कक्षा 9: अध्याय 11 – ध्वनि (Sound)

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अध्याय 11 – ध्वनि (Sound)

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ध्वनि हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है। हम अपने चारों ओर वस्तुओं की पहचान, संवाद और मनोरंजन के लिए ध्वनि का उपयोग करते हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है, किस प्रकार माध्यम में चलती है, और यह हमारे कानों तक कैसे पहुँचती है।

क्या आप जानते हैं?
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग (Mechanical Wave) है जो किसी माध्यम में कणों के कंपन के कारण उत्पन्न होती है।

ध्वनि का उत्पन्न होना

ध्वनि हमेशा कंपन (Vibration) से उत्पन्न होती है। जब कोई वस्तु आगे-पीछे कंपन करती है, तो उसके आस-पास की वायु में संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) उत्पन्न होते हैं, जो ध्वनि तरंगों को बनाते हैं।

स्थिति कणों की दूरी दाब (Pressure)
संपीड़न (Compression) कम अधिक
विरलन (Rarefaction) अधिक कम

ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक

ध्वनि निर्वात (Vacuum) में नहीं चल सकती। इसे संचारित होने के लिए वायु, जल या ठोस जैसे माध्यम की आवश्यकता होती है।
इसलिए अंतरिक्ष में ध्वनि नहीं सुनाई देती।

तथ्य बॉक्स:
ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) होती हैं, जबकि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves) होती हैं।

ध्वनि तरंगों की विशेषताएँ

  • आवृत्ति (Frequency)
  • तरंगदैर्ध्य (Wavelength)
  • आयाम (Amplitude)
  • गति (Speed)
  • कालावधि (Time Period)

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भौतिक राशि प्रतीक एसआई इकाई
आवृत्ति f हर्ट्ज़ (Hz)
तरंगदैर्ध्य λ मीटर (m)
गति v m/s

महत्वपूर्ण सूत्र:

ध्वनि की गति (v) = आवृत्ति (f) × तरंगदैर्ध्य (λ)

ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

जब ध्वनि किसी कठोर सतह से टकराकर लौटती है, तो इसे ध्वनि का परावर्तन कहा जाता है।
ध्वनि का परावर्तन वही नियम मानता है जो प्रकाश के परावर्तन में लागू होता है।

  • आपतन कोण = परावर्तन कोण
  • परावर्तन सतह चिकनी और कठोर होनी चाहिए।
उदाहरण:
प्रतिध्वनि (Echo) ध्वनि के परावर्तन का एक उदाहरण है। जब परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि के 0.1 सेकंड बाद सुनाई देती है तो उसे प्रतिध्वनि कहा जाता है।
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ध्वनि का उत्पादन (Production of Sound)

ध्वनि का उत्पादन किसी वस्तु के कंपन करने से होता है। जब कोई वस्तु आगे-पीछे हिलती (वाइब्रेट करती) है, तो वह अपने आस-पास की वायु के कणों में संपीड़न और विरलन उत्पन्न करती है। यही तरंगें माध्यम में फैलती हैं और हमारे कानों तक पहुँचकर “ध्वनि” का अनुभव कराती हैं।

मुख्य तथ्य:
ध्वनि उत्पन्न होने की मूल शर्त है — कंपन का होना (Vibration of an object)

ध्वनि कैसे बनती है?

जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो उसके आस-पास की वायु के कण भी आगे-पीछे दोलन करने लगते हैं। ये कण अपनी ऊर्जा पास के कणों को देते हैं, जिससे ध्वनि तरंग (Sound Wave) माध्यम में आगे बढ़ती है।

उदाहरण:
ढोलक, गिटार, तबला, बांसुरी, और स्वरयंत्र (Voice Box) सभी में कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
यदि किसी वाद्य यंत्र की तार को खींचकर छोड़ दिया जाए, तो वह कंपन करने लगती है और ध्वनि पैदा करती है।

प्रयोग द्वारा समझें:

यदि आप किसी घंटी को बजाकर उसकी धातु को उंगली से हल्के से स्पर्श करें, तो कंपन बंद होते ही ध्वनि भी बंद हो जाती है।
इससे सिद्ध होता है कि ध्वनि केवल कंपन करते हुए वस्तु से ही उत्पन्न होती है।

