° ⇒ परावर्तन कोण = 30°
दर्पण लम्बवत् हैं इसलिए दूसरा दर्पण पहले से 90° पर है।
दूसरे दर्पण पर आपतन कोण = 90° – 30° = 60°
इसलिए दूसरे दर्पण से परावर्तन कोण भी 60° होगा।
अतः अंतिम परावर्तित किरण आपतित किरण के समानान्तर जाएगी (लेकिन विपरीत दिशा में)।

16. चित्र 13.20 के अनुसार बूंदों वाले दर्पण के ठीक सामने प्वाइंट A पर खड़ा व्यक्ति क्या वह स्वयं को दर्पण में देख सकता है? क्या वह P, Q तथा R पर स्थित वस्तुओं के प्रतिबिम्ब भी देख सकता है?

• A पर खड़ा व्यक्ति खुद को नहीं देख सकता क्योंकि उसकी ओर से आने वाली किरणें दर्पण तक पहुँच ही नहीं रही हैं (बूंदें बाधा हैं)।
• P और Q पर स्थित वस्तुओं के प्रतिबिम्ब वह देख सकता है क्योंकि उनकी किरणें दर्पण तक पहुँच रही हैं।
• R पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब वह नहीं देख सकता क्योंकि बूंदें उसकी किरणों को भी रोक रही हैं।
17.(a) A पर स्थित किसी वस्तु के समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए (चित्र 13.21)
(b) क्या स्थिति B से पहेली प्रतिबिम्ब को देख सकती है?
(c) क्या स्थिति C से बूढ़ा इस प्रतिबिम्ब को देख सकता है?
(d) जब पहेली B से C पर चली जाती है तो A का प्रतिबिम्ब किस ओर खिसक जाता है?

(a) A पर वस्तु का प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे A से उतनी ही दूरी पर बनेगा जितनी A दर्पण से दूर है (दर्पण के लम्बवत्)।

(b) हाँ, स्थिति B से पहेली A का प्रतिबिम्ब देख सकती है

(c) नहीं, स्थिति C से बूढ़ा यह प्रतिबिम्ब नहीं देख सकता क्योंकि दर्पण का वह भाग दिखाई नहीं दे रहा।

(d) जब पहेली B से C पर जाती है तो A का प्रतिबिम्ब बाईं ओर (या नीचे की ओर, चित्र के अनुसार) खिसकता हुआ प्रतीत होता है।


Chapter 13: प्रकाश — MCQs

  1. प्रकाश किस प्रकार की ऊर्जा है?
    a) उष्मा ऊर्जा
    b) प्रकाश ऊर्जा
    c) ध्वनि ऊर्जा
    d) रासायनिक ऊर्जा
    उत्तर: b
  2. प्रकाश किस मार्ग में चलता है?
    a) वक्र रेखा में
    b) अनियमित रेखा में
    c) सीधी रेखा में
    d) ऊपर की ओर
    उत्तर: c
  3. परावर्तन किसे कहते हैं?
    a) प्रकाश का अपवर्तन
    b) प्रकाश का लौटना
    c) प्रकाश का अवशोषण
    d) प्रकाश का फैलना
    उत्तर: b
  4. नियमित परावर्तन कहाँ होता है?
    a) खुरदरी सतह पर
    b) चिकनी सतह पर
    c) अनियमित सतह पर
    d) कागज पर
    उत्तर: b
  5. विसरित परावर्तन किससे होता है?
    a) समतल दर्पण
    b) खुरदरी सतह
    c) चमकीली सतह
    d) धातु की सतह
    उत्तर: b
  6. आपतित किरण और परावर्तित किरण किसके नियम का पालन करते हैं?
    a) विद्युत के नियम
    b) ऊष्मा के नियम
    c) परावर्तन के नियम
    d) गति के नियम
    उत्तर: c
  7. आपतन कोण किसके बराबर होता है?
    a) अपवर्तन कोण
    b) अवशोषण कोण
    c) परावर्तन कोण
    d) प्रतिच्छेद कोण
    उत्तर: c
  8. दर्पण में छवि किस प्रकार की होती है?
    a) वास्तविक और उल्टी
    b) काल्पनिक और सीधी
    c) वास्तविक और सीधी
    d) तिरछी
    उत्तर: b
  9. दर्पण में बाएँ-दाएँ बदल जाना क्या कहलाता है?
    a) विसरण
    b) पार्श्व परिवर्तन
    c) अपवर्तन
    d) प्रवाह
    उत्तर: b
  10. कैलाइडोस्कोप में सुंदर पैटर्न किस कारण से बनते हैं?
    a) अपवर्तन
    b) बहुलित परावर्तन
    c) अवशोषण
    d) विभेदन
    उत्तर: b
  11. सूर्य का प्रकाश किस प्रकार का प्रकाश है?
    a) लाल प्रकाश
    b) पीला प्रकाश
    c) श्वेत प्रकाश
    d) नीला प्रकाश
    उत्तर: c
  12. श्वेत प्रकाश कितने रंगों से मिलकर बना होता है?
    a) 5
    b) 6
    c) 7
    d) 8
    उत्तर: c
  13. नेत्र का कौन सा भाग आँख में प्रकाश प्रवेश करने देता है?
    a) लेंस
    b) कॉर्निया
    c) रेटिना
    d) आइरिस
    उत्तर: b
  14. नेत्र का कौन सा भाग पुतली के आकार को नियंत्रित करता है?
    a) कॉर्निया
    b) रेटिना
    c) आइरिस
    d) लेंस
    उत्तर: c
  15. रेटिना में कौन-कौन सी कोशिकाएँ होती हैं?
    a) तंतु और नसें
    b) शंख और हड्डियाँ
    c) शंकु और शलाकाएँ
    d) प्रकाश और ध्वनि
    उत्तर: c
  16. कौन सी कोशिकाएँ रंगों को पहचानती हैं?
    a) शलाकाएँ
    b) शंकु
    c) तंतु
    d) नसें
    उत्तर: b
  17. कौन सी कोशिकाएँ कम प्रकाश में देखने में मदद करती हैं?
    a) शंकु
    b) शलाकाएँ
    c) तंतु
    d) कोशिकाएँ
    उत्तर: b
  18. अंध बिंदु वह स्थान है जहाँ—
    a) केवल शंकु होते हैं
    b) केवल शलाकाएँ होती हैं
    c) कोई प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ नहीं होतीं
    d) अत्यधिक प्रकाश होता है
    उत्तर: c
  19. ब्रेल पद्धति किसके लिए विकसित की गई है?
    a) सामान्य व्यक्तियों के लिए
    b) दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए
    c) बच्चों के लिए
    d) वैज्ञानिकों के लिए
    उत्तर: b
  20. ब्रेल प्रणाली किस पर आधारित है?
    a) 4 बिंदु
    b) 6 बिंदु
    c) 8 बिंदु
    d) 10 बिंदु
    उत्तर: b

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