निष्कर्ष:
ध्वनि उत्पन्न होने के लिए वस्तु का कंपन करना आवश्यक है। यदि वस्तु कंपन नहीं करती, तो ध्वनि उत्पन्न नहीं होती।

 कंपन और माध्यम का संबंध

कंपन किसी माध्यम (जैसे वायु, जल या ठोस) के कणों में भी ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। ये कण आगे-पीछे गति करते हुए तरंगें बनाते हैं।
ध्वनि तरंगें माध्यम के समानांतर चलती हैं, इसलिए इन्हें अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) कहा जाता है।

तरंग का प्रकार कणों की गति की दिशा तरंग की दिशा उदाहरण
अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal) तरंग के समानांतर समान दिशा में ध्वनि तरंग
अनुप्रस्थ तरंग (Transverse) तरंग के लंबवत ऊपर-नीचे दिशा में प्रकाश तरंग
क्या आप जानते हैं?
हमारे स्वरयंत्र (Voice Box) में उपस्थित स्वर तंतु (Vocal Cords) भी कंपन करके ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
इन्हीं कंपन की दर (आवृत्ति) से हमारी आवाज़ पतली या मोटी सुनाई देती है।

ध्वनि का संचरण (Propagation of Sound)

ध्वनि का संचरण माध्यम (Medium) के कणों के कंपन के कारण होता है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम (जैसे वायु, जल या ठोस) के कणों को भी कंपनित करती है। ये कंपन तरंगों के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ध्वनि को पहुँचाते हैं।

मुख्य तथ्य:
ध्वनि ऊर्जा के रूप में माध्यम के कणों के द्वारा संचरित होती है, न कि स्वयं कण माध्यम के साथ आगे बढ़ते हैं।

ध्वनि का माध्यम में फैलना

जब ध्वनि तरंगें माध्यम में चलती हैं, तो उसमें संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) की प्रक्रिया होती है।
संपीड़न क्षेत्र में कण पास-पास आ जाते हैं और दाब अधिक होता है, जबकि विरलन क्षेत्र में कण दूर-दूर हो जाते हैं और दाब कम होता है।

स्थिति कणों की स्थिति दाब (Pressure) घनत्व (Density)
संपीड़न कण पास-पास अधिक अधिक
विरलन कण दूर-दूर कम कम
उदाहरण:
यदि हम ट्यूनिंग फोर्क (Tuning Fork) बजाकर उसे किसी कार्डबोर्ड या पानी की सतह के पास लाएँ, तो वहाँ हल्के कंपन दिखाई देंगे।
यह प्रमाण है कि कंपन माध्यम के कणों में ऊर्जा भेजते हैं और ध्वनि फैलती है।

ध्वनि को संचरित होने के लिए माध्यम आवश्यक है

ध्वनि तरंगें केवल किसी माध्यम (जैसे वायु, जल, ठोस) में ही संचरित हो सकती हैं।
निर्वात (Vacuum) में कोई कण नहीं होते, इसलिए वहाँ ध्वनि का प्रसार नहीं हो सकता।

प्रयोग:
घंटी (Bell Jar) प्रयोग में जब हवा को वैक्यूम पंप द्वारा निकाल दिया जाता है, तो घंटी बजने पर भी कोई ध्वनि नहीं सुनाई देती।
इससे सिद्ध होता है कि ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।

ध्वनि की तरंग का स्वरूप

ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) होती हैं।
इनमें माध्यम के कण उसी दिशा में कंपन करते हैं जिस दिशा में तरंग चलती है।

ध्यान दें:
प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं, परंतु ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं।
इसलिए ध्वनि के संचरण में संपीड़न और विरलन का बनना आवश्यक होता है।

ध्वनि की गति (Speed of Sound)

ध्वनि की गति माध्यम के प्रकार पर निर्भर करती है। ठोस में कण घने होते हैं, इसलिए ध्वनि की गति सबसे अधिक होती है, जबकि गैसों में सबसे कम।

माध्यम ध्वनि की औसत गति (m/s)
वायु (Air) ≈ 340 m/s
जल (Water) ≈ 1500 m/s
इस्पात (Steel) ≈ 5000 m/s

सारांश:

  • ध्वनि का संचरण माध्यम में कणों के कंपन द्वारा होता है।
  • संपीड़न और विरलन के रूप में ध्वनि तरंगें आगे बढ़ती हैं।
  • निर्वात में ध्वनि का संचरण नहीं होता।
  • ठोस में ध्वनि की गति सबसे अधिक और गैस में सबसे कम होती है।

प्रश्न 1. किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?

उत्तर : जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम (जैसे वायु) के कणों को भी कंपनित करती है।
ये कंपन माध्यम के कणों के बीच संकुचन (compression) और प्रसारण (rarefaction) की तरंगों के रूप में आगे बढ़ते हैं।
यह तरंग माध्यम में क्रमशः एक कण से दूसरे कण तक ऊर्जा का संचरण करती है।
अंततः ये तरंगें हमारे कान के पर्दे (eardrum) तक पहुँचती हैं और उसे कंपनित करती हैं।कान का पर्दा इन कंपन को विद्युत संकेतों में बदल देता है, जिन्हें मस्तिष्क ध्वनि के रूप में पहचानता है।
क्या आप जानते हैं?
ध्वनि तरंगें केवल माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) में ही चल सकती हैं।
शून्य (vacuum) में ध्वनि का संचार नहीं हो सकता।

ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं

जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास की वायु के कणों को भी आगे-पीछे दोलन करने के लिए बाध्य करती है।
ये दोलन उसी दिशा में होते हैं जिस दिशा में ध्वनि तरंगें आगे बढ़ती हैं।

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अतः, ध्वनि तरंगों में कणों का दोलन और तरंग का संचरण — दोनों एक ही दिशा में होते हैं।
ऐसी तरंगों को ही अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) कहा जाता है।

उदाहरण :
वायु में ध्वनि के संचरण के दौरान जब कोई घंटी या ट्यूनिंग फोर्क कंपन करता है, तो पास के वायु कण आगे-पीछे दोलन करते हैं और ध्वनि तरंग उत्पन्न करते हैं।
  • ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं।
  • इनमें संकुचन (Compression) और प्रसारण (Rarefaction) बनते हैं।
  • तरंग के दोलन की दिशा और संचरण की दिशा समान होती है।

ध्वनि तरंग के अभिलक्षण

ध्वनि तरंगों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ होती हैं जिनसे हम किसी ध्वनि की तीव्रता, ऊँचाई, स्वर आदि का अनुभव करते हैं।
ये अभिलक्षण ध्वनि की तरंगरूप संरचना पर निर्भर करते हैं।

1. आयाम (Amplitude)

ध्वनि तरंग के कणों का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है।
आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि उतनी ही तेज (Loud) होगी।
अर्थात, ध्वनि की तीव्रता आयाम पर निर्भर करती है।

2. आवृत्ति (Frequency)

कणों द्वारा प्रति सेकंड किए गए दोलनों की संख्या आवृत्ति कहलाती है।
इसकी इकाई हर्ट्ज़ (Hz) होती है।
आवृत्ति जितनी अधिक होगी, ध्वनि उतनी ही तीखी या ऊँची (Shrill) सुनाई देगी।

3. तरंगदैर्ध्य (Wavelength)

दो क्रमागत संकुचनों या प्रसारणों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं।
इसे λ (लैम्ब्डा) द्वारा दर्शाया जाता है।
तरंगदैर्ध्य का संबंध तरंग की चाल (v) और आवृत्ति (f) से होता है —
v = f × λ

4. चाल (Velocity)

किसी माध्यम में ध्वनि के संचरण की गति को उसकी चाल कहते हैं।
यह माध्यम पर निर्भर करती है —
ध्वनि ठोस में सबसे तेज, द्रव में मध्यम और गैस में सबसे धीमी गति से चलती है।

5. स्वर (Quality or Timbre)

स्वर वह गुण है जिससे हम दो समान तीव्रता और ऊँचाई वाली ध्वनियों में अंतर पहचान सकते हैं।
उदाहरण के लिए, बांसुरी और हारमोनियम की ध्वनि में अंतर उनके स्वर के कारण होता है।

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संक्षेप में :

  • आयाम → ध्वनि की तीव्रता
  • आवृत्ति → ध्वनि की ऊँचाई
  • तरंगदैर्ध्य → तरंग की लंबाई
  • चाल → माध्यम पर निर्भर
  • स्वर → ध्वनि की गुणवत्ता

 

प्रश्न 1 और 2

1. तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है?

ध्वनि का गुण निर्धारित करता है
आयाम (Amplitude) प्रबलता (Loudness)
आवृत्ति (Frequency) तारत्व (Pitch)

2. अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है?

  • गिटार → तारत्व उच्च (High Pitch) क्योंकि इसकी तारें छोटी और पतली होती हैं।
  • कार का हॉर्न → तारत्व अपेक्षाकृत कम (Lower Pitch) क्योंकि इसकी ध्वनि गहरी और व्यापक होती है।

संक्षेप में:

  • ध्वनि की प्रबलता आयाम (Amplitude) से तय होती है।
  • ध्वनि का तारत्व आवृत्ति (Frequency) से तय होता है।
  • उच्च आवृत्ति → उच्च तारत्व, निम्न आवृत्ति → निम्न तारत्व।

 

प्रश्न 1: किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्त काल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?

  • तरंगदैर्घ्य (Wavelength, λ): दो क्रमागत संपीड़न या विरलन के बीच की दूरी।
  • आवृत्ति (Frequency, f): प्रति सेकंड कण द्वारा किए गए दोलनों की संख्या।
  • आवर्त काल (Time Period, T): एक दोलन पूरा होने में लगने वाला समय। T = 1/f
  • आयाम (Amplitude, A): कणों के अधिकतम विस्थापन की दूरी, जो ध्वनि की तीव्रता (Loudness) निर्धारित करता है।

प्रश्न 2: किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार संबंधित है?

ध्वनि तरंग की चाल (v), तरंगदैर्ध्य (λ) और आवृत्ति (f) के बीच संबंध होता है:

v = f × λ
अर्थात, किसी माध्यम में तरंग का वेग उसके तरंगदैर्ध्य और आवृत्ति का गुणनफल होता है।

प्रश्न 3: किसी दिए हुए माध्यम में आवृत्ति 220 Hz और वेग 440 m/s है। तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।

हम जानते हैं: v = f × λ

v = 440 m/s, f = 220 Hz

λ = v / f = 440 / 220 = 2 m

उत्तर: तरंगदैर्ध्य λ = 2 मीटर

प्रश्न 4: स्रोत से 450 m दूरी पर बैठा व्यक्ति 500 Hz की ध्वनि सुनता है। दो क्रमागत संपीड़नों में कितना समय अंतराल होगा?

आवृत्ति f = 500 Hz → आवर्त काल T = 1 / f = 1 / 500 s

T = 0.002 s

उत्तर: दो क्रमागत संपीड़नों में समय अंतराल 0.002 सेकंड होगा।

विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल

ध्वनि की चाल (Speed of Sound) उस माध्यम पर निर्भर करती है जिसमें वह चल रही हो।
सघन और ठोस माध्यमों में ध्वनि की गति अधिक होती है, जबकि गैसों में अपेक्षाकृत कम।

माध्यम ध्वनि की चाल (m/s)
वायु (Air, 0°C) 331 m/s
वायु (Air, 20°C) 343 m/s
जल (Water) 1480 m/s
लकड़ी (Wood) 3300 m/s
इस्पात (Steel) 5000 m/s

मुख्य तथ्य:

  • ध्वनि ठोस माध्यमों में सबसे तेज़ चलती है।
  • ध्वनि द्रव माध्यमों में मध्यम गति से चलती है।
  • ध्वनि गैसों में सबसे धीमी गति से चलती है।
  • माध्यम की सघनता और कणों के निकट होने से गति प्रभावित होती है।

ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)

जब कोई ध्वनि किसी कठोर सतह (जैसे दीवार या पहाड़) से टकराती है, तो वह सतह से उलट दिशा में लौटती है।
इसे ध्वनि का परावर्तन कहा जाता है।

मुख्य तथ्य:

  • ध्वनि का परावर्तन केवल कठोर और चिकनी सतह पर होता है।
  • मुलायम सतहें ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं और परावर्तन कम होता है।
  • परावर्तित ध्वनि को हम कानों से सुन सकते हैं।

प्रतिध्वनि (Echo)

यदि परावर्तित ध्वनि हमें कुछ समय बाद सुनाई देती है (लगभग 0.1 सेकंड या उससे अधिक अंतराल के बाद), तो इसे प्रतिध्वनि (Echo) कहा जाता है।
प्रतिध्वनि तब स्पष्ट होती है जब स्रोत और परावर्तक सतह के बीच दूरी पर्याप्त अधिक हो।

नियम:
ध्वनि का परावर्तन और प्रतिध्वनि तभी सुनी जा सकती है जब स्रोत और परावर्तक सतह के बीच दूरी ≥ 17 मीटर हो (वायु में ध्वनि की चाल ≈ 340 m/s)।

प्रतिध्वनि का उपयोग

  • SONAR और RADAR में ध्वनि/ध्वनि तरंगों का पता लगाने के लिए।
  • थियेटर और सभागार में ध्वनि का बेहतर प्रसार सुनिश्चित करने के लिए।
  • भूगोल में पहाड़ों और घाटियों में प्रतिध्वनि का अध्ययन।

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संक्षेप में:

  • ध्वनि का परावर्तन सतह से उलट दिशा में लौटने को कहते हैं।
  • यदि परावर्तित ध्वनि हमें समय बाद सुनाई देती है → प्रतिध्वनि (Echo)।
  • उपयोग: SONAR, सभागार, संगीत हॉल आदि।

प्रतिध्वनि (Echo)

जब कोई ध्वनि किसी कठोर सतह से टकराकर वापस लौटती है और वह हमें कुछ समय बाद सुनाई देती है, तो इसे प्रतिध्वनि (Echo) कहते हैं।
प्रतिध्वनि केवल तब स्पष्ट सुनाई देती है जब स्रोत और परावर्तक सतह के बीच दूरी पर्याप्त हो।

शर्त:
प्रतिध्वनि तब स्पष्ट होगी जब ध्वनि लौटने और सुनाई देने में समय अंतर ≥ 0.1 सेकंड हो।

प्रतिध्वनि की गणना (Calculation of Echo)

यदि ध्वनि स्रोत से परावर्तक सतह तक दूरी d और ध्वनि की चाल v है, तो प्रतिध्वनि के सुनाई देने का समय अंतराल t निम्न प्रकार होगा:

t = 2d / v

यहाँ, 2d इसलिए क्योंकि ध्वनि को परावर्तक सतह तक जाने और वापस लौटने में दूरी दोगुनी होती है।

उदाहरण

यदि कोई व्यक्ति 170 m दूर की दीवार की ओर आवाज़ करता है और ध्वनि की चाल 340 m/s है, तो प्रतिध्वनि सुनाई देने का समय:

t = 2 × 170 / 340 = 1 सेकंड

इसलिए व्यक्ति 1 सेकंड बाद अपनी आवाज़ की प्रतिध्वनि सुन पाएगा।

प्रतिध्वनि का उपयोग

  • भूगोल में पहाड़ और घाटियों की दूरी मापने में।
  • SONAR और RADAR तकनीक में वस्तुओं की पहचान और दूरी मापने के लिए।
  • संगीत हॉल और सभागार में ध्वनि का नियंत्रण और विस्तार सुनिश्चित करने के लिए।

अनुरणन (Echo)

अनुरणन वह ध्वनि है जो किसी कठोर सतह से टकराकर लौटती है और हमें सुनाई देती है।
अर्थात, जब किसी सतह से ध्वनि परावर्तित होती है और कुछ समय बाद कान तक पहुँचती है, तो इसे अनुरणन कहते हैं।

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मुख्य तथ्य:

  • अनुरणन केवल तब स्पष्ट सुनाई देती है जब स्रोत और परावर्तक सतह के बीच पर्याप्त दूरी हो।
  • वायु में ध्वनि की चाल लगभग 340 m/s होती है।
  • समय अंतराल t = 2d / v, जहाँ d = दूरी और v = ध्वनि की चाल।

उदाहरण

यदि कोई व्यक्ति 170 m दूर दीवार की ओर आवाज़ करता है और ध्वनि की चाल 340 m/s है, तो अनुरणन सुनाई देने का समय:

t = 2 × 170 / 340 = 1 सेकंड

इसलिए व्यक्ति अपनी आवाज़ की प्रतिध्वनि 1 सेकंड बाद सुन पाएगा।

अनुरणन का उपयोग

  • भूगोल में पहाड़ और घाटियों की दूरी मापने में।
  • SONAR और RADAR तकनीक में वस्तुओं की पहचान और दूरी मापने के लिए।
  • संगीत हॉल और सभागार में ध्वनि का नियंत्रण और प्रसार सुनिश्चित करने के लिए।

प्रश्न:

कोई प्रतिध्वनि 3 सेकंड पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 m/s है, तो स्रोत और परावर्तक सतह के बीच दूरी ज्ञात कीजिए।

हल:

प्रतिध्वनि सुनाई देने का समय अंतराल t और स्रोत से सतह तक दूरी d के बीच संबंध है:

t = 2d / v

जहाँ,

  • t = 3 s
  • v = 342 m/s
  • d = स्रोत से सतह तक की दूरी

समीकरण से:

d = (v × t) / 2

दूरी = (342 × 3) / 2 = 1026 / 2 = 513 m

उत्तर: स्रोत और परावर्तक सतह के बीच दूरी = 513 मीटर


ध्वनि के बहुल परावर्तन के उपयोग

जब ध्वनि कई कठोर सतहों से टकराती है और बार-बार परावर्तित होती है, तो इसे ध्वनि का बहुल परावर्तन (Multiple Reflection of Sound) कहा जाता है।
यह गुण संगीत हॉल, सभागार और थिएटर में ध्वनि के प्रसार और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

मुख्य उपयोग:

  • संगीत हॉल और थिएटर: ध्वनि के बहुल परावर्तन से ध्वनि हर जगह समान रूप से पहुँचती है और स्पष्ट सुनाई देती है।
  • सभागार: वक्ता की आवाज़ दूर-दूर तक सुनाई देने में मदद करती है।
  • सदन और ऑडिटोरियम डिजाइन: बहुल परावर्तन के आधार पर दीवारों और छत की डिजाइन की जाती है ताकि ध्वनि प्रतिध्वनि के कारण गूंज न जाए।
  • सुरक्षा उपकरण: कुछ sonar और ultrasound तकनीकों में भी बहुल परावर्तन का उपयोग वस्तु की स्थिति जानने के लिए किया जाता है।
संक्षेप में:
ध्वनि के बहुल परावर्तन से ध्वनि का प्रभाव बढ़ता है और इसकी स्पष्टता एवं फैलाव नियंत्रित किया जा सकता है।

श्रव्यता का परिसर (Audible Range)

श्रव्यता का परिसर उस आवृत्ति और तीव्रता का क्षेत्र है, जिसमें मानव कान ध्वनि सुन सकता है।
साधारणतः मानव कान 20 Hz से 20,000 Hz तक की ध्वनियों को सुन सकता है।

मुख्य बातें:

  • मानव कान सबसे संवेदनशील 1000 Hz से 4000 Hz के बीच की ध्वनि के लिए होता है।
  • 20 Hz से कम आवृत्ति को अधो-ध्वनि (Infrasound) कहते हैं।
  • 20,000 Hz से अधिक आवृत्ति को अधिस्वर (Ultrasound) कहते हैं।
  • ध्वनि की तीव्रता (Loudness) भी श्रव्यता पर प्रभाव डालती है। बहुत कम तीव्र ध्वनि सुनाई नहीं देती।

उपयोग और महत्व:

  • अधो-ध्वनि और अधिस्वर तकनीकों में (जैसे SONAR, Ultrasound scanning)।
  • संगीत और ध्वनि उपकरण डिजाइन में मानव श्रव्यता का ध्यान रखना।
  • भूकंप या प्राकृतिक आपदा में अधो-ध्वनि का अध्ययन।

 

प्रश्न 1: सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास क्या है?

सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास (Audible Range) है:

  • आवृत्ति: 20 Hz से 20,000 Hz (20 kHz)
  • तीव्रता: लगभग 0 dB से 120 dB तक

प्रश्न 2: निम्न से संबंधित आवृत्तियों का परास क्या है?

प्रकार आवृत्ति परास
अवश्रव्य ध्वनि (Infrasound) 20 Hz से कम
पराध्वनि (Ultrasound) 20,000 Hz (20 kHz) से अधिक

संक्षेप में:

  • मानव कान सामान्यतः 20 Hz – 20 kHz के बीच की ध्वनि सुन सकते हैं।
  • 20 Hz से कम → अवश्रव्य ध्वनि (Infrasound)
  • 20 kHz से अधिक → पराध्वनि (Ultrasound)

पराध्वनि (Ultrasound) के अनुप्रयोग

पराध्वनि वह ध्वनि है जिसकी आवृत्ति मानव कान से अधिक होती है (20 kHz से अधिक)।
इसका उपयोग विज्ञान, चिकित्सा और उद्योग में विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

मुख्य अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा (Medical): भ्रूण का निरीक्षण (Ultrasound scanning), अंगों और ऊतकों की जाँच।
  • भूविज्ञान और भूकंप अध्ययन: पृथ्वी की सतह और भूकंपीय तरंगों का अध्ययन।
  • उद्योग (Industrial): धातु और सामग्री में दोष का पता लगाने के लिए।
  • नौसेना (Naval / SONAR): समुद्र में वस्तुओं की स्थिति और दूरी मापने के लिए।
  • संगीत और ध्वनि उपकरण: अल्ट्रासोनिक सफाई उपकरण और ध्वनि नियंत्रित उपकरण।

संक्षेप में:

  • पराध्वनि मानव कान से सुनाई नहीं देती।
  • चिकित्सा, उद्योग, शोध और नौसेना में इसका व्यापक उपयोग है।

अध्याय 11: ध्वनि – प्रश्न और उत्तर

1. ध्वनि क्या है और यह कैसे उत्पन्न होती है?

ध्वनि (Sound) वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु के दोलन (vibration) से उत्पन्न होती है और माध्यम (जैसे वायु, जल, ठोस) के कणों के माध्यम से फैलती है।
ध्वनि उत्पन्न होती है जब कोई वस्तु (जैसे घंटी, तार, पत्थर से टकराई हुई सतह) दोलित होती है और उसके कंपन से आसपास के कण कंपन करने लगते हैं।

2. ध्वनि के स्रोत के निकट संपीड़न और विरलन

ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु के कंपन से आसपास की वायु में संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) उत्पन्न होता है।
संकुचन के दौरान कण पास आते हैं और विरलन में दूर जाते हैं। इस दोलन से अनुदैर्ध्य तरंगें बनती हैं।

Sound Compression and Rarefaction

चित्र: ध्वनि स्रोत के निकट वायु में संपीड़न और विरलन

3. ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्ध्य क्यों है?

ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य (Longitudinal) होती हैं क्योंकि ध्वनि का संचरण माध्यम के कणों के दोलन के साथ उसी दिशा में होता है, जिसमें तरंग फैलती है।
कण आगे-पीछे कंपन करते हैं, जिससे संपीड़न और विरलन पैदा होता है।

4. ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण मित्र की आवाज़ पहचानने में मदद करता है?

ध्वनि का स्वर (Pitch) और टोन/तारत्व (Timbre) किसी व्यक्ति की आवाज़ पहचानने में मदद करता है।
यह विशेषता ध्वनि के अलग-अलग स्रोतों को अलग पहचानने की क्षमता देती है।

5. तड़ित और गर्जन के समय अंतर का कारण

बिजली चमकने और गर्जन के बीच समय अंतर इस कारण होता है कि ध्वनि की गति प्रकाश की गति से बहुत कम है।
– प्रकाश की गति ≈ 3 × 10⁸ m/s → हम तुरंत चमक देखते हैं।
– ध्वनि की गति ≈ 344 m/s → ध्वनि (गर्जन) हमें कुछ सेकंड बाद सुनाई देती है।

6. श्रव्य परास के लिए तरंगदैर्घ्य

ध्वनि की तरंगदैर्घ्य λ = v / f
जहाँ v = 344 m/s (ध्वनि की चाल), f = आवृत्ति

  • f = 20 Hz → λ = 344 / 20 = 17.2 m
  • f = 20,000 Hz → λ = 344 / 20000 ≈ 0.0172 m = 1.72 cm

7. वायु और ऐलुमिनियम में ध्वनि के लिए समय का अनुपात

समय t = दूरी / गति (v)
यदि दूरी समान है, तो समय का अनुपात tवायु : tऐलुमिनियम = vऐलुमिनियम : vवायु

  • vवायु ≈ 344 m/s
  • vऐलुमिनियम ≈ 5100 m/s
  • समय अनुपात tवायु : tऐलुमिनियम = 5100 : 344 ≈ 14.8 : 1

अर्थात, वायु में ध्वनि ऐलुमिनियम की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक समय लेती है।

अध्याय 11: ध्वनि – प्रश्न 8 से 17 के उत्तर

8. किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कंपन करेगा?

आवृत्ति f = 100 Hz → इसका अर्थ है 1 सेकंड में 100 कंपन।
एक मिनट = 60 सेकंड → कुल कंपन = 100 × 60 = 6000

9. क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए।

हाँ, ध्वनि का परावर्तन प्रकाश की तरह ही नियमों का पालन करता है।
नियम:

  • आगमन किरण, परावर्तित किरण और सामान्य (Normal) एक समतल में होते हैं।
  • आगमन कोण (Angle of incidence) = परावर्तन कोण (Angle of reflection)

10. प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र किस दिन सुनाई देगी?

ध्वनि की चाल तापमान पर निर्भर करती है।
– उच्च तापमान → ध्वनि की चाल अधिक → प्रतिध्वनि शीघ्र सुनाई देती है।
– निम्न तापमान → ध्वनि की चाल कम → प्रतिध्वनि देर से सुनाई देती है।
अतः प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी जिस दिन तापमान अधिक हो।

11. ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग

  • संगीत हॉल और सभागार में ध्वनि का स्पष्ट और समान प्रसार।
  • SONAR और RADAR तकनीक में वस्तु की स्थिति और दूरी का पता लगाने में।

12. 500 m ऊँची मीनार से गिराए पत्थर की ध्वनि तालाब पर कब सुनाई देगी?

दी गई बातें: h = 500 m, g = 10 m/s², v = 340 m/s (ध्वनि की चाल)
– पत्थर के गिरने का समय: t₁ = √(2h/g) = √(2×500/10) = √100 ≈ 10 s
– ध्वनि के लौटने का समय: t₂ = h/v = 500 / 340 ≈ 1.47 s
कुल समय = t₁ + t₂ ≈ 10 + 1.47 ≈ 11.47 s

13. ध्वनि तरंग की आवृत्ति

दी गई बातें: v = 339 m/s, λ = 1.5 cm = 0.015 m
f = v / λ = 339 / 0.015 ≈ 22600 Hz ≈ 22.6 kHz
– यह मानव श्रव्य परास (20 Hz – 20 kHz) से अधिक है → श्रव्य नहीं, यह पराध्वनि है।

14. अनुरणन क्या है? इसे कैसे कम किया जा सकता है?

अनुरणन (Echo) वह ध्वनि है जो किसी सतह से परावर्तित होकर लौटती है।
कम करने के उपाय:

  • कमरे में नरम पर्दे, कारपेट और फर्नीचर लगाना → ध्वनि अवशोषित होती है।
  • कठोर और चिकनी सतहों की संख्या कम करना।
  • ध्वनि अवशोषक पैनल लगाना।

15. ध्वनि की प्रबलता (Loudness)

ध्वनि की प्रबलता का अर्थ है ध्वनि कितनी जोर से सुनाई देती है। यह निम्न कारकों पर निर्भर करती है:

  • ध्वनि स्रोत का आयाम (Amplitude) – अधिक आयाम → अधिक प्रबलता
  • श्रोत और सुनने वाले के बीच दूरी – दूरी अधिक → प्रबलता कम
  • माध्यम की विशेषताएँ – वायु, जल, ठोस में प्रबलता अलग होती है

16. पराध्वनि द्वारा वस्तुओं को साफ़ करना

पराध्वनि (Ultrasound) तरंगें उच्च आवृत्ति की होती हैं।
उन्हें तरल में भेजने पर सूक्ष्म बुलबुले बनते हैं, जो फूटते समय वस्तु की सतह से धूल, तेल और गंदगी को हटा देते हैं।
उदाहरण: गहनों, घड़ी के पुर्ज़ों और मेडिकल उपकरणों की सफाई।

17. पराध्वनि द्वारा धातु में दोष पता करना

– धातु में पराध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं।
– तरंगें धातु के अंदर किसी दोष (क्रैक, छेद) से टकराकर परावर्तित होती हैं।
– परावर्तित तरंग का समय और तीव्रता देखकर दोष का आकार और स्थान पता लगाया जाता है।
उपयोग: एयरक्राफ्ट, पुल, पाइपलाइन आदि की सुरक्षा जाँच में।


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